Chhath Puja 2025: आखिर क्यों छठ में महिलाएं काले रंग और सिले हुए कपड़े नहीं पहनती, यहां जानें शुभ रंग और पर...

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Chhath Puja 2025: आखिर क्यों छठ में महिलाएं काले रंग और सिले हुए कपड़े नहीं पहनती, यहां जानें शुभ रंग और पर...
सूर्यदेव पूजाव्रत परंपराफरीदाबाद खबर
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Faridabad latest Chhath News: छठ महापर्व सूर्यदेव को अर्घ्य देने और जीवन में सुख, शांति व समृद्धि लाने का पर्व है. व्रती नए, साफ-सुथरे कपड़े पहनकर, लाल-पीला रंग को शुभ मानते हुए मन, वचन और कर्म से पूजा करते हैं. यह पर्व श्रद्धा, शुद्धता और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है.

फरीदाबाद: सूरज की पहली किरण और धरती पर फैलती सुनहरी रोशनी के बीच छठ महापर्व का आगाज़ हर साल लोगों के जीवन में उम्मीद और नई ऊर्जा लेकर आता है. कहते हैं ना…जहाँ चाह वहाँ राह वैसे ही छठ का पर्व भी अपने साथ सुख, समृद्धि और स्वास्थ्य की राह लेकर आता है.

इस महापर्व में न केवल व्रती अपना मन और शरीर शुद्ध करते हैं, बल्कि प्रकृति और सूर्यदेव के प्रति अपनी श्रद्धा भी प्रकट करते हैं. छठ पर्व में पहनावे और रंगों का विशेष महत्व Local18 से बातचीत में ज्योतिषाचार्य पंडित उमा चंद्र मिश्रा ने बताया कि छठ पर्व में पहनावे और रंगों का विशेष महत्व है. उन्होंने कहा कि व्रती सिले हुए कपड़े पहनकर पानी में नहीं उतरें. नया कपड़ा ही पहनना चाहिए और उसमें दाग-धब्बे बिल्कुल नहीं होने चाहिए. इसका कारण यह है कि भगवान सूर्य का रंग लाल है और शनिदेव काले रंग के होते हैं. शास्त्रों में इन दोनों की शत्रुता के कारण काले रंग को अशुभ माना गया है. इसलिए, छठ जैसे मंगल कार्य में पीला और लाल रंग शुभ होते हैं. छठ के दौरान साड़ी ही क्यों पहनती हैं महिलाएं आपने देखा होगा कि महिलाएं छठ व्रत के दौरान केवल साड़ी पहनकर ही पानी में उतरती हैं. इसका कारण यह है कि साड़ी में कोई सिलाई नहीं होती, जबकि ब्लाउज सिला हुआ होता है. इसलिए महिलाएं ब्लाउज नहीं पहनती हैं. पंडित उमा चंद्र मिश्रा के अनुसार संत और महात्मा भी सिला हुआ कपड़ा नहीं पहनते वे धोती या अन्य बिना सिलाई वाले कपड़े ही पहनते हैं. पुरुष भी व्रत और पूजन में धोती पहनें. यह परंपरा शास्त्रों में दी गई है और इसे आज भी बड़ी श्रद्धा के साथ पालन किया जाता है. इन बातों का रखें ध्यान यदि कोई इस वर्ष नया व्रत उठा रहा है, तो उसके लिए यह बहुत ही शुभ माना जाता है. व्रत करने वाले को कोसी भर फल, ठेकुआ और अन्य प्रसाद के साथ पूजा करनी चाहिए. व्रत और उद्यापन दोनों में ही फल अन्य चीज़ का विशेष ध्यान रखना चाहिए. जैसे ही छठ के समय महिलाएं घाट पर उतरती हैं, उनके हाथों में साफ-सुथरे और नए कपड़े होते हैं जो उनकी आस्था और मन की शुद्धता का प्रतीक होते हैं. नेगेटिव चीज़ का इस्तेमाल व्रत के दौरान नहीं करना चाहिए पंडित जी ने यह भी बताया कि छठ महापर्व में मन, वचन और कर्म से पूजा करनी चाहिए. किसी भी नेगेटिव चीज़ का इस्तेमाल व्रत के दौरान नहीं करना चाहिए. इसलिए महिलाएं साड़ी में किसी प्रकार का काला धागा, निशान या दाग-धब्बा नहीं रखती. लाल और पीला रंग शुभ माने जाते हैं और इन्हें पहनकर पूजा करना चाहिए. इस तरह छठ का पर्व न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है बल्कि जीवन में सकारात्मक ऊर्जा अनुशासन और सौभाग्य भी लेकर आता है. सच्ची श्रद्धा ही सब दुखों का नाश करती है अंत में यही कहा जा सकता है कि छठ महापर्व सिर्फ एक व्रत या पूजा नहीं है बल्कि यह श्रद्धा, शुद्धता और प्रकृति के प्रति आदर का संगम है. सच्ची श्रद्धा ही सब दुखों का नाश करती है. इस सोच के साथ हर व्रती अपने मन और शरीर को शुद्ध कर सूर्यदेव को अर्घ्य देता है और अपने जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लाता है.

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