Kinnaur Landslide: एचआरटीसी बस चालक की जुबानी, आंखों के सामने मौत के मुंह में चले गए लोग kinnaurlandslide kinnaur
महेंद्र पाल ने बताया कि वह बस लेकर रिकांगपिओ से हरिद्वार जा रहा थे। बस में करीब 25 यात्री सवार थे। निगुलसेरी के समीप पहुंचने पर चालक महेंद्र पाल ने देखा कि सामने की पहाड़ी से चट्टानें गिर रही हैं। महेंद्र ने बस को 100 मीटर पीछे ही रोक दिया। यहीं पर ही अन्य वाहन भी रुक गए जिनमें कार और ट्रक चालक शामिल थे। महेंद्र पाल ने बताया कि यह अंदाजा लगाना मुश्किल हो रहा था कि बस सड़क से गुजर पाएगी या नहीं। चालक महेंद्र पाल और कंडक्टर बस से उतरकर पैदल सड़क पर निकले। लेकिन जैसे ही वे सड़क पर थोड़ा और आगे पैदल चले तो चट्टानें ठीक हमारे ऊपर पहाड़ी से गिरने लगीं। दोनों पीछे की ओर भागे और सड़क के किनारे एक सुरक्षित स्थान पर छिप गए। महेंद्र पाल ने बताया कि देखते ही देखते पहाड़ी से चट्टानों की बौछार होने लगी और जहां पर सभी वाहन रुके हुए थे। उन पर भारी भरकम चट्टानें और मलबा आ गिरा। बस समेत अन्य वाहन चट्टानों और मलबे की चपेट में आ गए। कुछ ही पलों में वहां का मंजर खौफनाक हो गया। महेंद्र पाल ने बताया कि खौफनाक मंजर देखकर वह बेहद डर गए थे। उन्होंने एचआरटीसी के अफसरों को हादसे की सूचना दी जिसके बाद प्रशासन रेस्क्यू टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंचा। पाल ने हादसे के दर्दनाक पलों को साझा किया है। उनकी आंखों के सामने लोग मौत के मुंह में चले गए।महेंद्र पाल ने बताया कि वह बस लेकर रिकांगपिओ से हरिद्वार जा रहा थे। बस में करीब 25 यात्री सवार थे। निगुलसेरी के समीप पहुंचने पर चालक महेंद्र पाल ने देखा कि सामने की पहाड़ी से चट्टानें गिर रही हैं। महेंद्र ने बस को 100 मीटर पीछे ही रोक दिया। यहीं पर ही अन्य वाहन भी रुक गए जिनमें कार और ट्रक चालक शामिल थे। महेंद्र पाल ने बताया कि यह अंदाजा लगाना मुश्किल हो रहा था कि बस सड़क से गुजर पाएगी या नहीं। चालक महेंद्र पाल और कंडक्टर बस से उतरकर पैदल सड़क पर निकले। लेकिन जैसे ही वे सड़क पर थोड़ा और आगे पैदल चले तो चट्टानें ठीक हमारे ऊपर पहाड़ी से गिरने लगीं। दोनों पीछे की ओर भागे और सड़क के किनारे एक सुरक्षित स्थान पर छिप गए। महेंद्र पाल ने बताया कि देखते ही देखते पहाड़ी से चट्टानों की बौछार होने लगी और जहां पर सभी वाहन रुके हुए थे। उन पर भारी भरकम चट्टानें और मलबा आ गिरा। बस समेत अन्य वाहन चट्टानों और मलबे की चपेट में आ गए। कुछ ही पलों में वहां का मंजर खौफनाक हो गया। महेंद्र पाल ने बताया कि खौफनाक मंजर देखकर वह बेहद डर गए थे। उन्होंने एचआरटीसी के अफसरों को हादसे की सूचना दी जिसके बाद प्रशासन रेस्क्यू टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंचा।खबर में दी गई जानकारी और सूचना से आप संतुष्ट हैं?खबर में और अधिक सुधार की आवश्यकता है?.
महेंद्र पाल ने बताया कि वह बस लेकर रिकांगपिओ से हरिद्वार जा रहा थे। बस में करीब 25 यात्री सवार थे। निगुलसेरी के समीप पहुंचने पर चालक महेंद्र पाल ने देखा कि सामने की पहाड़ी से चट्टानें गिर रही हैं। महेंद्र ने बस को 100 मीटर पीछे ही रोक दिया। यहीं पर ही अन्य वाहन भी रुक गए जिनमें कार और ट्रक चालक शामिल थे। महेंद्र पाल ने बताया कि यह अंदाजा लगाना मुश्किल हो रहा था कि बस सड़क से गुजर पाएगी या नहीं। चालक महेंद्र पाल और कंडक्टर बस से उतरकर पैदल सड़क पर निकले। लेकिन जैसे ही वे सड़क पर थोड़ा और आगे पैदल चले तो चट्टानें ठीक हमारे ऊपर पहाड़ी से गिरने लगीं। दोनों पीछे की ओर भागे और सड़क के किनारे एक सुरक्षित स्थान पर छिप गए। महेंद्र पाल ने बताया कि देखते ही देखते पहाड़ी से चट्टानों की बौछार होने लगी और जहां पर सभी वाहन रुके हुए थे। उन पर भारी भरकम चट्टानें और मलबा आ गिरा। बस समेत अन्य वाहन चट्टानों और मलबे की चपेट में आ गए। कुछ ही पलों में वहां का मंजर खौफनाक हो गया। महेंद्र पाल ने बताया कि खौफनाक मंजर देखकर वह बेहद डर गए थे। उन्होंने एचआरटीसी के अफसरों को हादसे की सूचना दी जिसके बाद प्रशासन रेस्क्यू टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंचा। पाल ने हादसे के दर्दनाक पलों को साझा किया है। उनकी आंखों के सामने लोग मौत के मुंह में चले गए।महेंद्र पाल ने बताया कि वह बस लेकर रिकांगपिओ से हरिद्वार जा रहा थे। बस में करीब 25 यात्री सवार थे। निगुलसेरी के समीप पहुंचने पर चालक महेंद्र पाल ने देखा कि सामने की पहाड़ी से चट्टानें गिर रही हैं। महेंद्र ने बस को 100 मीटर पीछे ही रोक दिया। यहीं पर ही अन्य वाहन भी रुक गए जिनमें कार और ट्रक चालक शामिल थे। महेंद्र पाल ने बताया कि यह अंदाजा लगाना मुश्किल हो रहा था कि बस सड़क से गुजर पाएगी या नहीं। चालक महेंद्र पाल और कंडक्टर बस से उतरकर पैदल सड़क पर निकले। लेकिन जैसे ही वे सड़क पर थोड़ा और आगे पैदल चले तो चट्टानें ठीक हमारे ऊपर पहाड़ी से गिरने लगीं। दोनों पीछे की ओर भागे और सड़क के किनारे एक सुरक्षित स्थान पर छिप गए। महेंद्र पाल ने बताया कि देखते ही देखते पहाड़ी से चट्टानों की बौछार होने लगी और जहां पर सभी वाहन रुके हुए थे। उन पर भारी भरकम चट्टानें और मलबा आ गिरा। बस समेत अन्य वाहन चट्टानों और मलबे की चपेट में आ गए। कुछ ही पलों में वहां का मंजर खौफनाक हो गया। महेंद्र पाल ने बताया कि खौफनाक मंजर देखकर वह बेहद डर गए थे। उन्होंने एचआरटीसी के अफसरों को हादसे की सूचना दी जिसके बाद प्रशासन रेस्क्यू टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंचा।खबर में दी गई जानकारी और सूचना से आप संतुष्ट हैं?खबर में और अधिक सुधार की आवश्यकता है?
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