MP High Court: एमपी हाई कोर्ट ने पीएचई विभाग के अधिकारियों को चेतावनी दी है कि अगर वे कोर्ट के आदेश का पालन नहीं करते तो उनकी वेतन में 50 प्रतिशत कटौती की जा सकती है। कोर्ट ने राज्य सरकार पर 15000 रुपये का जुर्माना भी लगाया है जो याचिकाकर्ता को दिया...
भोपाल: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने पीएचई विभाग के अधिकारियों को चेतावनी दी है। अगर वे कोर्ट के आदेश का पालन नहीं करते हैं तो उनकी सैलरी में 50% की कटौती हो सकती है। यह चेतावनी एक सेवानिवृत्त कर्मचारी की अवमानना याचिका पर सुनवाई के दौरान दी गई। यह मामला पेंशन और अन्य सेवानिवृत्ति बकाया राशि से जुड़ा है। कोर्ट ने राज्य सरकार पर 15,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया है। यह राशि याचिकाकर्ता को मिलेगी।विश्वनाथ प्रसाद मिश्रा पीएचई विभाग के एक सेवानिवृत्त पंप अटेंडेंट हैं। उन्होंने अवमानना याचिका दायर की थी। इससे पहले हाईकोर्ट ने उनके द्वारा दायर याचिका पर पीएचई विभाग को आदेश दिया था। कोर्ट ने कहा था कि मिश्रा के कार्यकाल को ध्यान में रखते हुए उनकी पेंशन और अन्य सेवानिवृत्ति बकाया राशि का निर्धारण किया जाए। यह काम आदेश के 90 दिनों के भीतर करना था, लेकिन विभाग ने ऐसा नहीं किया। इसलिए मिश्रा ने अवमानना याचिका दायर की।अधिकारियों ने नोटिस का नहीं दिया जवाब जस्टिस डी के पालीवाल की पीठ ने याचिका पर सुनवाई की। उन्होंने देखा कि कई मौके देने के बावजूद पीएचई विभाग के अधिकारियों ने नोटिस का जवाब नहीं दिया। रीवा के पीएचई के कार्यपालक अभियंता ने दलील दी। उन्होंने कहा कि विभाग हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ अपील करने पर विचार कर रहा है। इसलिए आदेश का पालन नहीं किया गया। अपील दायर करने की अनुमति मांगी गई है।अदालत ने जताई नाराजगीकोर्ट ने आदेश का पालन न करने पर नाराजगी जताई। कोर्ट ने कहा कि विभाग हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ अपील करे या नहीं, यह कोर्ट तय नहीं करेगा। लेकिन आदेश का पालन बिना किसी देरी के किया जाना चाहिए। प्रशासन पर लगा जुर्मानाकोर्ट ने आदेश की अवहेलना के लिए राज्य सरकार पर 15,000 रुपये का जुर्माना लगाया। साथ ही चेतावनी दी कि अगर आदेश का पालन नहीं किया गया तो मामले में प्रतिवादी बनाए गए अधिकारियों के वेतन में आधी कटौती का आदेश पारित किया जा सकता है।.
भोपाल: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने पीएचई विभाग के अधिकारियों को चेतावनी दी है। अगर वे कोर्ट के आदेश का पालन नहीं करते हैं तो उनकी सैलरी में 50% की कटौती हो सकती है। यह चेतावनी एक सेवानिवृत्त कर्मचारी की अवमानना याचिका पर सुनवाई के दौरान दी गई। यह मामला पेंशन और अन्य सेवानिवृत्ति बकाया राशि से जुड़ा है। कोर्ट ने राज्य सरकार पर 15,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया है। यह राशि याचिकाकर्ता को मिलेगी।विश्वनाथ प्रसाद मिश्रा पीएचई विभाग के एक सेवानिवृत्त पंप अटेंडेंट हैं। उन्होंने अवमानना याचिका दायर की थी। इससे पहले हाईकोर्ट ने उनके द्वारा दायर याचिका पर पीएचई विभाग को आदेश दिया था। कोर्ट ने कहा था कि मिश्रा के कार्यकाल को ध्यान में रखते हुए उनकी पेंशन और अन्य सेवानिवृत्ति बकाया राशि का निर्धारण किया जाए। यह काम आदेश के 90 दिनों के भीतर करना था, लेकिन विभाग ने ऐसा नहीं किया। इसलिए मिश्रा ने अवमानना याचिका दायर की।अधिकारियों ने नोटिस का नहीं दिया जवाब जस्टिस डी के पालीवाल की पीठ ने याचिका पर सुनवाई की। उन्होंने देखा कि कई मौके देने के बावजूद पीएचई विभाग के अधिकारियों ने नोटिस का जवाब नहीं दिया। रीवा के पीएचई के कार्यपालक अभियंता ने दलील दी। उन्होंने कहा कि विभाग हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ अपील करने पर विचार कर रहा है। इसलिए आदेश का पालन नहीं किया गया। अपील दायर करने की अनुमति मांगी गई है।अदालत ने जताई नाराजगीकोर्ट ने आदेश का पालन न करने पर नाराजगी जताई। कोर्ट ने कहा कि विभाग हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ अपील करे या नहीं, यह कोर्ट तय नहीं करेगा। लेकिन आदेश का पालन बिना किसी देरी के किया जाना चाहिए। प्रशासन पर लगा जुर्मानाकोर्ट ने आदेश की अवहेलना के लिए राज्य सरकार पर 15,000 रुपये का जुर्माना लगाया। साथ ही चेतावनी दी कि अगर आदेश का पालन नहीं किया गया तो मामले में प्रतिवादी बनाए गए अधिकारियों के वेतन में आधी कटौती का आदेश पारित किया जा सकता है।
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