अमरावती जिला परिषद की सीईओ IAS संजीता मोहापात्रा ने UPSC 2023 की परीक्षा में 10वीं रैंक हासिल की है. संजीता ने अपनी जिंदगी के संघर्षों और सफलता की कहानी साझा करते हुए समाज में बेटा-बेटी के भेदभाव को खत्म करने का आह्वान किया है. उन्होंने अपने बचपन के संघर्षपूर्ण दिनों को याद करते हुए कहा कि उनका जन्म एक ऐसे ग्रामीण परिवार में हुआ, जहां आर्थिक स्थिति कमजोर थी. उनके जन्म पर परिवार के कुछ सदस्यों को बेटे की चाह थी, लेकिन उनके माता-पिता ने कभी उनके साथ भेदभाव नहीं किया. उन्होंने पढ़ाई को हमेशा दी तवज्जो दी. संजीता ने शादी के बाद अपने IAS बनने के सपने को पूरा करने में अपने पति और स्कूली सहेलियों का महत्वपूर्ण योगदान बताया. उन्होंने महिलाओं के बीच जलन और प्रतिस्पर्धा के मुद्दे पर भी खुलकर बात की और कहा कि बेटा-बेटी के भेद को खत्म करने के लिए महिलाओं को ही आगे आना होगा.
IAS Sanjita Mohapatra Success Story: अमरावती की जिलापरिषद की सीईओ IAS संजीता मोहापात्रा ने UPSC 2023 की परीक्षा में 10वीं रैंक हासिल की थी. संजीता मोहापात्रा ने अकादमिक रूप से बेहतरीन प्रदर्शन किया और सीईटी भुवनेश्वर से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की डिग्री प्राप्त की.
संजीता का हमेशा से आईएएस अधिकारी और कलेक्टर बनने का सपना था. अपनी डिग्री पूरी करने के बाद, उन्होंने 2018 तक राउरकेला स्टील प्लांट के सेल में प्रशिक्षु के रूप में काम किया, फिर सिविल सेवा परीक्षा पर ध्यान केंद्रित करने के लिए उन्होंने नौकरी से इस्तीफा दे दिया. अमरावती जिला परिषद की मुख्य कार्यकारी अधिकारी संजीता मोहापात्रा ने अपनी जिंदगी के संघर्षों और सफलता की कहानी साझा करते हुए समाज में बेटा-बेटी के भेदभाव को खत्म करने का आह्वान किया. आजतक से बातचीत में उन्होंने अपने बचपन के संघर्षपूर्ण दिनों को याद करते हुए कहा कि उनका जन्म एक ऐसे ग्रामीण परिवार में हुआ, जहां आर्थिक स्थिति कमजोर थी. उनके जन्म पर परिवार के कुछ सदस्यों को बेटे की चाह थी, लेकिन उनके माता-पिता ने कभी उनके साथ भेदभाव नहीं किया.पिता ने हमेशा पढ़ाई को दी तवज्जोसंजीता ने बताया, "मेरी मां ने मुझे कभी पढ़ाई से रोका नहीं, हालांकि समाज में बेटा-बेटी में भेदभाव उस समय आम बात थी. गांव के माहौल में लड़कियों को चूल्हे-चौके तक सीमित रखने का दबाव था, लेकिन मेरे पिता ने मुझे हमेशा प्रोत्साहित किया. पढ़ाई में तेज होने के बावजूद, खेलकूद में मैं उतनी अच्छी नहीं थी. बावजूद इसके, मैंने अपने सपने को साकार करने का संकल्प लिया."Advertisementसंजीता ने कहा कि शादी के बाद उनके पति ने उनके IAS बनने के सपने को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. उन्होंने बताया, "मेरे पति और स्कूली सहेलियों ने हमेशा मेरा साथ दिया. उनकी हौसलाअफजाई से मैं आज इस मुकाम तक पहुंच पाई. अब मैं समाज में बदलाव लाने की कोशिश कर रही हूं, ताकि बेटा-बेटी में भेदभाव जैसी सोच को पूरी तरह खत्म किया जा सके."बेटियों के प्रति भेदाभाव को खत्म करना चाहती हैं संजीताउन्होंने समाज में महिलाओं के बीच जलन और प्रतिस्पर्धा के मुद्दे पर भी खुलकर बात की. उन्होंने कहा, "आज भी महिलाएं एक-दूसरे की तरक्की से जलती हैं. मैं चाहती हूं कि महिलाएं इस सोच से बाहर निकलें और एक-दूसरे का हौसला बढ़ाएं बेटा-बेटी के भेद को खत्म करने के लिए महिलाओं को ही आगे आना होगा."संजीता ने कहा कि उनकी कोशिश है कि समाज में महिलाओं के प्रति सोच को बदला जाए और हर लड़की को वह अवसर मिले, जिसकी वह हकदार है. उनके इस प्रेरणादायक सफर से न केवल महिलाओं को प्रोत्साहन मिलेगा, बल्कि समाज में बेटा-बेटी के भेदभाव को मिटाने की दिशा में भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा.इस विषय से की है IAS संजीता ने पढ़ाईबता दें कि संजीता का जन्म और शुरुआती शिक्षा राउरकेला से ही हुई. 12वीं के बाद उन्होंने मैकेनिकल इंजीनियरिंग से बीटेक किया. बचपन से पढ़ने में अव्वल संजीता ने कभी फेल शब्द का सामना नहीं किया था क्योंकि वो हमेशा सिर्फ पास ही नहीं बल्कि अच्छे नंबरों से अव्वल रहती थीं. वो बचपन से ही आईएएस बनने का ख्वाब देखती थीं, लेकिन 12वीं के बाद उन्होंने सबके कहने पर इंजीनियरिंग का चुनाव किया. लेकिन कॉलेज खत्म होने के बाद उन्होंने तीन बार यूपीएससी का प्रयास किया जिसमें सफल नहीं हो सकीं. इसके बाद उन्होंने नौकरी भी की और फिर शादी के बाद आईएएस बनने का सपना पूरा किया.Advertisementपैटर्न को समझकर की तैयारी संजीता ने परीक्षा के पूरे पैटर्न को समझकर तैयारी शुरू की थी. संजीता की स्ट्रेटजी की बात करें तो उन्होंने पूरा गाइडेंस इंटरनेट से लिया और तैयारी शुरू कर दी. तैयारी और नौकरी के बीच उन्हें जब मुश्किल नजर आई तो उन्होंने अच्छी सैलरी वाली नौकरी को छोड़कर तैयारी को चुना. लेकिन इसी बीच उनकी शादी हो गई तो एक और जिम्मेदारी आ गई, लेकिन वो लक्ष्य से डिगी नहीं और तैयारी करती रहीं. फिर चौथी बार भी मिली हार इत्तेफाक से चौथे प्रयास में भी संजीता सफल नहीं हो पाईं. ये उनके लिए भीतर तक हिला देने वाला अनुभव था. लेकिन उन्हें इस बात की खुशी थी कि इस बार वो प्री निकाल चुकी थीं और मेन्स में सफल नहीं हो पाई थीं. मन ही मन संजीता ने तय किया कि अब जब मेंस तक पहुंच गई हूं तो आगे भी तैयारी जारी रखूंगी. इस तरह वो फिर से तैयारी में जुट गईं. ससुराल वाले भी उनका हौसला देखकर दंग थे, सभी संजीता का साथ दे रहे थे. ये भी देखें
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