Naulakha Haveli Historical heritage:नरहन स्टेट की नौलखा हवेली अब खंडहर में तब्दील हो रही है, हालांकि, इसकी भव्यता और ऐतिहासिक महत्व के कारण यह आकर्षण का केंद्र बनी हुई है.
समस्तीपुर. बिहार के समस्तीपुर जिले में आज भी एक ऐतिहासिक विरासत समय की मार झेलती खड़ी है, जिसे नरहन स्टेट की नौलखा हवेली के नाम से जाना जाता है. करीब 300 वर्ष पुरानी यह हवेली आज खंडहर में तब्दील होने की कगार पर है, लेकिन इसकी भव्यता और ऐतिहासिक महत्व के कारण आज भी यह लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है.
कहते हैं कि यह हवेली नरहन स्टेट के शासकों द्वारा बनवाई गई थी. इसे परमेश्वरी नारायण पुरी के समय में बनवाया गया, जब नरहन एक प्रभावशाली रियासत थी. हवेली के चारों ओर उगे विशाल वृक्ष और अंदर के टूटे-फूटे हिस्से आज इसकी दुर्दशा को बयां करते हैं, लेकिन जब लोकल 18 की टीम इसके अंदर पहुंची, तो आज भी वहां पुराने जमाने के सिलौटा, ओखली, और अन्य पारंपरिक चीजें मौजूद थीं, जो इसके गौरवशाली अतीत की कहानी बयां करते हैं. हवेली के मुख्य भवन में एक समय राजा का दरबार लगता था, जहां दूर-दराज से लोग अपनी समस्याएं लेकर आया करते थे. राजा खुद लोगों की फरियाद सुनते और उनका समाधान करते थे. क्या कहते हैं ग्रामीण? स्थानीय निवासी मनोज कुमार राय ने बताया कि यह हवेली परमेश्वरी नारायण पुरी के समय की है और यह करीब 300 वर्ष पुरानी है. उन्होंने कहा, यहां कभी राजा का दरबार लगता था, हाथी-घोड़े रहते थे. अब देखरेख नहीं होने के कारण यह खंडहर में बदल रही है. उन्होंने बताया कि हवेली का जो मैनेजर था, उसने इसे तुड़वाने की कोशिश भी की थी, लेकिन गांव के लोगों ने एकजुट होकर इसका विरोध किया और इसे बचा लिया. उन्होंने कहा, यह समस्तीपुर की विरासत है, इसे मिटने नहीं देंगे. मनोज कुमार राय ने आगे बताया कि नरहन स्टेट का इतिहास सिर्फ यहीं तक सीमित नहीं है. कोलकाता, गुजरात और वाराणसी में भी नरहन स्टेट के राजाओं के नाम से मंदिर और ऐतिहासिक स्थल मौजूद हैं. उन्होंने बताया कि नरहन को ऐतिहासिक पहचान द्रोणवार राजवंश के 13 भूपतियों ने दी थी, जिन्होंने इसे एक राजधानी नगर के रूप में विकसित किया था. राजा द्वारा बनाए गए राजमहल, मंदिर, पुल और तालाब आज भी नरहन की गौरवशाली अतीत की गवाही देते हैं. हालांकि, समय के साथ-साथ राज्य की कई ऐतिहासिक धरोहरें बंटवारे के दौरान वाराणसी चली गईं और जो बची हैं, वो गुमनामी में पड़ी हैं. मनोज कुमार ने यह भी बताया कि इसी क्षेत्र में पालयुगीन काल का मंदिर भी था, जिसमें सूर्य की दो फीट लंबी प्रस्तर मूर्ति, शिवलिंग और नंदी की मूर्तियां स्थापित की गई थीं. यह सब कुछ आज नरहन की ऐतिहासिक और पुरातात्विक धरोहर की समृद्धता को दर्शाता है.
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