GST Council Meeting: पेट्रोल-डीजल के दाम में कैसे हो भारी कमी? GST में लाने पर होगा विचार | ATCard Diesel Petrol GST
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में वस्तु एवं सेवा कर परिषद की बैठक इस बार 17 सितंबर को लखनऊ में होने जा रही है. इस बार की बैठक में पेट्रोल और डीजल को भी जीएसटी के दायरे में लाने पर विचार हो सकता है.
अगर पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के दायरे में लाया गया तो इसके दाम में अचानक भारी कमी आ सकती है. जीएसटी कौंसिल के एजेंडा में इस बार 54 प्रस्ताव हैं. साल 2017 में जीएसटी लागू होने के बाद ऐसा पहली बार होगा जब कौंसिल इसके दायरे में पेट्रोल एवं डीजल को लाने पर विचार करेगी. असल में इस मसले पर राज्यों में काफी मतभेद हैं, लेकिन केरल हाईकोर्ट के एक आदेश के बाद कौंसिल को इस पर विचार करना पड़ रहा है.गौरतलब है कि देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर चल रही हैं. कई शहरों में पेट्रोल 100 रुपये प्रति लीटर के पार है. इसकी वजह से यह मांग फिर जोड़ पकड़ रही है कि पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के दायरे में लाया जाए. असल में पेट्रोल-डीजल की कीमत में आधे से ज्यादा हिस्सा केंद्र और राज्य के टैक्स का ही होता है. उदारहण के लिए दिल्ली में 1 सितंबर को पेट्रोल का रेट 101.34 रुपये लीटर था, जिसमें से करीब 56 रुपये केंद्र और राज्यों का टैक्स ही था. ऐसा कहा जाता है कि पेट्रोल डीजल को अगर जीएसटी के दायरे में लाया गया तो दाम में भारी कमी आएगी.वित्त मंत्री ने इस साल मार्च में ही कहा था कि अगर जीएसटी कौंसिल में प्रस्ताव आया तो वह पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के दायरे में लाने पर चर्चा करने को तैयार हैं. कई जानकारों का कहना है कि अगर जीएसटी कौंसिल में इस पर चर्चा के बाद आम राय बनती है तो पेट्रोल एक झटके में घटकर 60 रुपये लीटर से नीचे आ सकता है. जब 1 जुलाई 2017 को केंद्रीय करों और वैट जैसे राज्य करों को मिलाकर पूरे देश में एक जीएसटी की व्यवस्था लागू की गई तो इसके दायरे से पांच पेट्रोलियम उत्पादों को बाहर रखा गया. यह कहा गया कि जब तक राज्य रेवेन्यू न्यूट्रल नहीं हो जाते यानी उनका राजस्व जीएसटी से पहले वाली स्थिति में नहीं आ जाता, तब तक इन उत्पादों को जीएसटी के दायरे से बाहर रखा जाए.अभी इन पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क सेस के अलावा राज्यों की तरफ से वैट भी लगाया जाता है. पेट्रोल और डीजल को राजस्व के हिसाब से राज्यों के लिए दुधारु गाय माना जाता है. जून में केरल हाईकोर्ट ने एक याचिका पर जीएसटी कौंसिल को यह आदेश दिया था कि पेट्रोल एवं डीजल को जीएसटी में लाने पर वह निर्णय ले. हालांकि इस मामले में राज्यों में एकराय नहीं है. केंद्र सरकार भी शायद ऐसा नहीं चाहती क्योंकि इससे केंद्र और राज्य सरकारों, दोनों को राजस्व का भारी नुकसान होगा.
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