राहुल गांधी के वायनाड से नामांकन दाखिल करने के बाद वायनाड वासियों में यह आम राय है कि वे केवल एक सांसद नहीं चुनने जा रहे हैं बल्कि प्रधानमंत्री पद के सबसे प्रबल दावेदार को चुनेंगे। RahulGandhiWayanad INCIndia
वजह चाहे भले ही सियासी हो मगर वायनाड अचानक मिले वीआइपी स्टेट्स से काफी खुश है। वायनाड के लोगों को इस नये वीआइपी स्टेट्स के सहारे अपने इलाके का पिछड़ापन दूर होने की उम्मीदें जग गई हैं। इससे वायनाड को वाराणसी या अमेठी जैसी प्राथमिकता मिलेगी। रेलवे लाइन से लेकर यूनिवर्सिटी जैसे उनके सपने हकीकत बन सकते हैं। राहुल गांधी से इलाके की सूरत बदलने की अपेक्षाओं और उम्मीदों से साफ है कि सांसद के रूप में यहां के लोगों की कसौटी पर खरा उतरना सहज नहीं होगा। वायनाड के जिला मुख्यालय शहर केलपट्टा के हर चौक-चौराहे पर चाय की चुस्कियों के साथ राहुल गांधी के चुनाव लड़ने की सियासी चर्चा गरम है। हालांकि मलयालम भाषा में होने वाले इन संवादों को समझना कठिन है मगर पूछने पर कई लोग खुलकर यह बताने से गुरेज नहीं कर रहे कि राहुल से उनकी कैसी अपेक्षाएं हैं। शहर के युवा कारोबारी श्रीजित कुमार कहते हैं कि श्रीनगर और पूर्वोत्तर भारत में रेल पहुंच गई है, मगर वायनाड में इतने सालों बाद भी रेलवे लाइन नहीं है। वायनाड संसदीय क्षेत्र के सुल्तान बथेरी विधानसभा का इलाको हो या नीलांबुर इन जगहों के तमाम लोगों की एक सुर में राय थी कि रेलवे लाइन आने से ही इलाके के विकास की पटरी खुलेगी।पहाड़ी इलाका होने के कारण सड़क संपर्क भी केरल के दूसरे इलाकों के मुकाबले सीमित है और इसीलिए भी रेलवे लाइन की जरूरत लोग मानते हैं। नीलांबुर के बीनू अब्राहम ने कहा कि हम लोग राहुल गांधी से यह उम्मीद करते हैं कि कर्नाटक के नानचंनकोट और वायनाड के नीलमगुरू के बीच रेलवे लाइन शुरू कराकर वे इलाके की सूरत बदलने का बड़ा काम करेंगे। वे कहते हैं कि आखिर हम कोई एक साधारण सांसद चुनने नहीं जा रहे बल्कि कांग्रेस-यूपीए के प्रधानमंत्री पद के दावेदार को संसद में भेजने जा रहे हैं। वायनाड के एक स्थानीय पत्रकार अदीब कहते हैं कि वन क्षेत्र होने की वजह से वैकल्पिक सड़क मार्ग बनाना यहां बेहद कठिन है और लोग यह भी उम्मीद कर रहे कि राहुल वन कानून की बेडि़यों को ढीला करा यहां विकास की गाड़ी को गति देंगे। केरल देश में शिक्षा के लिहाज से सबसे अग्रणी राज्य है मगर वायनाड में कोई यूनिवर्सिटी नहीं है न ही मेडिकल कालेज। कांग्रेस अध्यक्ष से लोगों की अपेक्षाओं की फेहरिस्त में ये दोनों मांग भी शामिल हैं। विकास के पैमाने पर वायनाड केरल का सबसे पिछड़ा जिला है और सूबे की सबसे ज्यादा आदिवासी जनसंख्या यहीं रहती है। राज्य में आदिवासियों के लिए आरक्षित तीन विधानसभा सीटों में से दो इसी जिले में हैं। केरल में स्कूल ड्रॉप आउट भी इस जिले में सबसे ज्यादा हैं। विकास के पैमाने पर वायनाड की मौजूदा स्थिति इसी से समझी जा सकती है कि देश के सबसे पिछडे़ 115 जिलों में वायनाड शामिल है। नीति आयोग ने इसे देश के विकास के आकांक्षी 115 जिलों की सूची में रखा है। कलपेट्टा की स्थानीय पत्रकार मीनू मोहनन के अनुसार स्थानीय लोगों में यह आम धारणा बन रही है कि वे अपना वोट भविष्य के प्रधानमंत्री दावेदार को देने जा रहे हैं तो उनके मुद्दों को भी वैसे ही तवज्जो मिलेगी। हालांकि माकपा के स्थानीय नेता गागरिन इससे असहमति जताते हुए कहते हैं कि राहुल गांधी सुरक्षित सीट की तलाश में वायनाड आए हैं। यहां का विकास उनकी प्राथमिकता सूची में होगा इसकी गुंजाइश नहीं। राहुल के यहां आने से इस इलाके की सूरत कितनी बदलेगी यह तो समय बताएगा मगर वायनाड के लोग अपने इलाके के अचानक बढ़े वीवीआइपी स्टेट्स से इसीलिए भी खुश हैं कि उत्तर भारत से अचानक लोगों का यहां आना बढ़ गया है। केवल राजनीतिज्ञ और मीडिया ही नहीं दूसरे क्षेत्र से जुडे़ लोग भी वायनाड आ रहे हैं। इसकी वजह से पर्यटन का मौसम खत्म हो जाने के बाद भी होटलों, टैक्सी और इस व्यवसाय से जुडे़ लोगों को ऑफ सीजन का अहसास नहीं हो रहा है।.
वजह चाहे भले ही सियासी हो मगर वायनाड अचानक मिले वीआइपी स्टेट्स से काफी खुश है। वायनाड के लोगों को इस नये वीआइपी स्टेट्स के सहारे अपने इलाके का पिछड़ापन दूर होने की उम्मीदें जग गई हैं। इससे वायनाड को वाराणसी या अमेठी जैसी प्राथमिकता मिलेगी। रेलवे लाइन से लेकर यूनिवर्सिटी जैसे उनके सपने हकीकत बन सकते हैं। राहुल गांधी से इलाके की सूरत बदलने की अपेक्षाओं और उम्मीदों से साफ है कि सांसद के रूप में यहां के लोगों की कसौटी पर खरा उतरना सहज नहीं होगा। वायनाड के जिला मुख्यालय शहर केलपट्टा के हर चौक-चौराहे पर चाय की चुस्कियों के साथ राहुल गांधी के चुनाव लड़ने की सियासी चर्चा गरम है। हालांकि मलयालम भाषा में होने वाले इन संवादों को समझना कठिन है मगर पूछने पर कई लोग खुलकर यह बताने से गुरेज नहीं कर रहे कि राहुल से उनकी कैसी अपेक्षाएं हैं। शहर के युवा कारोबारी श्रीजित कुमार कहते हैं कि श्रीनगर और पूर्वोत्तर भारत में रेल पहुंच गई है, मगर वायनाड में इतने सालों बाद भी रेलवे लाइन नहीं है। वायनाड संसदीय क्षेत्र के सुल्तान बथेरी विधानसभा का इलाको हो या नीलांबुर इन जगहों के तमाम लोगों की एक सुर में राय थी कि रेलवे लाइन आने से ही इलाके के विकास की पटरी खुलेगी।पहाड़ी इलाका होने के कारण सड़क संपर्क भी केरल के दूसरे इलाकों के मुकाबले सीमित है और इसीलिए भी रेलवे लाइन की जरूरत लोग मानते हैं। नीलांबुर के बीनू अब्राहम ने कहा कि हम लोग राहुल गांधी से यह उम्मीद करते हैं कि कर्नाटक के नानचंनकोट और वायनाड के नीलमगुरू के बीच रेलवे लाइन शुरू कराकर वे इलाके की सूरत बदलने का बड़ा काम करेंगे। वे कहते हैं कि आखिर हम कोई एक साधारण सांसद चुनने नहीं जा रहे बल्कि कांग्रेस-यूपीए के प्रधानमंत्री पद के दावेदार को संसद में भेजने जा रहे हैं। वायनाड के एक स्थानीय पत्रकार अदीब कहते हैं कि वन क्षेत्र होने की वजह से वैकल्पिक सड़क मार्ग बनाना यहां बेहद कठिन है और लोग यह भी उम्मीद कर रहे कि राहुल वन कानून की बेडि़यों को ढीला करा यहां विकास की गाड़ी को गति देंगे। केरल देश में शिक्षा के लिहाज से सबसे अग्रणी राज्य है मगर वायनाड में कोई यूनिवर्सिटी नहीं है न ही मेडिकल कालेज। कांग्रेस अध्यक्ष से लोगों की अपेक्षाओं की फेहरिस्त में ये दोनों मांग भी शामिल हैं। विकास के पैमाने पर वायनाड केरल का सबसे पिछड़ा जिला है और सूबे की सबसे ज्यादा आदिवासी जनसंख्या यहीं रहती है। राज्य में आदिवासियों के लिए आरक्षित तीन विधानसभा सीटों में से दो इसी जिले में हैं। केरल में स्कूल ड्रॉप आउट भी इस जिले में सबसे ज्यादा हैं। विकास के पैमाने पर वायनाड की मौजूदा स्थिति इसी से समझी जा सकती है कि देश के सबसे पिछडे़ 115 जिलों में वायनाड शामिल है। नीति आयोग ने इसे देश के विकास के आकांक्षी 115 जिलों की सूची में रखा है। कलपेट्टा की स्थानीय पत्रकार मीनू मोहनन के अनुसार स्थानीय लोगों में यह आम धारणा बन रही है कि वे अपना वोट भविष्य के प्रधानमंत्री दावेदार को देने जा रहे हैं तो उनके मुद्दों को भी वैसे ही तवज्जो मिलेगी। हालांकि माकपा के स्थानीय नेता गागरिन इससे असहमति जताते हुए कहते हैं कि राहुल गांधी सुरक्षित सीट की तलाश में वायनाड आए हैं। यहां का विकास उनकी प्राथमिकता सूची में होगा इसकी गुंजाइश नहीं। राहुल के यहां आने से इस इलाके की सूरत कितनी बदलेगी यह तो समय बताएगा मगर वायनाड के लोग अपने इलाके के अचानक बढ़े वीवीआइपी स्टेट्स से इसीलिए भी खुश हैं कि उत्तर भारत से अचानक लोगों का यहां आना बढ़ गया है। केवल राजनीतिज्ञ और मीडिया ही नहीं दूसरे क्षेत्र से जुडे़ लोग भी वायनाड आ रहे हैं। इसकी वजह से पर्यटन का मौसम खत्म हो जाने के बाद भी होटलों, टैक्सी और इस व्यवसाय से जुडे़ लोगों को ऑफ सीजन का अहसास नहीं हो रहा है।
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