हरियाणा की राजनीति में देवीलाल परिवार और भाजपा का 52 साल पुराना नाता है।
हरियाणा की राजनीति में देवीलाल परिवार और भाजपा का 52 साल पुराना नाता है। हरियाणा में भाजपा के जनक कहे जाने वाले डॉ. मंगल सेन और चौधरी देवीलाल की दोस्ती के किस्से आज भी लोगों की जुबां पर हैं। यह दोस्ती सियासी गठजोड़ में बदली। 1977 में चुनाव जीतकर मुख्यमंत्री बनने पर चौधरी देवीलाल ने मंगल सेन को उप मुख्यमंत्री बनाया था। देवीलाल ने पहले जनसंघ और फिर भाजपा के साथ मिलकर कई चुनाव लड़े। हालांकि कुछ चुनाव भाजपा ने अकेले भी लड़े, लेकिन जब भी जरूरत पड़ी है तो भाजपा और चाैधरी देवीलाल का परिवार एक साथ नजर आया। देवीलाल के बाद उनके बेटे ओमप्रकाश चौटाला को भी भाजपा का साथ मिला। 2019 में देवीलाल के प्रपौत्र दुष्यंत चौटाला की पार्टी जजपा के साथ मिलकर भाजपा ने प्रदेश में सरकार बनाई। हालांकि लोकसभा चुनाव से पहले यह गठबंधन टूट गया। अब जजपा अकेले चुनाव लड़ रही है। दूसरी तरफ सरकार में सहयोगी रहे रणजीत चौटाला भी रानियां से टिकट न मिलने पर भाजपा छोड़कर निर्दलीय ताल ठोक चुके हैं। देवीलाल के पौत्र आदित्य चौटाला भी भाजपा का दामन छोड़कर इनेलो के टिकट पर डबवाली सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। इस बार विधानसभा चुनाव में भाजपा के साथ देवीलाल परिवार का कोई सदस्य नहीं है। देवीलाल के बाद भाजपा के सहयोग से दो बार सीएम बने ओमप्रकाश चौटाला वर्ष 1982 के विधानसभा चुनाव में देवीलाल की पार्टी लोकदल और भाजपा ने गठबंधन कर क्रमश: 31 व 6 सीटों पर जीत दर्ज की, लेकिन सरकार नहीं बना पाए। तब जोड़तोड़ कर कांग्रेस के भजनलाल सरकार बनाने में सफल रहे। 1987 के विधानसभा चुनाव में लोकदल और भाजपा के गठबंधन ने प्रचंड बहुमत हासिल किया। लोकदल ने 69 सीटों में से 60 और भाजपा ने 20 सीटों में से 16 सीटें जीतकर सरकार बनाई। तब देवीलाल सीएम बने थे। लोकदल के साथ भाजपा का दोस्ती का किस्सा यहीं खत्म नहीं हुआ। 1991 का चुनाव अकेले लड़ने के बाद भाजपा ने 1996 में बंसीलाल की हरियाणा विकास पार्टी के साथ गठबंधन किया। 1999 में भाजपा और चौधरी देवीलाल के पुत्र ओमप्रकाश चौटाला एक साथ आए। चुनाव जीतकर चौटाला सीएम बने। इसके बाद 2000 का विधानसभा चुनाव भी चौटाला और भाजपा ने मिलकर लड़ा और सरकार बनाई। 2005 और 2009 में भाजपा ने अकेले चुनाव लड़ा। 2014 में भाजपा ने पहली बार अपने बलबूते पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई। इस चुनाव में भी देवीलाल के बेटे जगदीश चौटाला के पुत्र आदित्य भाजपा के साथ थे। 2019 के चुनाव के बाद भाजपा ने देवीलाल के बेटे रणजीत चौटाला और प्रपौत्र दुष्यंत चौटाला के सहयोग से सरकार बनाई। भाजपा ने दुष्यंत को उप मुख्यमंत्री तो रणजीत चौटाला को कैबिनेट मंत्री बनाया। छठी बार अकेले दम पर चुनाव लड़ने की तैयारी में भाजपा जनसंघ के बाद भाजपा 1982 में अस्तित्व में आई। 1967 के पहले चुनाव से लेकर 2019 तक हुए 13 विधानसभा चुनावों में भाजपा पांच बार अकेले दम पर चुनाव लड़ चुकी है। 2024 के 14वें चुनाव में भाजपा छठी बार अकेले दम पर चुनाव लड़ने को तैयार है। 1967 से लेकर 2009 तक के चुनाव में भाजपा ज्यादातर अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाई। 1991, 2005, 2009 के चुनाव में भाजपा की सीटों का आंकड़ा दहाई के अंक को भी नहीं छू पाया। 2014 के चुनाव में भाजपा ने पहली बार बहुमत हासिल किया और 47 सीटें जीतकर सत्ता में पहुंची। 2019 के चुनाव में भी पार्टी का प्रदर्शन ठीक रहा और 40 सीटें जीतकर जजपा के सहयोग से सरकार बनाई।.
हरियाणा की राजनीति में देवीलाल परिवार और भाजपा का 52 साल पुराना नाता है। हरियाणा में भाजपा के जनक कहे जाने वाले डॉ. मंगल सेन और चौधरी देवीलाल की दोस्ती के किस्से आज भी लोगों की जुबां पर हैं। यह दोस्ती सियासी गठजोड़ में बदली। 1977 में चुनाव जीतकर मुख्यमंत्री बनने पर चौधरी देवीलाल ने मंगल सेन को उप मुख्यमंत्री बनाया था। देवीलाल ने पहले जनसंघ और फिर भाजपा के साथ मिलकर कई चुनाव लड़े। हालांकि कुछ चुनाव भाजपा ने अकेले भी लड़े, लेकिन जब भी जरूरत पड़ी है तो भाजपा और चाैधरी देवीलाल का परिवार एक साथ नजर आया। देवीलाल के बाद उनके बेटे ओमप्रकाश चौटाला को भी भाजपा का साथ मिला। 2019 में देवीलाल के प्रपौत्र दुष्यंत चौटाला की पार्टी जजपा के साथ मिलकर भाजपा ने प्रदेश में सरकार बनाई। हालांकि लोकसभा चुनाव से पहले यह गठबंधन टूट गया। अब जजपा अकेले चुनाव लड़ रही है। दूसरी तरफ सरकार में सहयोगी रहे रणजीत चौटाला भी रानियां से टिकट न मिलने पर भाजपा छोड़कर निर्दलीय ताल ठोक चुके हैं। देवीलाल के पौत्र आदित्य चौटाला भी भाजपा का दामन छोड़कर इनेलो के टिकट पर डबवाली सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। इस बार विधानसभा चुनाव में भाजपा के साथ देवीलाल परिवार का कोई सदस्य नहीं है। देवीलाल के बाद भाजपा के सहयोग से दो बार सीएम बने ओमप्रकाश चौटाला वर्ष 1982 के विधानसभा चुनाव में देवीलाल की पार्टी लोकदल और भाजपा ने गठबंधन कर क्रमश: 31 व 6 सीटों पर जीत दर्ज की, लेकिन सरकार नहीं बना पाए। तब जोड़तोड़ कर कांग्रेस के भजनलाल सरकार बनाने में सफल रहे। 1987 के विधानसभा चुनाव में लोकदल और भाजपा के गठबंधन ने प्रचंड बहुमत हासिल किया। लोकदल ने 69 सीटों में से 60 और भाजपा ने 20 सीटों में से 16 सीटें जीतकर सरकार बनाई। तब देवीलाल सीएम बने थे। लोकदल के साथ भाजपा का दोस्ती का किस्सा यहीं खत्म नहीं हुआ। 1991 का चुनाव अकेले लड़ने के बाद भाजपा ने 1996 में बंसीलाल की हरियाणा विकास पार्टी के साथ गठबंधन किया। 1999 में भाजपा और चौधरी देवीलाल के पुत्र ओमप्रकाश चौटाला एक साथ आए। चुनाव जीतकर चौटाला सीएम बने। इसके बाद 2000 का विधानसभा चुनाव भी चौटाला और भाजपा ने मिलकर लड़ा और सरकार बनाई। 2005 और 2009 में भाजपा ने अकेले चुनाव लड़ा। 2014 में भाजपा ने पहली बार अपने बलबूते पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई। इस चुनाव में भी देवीलाल के बेटे जगदीश चौटाला के पुत्र आदित्य भाजपा के साथ थे। 2019 के चुनाव के बाद भाजपा ने देवीलाल के बेटे रणजीत चौटाला और प्रपौत्र दुष्यंत चौटाला के सहयोग से सरकार बनाई। भाजपा ने दुष्यंत को उप मुख्यमंत्री तो रणजीत चौटाला को कैबिनेट मंत्री बनाया। छठी बार अकेले दम पर चुनाव लड़ने की तैयारी में भाजपा जनसंघ के बाद भाजपा 1982 में अस्तित्व में आई। 1967 के पहले चुनाव से लेकर 2019 तक हुए 13 विधानसभा चुनावों में भाजपा पांच बार अकेले दम पर चुनाव लड़ चुकी है। 2024 के 14वें चुनाव में भाजपा छठी बार अकेले दम पर चुनाव लड़ने को तैयार है। 1967 से लेकर 2009 तक के चुनाव में भाजपा ज्यादातर अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाई। 1991, 2005, 2009 के चुनाव में भाजपा की सीटों का आंकड़ा दहाई के अंक को भी नहीं छू पाया। 2014 के चुनाव में भाजपा ने पहली बार बहुमत हासिल किया और 47 सीटें जीतकर सत्ता में पहुंची। 2019 के चुनाव में भी पार्टी का प्रदर्शन ठीक रहा और 40 सीटें जीतकर जजपा के सहयोग से सरकार बनाई।
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