भारतीय क्रिकेट टीम को न्यूजीलैंड के खिलाफ वनडे सीरीज में हार का सामना करना पड़ा है। ये हार टीम की कई कमियों को उजागर तो करती ही है साथ ही टीम मैनेजमेंट के फैसलों पर भी सवाल उठाती है।
जागरण न्यूज नेटवर्क, नई दिल्ली : गौतम गंभीर के कोच बनने के बाद भारतीय टीम को लगातार ऐसे परिणामों का सामना करना पड़ा है, जिसने टीम प्रबंधन की रणनीति और चयन नीति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। 2024 में न्यूजीलैंड के विरुद्ध घरेलू टेस्ट सीरीज में 0-3 की करारी हार के बाद अब उसी न्यूजीलैंड टीम ने भारत को 37 साल में पहली बार वनडे सीरीज में भी हराया। यह हार इसलिए और चुभने वाली है क्योंकि न्यूजीलैंड की यह टीम पूरी तरह से अनुभवी नहीं थी, बल्कि इसमें कई नए और अपेक्षाकृत कम अनुभवी खिलाड़ी शामिल थे। इसके बावजूद भारत अपने घरेलू मैदान पर सीरीज गंवा बैठा, जिससे टीम प्रबंधन के सोच और निर्णयों पर सवाल उठ रहे हैं। खराब टीम चयन बड़ा कारण इस हार के पीछे सबसे बड़ा कारण खराब टीम चयन और असंतुलित रणनीति मानी जा रही है। खास तौर पर नीतीश कुमार रेड्डी, रवींद्र जडेजा और प्रसिद्ध कृष्णा का प्रदर्शन ऐसा नहीं रहा, जो टीम में उनकी जगह को जायज ठहरा सके। नीतीश कुमार रेड्डी को तेज गेंदबाजी ऑलराउंडर के तौर पर तैयार करने की कोशिश की गई। चोटिल वॉशिंगटन सुंदर की जगह उन्हें एकादश में शामिल किया गया, मगर वह ने न तो गेंद से प्रभाव डाला और न ही बल्ले से कोई बड़ी भूमिका निभाई। पूरी सीरीज में उन्होंने केवल एक अर्धशतक लगाया और एक भी विकेट हासिल नहीं कर पाए। उनके अब तक के वनडे करियर पर नजर डालें तो चार मैचों में वह केवल 100 रन बना पाए हैं और उनके नाम एक भी विकेट नहीं है। खुद टीम के सहायक कोच रेयान डेन डोएशे ने भी माना कि रेड्डी को मिले मौकों का वह सही इस्तेमाल नहीं कर पाए। रवींद्र जडेजा कमजोर कड़ी रवींद्र जडेजा भी इस सीरीज में टीम की कमजोर कड़ी साबित हुए। न तो उनकी बल्लेबाजी में पुरानी धार दिखी और न ही गेंदबाजी में वह मैच का रुख पलटने में सफल रहे। इंदौर वनडे में उनसे गेंदबाजी भी काफी देर से कराई गई, जिससे यह संकेत मिलता है कि टीम प्रबंधन खुद भी उन पर पूरी तरह भरोसा नहीं कर रहा था। पिछले एक साल के आंकड़ों पर नजर डालें तो जडेजा ने 10 वनडे मैचों में केवल 106 रन बनाए हैं और 12 विकेट हासिल किए हैं, जो उनके स्तर के खिलाड़ी के लिए निराशाजनक माने जा सकते हैं। तेज गेंदबाज प्रसिद्ध कृष्णा को भी लगातार मौके दिए जा रहे हैं, लेकिन वह प्रभाव छोड़ने में नाकाम रहे हैं। न्यूजीलैंड के विरुद्ध सीरीज में उन्होंने सिर्फ तीन विकेट लिए। इसके बावजूद उन्हें बार-बार मौका मिलना चयन नीति की मजबूरी का संकेत देता है। दिलचस्प बात यह है कि अक्षर पटेल मौजूदा समय में जडेजा से बेहतर फॉर्म में नजर आ रहे हैं, लेकिन उन्हें वनडे टीम में जगह नहीं मिल रही। टी-20 विश्व कप में उन्हें उपकप्तान बनाया गया है, फिर भी वनडे टीम में उनकी अनदेखी की जा रही है। यह चयन में असंतुलन और फॉर्म से ज्यादा पसंद-नापसंद के आधार पर फैसले होने का संकेत देता है। कोच भी हैं जिम्मेदार कोच गौतम गंभीर की रणनीति भी चर्चा के केंद्र में है। वह लगातार प्रयोग करने के पक्षधर नजर आते हैं, लेकिन इन प्रयोगों से टीम को फायदा कम और नुकसान ज्यादा हुआ है। चाहे टेस्ट क्रिकेट हो या वनडे गंभीर बल्लेबाजी को लंबा करने के लिए ऑलराउंडरों पर जरूरत से ज्यादा भरोसा दिखा रहे हैं। आईपीएल में कोलकाता नाइटराइडर्स के मेंटर रहते हुए उन्होंने जिस तरह टीम का संचालन किया था, उसी शैली को वह भारतीय टीम में भी लागू करने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में वही रणनीति हमेशा कारगर नहीं होती। न्यूजीलैंड से हार ने यह साफ कर दिया है कि भारतीय टीम को अब नई सोच, बेहतर चयन और स्पष्ट रणनीति की जरूरत है। गंभीर की कोचिंग में मिली बड़ी हार 2024 में श्रीलंका से पहली बार 1997 के बाद वनडे सीरीज हारी 2024 में ही न्यूजीलैंड से पहली बार 1988 के बाद घरेलू टेस्ट हारी2015 के बाद पिछले साल बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी में हारी भारतीय टीम 2026 में न्यूजीलैंड से 37 साल बाद घरेलू वनडे सीरीज में मिली हार यह भी पढ़ें- IND vs NZ: न्यूजीलैंड ने पहली बार नहीं दिखाए भारत को तारे, पहले भी दे चुका है न भूलने वाले जख्म; आज तक चुभती है टीस यह भी पढ़ें- IND vs NZ: सीरीज हार के बाद इन 3 खिलाड़ियों की खुल सकती है किस्मत, टीम इंडिया में मिल सकता है मौका.
जागरण न्यूज नेटवर्क, नई दिल्ली : गौतम गंभीर के कोच बनने के बाद भारतीय टीम को लगातार ऐसे परिणामों का सामना करना पड़ा है, जिसने टीम प्रबंधन की रणनीति और चयन नीति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। 2024 में न्यूजीलैंड के विरुद्ध घरेलू टेस्ट सीरीज में 0-3 की करारी हार के बाद अब उसी न्यूजीलैंड टीम ने भारत को 37 साल में पहली बार वनडे सीरीज में भी हराया। यह हार इसलिए और चुभने वाली है क्योंकि न्यूजीलैंड की यह टीम पूरी तरह से अनुभवी नहीं थी, बल्कि इसमें कई नए और अपेक्षाकृत कम अनुभवी खिलाड़ी शामिल थे। इसके बावजूद भारत अपने घरेलू मैदान पर सीरीज गंवा बैठा, जिससे टीम प्रबंधन के सोच और निर्णयों पर सवाल उठ रहे हैं। खराब टीम चयन बड़ा कारण इस हार के पीछे सबसे बड़ा कारण खराब टीम चयन और असंतुलित रणनीति मानी जा रही है। खास तौर पर नीतीश कुमार रेड्डी, रवींद्र जडेजा और प्रसिद्ध कृष्णा का प्रदर्शन ऐसा नहीं रहा, जो टीम में उनकी जगह को जायज ठहरा सके। नीतीश कुमार रेड्डी को तेज गेंदबाजी ऑलराउंडर के तौर पर तैयार करने की कोशिश की गई। चोटिल वॉशिंगटन सुंदर की जगह उन्हें एकादश में शामिल किया गया, मगर वह ने न तो गेंद से प्रभाव डाला और न ही बल्ले से कोई बड़ी भूमिका निभाई। पूरी सीरीज में उन्होंने केवल एक अर्धशतक लगाया और एक भी विकेट हासिल नहीं कर पाए। उनके अब तक के वनडे करियर पर नजर डालें तो चार मैचों में वह केवल 100 रन बना पाए हैं और उनके नाम एक भी विकेट नहीं है। खुद टीम के सहायक कोच रेयान डेन डोएशे ने भी माना कि रेड्डी को मिले मौकों का वह सही इस्तेमाल नहीं कर पाए। रवींद्र जडेजा कमजोर कड़ी रवींद्र जडेजा भी इस सीरीज में टीम की कमजोर कड़ी साबित हुए। न तो उनकी बल्लेबाजी में पुरानी धार दिखी और न ही गेंदबाजी में वह मैच का रुख पलटने में सफल रहे। इंदौर वनडे में उनसे गेंदबाजी भी काफी देर से कराई गई, जिससे यह संकेत मिलता है कि टीम प्रबंधन खुद भी उन पर पूरी तरह भरोसा नहीं कर रहा था। पिछले एक साल के आंकड़ों पर नजर डालें तो जडेजा ने 10 वनडे मैचों में केवल 106 रन बनाए हैं और 12 विकेट हासिल किए हैं, जो उनके स्तर के खिलाड़ी के लिए निराशाजनक माने जा सकते हैं। तेज गेंदबाज प्रसिद्ध कृष्णा को भी लगातार मौके दिए जा रहे हैं, लेकिन वह प्रभाव छोड़ने में नाकाम रहे हैं। न्यूजीलैंड के विरुद्ध सीरीज में उन्होंने सिर्फ तीन विकेट लिए। इसके बावजूद उन्हें बार-बार मौका मिलना चयन नीति की मजबूरी का संकेत देता है। दिलचस्प बात यह है कि अक्षर पटेल मौजूदा समय में जडेजा से बेहतर फॉर्म में नजर आ रहे हैं, लेकिन उन्हें वनडे टीम में जगह नहीं मिल रही। टी-20 विश्व कप में उन्हें उपकप्तान बनाया गया है, फिर भी वनडे टीम में उनकी अनदेखी की जा रही है। यह चयन में असंतुलन और फॉर्म से ज्यादा पसंद-नापसंद के आधार पर फैसले होने का संकेत देता है। कोच भी हैं जिम्मेदार कोच गौतम गंभीर की रणनीति भी चर्चा के केंद्र में है। वह लगातार प्रयोग करने के पक्षधर नजर आते हैं, लेकिन इन प्रयोगों से टीम को फायदा कम और नुकसान ज्यादा हुआ है। चाहे टेस्ट क्रिकेट हो या वनडे गंभीर बल्लेबाजी को लंबा करने के लिए ऑलराउंडरों पर जरूरत से ज्यादा भरोसा दिखा रहे हैं। आईपीएल में कोलकाता नाइटराइडर्स के मेंटर रहते हुए उन्होंने जिस तरह टीम का संचालन किया था, उसी शैली को वह भारतीय टीम में भी लागू करने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में वही रणनीति हमेशा कारगर नहीं होती। न्यूजीलैंड से हार ने यह साफ कर दिया है कि भारतीय टीम को अब नई सोच, बेहतर चयन और स्पष्ट रणनीति की जरूरत है। गंभीर की कोचिंग में मिली बड़ी हार 2024 में श्रीलंका से पहली बार 1997 के बाद वनडे सीरीज हारी 2024 में ही न्यूजीलैंड से पहली बार 1988 के बाद घरेलू टेस्ट हारी2015 के बाद पिछले साल बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी में हारी भारतीय टीम 2026 में न्यूजीलैंड से 37 साल बाद घरेलू वनडे सीरीज में मिली हार यह भी पढ़ें- IND vs NZ: न्यूजीलैंड ने पहली बार नहीं दिखाए भारत को तारे, पहले भी दे चुका है न भूलने वाले जख्म; आज तक चुभती है टीस यह भी पढ़ें- IND vs NZ: सीरीज हार के बाद इन 3 खिलाड़ियों की खुल सकती है किस्मत, टीम इंडिया में मिल सकता है मौका
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