Indian Army: अब सेना की आस्था की बात करेंगे, जहां धर्म के नाम पर सैन्य कार्यक्रम से दूरी बनाना एक ईसाई अफसर को भारी पड़ गया.
Indian Army : अब सेना की आस्था की बात करेंगे, जहां धर्म के नाम पर सैन्य कार्यक्रम से दूरी बनाना एक ईसाई अफसर को भारी पड़ गया.Wild Cats Photos: एक-दो नहीं, दुनिया में बिल्लियों की हैं 40 प्रजातियां; बेरहमी से चुटकियों में शिकार का कर देती काम-तमाम!बढ़े यूरिक एसिड को गठिया बनने से पहले करें कम, फायदेमंद साबित हो सकते हैं ये 5 ड्रिंकWorst Foods for Kidneys: किडनी को धीरे-धीरे खोखला कर डालते हैं ये 6 फूड्स, आज से ही कर लें तौबा! वरना दोनों गुर्दे छोड़ देंगे साथ!चेहरे के मुंहासे हो सकते हैं पेट में टॉक्सिन का संकेत, आंतों की सफाई के लिए खाएं ये फल डीएनए का ये खास विश्लेषण सेना के धर्म से जुड़ा है.
जिसके मुख्य पात्र सैमुअल कमलेसन नाम के एक पूर्व सैन्य अधिकारी हैं. जिन्हें सेना ने बर्खास्त कर दिया था. ये कहानी सभी धर्म, सभी संप्रदाय और सभी सैनिकों को भी पढनी चाहिए. एक आंकड़े के मुताबिक दुनिया में 4000 से ज्यादा छोटे बड़े धर्म और संप्रदाय हैं. लेकिन दुनिया की 95 प्रतिशत आबादी में मुख्य रूप से 10 प्रमुख धर्मों को मानने वाले लोग शामिल हैं. भारत में लगभग 8 धर्मों के अनुयायी प्रमुख रूप से रहते हैं. यानी कहा जा सकता है हमारा देश भारत विश्व में धार्मिक विविधता के मामले में सबसे आगे है. लेकिन भारत में मौजूद इन सभी धर्मों से ऊपर है, भारत की सेना का धर्म. जिसके लिए देश सर्वप्रथम है. आप समझिए सेना का धर्म क्या है?सेना का धर्म क्या है - नाम..नमक और निशान.सेना का धर्म क्या है - अपने सीनियर अधिकारी की आज्ञा का पालन. लेकिन भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट सैमुअल कमलेसन की सोच इससे मेल नहीं खाती थी. सैमुअल कमलेसन को मार्च 2017 में सेना की 3 कैवेलरी रेजीमेंट में कमीशन मिला. इस रेजीमेंट में सिख, जाट और राजपूत सैनिकों के तीन स्क्वाड्रन शामिल थे. सैमुअल कमलेसन को जिस स्क्वाड्रन का लीडर बनाया गया उसमें सिख जवान शामिल थे. एक कमांडर के तौर पर सैमुअल की जिम्मेदारी थी कि वो अपने स्क्वाड्रन में होने वाले धार्मिक अनुष्ठान में शामिल हों और जवानों का मनोबल बढ़ाएं. लेकिन सैमुअल कमलेसन को इस पर आपत्ति थी. इसलिए वो रेजीमेंट में मौजूद मंदिर और गुरूद्वारे में बाहर तक तो जाते लेकिन पूजा करने वाले स्थान पर जाने से परहेज करते. इस कमांडर ने सैनिकों की धार्मिक परेड में हिस्सा लेने से भी इनकार कर दिया. भारतीय सेना के अफसर ऐसा कभी नहीं करते. लेकिन सैमुअल कमलेसन जो कि धर्म से ईसाई थे, उन्हें किसी मंदिर या गुरूद्वारे में जाना अपने धर्म के खिलाफ लगा. सीनियर अफसरों को जब इस बात की खबर लगी तो सैमुअल को समझाया गया. सैमुअल को बताया गया अपने सैनिकों का मनोबल बढ़ाए रखने के लिए ये जरूरी है. लेकिन सीनियर अधिकारियों के बार बार समझाने के बावजूद सैमुअल ने आदेश का पालन नहीं किया. जिसके बाद सेना ने अफसर की अनुशासन हीनता को देखते हुए उसे 2021 में सेवा से बर्खास्त कर दिया. सैमुअल की पेंशन और ग्रेच्युटी को भी रोक दिया गया. लेकिन सैमुअल सेना ने इस फैसले से सहमत नहीं थे.इसके खिलाफ सैमुअल ने दिल्ली हाईकोर्ट में सेना से बर्खास्तगी के आदेश को चुनौती दी और अपनी सेवा फिर से बहाल करने की मांग की. लगभग चार साल की सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने सेना के बर्खास्त अफसर की याचिका पर फैसला सुना दिया है. दिल्ली हाई कोर्ट ने भारतीय सेना के पूर्व अफसर सैमुअल कमलेसन की बर्खास्तगी को बरकरार रखा है. सेना के इस पूर्व अफसर की अर्जी खारिज करते वक्त दिल्ली हाईकोर्ट ने क्या कहा, आपको वो बातें भी बहुत ध्यान से पढ़नी चाहिए. कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि इस केस में सवाल धार्मिक स्वतंत्रता का नहीं, बल्कि किसी वरिष्ठ अधिकारी के वैध आदेश के पालन का था.* याचिकाकर्ता को सीनियर अधिकारियों ने धार्मिक स्थल के अंदरूनी हिस्से में आकर पूजा करने के लिए समझाया था.* कोर्ट ने कहा सामान्य नागरिकों के लिए ये आदेश सख्त लग सकता है. लेकिन सेना में अनुशासन के मानक देश के आम नागरिकों से अलग हैं. * धार्मिक स्थल में एक अफसर का प्रवेश करने से इनकार करना सैन्य मूल्यों को कमजोर करेगा.अदालत ने सेना की इस दलील को भी सही माना. * अधिकारी ने अपने सीनियर के वैध आदेश से ऊपर अपने धर्म को रखा..कोर्ट ने इसे साफ तौर पर अनुशासनहीनता माना और इस अफसर की बर्खास्तगी को सही ठहराया.| धर्म Vs 'सेना का धर्म'..'ऐतिहासिक' विश्लेषण, सेना में 'अपना धर्म' देखने वाले अफसर कैसे नपे?अपने आदेश में दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा है कि भारतीय सैनिकों का एक ही चरित्र है कि वो देश को सबसे ऊपर रखते हैं. उनके लिए देश खुद से और उनके धर्म से बढ़कर है. हमारी सेना में हर धर्म, जाति और इलाके के लोग हैं. लेकिन सेना की वर्दी उनको जोड़ती है. भारतीय सैनिक इस बात को अच्छी तरह समझते हैं और अब दिल्ली हाईकोर्ट ने भी पूरे देश को एक बार फिर से बता दिया है कि सेना का धर्म देश की रक्षा है. हमारी सेना देश की रक्षा को अपना धर्म मानती है. वहीं जो लश्कर, धर्म को देश से ऊपर रखे, वो पाकिस्तान की फौज कहलाती है. पाकिस्तान की सेना धर्म को देश के ऊपर रखती है. अब आपको पाकिस्तान के आर्मी चीफ आसिम मुनीर का वो बयान पढ़ना चाहिए जिसके बाद पहलगाम में 26 हिंदुओं का धर्म पूछकर नरसंहार हुआ था, ताकि आपको पता चले कि आसिम मुनीर के बयानों में मजहबी कट्टरता किस तरह से नजर आती है. दूसरे धर्मों को लेकर उसके दिल में किस हद तक नफरत भरी है. आज आपको देश के लिए लड़ने वाली सेना और धर्म के लिए लड़ने वाली सेना में फर्क भी समझना चाहिए. जिसका सबसे बड़ा उदाहरण भारत और पाकिस्तान की सेनाएं हैं. - भारत के हर सैनिक का धर्म देश के संविधान और उनके कर्तव्य से जुड़ा है. जबकि पाकिस्तान की सेना इस्लामिक विचारधारा के आधार पर बनी है. जिसका मूल सिद्धांत पाकिस्तान को एक इस्लामिक राष्ट्र के रूप में संरक्षित करना है. - भारतीय सेना धर्मनिरपेक्ष है. जिसमें सभी धर्मों, जातियों और क्षेत्र से जुड़े व्यक्ति शामिल होते हैं. भारतीय सेना में हिंदू, सिख, ईसाई और पारसी धर्म को मानने वाले अधिकारी भी सेना प्रमुख बने. यहूदी अफसरों ने भी बड़ी भूमिका निभाई. लेकिन पाकिस्तान में गैर मुस्लिम के सेना प्रमुख बनने की बात तो छोड़ दीजिए. उनका सेना में शामिल होना मुश्किल है. पाकिस्तान की सेना में 96 प्रतिशत से ज्यादा सुन्नी मुसलमान हैं. 3 प्रतिशत शिया मुसलमान हैं. 1 प्रतिशत हिंदू और ईसाई हैं. जिनमें ज्यादातर निचले कर्मचारी हैं. - भारत की धर्मनिरपेक्ष सेना ने आज तक कभी राजनीति में दखल नहीं दिया. जबकि पकिस्तान की इस्लामिक सेना ने 3 बार 1958, 1977 और फिर 1999 में तख्तापलट किया. पाकिस्तान की सेना ने वहां लगभग 33 साल तक राज किया. हर मिलिट्री शासन में पाकिस्तान के अंदर कट्टरता और ज्यादा बढ़ी है. - भारतीय सेना, जरुरत पड़ने पर धार्मिक कट्टरवाद से भी युद्ध लड़ती है. जबकि पाकिस्तान की इस्लामिक सेना धर्म के नाम पर आतंकवादियों का समर्थन करती है. पाकिस्तान की सेना हाफिज़ सईद और मसूद अज़हर की मददगार है. यहां तक की ओसामा बिन लादेन से भी पाकिस्तान की सेना से सीधे रिश्ते रहे हैं.
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