पहले मां-बाप का कत्ल किया। फिर लाश के हाथ पैर तोड़े और इसके बाद लाश को सूटकेस में रख कर नाले में फेंक दिया। itsparvezsagar
दिल्ली में एक बुजुर्ग दंपत्ति अचानक गायब हो जाते हैं. घर की इकलौती बेटी उन्हें हर जगह ढूंढती है. पर तमाम कोशिश के बाद भी जब दोनों का कोई सुराग नहीं मिलता तो कुछ दिन बाद वो पुलिस में जाकर अपने मां-बाप की गुमशुदगी की रिपोर्ट लिखा देती है.
पर फिर भी दोनों का कोई पता नहीं चलता. कई दिन और बीत जाते हैं. फिर तभी एक रोज़ एक नाले में एक सूटकेस तैरता हुआ नज़र आता है. लोग पुलिस को खबर देते हैं. पुलिस सूटकेस खोलती है. सूटकेस में मां बंद थी. इसके बाद उसी नाले से एक दूसरा सूटकेस मिलता है. दूसरे सूटकेस में बाप बंद था. वो लड़की बेफिक्र अपने ब्वॉयफ्रेंड और पुलिस के साथ साथ घूम रही थी. अपने माता-पिता के कातिल को तलाश रही थी. लेकिन उसकी हकीकत जान लीजिए. वो खुद ही अपने मां-बाप की कातिल थी. एक ऐसी कातिल, जो पहले मां-बाप का कत्ल करती है. फिर लाश के हाथ पैर तोड़ती है. इसके बाद लाश को सूटकेस में रखती है और फिर सूटकेस नाले में ले जाकर फेंक देती है. जब आज तक के रिपोर्टर ने कातिल बेटी से पूछा कि ऐसा क्यों किया तो वो बताती है कि पर्सनल इश्यू थे कुछ. जानना नहीं चाहेंगे कि अपने मां-बाप से इनके पर्सनल इश्यू क्या थे. तो सुनिए. ये शादीशुदा थी. ब्वॉयफ्रेंड होने की वजह से पति से बनी नहीं. ससुराल छोड़ दिया. मां-बाप के साथ रहने लगीं. फिर नज़र मां-बाप के मकान पर गड़ गई. वो इनकी ज़िद के आगे झुके नहीं. लिहाज़ा इसने बारी बारी से उन दोनों को मार डाला.सोनिया- मेरे पास इसका आनसर नहीं है कोई भी. अब आइये जानते हैं.. कि ऐसी क्या फैमिली प्रॉब्लम थी जो मां-बाप को मार डालने के बाद भी ये बता नहीं पा रही है.. तो सुनिए इसके पापों की ये कहानी शुरू होती है इसी महीने की आठ तारीख से. दिल्ली के नांगलोई इलाक़े में बहते इस नाले में 8 मार्च की शाम को लोगों की नज़र एक अजीब सी चीज़ पर पड़ी. वो महरून रंग का बड़ा सा सूटकेस था, जो बंद था लेकिन नाले में आधा डूबा आधा बाहर था. नाले में इतना बड़ा सूटकेस पड़ा देख कर वहां से गुज़र रहे किसी मुसाफ़िर को इस पर शक हुआ और उसने पुलिस को इत्तिला दी. फ़ौरन दिल्ली पुलिस मौका-ए-वारदात पर थी और उसने सफ़ाईकर्मियों की मदद से सूटकेस को बाहर निकलवाया. लेकिन पुलिस की हैरानी का तब कोई ठिकाना नहीं रहा, जब इस भारी-भरकम सूटकेस को खोलने पर उसमें एक बुजुर्ग महिला की लाश मिली. लाश के हाथ-पांव तोड़ कर उसे जिस तरह से सूटकेस के अंदर ठूंसा गया था, उसे देखकर से साफ़ था कि क़ातिलों ने अपने शिकार को कितनी दर्दनाक मौत दी होगी. बहरहाल, पुलिस ने लाश की शिनाख्त करने की शुरुआत की और कुछ ही घंटों की मशक्कत के बाद पुलिस को इसमें कामयाबी भी मिल गई. क्योंकि जो महिला गायब हुई थी, उसकी बेटी सोनिया ने लाश मिलने से ठीक चार दिन पहले यानी 4 मार्च को पश्चिम विहार थाने में अपनी मां की गुमशुदगी की रिपोर्ट लिखवाई थी. वो महिला थी जागीर कौर. सोनिया ने तो अपनी मां जागीर कौर के साथ-साथ पिता गुरमीत सिंह की गुमशुदगी की रिपोर्ट भी थाने में लिखवाई थी. ऐसे में अब पुलिस को लग रहा था की कहीं क़ातिलों ने जागीर कौर की तरह गुरमीत सिंह की जान भी ना ले ली हो? पुलिस को ये भी लग रहा था कि कहीं गुरमीत सिंह ही तो अपनी बीवी का कत्ल कर कहीं फ़रार नहीं हो गया. लेकिन किसी नतीजे पर पहुंचने से पहले पुलिस तसल्ली करना चाहती थी. और इसी कोशिश में ये सूटकेस भी ठीक पहली सूटकेस की तरह ही भारी-भरकम था. अब बग़ैर देर किए पुलिस ने दूसरा सूटकेस खुलवाया और सितम देखिए कि इस सूटकेस से जागीर कौर के बुजुर्ग पति गुरमीत सिंह बाहर निकले. पर मुर्दा. अब सबसे बड़ा सवाल यही था कि आख़िर दोनों बुजुर्गों की जान किसने ली और क्यों? आख़िर इनसे किसी की क्या दुश्मनी थी? क्या क़त्ल लूटपाट की वजह से हुआ या फिर किसी रंजिश के चलते? सवाल कई थे और पुलिस को इन्हीं सवालों के जवाब ढूंढ कर क़ातिल तक पहुंचना था. अब पुलिस ने मामले की तफ्तीश शुरू की. उसे एक साथ कई एंगल पर काम करना था, लेकिन पहला सुराग़ भी परिवार से ही मिलने की उम्मीद थी. पुलिस ने इस कोशिश में सबसे पहले बुजुर्ग जागीर कौर और गुरमीत सिंह के साथ रह रही उनकी बेटी सोनिया से पूछताछ शुरू की. सोनिया ने दोनों की गुमशुदगी की रिपोर्ट पश्चिम विहार थाने में 4 मार्च को दर्ज करवाई थी, जबकि पड़ोसियों और रिश्तेदारों से पूछताछ करने पर पता चला कि दोनों उससे कई रोज़ पहले से ही नजर नहीं आ रहे थे. ऐसे में पुलिस को उनकी बेटी सोनिया पर पहला शक हुआ. उसके पास इस सवाल का कोई पुख्ता जवाब नहीं था कि आख़िर उसने गुमशुदगी की रिपोर्ट लिखवाने में इतनी देरी क्यों की? जबकि उसके दूसरे रिश्तेदार बता रहे थे कि जागीर कौर और गुरमीत सिंह को आख़िरी बार 20-21 फ़रवरी के आस-पास देखा गया था. अब पुलिस ने सोनिया पर अपना शिकंजा कसना शुरू कर दिया. पुलिस ने सोनिया से कई सवाल पूछे. सोनिया ने उन सवालों के जवाब तो दिये, मगर रुक-रुक कर... अटक-अटक कर... और तो और सोनिया इन दिनों में जहां-जहां अपनी मौजूदगी बता रही थी, उसके मोबाइल फ़ोन की लोकेशन से उसकी बात से मैच नहीं कर रही थी. यानी सोनिया अपने वहां होने और नहीं होने को लेकर भी झूठ बोल रही थी. इसी बीच पुलिस ने एक और अजीब इत्तेफ़ाक पर ग़ौर किया. पुलिस ने देखा कि सोनिया का ब्वॉयफ्रेंड प्रिंस और उसके दो दोस्त 21 फरवरी और 2 मार्च के रोज़ उसके घर आए थे और इन्हीं दो दिनों में जागीर कौर और गुरमीत सिंह आख़िरी बार ज़िंदा देखे गए थे. गुरमीत सिंह का तो 21 फरवरी के बाद से ही कोई पता नहीं था, जबकि पंजाब गई जागीर कौर एक मार्च को दिल्ली लौटी थी और 2 मार्च को रहस्यमयी तरीक़े से गायब हो गई. ऐसे में ये सवाल लाज़िमी था कि आख़िर सोनिया के ब्वॉयफ्रेंड प्रिंस की उसके घर मौजूदगी से दोनों बुजुर्गों के गायब होने का ऐसा क्या रिश्ता था? तो पुलिस ने जब इस सवाल के साथ सोनिया का सामना किया, तो सोनिया एक बार फिर लड़खड़ाने लगी. और आख़िरकार उसे मानना ही पड़ा कि ये वही है जिसने अपने ब्वॉयफ्रेंड और उसके साथियों के साथ मिलकर अपने बुजुर्ग माता-पिता की जान ली. सोनिया का ये खुलासा किसी को भी दहलाने के लिए काफ़ी था. वो इसलिए कि आख़िर कोई सगी बेटी अपने ही मां-बाप की जान इतनी वहशियाना तरीक़े से कैसे ले सकती है? और क्यों? तो पुलिस को अब इन सवालों के जवाब जानने थे. लिहाज़ा अब पुलिस पूछ रही थी और सोनिया बता रही थी. सोनिया ने बताया कि उसकी मां जागीर कौर के किसी काम से पंजाब चले जाने के बाद उसके पिता गुरमीत सिंह घर में अकेले थे. वो अपने पिता से छुटकारा पाना चाहती थी. उसने 21 फ़रवरी को मौका देख कर अपने पिता की चाय में नशीली गोलियां डाल दीं. चाय पीते ही वो बेहोश हो गए. चूंकि मौत की साज़िश पहले से तैयार थी. इशारा मिलते ही उसका ब्वॉयफ्रेंड प्रिंस अपने दो साथियों के साथ उनके घर पहुंचा और सबने बेहोशी में ही गुरमीत सिंह का गला घोंट कर लाश सूटकेस में भरी और उसे नाले में निपटा दिया. लेकिन अभी काम आधा ही हुआ था. क्योंकि गुरमीत सिंह की बीवी जागीर कौर अभी ज़िंदा थी. बुजुर्ग गुरमीत सिंह का क़त्ल हो चुका था. लाश भी निपटाई जा चुकी थी. करीब हफ्ते भर का वक़्त भी गुज़र गया और किसी को कानों-कान खबर तक नहीं हुई. ऐसे में सोनिया, उसके ब्वॉयफ्रेंड प्रिंस और बाकी क़ातिलों का हौसला सातवें आसमान पर था. उन्हें लगने लगा था कि अब इसी तरह वो अपनी मां जागीर कौर को भी ठिकाने लगा देंगे और किसी को पता नहीं चलेगा. काफ़ी हद तक ऐसा हुआ भी. जागीर कौर एक मार्च को पंजाब से वापस आ गई. और अगले ही दिन यानी 2 मार्च को सोनिया ने अपनी मां को बेहोशी की दवा मिला कर चाय पिलाई. फिर बेहोश होते ही अपने ब्वॉयफ्रेंड और उसके साथियों की मदद से उनकी भी गला घोंट कर हत्या कर दी. क़ातिलों ने ठीक गुरमीत सिंह की तरह ही उनकी लाश भी एक सूटकेस में भरी और उसे नांगलोई के नाले में में फेंक आए. अब काम पूरा हो चुका था. दस दिन के अंदर मां-बाप को ठिकाने लगा कर सोनिया राहत महसूस कर रही थी. लेकिन यहां क़ातिलों से कई गलतियां हुई. पहली ग़लती तो यही हुई कि वो गुरमीत सिंह की लाश की तरह जागीर कौर की लाश गहरे पानी में फेंकना भूल गए और वो सूटकेस दूर से नज़र आ रही थी. और सूटकेस देख कर किसी ने पुलिस को ख़बर दे दी. दूसरी ग़लती ये हुई कि सोनिया ने अपने मां-बाप की गुमशुदगी की रिपोर्ट लिखवाने में देर कर दी. जागीर कौर की लाश मिलते ही पहला शक सोनिया पर हुआ. इसके बाद तफ्तीश की रौशनी में बाकी के झूठ तो धीरे-धीरे बेनक़ाब हो ही गए. सोनिया ने पुलिस को बताया कि मां बाप की जान लेने के पीछे पर्सनल डिस्प्यूट था. वो मेरा खर्चा नहीं उठाते थे. मगर, सच सिर्फ़ इतना नहीं है, जितना ये बेटी इस वक्त बता रही है, बल्कि पुलिस की मानें तो ये बेटी अपने मां-बाप की लाखों की प्रॉपर्टी हड़पना चाहती थी. वो इस लालच में इतनी अंधी हो चुकी थी कि उसे मां-बाप की जीना गवारा ही नहीं था.
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