DNA on US New Bunker Buster Bomb: US के पास पहले से दुनिया के सबसे घातक बंकर बस्टर बम है. इसके बावजूद राष्ट्रपति ट्रंप ने इससे भी ज्यादा घातक और हल्के बंकर बस्टर बम बनाने का आदेश दिया है. आखिर वे अब किसे अपने निशाने पर लेना चाहते हैं.
DNA Analysis US New Bunker Buster Bomb: अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप अब किसी देश पर बड़ी बारूदी स्ट्राइक की भी तैयारी कर रहे हैं. ऐसी आशंकाएं क्यों जताई जा रही हैं. ये समझने के लिए आपको ट्रंप का सुपर बंकर बस्टर प्लान बेहद गौर से देखना चाहिए.
अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी एयरफोर्स के लिए अगली पीढ़ी के बंकर बस्टर बम बनाए जा रहे हैं, जो मौजूदा GBU-57 बंकर बस्टर बम से ज्यादा घातक होंगे. इन बमों के लिए ARA नाम की एक कंपनी को कॉन्ट्रेक्ट दिया गया है. बताया जा रहा है कि एक साल के अंदर ये कंपनी बम का पहला प्रोटोटाइप तैयार कर लेगी. जिसकी टेस्टिंग के बाद अगली पीढ़ी के बंकर बस्टर बमों का निर्माण शुरु किया जाएगा. पहले से कहीं ज्यादा घातक होंगे बम सामरिक हलकों में माना जा रहा है कि जिन नए बंकर बस्टर बमों के निर्माण की तैयारी की जा रही है. वो GBU-57 के मुकाबले कही ज्यादा हल्के होंगे और इन बमों की बंकर भेदने की क्षमता भी बेहतर की जाएगी. बड़ा सवाल ये है कि जब अमेरिका के पास पहले GBU-57 जैसे आधुनिक बंकर बस्टर बम हैं तो ट्रंप को नए बमों को बनाने की जरूरत क्यों पड़ी. अगली पीढ़ी के बंकर बस्टर बम बनाकर ट्रंप किस टारगेट को हिट करना चाहते हैं. ट्रंप के नए बारूदी प्लान से जुड़े इन सवालों का जवाब जानने के लिए आपको बंकर बस्टर बमों पर DNA की STRATEGIC REPORT बेहद गौर से पढ़नी चाहिए. DNA : बंकर बस्टर बम का बाप आ रहा है.. ट्रंप के सुपर बम का DNA टेस्ट #DNA #DonaldTrump #Politics #India #America | @pratyushkkhare pic.twitter.com6X404B5m4L — Zee News September 13, 2025 अमेरिका के बंकर बस्टर बम पिछली बार दुनिया भर की सुर्खियों में 22 जून 2025 को आए थे. जब इजरायल और ईरान के टकराव के बीच अमेरिकी वायुसेना ने ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमला किया था. इस दौरान GBU-57 बमों से ईरान के फोर्दो, नतांज और एसफहान परमाणु रिएक्टरों को बड़ा नुकसान पहुंचाया था. नए बंकर बस्टर बम क्यों बना रहा US? ये पहली बार था जब अमेरिकी वायुसेना ने अपने GBU-57 बमों का किसी युद्ध या बड़े टकराव में इस्तेमाल किया था. अब इसी बम का एडवांस्ड वर्जन तैयार किया जा रहा है. इसी वजह से सवाल पूछा जा रहा है. आखिर एक ही बार इस्तेमाल करने के बाद अमेरिका ने अगली पीढ़ी के बम बनाने की तरफ कदम क्यों बढ़ाए हैं. इस सवाल का पहला जवाब है GBU-57 की वो सीमित क्षमता तो ईरान के ऑपरेशन में भांपी गई थी. ईरान के जिन परमाणु अड्डों पर अमेरिका ने हमले किए थे. उन्हें सिर्फ नुकसान पहुंचा था. वो पूरी तरह तबाह नहीं हो पाए थे. दरअसल ईरान ने अपने परमाणु अड्डों को जमीन में तीन मंजिल नीचे तक बनाया हुआ था. अमेरिका का GBU-57 बम सतह पर पहली बार फटने के बाद. तहखानों के ऊपरी हिस्से को ही नुकसान पहुंचा पाया था. जिसकी वजह से निचले तहखानों में रखे संवर्धित यूरेनियम और मशीनरी सुरक्षित बच गई थी. इसी कमी को देखते हुए अमेरिकी वायुसेना के लिए सुपर बंकर बस्टर बम का कॉन्ट्रेक्ट दिया गया है. बताया जा रहा है कि अगली पीढ़ी के सुपर बंकर बस्टर बम को एक नई तकनीक से भी लैस किया जाएगा. काम तमाम करेगा नया बंकर बस्टर बम? जब ये बम किसी इमारत पर गिरकर पहला धमाका करेगा. तो बम के अंदर लगा फ्यूज़ निचली सतह के उन हिस्सों को पहचान लेगा जहां ज्यादा नुकसान हुआ है. फिर बम में फिट किया गया दूसरा वॉरहेड उसी कमजोर हिस्से पर गिरेगा. जिससे इमारत या ढांचे को नुकसान होने की संभावना बढ़ जाएगी. जिस कंपनी को बम बनाने का ऑर्डर दिया गया है. उसने इस प्रोजेक्ट से जुड़ी ज्यादा जानकारी सार्वजनिक नहीं की हैं. लेकिन कुछ ऐसे पहलू हैं. जो मीडिया रिपोर्ट्स के जरिए सामने आए हैं. एक GBU-57 बम का वजन तकरीबन 13 हजार 600 किलोग्राम होता है. जबकि जो नया सुपर बंकर बस्टर बम बनाया जा रहा है. उसका वजन तकरीबन 9 हजार किलोग्राम ही होगा. भारी वजन की वजह से एक B-2 बॉम्बर पर सिर्फ 2 GBU-57 बम लोड किए जा सकते थे. लेकिन हल्का होने की वजह से सुपर बंकर बस्टर बम की चार यूनिट एक बमवर्षक पर लोड की जा सकेंगी. यानी किसी भी मिशन पर जाते हुए पायलट की मारक क्षमता बढ़ जाएगी. गाइडेंस किट से पहचान लेगा टारगेट अब तक जिस GBU-57 बम का इस्तेमाल अमेरिका करता आया है. वो GPS गाइडेंस पर आधारित है. यानी ये बम GPS का इस्तेमाल करके अपने टारगेट को पहचानता और फिर धमाका करता है. लेकिन सुपर बंकर बस्टर को लेकर ये दावा किया जा रहा है कि ये बम गाइडेंस किट से भी दागा जा सकेगा. यानी इस बम को दागने के लिए पायलट को टारगेट के ज्यादा करीब नहीं जाना पड़ेगा. ट्रंप का सुपर बम कैसा होगा, ये आपने जान लिया. अब दूसरा सवाल, आखिर ट्रंप का टारगेट क्या है? ईरान पर ट्रंप पहले ही बम गिरा चुके हैं..और अब ट्रंप के सामने सिर्फ एक ही मुद्दा बचता है..किम जोंग का उत्तर कोरिया. आपको याद होगा...जब चीन की विक्ट्री डे परेड में किम जोंग उन आया था तो किम की मौजूदगी की टीस ट्रंप की जुबान से साफ सुनाई दी थी. ट्रंप ने कहा था कि पुतिन और चीन के साथ मिलकर किम जोंग अमेरिका विरोधी साजिशों का जाल बुन रहा है. तो क्या ये माना जा सकता है कि ट्रंप के सुपर बम का टारगेट किम जोंग उन के परमाणु अड्डे हैं.जिस किम जोंग के साथ पहले कार्यकाल में ट्रंप ने हाथ मिलाया था.वही किम जोंग ट्रंप का अगला शिकार बनने जा रहा है.
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