Indian Exports: भारत को दोहरी चोट... चीन-जापान से ज्‍यादा बोझ, जीरो टैरिफ वाले सामान का भी बुरा हाल, बड़ी चेतावनी

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Indian Exports: भारत को दोहरी चोट... चीन-जापान से ज्‍यादा बोझ, जीरो टैरिफ वाले सामान का भी बुरा हाल, बड़ी चेतावनी
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अमेरिकी टैरिफ ने भारतीय निर्यात को बड़ा झटका दिया है। मई से अक्टूबर 2025 के बीच शिपमेंट में 28.5% की भारी गिरावट आई है। जीरो टैरिफ वाले उत्पादों में भी 25.

नई दिल्‍ली: अमेरिकी टैरिफ ने भारतीय निर्यात को बड़ा झटका दिया है। मई से अक्टूबर 2025 के बीच शिपमेंट में 28.5% की भारी गिरावट आई है। जीरो टैरिफ वाले उत्पादों में भी 25.8% की कमी देखी गई। थिंक टैंक जीटीआरआई ने सरकार से निर्यात प्रोत्साहन मिशन को जल्द शुरू करने और अमेरिका से अतिरिक्त टैरिफ हटाने के ल‍िए माहौल बनाने को कहा है। अमेरिकी टैरिफ भारत के लिए दोहरी चोट साबित हुए हैं। एक ओर जहां चीन और जापान के मुकाबले भारत पर टैरिफ का बोझ बहुत ज्‍यादा है। वहीं, जीरो टैरिफ वाले उत्‍पादों के निर्यात में भी भारी गिरावट आई है। अमेरिका की तरफ से लगाए गए भारी टैरिफ के कारण भारत के निर्यात को बड़ा झटका लगा है। मई से अक्टूबर 2025 के बीच अमेरिका को होने वाले भारतीय शिपमेंट में गिरावट 8.

83 अरब डॉलर से घटकर 6.31 अरब डॉलर पर आ गई है। अमेरिका ने अप्रैल 2025 में 10% टैरिफ लगाया था। जिसे अगस्त में बढ़ाकर 25% और फिर उसी महीने के अंत तक 50% कर दिया गया। इस वजह से भारतीय सामान अमेरिका के लिए सबसे ज्यादा टैक्स वाले उत्पादों में से एक बन गए। जीटीआरआई की रिपोर्ट के मुताबिक, चीन पर लगभग 30% और जापान पर 15% टैरिफ लगे हैं।इस दौरान, भारत के अमेरिका को होने वाले निर्यात को जीटीआरआई ने तीन टैरिफ श्रेणियों में बांटा है। पहली श्रेणी में वे उत्पाद हैं जिन पर कोई टैरिफ नहीं लगा, जैसे स्मार्टफोन, दवाएं और पेट्रोलियम उत्पाद। अक्टूबर के निर्यात में इनका हिस्सा 40.3% था। लेकिन, फिर भी इनमें 25.8% की गिरावट आई। मई में यह 3.42 अरब डॉलर था, जो अक्टूबर में घटकर 2.54 अरब डॉलर रह गया। यानी 88.1 करोड़ डॉलर का नुकसान हुआ। दूसरी श्रेणी में वे उत्पाद थे जिन पर दुनिया भर में एक जैसे टैरिफ लगे थे। इनमें मुख्य रूप से लोहा, स्टील, एल्यूमीनियम, तांबा और ऑटो पार्ट्स शामिल थे। अक्टूबर के निर्यात में इनका हिस्सा सिर्फ 7.6% था। मई में यह 62.9 करोड़ डॉलर था, जो अक्टूबर में घटकर 48 करोड़ डॉलर रह गया। इसमें लगभग 14.9 करोड़ डॉलर की कमी आई।इन उत्‍पादों के न‍िर्यात में सबसे बड़ी ग‍िरावट निर्यात में सबसे बड़ी गिरावट उन उत्पादों में देखी गई जिनमें ज्यादा मेहनत लगती है। जैसे रत्न और आभूषण, सोलर पैनल, टेक्सटाइल और गारमेंट, केमिकल और समुद्री भोजन। इन उत्पादों पर भारत को अकेले 50% टैरिफ का सामना करना पड़ा। अक्टूबर के निर्यात में इनका हिस्सा 52.1% था। लेकिन, इनमें 31.2% की भारी गिरावट आई। मई में यह 4.78 अरब डॉलर था, जो अक्टूबर में घटकर 3.29 अरब डॉलर रह गया। यानी सिर्फ पांच महीनों में लगभग 1.5 अरब डॉलर का नुकसान हुआ।यहां तक कि जिन उत्पादों पर कोई टैरिफ नहीं था, उन पर भी असर पड़ा। भारत से अमेरिका को जाने वाले सबसे बड़े उत्पाद स्मार्टफोन में 36% की गिरावट आई। मई में यह 2.29 अरब डॉलर था, जो अक्टूबर में घटकर 1.50 अरब डॉलर रह गया। इसमें लगभग 79 करोड़ डॉलर का नुकसान हुआ। जीटीआरआई के अनुसार, मासिक निर्यात जून में 2 अरब डॉलर से शुरू होकर जुलाई में 1.52 अरब डॉलर, अगस्त में 96.48 करोड़ डॉलर, सितंबर में 88.46 करोड़ डॉलर तक गिरता रहा और अक्टूबर में 1.5 अरब डॉलर पर थोड़ा सुधरा। हालांकि, इसके पीछे का कारण नहीं बताया गया है। दवा निर्यात में सिर्फ 1.6% की गिरावट आई। जबकि पेट्रोलियम उत्पादों के शिपमेंट में 15.5% की कमी आई।मेटल और ऑटो पार्ट्स की श्रेणी में निर्यात में आई गिरावट को जीटीआरआई ने अमेरिका में औद्योगिक मांग में कमी का नतीजा बताया है, न कि भारत की प्रतिस्पर्धात्मकता में कमी का। ऐसा इसलिए क्योंकि इन उत्पादों पर सभी देशों के लिए टैरिफ एक समान थे।क्‍या कर सकता है भारत?इस गंभीर स्थिति को देखते हुए जीटीआरआई ने सरकार से 'एक्सपोर्ट प्रमोशन मिशन' को जल्द से जल्द शुरू करने और अमेरिका से भारत पर लगाए गए रूस से जुड़े 25% अतिरिक्त टैरिफ को हटाने की मांग करने का आग्रह किया है। जीटीआरआई ने बताया कि मार्च में घोषित और 12 नवंबर को कैबिनेट की ओर से स्वीकृत यह मिशन अभी भी सिर्फ कागजों पर है। वित्तीय वर्ष के लगभग आठ महीने बीत जाने के बाद भी कोई भी योजना चालू नहीं हुई है। वहीं, मार्केट एक्सेस इनिशिएटिव और इंटरेस्ट इक्वलाइजेशन स्कीम जैसे लंबे समय से चल रहे कार्यक्रमों से इस साल कोई भुगतान नहीं हुआ है।जीटीआरआई का मानना है कि मिशन का वार्षिक फंड 4,200 करोड़ रुपये से कम होने के कारण यह अपने लक्ष्यों को पूरा नहीं कर पाएगा। तब तक जब तक कि सरकार जल्दी से दिशानिर्देश जारी न करे, नियमित भुगतान बहाल न करे और निर्यातकों को साफ पात्रता नियम और समयसीमा न दे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली केंद्रीय कैबिनेट ने इसी महीने 'एक्सपोर्ट प्रमोशन मिशन' को मंजूरी दी है। यह मिशन 2025-26 के केंद्रीय बजट में घोषित एक प्रमुख पहल है। इसका उद्देश्य भारत की निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता को मजबूत करना है। इसमें खासतौर से एमएसएमई , पहली बार निर्यात करने वालें और श्रम-गहन क्षेत्र शामिल हैं। इस मिशन के लिए 2025-26 से 2030-31 तक कुल 25,060 करोड़ रुपये का प्रावधान है।इसके अलावा, जीटीआरआई ने तर्क दिया है कि 25% अतिरिक्त टैरिफ को हटाने से भारतीय सामानों पर लगने वाला प्रभावी अमेरिकी टैरिफ आधा होकर 25% रह जाएगा। इससे श्रम-गहन क्षेत्रों को राहत मिलेगी। जीटीआरआई ने सरकार से इन दोनों कदमों को निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता बहाल करने और अमेरिका के साथ अधिक समान स्तर पर बातचीत फिर से शुरू करने के लिए केंद्रीय बनाने का आग्रह किया है।

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