कश्मीर में लोकसभा चुनाव में कम मतदान चिंता का विषय बना हुआ है।
कश्मीर में लोकसभा चुनाव में कम मतदान चिंता का विषय बना हुआ है। 2019 में पुलवामा हमले के बाद हुए चुनाव में बारामुला, श्रीनगर व अनंतनाग सीट पर पिछले तीन चुनाव के मुकाबले सबसे कम मतदान हुआ था। यही वजह है कि कश्मीर में चुनाव कार्यालय की ओर से जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं ताकि अनुच्छेद 370 हटने के बाद बदले माहौल में मतदान का रिकॉर्ड टूट सके। कश्मीर में शामिल दस जिलों की रिकॉर्ड देखें तो दक्षिण कश्मीर में मतदान काफी कम रहा है। इसके अलावा पाकिस्तान से लगते जिलों कुपवाड़ा, बांदीपोरा व बारामुला में मतदान के प्रति लोगों का झुकाव अधिक दिखा है। दरअसल 1990 के बाद से हुए चुनाव में आतंकी संगठनों तथा पाकिस्तान प्रायोजित बंद, चुनाव बहिष्कार का साया रहा है। चुनाव से ठीक पहले कोई न कोई वारदात कर दिए जाते रहे थे, जिसकी वजह से मतदाता घरों से बाहर निकलने से कतराते थे। चुनाव से पहले अलगाववादियों तथा आतंकी संगठनों की ओर से बहिष्कार की कॉल भी दी जाती थी। यही कारण है कि मतदान का प्रतिशत कम रहा है। जानकारों का कहना है कि अब स्थितियां बदल गई है। अलगाववादी गतिविधियां बंद हैं। पत्थरबाजी भी बंद है। आतंकी संगठनों पर नकेल है। इस वजह से चुनाव बहिष्कार की कॉल भी अब तक किसी संगठन ने देने की हिम्मत नहीं जुटाई है। पाकिस्तान प्रायोजित हिंसा का चक्र थम गया है। ऐसे में पूरे कश्मीर में माहौल शांतिपूर्ण है। उम्मीद है कि मतदान के लिए लोग पहले की तुलना में अधिक निकलेंगे। प्रशासन की ओर से सभी जिलों में इसके लिए युद्धस्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं। स्वीप कार्यक्रम के साथ ही विभिन्न तबकों के साथ संपर्क साधा जा रहा है। विभिन्न प्रकार की प्रतियोगिताएं आयोजित की जा रही हैं। तांगा रैली से लेकर साइकिल रैली, मैराथन तथा विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जा रहा है। सभी जिला प्रशासन की ओर से इसके लिए विशेष प्रबंध किए गए हैं। 2019 के फैसले के खिलाफ कश्मीरियों से वोट देने की अपील राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 2019 के फैसले को लेकर आम कश्मीरियों में यह भावना फैलाने की कोशिश की जा रही है कि उन्हें वोट के जरिये यह दिखाना है कि यह फैसला गलत था। कश्मीरी अवाम को यह फैसला मंजूर नहीं है। पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती की ओर से लगातार यह कहा जा रहा है कि चुनाव केंद्र सरकार के फैसले के खिलाफ जवाब देने का मौका है। इस मौके को चूकने नहीं देना है। नेकां प्रमुख उमर अब्दुल्ला की ओर से भी लगातार केंद्र सरकार के फैसले पर हमले किए जा रहे हैं। साथ ही भाजपा को रोकने के लिए वोट देने की अपील की जा रही है। वोटिंग में पुलवामा तथा श्रीनगर फिसड्डी वोटिंग में पुलवामा तथा श्रीनगर में मत प्रतिशत काफी कम रहा है। 2004, 2009 व 2014 के लोकसभा चुनाव में जिलेवार आंकड़ों को देखा जाए तो कश्मीर के 10 जिलों में श्रीनगर व पुलवामा दो ऐसे जिले हैं जहां मत प्रतिशत अन्य जिलों की तुलना में काफी कम रहा है। यहां मतदान 10 फीसदी तक रहा है। श्रीनगर नेकां का गढ़ रहा है। लोकतंत्र के पर्व में भागीदारी के लिए आम लोगों को जागरूक किया जा रहा है। स्वीप के कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। स्कूल-कॉलेज के विद्यार्थियों के साथ आम लोगों को भी जागरूक किया जा रहा है। इसके लिए रैलियां, शपथ समारोह तथा अन्य प्रकार के जागरूकता कार्यक्रम किए जा रहे हैं। उम्मीद है कि माहौल बदला है। पूरे कश्मीर में शांति है। ऐसे में मतदान का प्रतिशत बढ़ेगा और रिकॉर्ड मतदान होगा। - पीके पोल, मुख्य निर्वाचन अधिकारी लोकसभा चुनाव में जिलावार वोटिंग प्रतिशत जिला 2004 2009 2014 कुपवाड़ा 40.
08 53.94 62.54 बारामुला 30.60 32.47 24.71 बांदीपोरा 40.46 45.40 35.24 गांदरबल 44.66 37.62 43.75 श्रीनगर 5.20 12.05 10.71 बडगाम 36.88 40.77 40.08 पुलवामा 6.67 10.49 7.66 शोपियां 14.68 18.83 22.31 अनंतनाग 16.24 36.08 39.37 कुलगाम 19.63 34.11 36.35 लोकसभावार वोटिंग प्रतिशत लोकसभा 2004 2009 2014 2019 बारामुला 35.65 41.84 39.13 34.89 श्रीनगर 18.57 25.55 25.86 14.43 अनंतनाग 15.04 27.10 28.84 8.96
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