Ocean Circulation: वैज्ञानिकों ने एक ऐसे माइक्रोस्कोपिक फॉसिल की खोज की है, जो आज से 3-4 मिलियन सालों पहले मरीन सर्कुलेशन के बारे में पता लगा सकता है.
Science News In Hindi: नॉर्थ जापान में एक माइक्रोस्कोपिक फॉसिल जीवों की खोज की गई है, जिससे यह पता चलता है कि लाखों साल पहले उत्तरी प्रशांत महासागर में वॉटर फ्लो किस तरह से होता था. खासतौर पर तब जब उस दौरान आज के मुकाबले धरती की जलवायु काफी गर्म थी.
यह खोज शुरुआती प्लायोसीन युग के सेडिमेंट्स से प्राप्त हुई है, जो लगभग 3- 4 मिलियन साल पहले का समय है. इस समय की स्टडी भविष्य की जलवायु परिस्थितियों के लिए नेचुरल पैरेलल के तौर पर की जाती है. इंटरकनेक्टेड था मरीन सर्कुलेशन? बता दें कि ये माइक्रोस्कोपिक जीव ऑस्ट्राकोड्स की प्रजाति से संबंधित है. इसके कठोर शेल में छोटे झींगा जैसे क्रस्टेशियन लिपटे होते हैं, जो थोड़े बहुत केकड़े की तरह दिखती है, हालांकि इसे नंगी आंखों से देखना थोड़ा मुश्किल है. ऑस्ट्राकोड वैज्ञानिकों के लिए शक्तिशाली टूल है क्योंकि हर प्रजाति अनोखे वॉटर टेंपरेचर और गहराई में पनपती है. प्राचीन चट्टानों की परतों में उनकी उपस्थिति ने रिसर्चर्स को अतीत के समुद्री वातावरण को बड़ी सटीकता के साथ रेनोवेट करने की अनुमति दी. उत्तरी जापान में वुडेलटिया की खोज से पता चलता है कि उत्तरी प्रशांत महासागर में मरीन सर्कुलेशन पहले की तुलना में कहीं अधिक इंटरकनेक्टेड था, जिससे छोटे समुद्री जीवों को विशाल दूरी तक फैलने की अनुमति मिली. ये भी पढ़ें- धरती से 50000 किमी ऊपर स्पेस पार्टिकल से टकराया सैटेलाइट, धरा का धरा रह गया स्पेन का अंतरिक्ष मिशन एक दूसरे से जुड़े थे सी रूट? कुमामोटो यूनिवर्सिटी के रिसर्चर्स ने जापान के होक्काइडो में ताकिकावा फॉर्मेशन में इन फॉसिल की खोज की.उन्होंने पहले से अज्ञात एक वंश और प्रजाति की पहचान की, जिसका नाम वुडेलटिया सोरापुचिएन्सिस रखा गया. वैज्ञानिकों का ध्यान इस बात पर गया कि उत्तरी प्रशांत महासागर के दूर वाले हिस्सों में ऑस्ट्राकोड प्रजातियों के अवशेष पाए गए हैं, जिससे पता चलता है कि ये क्षेत्र कभी एक्टिव सी रूट से जुड़े हुए थे. बता दें कि अर्ली प्लियोसीन काल के दौरान, वैश्विक तापमान, वायुमंडलीय कार्बन डाइऑक्साइड का लेवल और समुद्र का स्तर आज के मुकाबले ज्यादा था. ये भी पढ़ें- धरती की सांसें चुरा रहा है चांद! चुंबकीय टेल से होकर चांद तक पहुंच रहा पृथ्वी का वातावरण, NASA के हाथ लगा चौंकाने वाला सबूत वैज्ञानिकों ने क्या पता लगाया? नॉर्थ जापान में वुडेलटिया की खोज से पता चलता है कि उत्तरी प्रशांत महासागर में मरीन सर्कुलेशन पहले के मुकाबले काफी अच्छे से जुड़ा हुआ था, जिससे छोटे समुद्री जीव आसानी से फैल सकते थे. इस समय के फॉसिल यह सबूत दे सकते हैं कि किस तरह से ग्लोबल वॉर्मिंग ने ओशन सर्कुलेशन, मरीन इकोसिस्टम और लॉन्ग टर्म क्लाइमेट स्टेबिलीट को प्रभावित किया.
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