3000 श्रद्धालु, संभालने वाला कोई नहीं, भगदड़ में 9 मौतें: चश्मदीद बोले- मंदिर में दम घुटा, लोग गिरे तो भीड़ ...

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3000 श्रद्धालु, संभालने वाला कोई नहीं, भगदड़ में 9 मौतें: चश्मदीद बोले- मंदिर में दम घुटा, लोग गिरे तो भीड़ ...
Andhra Pradesh StampedeVenkateswara Swamy Temple Stampede VideoVenkateswara Swamy Stampede
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Andhra Pradesh Venkateswara Swamy Temple Stampede Eyewitness Story; Follow Srikakulam Mandir Case, Crowd Management, Andhra Police Latest News, Ground Report On Dainik Bhaskar.

चश्मदीद बोले- मंदिर में दम घुटा, लोग गिरे तो भीड़ कुचलकर निकलती रही‘सुबह के 10 बजे थे। उस दिन एकादशी थी, इसलिए मैं परिवार के साथ भगवान वेंकटेश्वर के दर्शन करने काशीबुग्गा गई थी। वहां इतनी भीड़ थी कि हम एक घंटे तक लाइन में लगे रहे, तब मुख्य द्वार तक पहुंच पाए। मंदिर में अंदर जाने और बाहर निकलने का एक ही रास्ता था। वो‘मंदिर की सीढ़ियों पर ही 1000 से ज्यादा लोग थे, लेकिन कोई पुलिस, कोई सिक्योरिटी गार्ड नहीं था। गर्भगृह तक जाने वाले रास्ते पर भीड़ इतनी बढ़ गई कि लोहे की रेलिंग टूट गई। महिलाएं और बच्चे उसका सपोर्ट लेकर खड़े थे, वे 10 फीट नीचे गिर गए।' 'चीख-पुकार मच गई। लोग एक-दूसरे पर गिर रहे थे, लेकिन उन्हें बचाने वाला कोई नहीं था। अगर बाहर निकलने के लिए दूसरा रास्ता होता या पुलिस होती, तो इतना बड़ा हादसा नहीं होता।’ 64 साल की येलाप्रगदा लक्ष्मी आंध्रप्रदेश में काशीबुग्गा के वेंकटेश्वर मंदिर में एक नवंबर को हुई भगदड़ की चश्मदीद हैं। एकादशी की वजह से मंदिर परिसर में तीन हजार से ज्यादा लोग थे। लक्ष्मी उस वक्त उन्हीं सीढ़ियों पर थीं, जहां रेलिंग टूटी। इस हादसे में 9 लोगों की मौत हो गई। 15 से ज्यादा लोग अब भी हॉस्पिटल में हैं।आंध्र प्रदेश के CM चंद्रबाबू नायडू ने घटना की हाईलेवल जांच और मरने वालों के परिवार को 15 लाख रुपए की मदद देने का ऐलान किया है। मंदिर के मुख्य पुजारी हरिमुकुंद पांडा पर गैर-इरादतन हत्या का केस दर्ज किया गया है, लेकिन क्या ये हादसा रोका जा सकता था, ये सवाल अभी बाकी है।पुलिस जांच में अब तक क्या सामने आया?‘आंखों के सामने लोगों का दम घुटते देखा, जो गिरा, कुचल गया’ काशीबुग्गा मंदिर को छोटा तिरुपति माना जाता हैं। तिरुपति बालाजी मंदिर यहां से करीब एक हजार किमी दूर है, इसलिए ज्यादातर लोग वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर में ही पूजा करने जाते हैं। यहां हर शनिवार को विशेष पूजा और भंडारा होता है। एक नवंबर को शनिवार के साथ एकादशी भी थी। काशीबुग्गा मंदिर में मची भगदड़ का शिकार ज्यादातर महिलाएं और बच्चे हुए। मंदिर सुबह 8 बजे खुला, तभी से श्रद्धालुओं की भीड़ जुटनी शुरू हो गई। भगदड़ के वक्त मंदिर में मौजूद येलाप्रगदा लक्ष्मी मंदिर की सीढ़ियों पर लाइन में खड़े होकर दर्शन का इंतजार कर रही थीं। तभी ये हादसा हो गया। लक्ष्मी बताती हैं, ‘रास्ते में लगी लोहे की रेलिंग लोगों का वजन नहीं सह पाई और टूटकर गिर गई। रेलिंग जमीन से करीब 8 से 10 फीट ऊंची थी। लोग नीचे गिरने लगे। मैंने अपने सामने लोगों का दम घुटते देखा। उस संकरी गली में हवा तक नहीं थी। रास्ते में जो भी गिरा, वो फिर उठ नहीं पाया। लोग बाहर निकलने के चक्कर में दूसरों को कुचलते हुए निकलने लगे।’ भीड़ के दबाव में सीढ़ियों पर लगी रैलिंग टूट गई। चश्मदीदों के मुताबिक, इसी से लोग नीचे गिर गए और हालात काबू से बाहर चले गए। लक्ष्मी के मुताबिक, अफरा-तफरी की वजह से लोगों को कंट्रोल करना मुश्किल हो रहा था। मैं और मेरी बहन भीड़ से बचकर मंदिर के पिछले हिस्से की तरफ चले गए। इससे हमारी जान बच गई। वे बताती हैं, ‘इतना बड़ा हादसा होने के बाद भी पुलिस नहीं आई, तो वहां मौजूद लोगों ने एंबुलेंस के लिए फोन किया। इसके कुछ देर बाद पुलिस भी आ गई। पुलिसवालों ने मंदिर से लोगों को निकलना शुरू किया। पता चला कि सीढ़ियों पर भी कुछ बुजुर्ग बेहोश पड़े हैं। उन्हें तुरंत अस्पताल भेजा गया।’वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर की देखरेख 94 साल के हरिमुकुंद पांडा करते हैं। हादसे के बाद आंध्रप्रदेश पुलिस ने उन पर गैर-इरादतन हत्या का केस दर्ज किया है। मंदिर प्रशासन के 2 और लोगों को हिरासत में लिया गया है। हादसे के बारे में हरिमुकुंद पांडा बताते हैं, ‘मैं हर दिन सुबह 8 बजे मंदिर के दरवाजे खोलता हूं, ताकि भक्त आकर भगवान के दर्शन कर सकें। एकादशी पर जैसे ही कपाट खुले, उम्मीद से बहुत ज्यादा लोग आ गए। इससे भीड़ को संभाल पाना मुश्किल हो गया। हमने सोचा नहीं था कि इतने भक्त आ जाएंगे। भगवान वेंकटेश्वर स्वामी मरने वालों की आत्मा को शांति दें।’हरिमुकुंद पांडा के पास श्रीकाकुलम जिले में 12 एकड़ खेत है। इसमें नारियल के पेड़ लगे हैं। उन्होंने खेत में ही मंदिर बनवाया है। मंदिर बनने के पीछे 13 साल पहले तिरुमला तिरुपति मंदिर में हुई एक घटना है। काशीबुग्गा में रहने वाले हरिमुकुंद पांडा तब 82 साल के थे। वे तिरुमला दर्शन के लिए गए थे। कई घंटे लाइन में खड़े रहने के बाद दर्शन के लिए पहुंचे, तो सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें धक्का देकर किनारे कर दिया। पांडा ने अपनी उम्र का हवाला देकर गुजारिश की, लेकिन गार्ड ने उनकी बात नहीं सुनी। पांडा को बुरा लगा। उन्होंने ठान लिया कि वे तिरुपति बालाजी की तरह मंदिर बनाएंगे, जहां लोग भगवान वेंकटेश्वर स्वामी के दर्शन कर सकें। उन्होंने 12 साल में करीब 10 करोड़ रुपए की लागत से काशीबुग्गा में मंदिर बनाया। वेंकटेश्वर मंदिर के मुख्य गर्भगृह में श्री वेंकटेश्वर स्वामी से मिलती हुई मूर्ति स्थापित की गई है। मंदिर में नवग्रह देवताओं के साथ-साथ दूसरे देवी-देवताओं की भी मूर्तियां हैं।भगदड़ के बाद लोगों की मदद के लिए सबसे पहले पहुंचने वालों में पलासा की MLA गौथु सीरीशा थीं। हमने उनसे फोन पर बात की। सीरीशा ने बताया कि वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर निजी मैनेजमेंट के तहत चल रहा था। इसे सिर्फ 4 महीने पहले दर्शन के लिए खोला गया था। सीरीशा कहती हैं, ‘मंदिर के मालिक पांडा बुजुर्ग हैं। उन्हें अंदाजा नहीं था कि इतनी बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंच जाएंगे। काशीबुग्गा मंदिर कुछ महीनों में ही फेमस हुआ है। जान गंवाने वाले कई भक्त पहली बार मंदिर आए थे।’ ‘हादसे के बाद मंदिर को फिलहाल बंद कर दिया गया है। घटना में 15 बच्चे और 5 महिलाएं गंभीर घायल हैं। घायलों को विशाखापट्टनम और लोकल हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है।’काशीबुग्गा मंदिर में हुई भगदड़ मामले की जांच श्रीकाकुलम के SP केवी महेश्वर रेड्डी कर रहे हैं। वे मंदिर प्रशासन की लापरवाही को हादसे की वजह मानते हैं। रेड्डी कहते हैं, ‘मंदिर में कोई भी एंट्री और एग्जिट गेट नहीं था। इसी वजह से हादसा हुआ। रेलिंग टूटने की वजह से मंदिर में पैनिक बढ़ गया।’ ‘मंदिर में एकादशी पर विशेष आयोजन के लिए मंदिर कमेटी ने पुलिस से न तो परमिशन ली, न ही इस बारे में पहले बताया गया। हादसा हुआ तब मंदिर परिसर में तीन हजार से ज्यादा लोग मौजूद थे। हमें जैसे ही मंदिर में भगदड़ की सूचना मिली, तुरंत पुलिस फोर्स को भेजा गया। तब तक बहुत देर हो चुकी थी। दैनिक भास्कर को एक वीडियो मिला है, जिसमें मंदिर के प्रशासक हरिमुकुंद पांडा पुलिस की बात को झूठा बता रहे हैं। उन्होंने मीडिया को बताया कि मंदिर समिति ने एक दिन पहले पुलिस को आयोजन की जानकारी दी थी। ये मंदिर के प्रशासक हरिमुकुंद पांडा हैं। मंदिर में भगदड़ के बाद इन पर गैर इरादतन हत्या का केस दर्ज किया गया है।आंध्रप्रदेश के शिक्षा-सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री और चंद्रबाबू नायडू के बेटे नारा लोकेश ने काशीबुग्गा मंदिर में मची भगदड़ में मारे गए लोगों के परिवार को 15 लाख रुपए की मदद देने का ऐलान किया है। गंभीर रूप से घायल हुए लोगों को सरकार 3 लाख रुपए देगी। 1 नवंबर की शाम नारा लोकेश मंदिर भी गए थे। उन्होंने अस्पताल में भर्ती लोगों से बात की। इस दौरान उन्होंने बताया कि भगदड़ में मरने वाले 9 लोगों में तेलुगु देशम पार्टी के 3 कार्यकर्ता भी थे। हम उनके परिवार को पार्टी की बीमा योजना से अलग 5 लाख रुपए देंगे।आंध्र प्रदेश के सीनियर जर्नलिस्ट मोहम्मद इलियास कहते हैं, ‘काशीबुग्गा भगदड़ सीधे तौर पर पुलिस का फेलियर है। मंदिर के प्रशासक पांडा ने साफ तौर पर कहा है कि उन्होंने एक दिन पहले लोकल पुलिस को एकादशी पर होने वाले आयोजन की जानकारी दी थी। बावजूद इसके मौके पर फोर्स तैनात नहीं थी।’ ‘ये मंदिर पहली मंजिल पर है। शनिवार को यहां 100 से 200 श्रद्धालु आते हैं। घटना वाले दिन 10 हजार से ज्यादा लोग पहुंच गए। इतना बड़ा क्राउड मैनेज करने के लिए मंदिर समिति के पास पुख्ता इंतजाम नहीं थे। वहां एक भी सिक्योरिटी गार्ड नहीं था। भक्तों को एक लाइन से दर्शन कराने के लिए बैरिकेडिंग तक नहीं की गई थीं। ये बड़ी चूक थी।’ ‘घटना के बाद सरकार चला रही TDP और विपक्षी पार्टी YSRCP के नेता एक दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं। ऐसा करने के बजाय सरकार अगर मंदिरों के लिए नए नियम लाए, जिसमें हर मंदिर समिति को लोकल पुलिस स्टेशन से जोड़ा जाए, तो ऐसी घटनाओं पर रोक लग सकती है।’दिल्ली में यमुना किनारे 17 मेन पॉइंट पर छठ पूजा के लिए मॉडल घाट बनाए गए। इनमें से एक वासुदेव घाट की तस्वीर वायरल हुई। यहां घाट के पास ही एक हिस्सा घेरकर छठ पूजा की अर्घ्य देने के लिए जगह बनाई गई। आम आदमी पार्टी ने आरोप लगाया कि 'नकली यमुना' बनाकर BJP नदी को साफ करने का दावा कर रही है, इसमें गंगा जी का फिल्टर्ड पानी डाला गया।बेटी की शादी से पहले फसल बर्बाद, किसान का सुसाइडकल से फिर बारिश का अलर्ट, 7 डिग्री बढ़ा तापमानपंजाब में रात के तापमान में गिरावट, ठंड बढ़ेगीलखनऊ की हवा हुई खराबउत्तराखंड में पहाड़ी इलाकों में बादल छाए.

चश्मदीद बोले- मंदिर में दम घुटा, लोग गिरे तो भीड़ कुचलकर निकलती रही‘सुबह के 10 बजे थे। उस दिन एकादशी थी, इसलिए मैं परिवार के साथ भगवान वेंकटेश्वर के दर्शन करने काशीबुग्गा गई थी। वहां इतनी भीड़ थी कि हम एक घंटे तक लाइन में लगे रहे, तब मुख्य द्वार तक पहुंच पाए। मंदिर में अंदर जाने और बाहर निकलने का एक ही रास्ता था। वो‘मंदिर की सीढ़ियों पर ही 1000 से ज्यादा लोग थे, लेकिन कोई पुलिस, कोई सिक्योरिटी गार्ड नहीं था। गर्भगृह तक जाने वाले रास्ते पर भीड़ इतनी बढ़ गई कि लोहे की रेलिंग टूट गई। महिलाएं और बच्चे उसका सपोर्ट लेकर खड़े थे, वे 10 फीट नीचे गिर गए।' 'चीख-पुकार मच गई। लोग एक-दूसरे पर गिर रहे थे, लेकिन उन्हें बचाने वाला कोई नहीं था। अगर बाहर निकलने के लिए दूसरा रास्ता होता या पुलिस होती, तो इतना बड़ा हादसा नहीं होता।’ 64 साल की येलाप्रगदा लक्ष्मी आंध्रप्रदेश में काशीबुग्गा के वेंकटेश्वर मंदिर में एक नवंबर को हुई भगदड़ की चश्मदीद हैं। एकादशी की वजह से मंदिर परिसर में तीन हजार से ज्यादा लोग थे। लक्ष्मी उस वक्त उन्हीं सीढ़ियों पर थीं, जहां रेलिंग टूटी। इस हादसे में 9 लोगों की मौत हो गई। 15 से ज्यादा लोग अब भी हॉस्पिटल में हैं।आंध्र प्रदेश के CM चंद्रबाबू नायडू ने घटना की हाईलेवल जांच और मरने वालों के परिवार को 15 लाख रुपए की मदद देने का ऐलान किया है। मंदिर के मुख्य पुजारी हरिमुकुंद पांडा पर गैर-इरादतन हत्या का केस दर्ज किया गया है, लेकिन क्या ये हादसा रोका जा सकता था, ये सवाल अभी बाकी है।पुलिस जांच में अब तक क्या सामने आया?‘आंखों के सामने लोगों का दम घुटते देखा, जो गिरा, कुचल गया’ काशीबुग्गा मंदिर को छोटा तिरुपति माना जाता हैं। तिरुपति बालाजी मंदिर यहां से करीब एक हजार किमी दूर है, इसलिए ज्यादातर लोग वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर में ही पूजा करने जाते हैं। यहां हर शनिवार को विशेष पूजा और भंडारा होता है। एक नवंबर को शनिवार के साथ एकादशी भी थी। काशीबुग्गा मंदिर में मची भगदड़ का शिकार ज्यादातर महिलाएं और बच्चे हुए। मंदिर सुबह 8 बजे खुला, तभी से श्रद्धालुओं की भीड़ जुटनी शुरू हो गई। भगदड़ के वक्त मंदिर में मौजूद येलाप्रगदा लक्ष्मी मंदिर की सीढ़ियों पर लाइन में खड़े होकर दर्शन का इंतजार कर रही थीं। तभी ये हादसा हो गया। लक्ष्मी बताती हैं, ‘रास्ते में लगी लोहे की रेलिंग लोगों का वजन नहीं सह पाई और टूटकर गिर गई। रेलिंग जमीन से करीब 8 से 10 फीट ऊंची थी। लोग नीचे गिरने लगे। मैंने अपने सामने लोगों का दम घुटते देखा। उस संकरी गली में हवा तक नहीं थी। रास्ते में जो भी गिरा, वो फिर उठ नहीं पाया। लोग बाहर निकलने के चक्कर में दूसरों को कुचलते हुए निकलने लगे।’ भीड़ के दबाव में सीढ़ियों पर लगी रैलिंग टूट गई। चश्मदीदों के मुताबिक, इसी से लोग नीचे गिर गए और हालात काबू से बाहर चले गए। लक्ष्मी के मुताबिक, अफरा-तफरी की वजह से लोगों को कंट्रोल करना मुश्किल हो रहा था। मैं और मेरी बहन भीड़ से बचकर मंदिर के पिछले हिस्से की तरफ चले गए। इससे हमारी जान बच गई। वे बताती हैं, ‘इतना बड़ा हादसा होने के बाद भी पुलिस नहीं आई, तो वहां मौजूद लोगों ने एंबुलेंस के लिए फोन किया। इसके कुछ देर बाद पुलिस भी आ गई। पुलिसवालों ने मंदिर से लोगों को निकलना शुरू किया। पता चला कि सीढ़ियों पर भी कुछ बुजुर्ग बेहोश पड़े हैं। उन्हें तुरंत अस्पताल भेजा गया।’वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर की देखरेख 94 साल के हरिमुकुंद पांडा करते हैं। हादसे के बाद आंध्रप्रदेश पुलिस ने उन पर गैर-इरादतन हत्या का केस दर्ज किया है। मंदिर प्रशासन के 2 और लोगों को हिरासत में लिया गया है। हादसे के बारे में हरिमुकुंद पांडा बताते हैं, ‘मैं हर दिन सुबह 8 बजे मंदिर के दरवाजे खोलता हूं, ताकि भक्त आकर भगवान के दर्शन कर सकें। एकादशी पर जैसे ही कपाट खुले, उम्मीद से बहुत ज्यादा लोग आ गए। इससे भीड़ को संभाल पाना मुश्किल हो गया। हमने सोचा नहीं था कि इतने भक्त आ जाएंगे। भगवान वेंकटेश्वर स्वामी मरने वालों की आत्मा को शांति दें।’हरिमुकुंद पांडा के पास श्रीकाकुलम जिले में 12 एकड़ खेत है। इसमें नारियल के पेड़ लगे हैं। उन्होंने खेत में ही मंदिर बनवाया है। मंदिर बनने के पीछे 13 साल पहले तिरुमला तिरुपति मंदिर में हुई एक घटना है। काशीबुग्गा में रहने वाले हरिमुकुंद पांडा तब 82 साल के थे। वे तिरुमला दर्शन के लिए गए थे। कई घंटे लाइन में खड़े रहने के बाद दर्शन के लिए पहुंचे, तो सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें धक्का देकर किनारे कर दिया। पांडा ने अपनी उम्र का हवाला देकर गुजारिश की, लेकिन गार्ड ने उनकी बात नहीं सुनी। पांडा को बुरा लगा। उन्होंने ठान लिया कि वे तिरुपति बालाजी की तरह मंदिर बनाएंगे, जहां लोग भगवान वेंकटेश्वर स्वामी के दर्शन कर सकें। उन्होंने 12 साल में करीब 10 करोड़ रुपए की लागत से काशीबुग्गा में मंदिर बनाया। वेंकटेश्वर मंदिर के मुख्य गर्भगृह में श्री वेंकटेश्वर स्वामी से मिलती हुई मूर्ति स्थापित की गई है। मंदिर में नवग्रह देवताओं के साथ-साथ दूसरे देवी-देवताओं की भी मूर्तियां हैं।भगदड़ के बाद लोगों की मदद के लिए सबसे पहले पहुंचने वालों में पलासा की MLA गौथु सीरीशा थीं। हमने उनसे फोन पर बात की। सीरीशा ने बताया कि वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर निजी मैनेजमेंट के तहत चल रहा था। इसे सिर्फ 4 महीने पहले दर्शन के लिए खोला गया था। सीरीशा कहती हैं, ‘मंदिर के मालिक पांडा बुजुर्ग हैं। उन्हें अंदाजा नहीं था कि इतनी बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंच जाएंगे। काशीबुग्गा मंदिर कुछ महीनों में ही फेमस हुआ है। जान गंवाने वाले कई भक्त पहली बार मंदिर आए थे।’ ‘हादसे के बाद मंदिर को फिलहाल बंद कर दिया गया है। घटना में 15 बच्चे और 5 महिलाएं गंभीर घायल हैं। घायलों को विशाखापट्टनम और लोकल हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है।’काशीबुग्गा मंदिर में हुई भगदड़ मामले की जांच श्रीकाकुलम के SP केवी महेश्वर रेड्डी कर रहे हैं। वे मंदिर प्रशासन की लापरवाही को हादसे की वजह मानते हैं। रेड्डी कहते हैं, ‘मंदिर में कोई भी एंट्री और एग्जिट गेट नहीं था। इसी वजह से हादसा हुआ। रेलिंग टूटने की वजह से मंदिर में पैनिक बढ़ गया।’ ‘मंदिर में एकादशी पर विशेष आयोजन के लिए मंदिर कमेटी ने पुलिस से न तो परमिशन ली, न ही इस बारे में पहले बताया गया। हादसा हुआ तब मंदिर परिसर में तीन हजार से ज्यादा लोग मौजूद थे। हमें जैसे ही मंदिर में भगदड़ की सूचना मिली, तुरंत पुलिस फोर्स को भेजा गया। तब तक बहुत देर हो चुकी थी। दैनिक भास्कर को एक वीडियो मिला है, जिसमें मंदिर के प्रशासक हरिमुकुंद पांडा पुलिस की बात को झूठा बता रहे हैं। उन्होंने मीडिया को बताया कि मंदिर समिति ने एक दिन पहले पुलिस को आयोजन की जानकारी दी थी। ये मंदिर के प्रशासक हरिमुकुंद पांडा हैं। मंदिर में भगदड़ के बाद इन पर गैर इरादतन हत्या का केस दर्ज किया गया है।आंध्रप्रदेश के शिक्षा-सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री और चंद्रबाबू नायडू के बेटे नारा लोकेश ने काशीबुग्गा मंदिर में मची भगदड़ में मारे गए लोगों के परिवार को 15 लाख रुपए की मदद देने का ऐलान किया है। गंभीर रूप से घायल हुए लोगों को सरकार 3 लाख रुपए देगी। 1 नवंबर की शाम नारा लोकेश मंदिर भी गए थे। उन्होंने अस्पताल में भर्ती लोगों से बात की। इस दौरान उन्होंने बताया कि भगदड़ में मरने वाले 9 लोगों में तेलुगु देशम पार्टी के 3 कार्यकर्ता भी थे। हम उनके परिवार को पार्टी की बीमा योजना से अलग 5 लाख रुपए देंगे।आंध्र प्रदेश के सीनियर जर्नलिस्ट मोहम्मद इलियास कहते हैं, ‘काशीबुग्गा भगदड़ सीधे तौर पर पुलिस का फेलियर है। मंदिर के प्रशासक पांडा ने साफ तौर पर कहा है कि उन्होंने एक दिन पहले लोकल पुलिस को एकादशी पर होने वाले आयोजन की जानकारी दी थी। बावजूद इसके मौके पर फोर्स तैनात नहीं थी।’ ‘ये मंदिर पहली मंजिल पर है। शनिवार को यहां 100 से 200 श्रद्धालु आते हैं। घटना वाले दिन 10 हजार से ज्यादा लोग पहुंच गए। इतना बड़ा क्राउड मैनेज करने के लिए मंदिर समिति के पास पुख्ता इंतजाम नहीं थे। वहां एक भी सिक्योरिटी गार्ड नहीं था। भक्तों को एक लाइन से दर्शन कराने के लिए बैरिकेडिंग तक नहीं की गई थीं। ये बड़ी चूक थी।’ ‘घटना के बाद सरकार चला रही TDP और विपक्षी पार्टी YSRCP के नेता एक दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं। ऐसा करने के बजाय सरकार अगर मंदिरों के लिए नए नियम लाए, जिसमें हर मंदिर समिति को लोकल पुलिस स्टेशन से जोड़ा जाए, तो ऐसी घटनाओं पर रोक लग सकती है।’दिल्ली में यमुना किनारे 17 मेन पॉइंट पर छठ पूजा के लिए मॉडल घाट बनाए गए। इनमें से एक वासुदेव घाट की तस्वीर वायरल हुई। यहां घाट के पास ही एक हिस्सा घेरकर छठ पूजा की अर्घ्य देने के लिए जगह बनाई गई। आम आदमी पार्टी ने आरोप लगाया कि 'नकली यमुना' बनाकर BJP नदी को साफ करने का दावा कर रही है, इसमें गंगा जी का फिल्टर्ड पानी डाला गया।बेटी की शादी से पहले फसल बर्बाद, किसान का सुसाइडकल से फिर बारिश का अलर्ट, 7 डिग्री बढ़ा तापमानपंजाब में रात के तापमान में गिरावट, ठंड बढ़ेगीलखनऊ की हवा हुई खराबउत्तराखंड में पहाड़ी इलाकों में बादल छाए

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