aparna yadav meets cm yogi adityanath lucknow
भाजपा से नाराज चल रहीं अपर्णा यादव ने सीएम योगी से मुलाकात की। अपर्णा के साथ उनके पति प्रतीक यादव भी थे। दोनों ने करीब 30 मिनट तक योगी से मुलाकात की। सूत्रों के मुताबिक, योगी ने उन्हें महिला आयोग की उपाध्यक्ष का कार्यभार ग्रहण करने की सलाह दी।मुलायम सिंह यादव की बहू अपर्णा को भाजपा ने 3 सितंबर को महिला आयोग का उपाध्यक्ष बनाया था। हालांकि, 6 दिन बाद भी उन्होंने कार्यभार ग्रहण नहीं किया। उनका कहना है कि पारिवारिक पृष्ठभूमि और राजनीतिक कद को देखते हुए उपाध्यक्ष का पद उनके लिए बहुत छोटा है। अपर्णा ने भाजपा आलाकमान से बातचीत कर असंतोष जाहिर किया था। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो गृह मंत्री अमित शाह ने भी अपर्णा से फोन पर बात की। आश्वासन दिया कि उन्हें भविष्य में अहम जिम्मेदारियां मिलेंगी। सूत्रों ने दावा किया कि अमित शाह से बातचीत और योगी से मुलाकात के बाद अब तय है कि अपर्णा जल्द पदभार ग्रहण कर लेंगी। यह तस्वीर पिछले विधानसभा चुनाव के पहले की है, जब अपर्णा ने भाजपा अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी से मुलाकात की थी।यूपी में उपचुनाव से पहले अपर्णा की नाराजगी पर सियासत तेज हो गई थी। अखिलेश यादव ने भी बिना नाम लिए तंज किया था-भाजपा किसी का सम्मान नहीं करती। इसके बाद भाजपा प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी ने अपर्णा को मनाने की जिम्मेदारी परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह को सौंपी। दयाशंकर सिंह ने अपर्णा से मुलाकात कर उन्हें भरोसा दिलाया कि आने वाले समय में उन्हें बड़ा पद दिया जाए। इसके अलावा, भूपेंद्र चौधरी ने भी अपर्णा से फोन पर बात की।पॉलिटिकल एक्सपर्ट का कहना है- अपर्णा को पता है कि अब सपा में उन्हें वह सम्मान नहीं मिलेगा। फिलहाल उनका राजनीतिक भविष्य भाजपा में ही सुरक्षित है, इसलिए वह भाजपा से अलग नहीं होना चाहती।1- उपचुनाव में भाजपा अपर्णा का इस्तेमाल करेगी यूपी की 10 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होने हैं। लोकसभा चुनाव में कमजोर प्रदर्शन के बाद भाजपा अब किसी हालत में उपचुनाव नहीं हारना चाहती है। भाजपा सपा को उसके मजबूत गढ़ में करहल में हारने के लिए पूरा जोर लगा रही है। अखिलेश के इस्तीफा देने की वजह से यह सीट खाली हुई है। पिछले लोकसभा चुनाव और उससे पहले विधानसभा चुनाव में अपर्णा ने भाजपा के लिए प्रचार तो किया, लेकिन उन सीटों पर नहीं गईं, जहां से यादव परिवार के सदस्य चुनाव लड़ रहे थे। तब तक अपर्णा के पास कोई पद भी नहीं था। इसीलिए अपर्णा को महिला आयोग का उपाध्यक्ष बनाया गया है।अपर्णा 3 साल पहले सपा छोड़कर भाजपा में तो आ गईं, लेकिन अपने परिवार से दूर नहीं हुईं। लगातार चाचा शिवपाल यादव के करीब रहीं। अखिलेश, डिंपल या परिवार के किसी अन्य सदस्य पर कभी गलत बयान नहीं दिया। इसी बीच, लोकसभा चुनाव में सपा के अच्छे प्रदर्शन और भाजपा में अपनी उपेक्षा के चलते अपर्णा के बारे में कहा जाने लगा था कि वह घर वापसी कर सकती हैं। इसीलिए भाजपा ने उन्हें महिला आयोग में पद देकर डैमेज कंट्रोल करने की कोशिश की।अयोध्या और कन्नौज में हुए रेप कांड को लेकर भाजपा और खुद सीएम योगी सपा पर हमलावर हैं। यही वजह है कि 4 साल बाद महिला आयोग का गठन करके मुलायम परिवार की बहू को ही पद दे दिया। इससे भाजपा को सपा पर हमला करने में ज्यादा आसानी रहेगी।ये तस्वीर 2017 के विधानसभा चुनाव की है। डिंपल ने मजाक में वोटर से कहा था-हमारी देवरानी चुनाव लड़ रही हैं, आप वोट जरूर दीजिए। अपर्णा को महिला आयोग का उपाध्यक्ष बनाए जाने से पहले तीन सालों के दौरान तमाम तरह की अटकलें चलती रहीं। पहले विधानसभा चुनाव में उम्मीदवार बनाने के कयास लगे। इसके बाद निकाय चुनाव में मेयर उम्मीदवार बनाने के चर्चे हुए। फिर लोकसभा चुनाव में भी उम्मीदवार बनाए जाने की संभावना जताई गई। लेकिन हर मौके पर उन्हें निराशा हाथ लगी। यही वजह है, इस पूरे घटनाक्रम के दौरान अपर्णा अखिलेश यादव और उनके पूरे परिवार के खिलाफ बोलने से बचती नजर आईं। अपर्णा कई मौकों पर चाचा शिवपाल यादव का आशीर्वाद लेने जाती रहीं। भाजपा में रहते हुए भी वह कई मौकों पर चाचा शिवपाल यादव के घर गईं और उनके पैर छूकर आशीर्वाद लिया। हालांकि, 2017 में सपा ने लखनऊ कैंट विधानसभा सीट से अपर्णा यादव को टिकट दिया था। डिंपल यादव ने उनका प्रचार भी किया था। हालांकि तब वह भाजपा की रीता बहुगुणा जोशी से हार गई थीं।अपर्णा मुलायम सिंह की छोटी बहू हैं। वह विधानसभा चुनाव- 2022 से पहले भाजपा में शामिल हुई थीं। अपर्णा 2022 विधानसभा चुनाव में लखनऊ की सरोजिनी नगर सीट से भाजपा का टिकट भी मांग रही थीं, लेकिन उन्हें टिकट नहीं मिला था। अपर्णा मुलायम की दूसरी पत्नी साधना यादव के बेटे प्रतीक यादव की पत्नी हैं।अपर्णा का जन्म 1 जनवरी, 1990 को हुआ था। उनके पिता अरविंद सिंह बिष्ट एक मीडिया कंपनी में थे। सपा की सरकार में वह सूचना आयुक्त भी रहे। अपर्णा की मां अंबी बिस्ट अधिकारी हैं। अपर्णा की स्कूली पढ़ाई लखनऊ के लोरेटो कॉन्वेंट से हुई है।अपर्णा के लिए भाजपा में आना क्या घाटे का सौदा:न विधायकी न सांसदी का टिकट; बनाया भी तो उपाध्यक्ष पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव की छोटी बहू अपर्णा यादव को मनाने के लिए भाजपा नेता जुटे हुए हैं। अपर्णा राज्य महिला आयोग में उपाध्यक्ष का पद स्वीकार करने के पक्ष में नहीं हैं। उन्होंने लखनऊ से लेकर दिल्ली तक बड़े भाजपा नेताओं से बातचीत कर अपनी नाराजगी जाहिर की है। पारिवारिक पृष्ठभूमि और राजनीतिक भविष्य को देखते हुए बड़ा पद चाहती हैं। इसे देखते हुए भाजपा उन्हें कोई बड़ा पद ऑफर कर सकती है।मथुरा में जोरदार बारिश, सड़कें तालाब बनींअयोध्या में दलित लड़की से रेप के आरोपी काआजमगढ़ में अनियंत्रित होकर उलट गया डंफरराजस्थान की बड़ी खबरें फटाफटछत्तीसगढ़ का महाराष्ट्र-ओडिशा और आंध्र-तेलंगाना से टूटा संपर्ककल से 6 जिलों में भारी बारिश का अलर्टबिहार में अब तक 27 फीसदी कम बारिश हुईझारखंड के 6 जिलों में भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट.
भाजपा से नाराज चल रहीं अपर्णा यादव ने सीएम योगी से मुलाकात की। अपर्णा के साथ उनके पति प्रतीक यादव भी थे। दोनों ने करीब 30 मिनट तक योगी से मुलाकात की। सूत्रों के मुताबिक, योगी ने उन्हें महिला आयोग की उपाध्यक्ष का कार्यभार ग्रहण करने की सलाह दी।मुलायम सिंह यादव की बहू अपर्णा को भाजपा ने 3 सितंबर को महिला आयोग का उपाध्यक्ष बनाया था। हालांकि, 6 दिन बाद भी उन्होंने कार्यभार ग्रहण नहीं किया। उनका कहना है कि पारिवारिक पृष्ठभूमि और राजनीतिक कद को देखते हुए उपाध्यक्ष का पद उनके लिए बहुत छोटा है। अपर्णा ने भाजपा आलाकमान से बातचीत कर असंतोष जाहिर किया था। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो गृह मंत्री अमित शाह ने भी अपर्णा से फोन पर बात की। आश्वासन दिया कि उन्हें भविष्य में अहम जिम्मेदारियां मिलेंगी। सूत्रों ने दावा किया कि अमित शाह से बातचीत और योगी से मुलाकात के बाद अब तय है कि अपर्णा जल्द पदभार ग्रहण कर लेंगी। यह तस्वीर पिछले विधानसभा चुनाव के पहले की है, जब अपर्णा ने भाजपा अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी से मुलाकात की थी।यूपी में उपचुनाव से पहले अपर्णा की नाराजगी पर सियासत तेज हो गई थी। अखिलेश यादव ने भी बिना नाम लिए तंज किया था-भाजपा किसी का सम्मान नहीं करती। इसके बाद भाजपा प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी ने अपर्णा को मनाने की जिम्मेदारी परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह को सौंपी। दयाशंकर सिंह ने अपर्णा से मुलाकात कर उन्हें भरोसा दिलाया कि आने वाले समय में उन्हें बड़ा पद दिया जाए। इसके अलावा, भूपेंद्र चौधरी ने भी अपर्णा से फोन पर बात की।पॉलिटिकल एक्सपर्ट का कहना है- अपर्णा को पता है कि अब सपा में उन्हें वह सम्मान नहीं मिलेगा। फिलहाल उनका राजनीतिक भविष्य भाजपा में ही सुरक्षित है, इसलिए वह भाजपा से अलग नहीं होना चाहती।1- उपचुनाव में भाजपा अपर्णा का इस्तेमाल करेगी यूपी की 10 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होने हैं। लोकसभा चुनाव में कमजोर प्रदर्शन के बाद भाजपा अब किसी हालत में उपचुनाव नहीं हारना चाहती है। भाजपा सपा को उसके मजबूत गढ़ में करहल में हारने के लिए पूरा जोर लगा रही है। अखिलेश के इस्तीफा देने की वजह से यह सीट खाली हुई है। पिछले लोकसभा चुनाव और उससे पहले विधानसभा चुनाव में अपर्णा ने भाजपा के लिए प्रचार तो किया, लेकिन उन सीटों पर नहीं गईं, जहां से यादव परिवार के सदस्य चुनाव लड़ रहे थे। तब तक अपर्णा के पास कोई पद भी नहीं था। इसीलिए अपर्णा को महिला आयोग का उपाध्यक्ष बनाया गया है।अपर्णा 3 साल पहले सपा छोड़कर भाजपा में तो आ गईं, लेकिन अपने परिवार से दूर नहीं हुईं। लगातार चाचा शिवपाल यादव के करीब रहीं। अखिलेश, डिंपल या परिवार के किसी अन्य सदस्य पर कभी गलत बयान नहीं दिया। इसी बीच, लोकसभा चुनाव में सपा के अच्छे प्रदर्शन और भाजपा में अपनी उपेक्षा के चलते अपर्णा के बारे में कहा जाने लगा था कि वह घर वापसी कर सकती हैं। इसीलिए भाजपा ने उन्हें महिला आयोग में पद देकर डैमेज कंट्रोल करने की कोशिश की।अयोध्या और कन्नौज में हुए रेप कांड को लेकर भाजपा और खुद सीएम योगी सपा पर हमलावर हैं। यही वजह है कि 4 साल बाद महिला आयोग का गठन करके मुलायम परिवार की बहू को ही पद दे दिया। इससे भाजपा को सपा पर हमला करने में ज्यादा आसानी रहेगी।ये तस्वीर 2017 के विधानसभा चुनाव की है। डिंपल ने मजाक में वोटर से कहा था-हमारी देवरानी चुनाव लड़ रही हैं, आप वोट जरूर दीजिए। अपर्णा को महिला आयोग का उपाध्यक्ष बनाए जाने से पहले तीन सालों के दौरान तमाम तरह की अटकलें चलती रहीं। पहले विधानसभा चुनाव में उम्मीदवार बनाने के कयास लगे। इसके बाद निकाय चुनाव में मेयर उम्मीदवार बनाने के चर्चे हुए। फिर लोकसभा चुनाव में भी उम्मीदवार बनाए जाने की संभावना जताई गई। लेकिन हर मौके पर उन्हें निराशा हाथ लगी। यही वजह है, इस पूरे घटनाक्रम के दौरान अपर्णा अखिलेश यादव और उनके पूरे परिवार के खिलाफ बोलने से बचती नजर आईं। अपर्णा कई मौकों पर चाचा शिवपाल यादव का आशीर्वाद लेने जाती रहीं। भाजपा में रहते हुए भी वह कई मौकों पर चाचा शिवपाल यादव के घर गईं और उनके पैर छूकर आशीर्वाद लिया। हालांकि, 2017 में सपा ने लखनऊ कैंट विधानसभा सीट से अपर्णा यादव को टिकट दिया था। डिंपल यादव ने उनका प्रचार भी किया था। हालांकि तब वह भाजपा की रीता बहुगुणा जोशी से हार गई थीं।अपर्णा मुलायम सिंह की छोटी बहू हैं। वह विधानसभा चुनाव- 2022 से पहले भाजपा में शामिल हुई थीं। अपर्णा 2022 विधानसभा चुनाव में लखनऊ की सरोजिनी नगर सीट से भाजपा का टिकट भी मांग रही थीं, लेकिन उन्हें टिकट नहीं मिला था। अपर्णा मुलायम की दूसरी पत्नी साधना यादव के बेटे प्रतीक यादव की पत्नी हैं।अपर्णा का जन्म 1 जनवरी, 1990 को हुआ था। उनके पिता अरविंद सिंह बिष्ट एक मीडिया कंपनी में थे। सपा की सरकार में वह सूचना आयुक्त भी रहे। अपर्णा की मां अंबी बिस्ट अधिकारी हैं। अपर्णा की स्कूली पढ़ाई लखनऊ के लोरेटो कॉन्वेंट से हुई है।अपर्णा के लिए भाजपा में आना क्या घाटे का सौदा:न विधायकी न सांसदी का टिकट; बनाया भी तो उपाध्यक्ष पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव की छोटी बहू अपर्णा यादव को मनाने के लिए भाजपा नेता जुटे हुए हैं। अपर्णा राज्य महिला आयोग में उपाध्यक्ष का पद स्वीकार करने के पक्ष में नहीं हैं। उन्होंने लखनऊ से लेकर दिल्ली तक बड़े भाजपा नेताओं से बातचीत कर अपनी नाराजगी जाहिर की है। पारिवारिक पृष्ठभूमि और राजनीतिक भविष्य को देखते हुए बड़ा पद चाहती हैं। इसे देखते हुए भाजपा उन्हें कोई बड़ा पद ऑफर कर सकती है।मथुरा में जोरदार बारिश, सड़कें तालाब बनींअयोध्या में दलित लड़की से रेप के आरोपी काआजमगढ़ में अनियंत्रित होकर उलट गया डंफरराजस्थान की बड़ी खबरें फटाफटछत्तीसगढ़ का महाराष्ट्र-ओडिशा और आंध्र-तेलंगाना से टूटा संपर्ककल से 6 जिलों में भारी बारिश का अलर्टबिहार में अब तक 27 फीसदी कम बारिश हुईझारखंड के 6 जिलों में भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट
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