डेहरी प्रखंड में जाति, आवास और आय प्रमाणपत्र बनवाने की प्रक्रिया अब डिजिटल हो गई है। मार्च से आवेदकों को सभी आवश्यक दस्तावेज ऑनलाइन अपलोड करने होंगे, अन्यथा आवेदन अस्वीकृत हो जाएगा।
संवाद सहयोगी, डेहरी आन सोन। डेहरी प्रखंड में जाति, आवास और आय प्रमाणपत्र बनवाने की प्रक्रिया में नई डिजिटल व्यवस्था लागू कर दी गई है। मार्च महीने से प्रभावी इस व्यवस्था के तहत अब केवल आवेदन फॉर्म भरना पर्याप्त नहीं होगा। आवेदकों को आवेदन के साथ सभी आवश्यक दस्तावेज ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य होगा। यदि कोई भी आवेदक बिना दस्तावेज के आवेदन करता है तो उसका आवेदन तत्काल अस्वीकृत कर दिया जाएगा। प्रशासन का कहना है कि इससे प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और समयबद्ध बनेगी। नई व्यवस्था से गलत या अधूरे आवेदन की छंटनी शुरुआती चरण में ही हो जाएगी। BPSC TRE-4 अभ्यर्थियों के लिए जरूरी बदलाव नई व्यवस्था का सबसे अधिक असर उन अभ्यर्थियों पर पड़ रहा है जो BPSC TRE-4 की तैयारी कर रहे हैं। भर्ती प्रक्रिया में जाति, आय और आवास प्रमाणपत्र महत्वपूर्ण दस्तावेज माने जाते हैं। ऐसे में अभ्यर्थियों को समय पर प्रमाणपत्र बनवाने के लिए सभी कागजात तैयार रखने की सलाह दी गई है। प्रशासन का कहना है कि अधूरे दस्तावेज के कारण आवेदन अस्वीकृत हो सकता है। इससे भर्ती प्रक्रिया में परेशानी भी हो सकती है। इसी कारण अभ्यर्थियों को पहले से सभी जरूरी दस्तावेज जुटाने को कहा गया है। अब हर प्रमाणपत्र के लिए अलग दस्तावेज जरूरी नई व्यवस्था के तहत प्रत्येक प्रकार के प्रमाणपत्र के लिए अलग-अलग दस्तावेज अनिवार्य कर दिए गए हैं। जाति प्रमाणपत्र के लिए पैतृक पहचान से जुड़े दस्तावेज देना जरूरी होगा। इसके लिए भूमि से संबंधित कागजात जैसे खतियान, केवाला या रजिस्ट्री पेपर अपलोड करना होगा। दानपत्र की प्रति भी कई मामलों में जरूरी मानी जाएगी। इन दस्तावेजों के आधार पर ही आवेदक की जातीय पहचान की पुष्टि की जाएगी। बिना प्रमाणित दस्तावेज के आवेदन स्वीकार नहीं किया जाएगा। आवास और आय प्रमाणपत्र के लिए भी नियम सख्त आवास प्रमाणपत्र के लिए पते की पुष्टि अनिवार्य कर दी गई है। इसके लिए भूमि खतियान, राशन कार्ड, वोटर आईडी या अन्य राजस्व अभिलेख अपलोड करने होंगे। वहीं आय प्रमाणपत्र के लिए आर्थिक स्थिति से जुड़े दस्तावेज देना जरूरी होगा। इसके तहत वेतन पर्ची, पेंशन पर्ची, आयकर रिटर्न या अन्य सरकारी दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे। सभी कागजात स्पष्ट रूप से स्कैन कर पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य है। अस्पष्ट या अधूरे दस्तावेज होने पर आवेदन अस्वीकार किया जा सकता है। साइबर कैफे और वसुधा केंद्रों पर बढ़ी भीड़ नई व्यवस्था लागू होने के बाद प्रखंड क्षेत्र में साइबर कैफे और वसुधा केंद्रों पर भीड़ बढ़ गई है। कई लोग पुराने भूमि रिकॉर्ड जैसे खतियान और रजिस्ट्री के कागजात खोजने में जुटे हैं। पहले कई मामलों में केवल आधार कार्ड के आधार पर आवेदन स्वीकार कर लिया जाता था। लेकिन अब शुरुआती चरण में ही सभी दस्तावेज अपलोड करना जरूरी हो गया है। खासकर छात्र और ग्रामीण वर्ग के लोग दस्तावेज स्कैन कराने के लिए केंद्रों का सहारा ले रहे हैं। इस कारण कई केंद्रों पर लंबी कतार भी देखी जा रही है। बिना कागजात के आवेदन तुरंत होगा रिजेक्ट प्रखंड विकास पदाधिकारी अजीत कुमार ने बताया कि नई व्यवस्था पारदर्शिता बढ़ाने के लिए लागू की गई है। पहले कई मामलों में दस्तावेजों की कमी के बावजूद आवेदन लंबित रहते थे। जिससे जांच प्रक्रिया में काफी समय लग जाता था। अब डिजिटल ऑथेंटिकेशन के माध्यम से आवेदन की प्रारंभिक जांच तुरंत हो जाएगी। बिना प्रासंगिक दस्तावेज अपलोड किए किसी भी स्थिति में प्रमाणपत्र जारी नहीं किया जाएगा। इससे गलत दस्तावेज के आधार पर प्रमाणपत्र बनवाने की कोशिशों पर भी रोक लगेगी।.
संवाद सहयोगी, डेहरी आन सोन। डेहरी प्रखंड में जाति, आवास और आय प्रमाणपत्र बनवाने की प्रक्रिया में नई डिजिटल व्यवस्था लागू कर दी गई है। मार्च महीने से प्रभावी इस व्यवस्था के तहत अब केवल आवेदन फॉर्म भरना पर्याप्त नहीं होगा। आवेदकों को आवेदन के साथ सभी आवश्यक दस्तावेज ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य होगा। यदि कोई भी आवेदक बिना दस्तावेज के आवेदन करता है तो उसका आवेदन तत्काल अस्वीकृत कर दिया जाएगा। प्रशासन का कहना है कि इससे प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और समयबद्ध बनेगी। नई व्यवस्था से गलत या अधूरे आवेदन की छंटनी शुरुआती चरण में ही हो जाएगी। BPSC TRE-4 अभ्यर्थियों के लिए जरूरी बदलाव नई व्यवस्था का सबसे अधिक असर उन अभ्यर्थियों पर पड़ रहा है जो BPSC TRE-4 की तैयारी कर रहे हैं। भर्ती प्रक्रिया में जाति, आय और आवास प्रमाणपत्र महत्वपूर्ण दस्तावेज माने जाते हैं। ऐसे में अभ्यर्थियों को समय पर प्रमाणपत्र बनवाने के लिए सभी कागजात तैयार रखने की सलाह दी गई है। प्रशासन का कहना है कि अधूरे दस्तावेज के कारण आवेदन अस्वीकृत हो सकता है। इससे भर्ती प्रक्रिया में परेशानी भी हो सकती है। इसी कारण अभ्यर्थियों को पहले से सभी जरूरी दस्तावेज जुटाने को कहा गया है। अब हर प्रमाणपत्र के लिए अलग दस्तावेज जरूरी नई व्यवस्था के तहत प्रत्येक प्रकार के प्रमाणपत्र के लिए अलग-अलग दस्तावेज अनिवार्य कर दिए गए हैं। जाति प्रमाणपत्र के लिए पैतृक पहचान से जुड़े दस्तावेज देना जरूरी होगा। इसके लिए भूमि से संबंधित कागजात जैसे खतियान, केवाला या रजिस्ट्री पेपर अपलोड करना होगा। दानपत्र की प्रति भी कई मामलों में जरूरी मानी जाएगी। इन दस्तावेजों के आधार पर ही आवेदक की जातीय पहचान की पुष्टि की जाएगी। बिना प्रमाणित दस्तावेज के आवेदन स्वीकार नहीं किया जाएगा। आवास और आय प्रमाणपत्र के लिए भी नियम सख्त आवास प्रमाणपत्र के लिए पते की पुष्टि अनिवार्य कर दी गई है। इसके लिए भूमि खतियान, राशन कार्ड, वोटर आईडी या अन्य राजस्व अभिलेख अपलोड करने होंगे। वहीं आय प्रमाणपत्र के लिए आर्थिक स्थिति से जुड़े दस्तावेज देना जरूरी होगा। इसके तहत वेतन पर्ची, पेंशन पर्ची, आयकर रिटर्न या अन्य सरकारी दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे। सभी कागजात स्पष्ट रूप से स्कैन कर पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य है। अस्पष्ट या अधूरे दस्तावेज होने पर आवेदन अस्वीकार किया जा सकता है। साइबर कैफे और वसुधा केंद्रों पर बढ़ी भीड़ नई व्यवस्था लागू होने के बाद प्रखंड क्षेत्र में साइबर कैफे और वसुधा केंद्रों पर भीड़ बढ़ गई है। कई लोग पुराने भूमि रिकॉर्ड जैसे खतियान और रजिस्ट्री के कागजात खोजने में जुटे हैं। पहले कई मामलों में केवल आधार कार्ड के आधार पर आवेदन स्वीकार कर लिया जाता था। लेकिन अब शुरुआती चरण में ही सभी दस्तावेज अपलोड करना जरूरी हो गया है। खासकर छात्र और ग्रामीण वर्ग के लोग दस्तावेज स्कैन कराने के लिए केंद्रों का सहारा ले रहे हैं। इस कारण कई केंद्रों पर लंबी कतार भी देखी जा रही है। बिना कागजात के आवेदन तुरंत होगा रिजेक्ट प्रखंड विकास पदाधिकारी अजीत कुमार ने बताया कि नई व्यवस्था पारदर्शिता बढ़ाने के लिए लागू की गई है। पहले कई मामलों में दस्तावेजों की कमी के बावजूद आवेदन लंबित रहते थे। जिससे जांच प्रक्रिया में काफी समय लग जाता था। अब डिजिटल ऑथेंटिकेशन के माध्यम से आवेदन की प्रारंभिक जांच तुरंत हो जाएगी। बिना प्रासंगिक दस्तावेज अपलोड किए किसी भी स्थिति में प्रमाणपत्र जारी नहीं किया जाएगा। इससे गलत दस्तावेज के आधार पर प्रमाणपत्र बनवाने की कोशिशों पर भी रोक लगेगी।
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