हिमाचल प्रदेश में लोकसभा की चार सीटें हैं। विधानसभा की 6 सीटों के साथ ही लोकसभा की सभी सीटों पर भी 1 जून को वोटिंग होगी।
लोकसभा चुनाव 2024 के लिए देश भर में जब अंतिम चरण का चुनाव प्रचार जोरों पर है, ऐसे वक्त में एक राज्य में छह सीटों पर हो रहे उपचुनाव में बीजेपी और कांग्रेस के बीच जोरदार मुकाबला हो रहा है। क्योंकि इन छह सीटों के उपचुनाव के नतीजे तय करेंगे कि क्या राज्य में सत्ता परिवर्तन होगा या फिर मौजूदा सरकार ही सत्ता में रहेगी। कुल मिलाकर यहां पर लोकसभा के चुनाव से ज्यादा बड़ी लड़ाई मुख्यमंत्री की कुर्सी की है। बात हो रही है पर्वतीय राज्य हिमाचल प्रदेश की। जहां पर कुछ महीने पहले कांग्रेस के विधायकों की बगावत की वजह से सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाली कांग्रेस की सरकार पर संकट आ गया था। अगर मौजूदा सरकार सत्ता में रही तो सुखविंदर सिंह सुक्खू ही मुख्यमंत्री रहेंगे जबकि सत्ता परिवर्तन हुआ तो बीजेपी नेता जयराम ठाकुर को फिर से मुख्यमंत्री के रूप में काम करने का मौका मिल सकता है। लेकिन इस बात का फैसला ये उपचुनाव के नतीजे ही करेंगे। हिमाचल प्रदेश में लोकसभा की चार सीटें हैं। विधानसभा की 6 सीटों के साथ ही लोकसभा की सभी सीटों पर भी 1 जून को वोटिंग होगी। लोकसभा सीटों के नाम- हमीरपुर, कांगड़ा, मंडी और शिमला हैं। Pratibha Singh Congress: प्रतिभा सिंह को मिली थी जीत 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को सभी चार सीटों पर जीत मिली थी लेकिन 2021 में मंडी सीट से बीजेपी के सांसद रामस्वरूप शर्मा का निधन हो गया था। उनके निधन के बाद इस सीट पर उपचुनाव हुए थे। उपचुनाव में प्रदेश कांग्रेस की अध्यक्ष प्रतिभा सिंह को जीत मिली थी। इस बार प्रतिभा सिंह की जगह उनके बेटे विक्रमादित्य सिंह चुनाव मैदान में हैं। Also ReadHimachal Pradesh Chunav 2024: बगावत करने वाले नेता को कांग्रेस ने कठिन सीट पर दी है ‘हाथ’ को जिताने की जिम्मेदारी हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू और कांग्रेस प्रत्याशी आनंद शर्मा। Himachal Pradesh election 2022: कांग्रेस ने जीती थी 40 सीटें दिसंबर 2022 में हुए विधानसभा चुनाव में 68 सीटों वाले हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस को 40 सीटों पर जीत मिली थी जबकि बीजेपी के उम्मीदवार 25 सीटों पर जीते थे। तीन सीटें निर्दलीय उम्मीदवारों के खाते में गई थी। हिमाचल प्रदेश में हर विधानसभा चुनाव में सीधी लड़ाई बीजेपी और कांग्रेस के बीच ही रही है। ऐसा ही कुछ इन 6 विधानसभा सीटों के उपचुनाव में भी हो रहा है। मतलब इन सीटों पर बीजेपी और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला है। Sukhvinder Sukhu Government: जब बाल-बाल बची थी सुक्खू सरकार? हिमाचल प्रदेश में 6 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव क्यों हो रहा है, इस बारे में समझने के लिए आपको इस साल फरवरी में हुए एक बड़े घटनाक्रम के बारे में जानना जरूरी है। फरवरी में जब हिमाचल प्रदेश की एक राज्यसभा सीट को लेकर चुनाव हुआ था तो कांग्रेस के 6 विधायकों की बगावत की वजह से राज्यसभा चुनाव में पार्टी के उम्मीदवार अभिषेक मनु सिंघवी चुनाव हार गए थे। उस चुनाव में बीजेपी के उम्मीदवार हर्ष महाजन को जीत मिली थी। इस हार को कांग्रेस के लिए बहुत बड़ा झटका माना गया था क्योंकि विधायकों की इस बगावत को पार्टी का राज्य और केंद्रीय स्तर का नेतृत्व नहीं भांप सका था। हिमाचल प्रदेश के स्पीकर ने इन सभी 6 बागी विधायकों को अयोग्य घोषित कर दिया था। चूंकि यह सीटें रिक्त हो चुकी थीं इसलिए इन सीटों पर उपचुनाव कराना जरूरी था। यह सभी विधायक बीजेपी में शामिल हो गए थे और बीजेपी ने इन्हें तुरंत अपना उम्मीदवार भी घोषित कर दिया। Also Readलोकसभा चुनाव: 370 सीटें तो राजनाथ, गडकरी और अमित शाह भी नहीं चाहेंगे संजय बारू का तर्क है कि मोदी को 370 सीटें आ गईं तो आगे चल कर बीजेपी का वही हश्र होगा जो इंदिरा गांधी या राजीव गांधी को प्रचंड बहुमत मिलने के बाद कांग्रेस का हुआ था। Himachal Pradesh BJP: बीजेपी ने बनाया उम्मीदवार इन बागी विधायकों को उन्हीं सीटों से उम्मीदवार बनाया गया, जहां से वे 2022 के विधानसभा चुनाव में जीत कर आए थे। इन विधायकों के नाम- राजेंद्र राणा, सुधीर शर्मा, इंदर दत्त लखनपाल, रवि ठाकुर, चैतन्य शर्मा और दविंदर भुट्टो हैं। इन्हें क्रमशः सुजानपुर, धर्मशाला, बड़सर, लाहौल-स्पीति, गगरेट और कुटलेहड़ विधानसभा सीटों से भाजपा ने टिकट दिया है। 35 विधायकों का समर्थन है जरूरी कांग्रेस के लिए इन 6 सीटों पर उपचुनाव को जीतना बेहद जरूरी है क्योंकि 68 सीटों वाली विधानसभा में बहुमत के लिए 35 विधायकों का समर्थन होना जरूरी है। 6 विधायकों को अयोग्य घोषित किए जाने के बाद कांग्रेस के विधायकों की संख्या 34 रह गई है। हालांकि ऐसे में विधानसभा की सदस्य संख्या भी घटकर 62 हो गई है और इसके लिए बहुमत का जरूरी आंकड़ा 32 है। कांग्रेस के पास 34 विधायक होने की वजह से सुक्खू सरकार पर अभी हाल-फिलहाल कोई संकट नहीं है लेकिन अगर ऐसा होता है कि इन सभी 6 सीटों पर कांग्रेस को हार मिलती है और बीजेपी को जीत मिलती है तो सुक्खू सरकार का बचना मुश्किल हो जाएगा। क्योंकि कांग्रेस के पास 34 ही विधायक रह जाएंगे और सरकार में बने रहने के लिए जरूरी आंकड़ा 35 है। ऐसी सूरत में कांग्रेस को कम से कम एक विधानसभा सीट पर जीत हासिल करनी ही होगी क्योंकि तब उसके पास 35 विधायकों का समर्थन हो जाएगा। बीजेपी के पास हिमाचल प्रदेश में 25 विधायक हैं। अगर यह सभी छह विधायक जीत जाते हैं तो उसके विधायकों की संख्या 31 हो जाएगी। बीजेपी के पास तीन निर्दलीय विधायकों का भी समर्थन है। ऐसे में बीजेपी के पास कुल 34 विधायकों का समर्थन हो जाएगा। ऐसे में बीजेपी को सरकार बनाने के लिए एक और विधायक की जरूरत होगी। Also ReadLok Sabha Chunav 2024: प्रचार के लिए पहली बार पंजाब गए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, किसानों ने किया जबरदस्त विरोध जालंधर में 24 मई को आयोजित चुनावी सभा में मौजूद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। HP Bypoll 2024: कांग्रेस का केंद्रीय नेतृत्व भी है गंभीर कांग्रेस का केंद्रीय नेतृत्व भी हिमाचल प्रदेश में 6 सीटों पर हो रहे उपचुनाव की अहमियत को जानता है इसलिए कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी और पार्टी की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा जैसे बड़े नेता लगातार हिमाचल प्रदेश में चुनाव प्रचार कर रहे हैं। इसके अलावा कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल और प्रदेश प्रभारी राजीव शुक्ला भी लगातार हिमाचल प्रदेश में डेरा डाले हुए हैं। पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेता शशि थरूर, सचिन पायलट आदि भी हिमाचल प्रदेश में चुनाव प्रचार करते दिखाई देंगे। कांग्रेस के सामने हिमाचल प्रदेश में बगावत को संभालना बहुत बड़ी चुनौती है क्योंकि देशभर में कांग्रेस की अभी सिर्फ तीन राज्यों में अपने दम पर सरकार है। इसमें कर्नाटक, तेलंगाना और हिमाचल प्रदेश शामिल है। अगर उपचुनाव के नतीजे पार्टी के खिलाफ होते हैं तो एक राज्य की सत्ता से पार्टी की विदाई हो जाएगी। इसलिए कांग्रेस का केंद्रीय और प्रदेश नेतृत्व इस उपचुनाव को बेहद गंभीरता से ले रहा है। बीजेपी हर हाल में जीतना चाहती है सभी 6 सीटें बीजेपी किसी भी सूरत में इन सभी 6 सीटों पर जीत दर्ज करना चाहती है। हिमाचल प्रदेश भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा का गृह राज्य भी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हिमाचल प्रदेश में जनसभाएं कर चुके हैं। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह भी हिमाचल के चुनाव प्रचार पर जोर दे रहे हैं। हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष राजीव बिंदल भी इन सभी 6 विधानसभा सीटों पर पार्टी कार्यकर्ताओं को एकजुट कर चुनाव में जीत हासिल करने के लिए जी जान से जुटे हैं। Also ReadHaryana Lok Sabha Chunav 2024: कांग्रेस को बीजेपी के खिलाफ किसानों, पहलवानों के गुस्से का सहारा, लेकिन 30% वोट के अंतर की खाई कैसे कम होगी? पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा और मनोहर लाल खट्टर। कांग्रेस को बगावत का है डर कांग्रेस के सामने सबसे बड़ा डर बगावत का है। राज्यसभा चुनाव में पार्टी विधायकों के बीजेपी उम्मीदवार के पक्ष में वोट डालने के बाद प्रदेश कांग्रेस की अध्यक्ष प्रतिभा सिंह और कैबिनेट मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने पार्टी हाई कमान को तेवर दिखाए थे। विक्रमादित्य सिंह ने तो कैबिनेट से इस्तीफा भी दे दिया था हालांकि बाद में उन्हें मनाया गया और उन्होंने इस्तीफा वापस ले लिया था। इसके बाद प्रतिभा सिंह ने मंडी सीट से चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया था। प्रतिभा सिंह हिमाचल प्रदेश के दिग्गज नेता और कई बार मुख्यमंत्री रहे वीरभद्र सिंह की पत्नी हैं। ऐसे नाजुक वक्त में कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व को इन दोनों वरिष्ठ नेताओं को साधना होगा। सरकार का काम बनाम राष्ट्रवाद मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू राज्य भर में चुनाव प्रचार के दौरान इस बात को लगातार जनता के बीच में कह रहे हैं कि बीजेपी उनकी चुनी हुई सरकार को गिराना चाहती है और ऐसी संस्कृति देवभूमि हिमाचल में कभी भी नहीं रही है। सुक्खू कहते हैं कि हिमाचल प्रदेश की जनता से कहते हैं कि लोगों को बीजेपी की साजिश का जोरदार जवाब देना चाहिए। चुनाव प्रचार के दौरान सुखविंदर सिंह सुक्खू अपनी सरकार के कामों को गिनाते हैं। दूसरी ओर बीजेपी चुनाव प्रचार के दौरान राष्ट्रवाद के मुद्दों के साथ चुनाव मैदान में है। पार्टी के नेता अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण, जम्मू कश्मीर से धारा 370 की समाप्ति, देश की बेहतर आर्थिक व्यवस्था होने का दावा करते हुए जनता के बीच में जा रहे हैं। Also ReadLok Sabha Chunav 2024: मंडी में है कांटे की लड़ाई; विक्रमादित्य-कंगना की जुबानी जंग का पड़ेगा चुनाव नतीजे पर असर? विक्रमादित्य सिंह और कंगना रनौत। HP Lok Sabha Chunav 2024: मंडी में कंगना और विक्रमादित्य में है टक्कर हिमाचल प्रदेश में लोकसभा की जो चार सीटें हैं, उनमें से मंडी लोकसभा सीट पर दिलचस्प चुनावी मुकाबला है। यहां कांग्रेस के उम्मीदवार और हिमाचल प्रदेश सरकार में मंत्री विक्रमादित्य सिंह और सिने अदाकारा कंगना रनौत बीजेपी के टिकट पर एक-दूसरे से मुकाबला कर रहे हैं।.
लोकसभा चुनाव 2024 के लिए देश भर में जब अंतिम चरण का चुनाव प्रचार जोरों पर है, ऐसे वक्त में एक राज्य में छह सीटों पर हो रहे उपचुनाव में बीजेपी और कांग्रेस के बीच जोरदार मुकाबला हो रहा है। क्योंकि इन छह सीटों के उपचुनाव के नतीजे तय करेंगे कि क्या राज्य में सत्ता परिवर्तन होगा या फिर मौजूदा सरकार ही सत्ता में रहेगी। कुल मिलाकर यहां पर लोकसभा के चुनाव से ज्यादा बड़ी लड़ाई मुख्यमंत्री की कुर्सी की है। बात हो रही है पर्वतीय राज्य हिमाचल प्रदेश की। जहां पर कुछ महीने पहले कांग्रेस के विधायकों की बगावत की वजह से सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाली कांग्रेस की सरकार पर संकट आ गया था। अगर मौजूदा सरकार सत्ता में रही तो सुखविंदर सिंह सुक्खू ही मुख्यमंत्री रहेंगे जबकि सत्ता परिवर्तन हुआ तो बीजेपी नेता जयराम ठाकुर को फिर से मुख्यमंत्री के रूप में काम करने का मौका मिल सकता है। लेकिन इस बात का फैसला ये उपचुनाव के नतीजे ही करेंगे। हिमाचल प्रदेश में लोकसभा की चार सीटें हैं। विधानसभा की 6 सीटों के साथ ही लोकसभा की सभी सीटों पर भी 1 जून को वोटिंग होगी। लोकसभा सीटों के नाम- हमीरपुर, कांगड़ा, मंडी और शिमला हैं। Pratibha Singh Congress: प्रतिभा सिंह को मिली थी जीत 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को सभी चार सीटों पर जीत मिली थी लेकिन 2021 में मंडी सीट से बीजेपी के सांसद रामस्वरूप शर्मा का निधन हो गया था। उनके निधन के बाद इस सीट पर उपचुनाव हुए थे। उपचुनाव में प्रदेश कांग्रेस की अध्यक्ष प्रतिभा सिंह को जीत मिली थी। इस बार प्रतिभा सिंह की जगह उनके बेटे विक्रमादित्य सिंह चुनाव मैदान में हैं। Also ReadHimachal Pradesh Chunav 2024: बगावत करने वाले नेता को कांग्रेस ने कठिन सीट पर दी है ‘हाथ’ को जिताने की जिम्मेदारी हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू और कांग्रेस प्रत्याशी आनंद शर्मा। Himachal Pradesh election 2022: कांग्रेस ने जीती थी 40 सीटें दिसंबर 2022 में हुए विधानसभा चुनाव में 68 सीटों वाले हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस को 40 सीटों पर जीत मिली थी जबकि बीजेपी के उम्मीदवार 25 सीटों पर जीते थे। तीन सीटें निर्दलीय उम्मीदवारों के खाते में गई थी। हिमाचल प्रदेश में हर विधानसभा चुनाव में सीधी लड़ाई बीजेपी और कांग्रेस के बीच ही रही है। ऐसा ही कुछ इन 6 विधानसभा सीटों के उपचुनाव में भी हो रहा है। मतलब इन सीटों पर बीजेपी और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला है। Sukhvinder Sukhu Government: जब बाल-बाल बची थी सुक्खू सरकार? हिमाचल प्रदेश में 6 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव क्यों हो रहा है, इस बारे में समझने के लिए आपको इस साल फरवरी में हुए एक बड़े घटनाक्रम के बारे में जानना जरूरी है। फरवरी में जब हिमाचल प्रदेश की एक राज्यसभा सीट को लेकर चुनाव हुआ था तो कांग्रेस के 6 विधायकों की बगावत की वजह से राज्यसभा चुनाव में पार्टी के उम्मीदवार अभिषेक मनु सिंघवी चुनाव हार गए थे। उस चुनाव में बीजेपी के उम्मीदवार हर्ष महाजन को जीत मिली थी। इस हार को कांग्रेस के लिए बहुत बड़ा झटका माना गया था क्योंकि विधायकों की इस बगावत को पार्टी का राज्य और केंद्रीय स्तर का नेतृत्व नहीं भांप सका था। हिमाचल प्रदेश के स्पीकर ने इन सभी 6 बागी विधायकों को अयोग्य घोषित कर दिया था। चूंकि यह सीटें रिक्त हो चुकी थीं इसलिए इन सीटों पर उपचुनाव कराना जरूरी था। यह सभी विधायक बीजेपी में शामिल हो गए थे और बीजेपी ने इन्हें तुरंत अपना उम्मीदवार भी घोषित कर दिया। Also Readलोकसभा चुनाव: 370 सीटें तो राजनाथ, गडकरी और अमित शाह भी नहीं चाहेंगे संजय बारू का तर्क है कि मोदी को 370 सीटें आ गईं तो आगे चल कर बीजेपी का वही हश्र होगा जो इंदिरा गांधी या राजीव गांधी को प्रचंड बहुमत मिलने के बाद कांग्रेस का हुआ था। Himachal Pradesh BJP: बीजेपी ने बनाया उम्मीदवार इन बागी विधायकों को उन्हीं सीटों से उम्मीदवार बनाया गया, जहां से वे 2022 के विधानसभा चुनाव में जीत कर आए थे। इन विधायकों के नाम- राजेंद्र राणा, सुधीर शर्मा, इंदर दत्त लखनपाल, रवि ठाकुर, चैतन्य शर्मा और दविंदर भुट्टो हैं। इन्हें क्रमशः सुजानपुर, धर्मशाला, बड़सर, लाहौल-स्पीति, गगरेट और कुटलेहड़ विधानसभा सीटों से भाजपा ने टिकट दिया है। 35 विधायकों का समर्थन है जरूरी कांग्रेस के लिए इन 6 सीटों पर उपचुनाव को जीतना बेहद जरूरी है क्योंकि 68 सीटों वाली विधानसभा में बहुमत के लिए 35 विधायकों का समर्थन होना जरूरी है। 6 विधायकों को अयोग्य घोषित किए जाने के बाद कांग्रेस के विधायकों की संख्या 34 रह गई है। हालांकि ऐसे में विधानसभा की सदस्य संख्या भी घटकर 62 हो गई है और इसके लिए बहुमत का जरूरी आंकड़ा 32 है। कांग्रेस के पास 34 विधायक होने की वजह से सुक्खू सरकार पर अभी हाल-फिलहाल कोई संकट नहीं है लेकिन अगर ऐसा होता है कि इन सभी 6 सीटों पर कांग्रेस को हार मिलती है और बीजेपी को जीत मिलती है तो सुक्खू सरकार का बचना मुश्किल हो जाएगा। क्योंकि कांग्रेस के पास 34 ही विधायक रह जाएंगे और सरकार में बने रहने के लिए जरूरी आंकड़ा 35 है। ऐसी सूरत में कांग्रेस को कम से कम एक विधानसभा सीट पर जीत हासिल करनी ही होगी क्योंकि तब उसके पास 35 विधायकों का समर्थन हो जाएगा। बीजेपी के पास हिमाचल प्रदेश में 25 विधायक हैं। अगर यह सभी छह विधायक जीत जाते हैं तो उसके विधायकों की संख्या 31 हो जाएगी। बीजेपी के पास तीन निर्दलीय विधायकों का भी समर्थन है। ऐसे में बीजेपी के पास कुल 34 विधायकों का समर्थन हो जाएगा। ऐसे में बीजेपी को सरकार बनाने के लिए एक और विधायक की जरूरत होगी। Also ReadLok Sabha Chunav 2024: प्रचार के लिए पहली बार पंजाब गए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, किसानों ने किया जबरदस्त विरोध जालंधर में 24 मई को आयोजित चुनावी सभा में मौजूद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। HP Bypoll 2024: कांग्रेस का केंद्रीय नेतृत्व भी है गंभीर कांग्रेस का केंद्रीय नेतृत्व भी हिमाचल प्रदेश में 6 सीटों पर हो रहे उपचुनाव की अहमियत को जानता है इसलिए कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी और पार्टी की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा जैसे बड़े नेता लगातार हिमाचल प्रदेश में चुनाव प्रचार कर रहे हैं। इसके अलावा कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल और प्रदेश प्रभारी राजीव शुक्ला भी लगातार हिमाचल प्रदेश में डेरा डाले हुए हैं। पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेता शशि थरूर, सचिन पायलट आदि भी हिमाचल प्रदेश में चुनाव प्रचार करते दिखाई देंगे। कांग्रेस के सामने हिमाचल प्रदेश में बगावत को संभालना बहुत बड़ी चुनौती है क्योंकि देशभर में कांग्रेस की अभी सिर्फ तीन राज्यों में अपने दम पर सरकार है। इसमें कर्नाटक, तेलंगाना और हिमाचल प्रदेश शामिल है। अगर उपचुनाव के नतीजे पार्टी के खिलाफ होते हैं तो एक राज्य की सत्ता से पार्टी की विदाई हो जाएगी। इसलिए कांग्रेस का केंद्रीय और प्रदेश नेतृत्व इस उपचुनाव को बेहद गंभीरता से ले रहा है। बीजेपी हर हाल में जीतना चाहती है सभी 6 सीटें बीजेपी किसी भी सूरत में इन सभी 6 सीटों पर जीत दर्ज करना चाहती है। हिमाचल प्रदेश भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा का गृह राज्य भी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हिमाचल प्रदेश में जनसभाएं कर चुके हैं। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह भी हिमाचल के चुनाव प्रचार पर जोर दे रहे हैं। हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष राजीव बिंदल भी इन सभी 6 विधानसभा सीटों पर पार्टी कार्यकर्ताओं को एकजुट कर चुनाव में जीत हासिल करने के लिए जी जान से जुटे हैं। Also ReadHaryana Lok Sabha Chunav 2024: कांग्रेस को बीजेपी के खिलाफ किसानों, पहलवानों के गुस्से का सहारा, लेकिन 30% वोट के अंतर की खाई कैसे कम होगी? 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