'H-1B के बिना नहीं होती सिलिकॉन वैली', किसने कही ये बात? बताया बगैर विदेशी वर्कर्स क्या होंगे नुकसान

Michio Kaku H-1B Visa Statement News

'H-1B के बिना नहीं होती सिलिकॉन वैली', किसने कही ये बात? बताया बगैर विदेशी वर्कर्स क्या होंगे नुकसान
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US H-1B Visa: अमेरिका में H-1B वीजा को लेकर शुरू हुआ विवाद तब और भी ज्यादा बढ़ गया, जब इसकी फीस बढ़ाकर 1 लाख डॉलर (लगभग 88 लाख रुपये) कर दी गई।

Michio Kaku on H-1B Visa: अमेरिका में टेक से लेकर हेल्थकेयर सेक्टर तक में जॉब के लिए सबसे आसान रास्ता H-1B वीजा है। हर साल भारतीयों के साथ दर्जनों देशों के हजारों वर्कर्स अमेरिका में इसी वीजा के जरिए जॉब के लिए जाते हैं। हालांकि, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले हफ्ते H-1B वीजा की फीस बढ़ाकर 1 लाख डॉलर कर दी। इस वजह से अब अमेरिकी कंपनियों के लिए विदेशी वर्कर्स को हायर करना महंगा हो जाएगा। ट्रंप के फैसले ने हजारों लोगों के अरमान तोड़े हैं।हालांकि, H-1B वीजा की फीस बढ़ने के बाद कई लोगों ने ट्रंप के फैसले की आलोचना की है। उनका तर्क है कि फीस बढ़ने से देश में टैलेंट की कमी हो जाएगी। सिर्फ इतना ही नहीं, बल्कि अमेरिका के साइंस और टेक्नोलॉजी फील्ड को भी इस फैसले से नुकसान पहुंचेगा। इस बीच अमेरिका के मशहूर फिजिसिस्ट या कहें भौतिक विज्ञानी मिचियो काकू का एक पुराना वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इसमें उन्होंने कहा था कि बिना H-1B वीजा के अमेरिका में कोई सिलिकॉन वैली नहीं होगी। बिना H-1B वीजा नहीं होती सिलिकॉन वैली: मिचियो काकूमिचियो काकू का वायरल हो रहा वीडियो ट्रंप के राष्ट्रपति बनने से पहले का है। इसमें मिचियो कहते हैं कि H-1B वीजा एक जीनियस वीजा है, जो अमेरिका का सीक्रेट हथियार भी है। वह कहते हैं, 'H-1B वीजा के बिना इस देश का वैज्ञानिक तंत्र पूरी तरह से ध्वस्त हो जाएगा। गूगल को भूल जाइए, सिलिकॉन वैली को भूल जाइए। H-1B वीजा के बिना सिलिकॉन वैली का कोई अस्तित्व ही नहीं होता।' उनकी बात सही भी है, क्योंकि अब अमेरिका को टेक सेक्टर में चीन-भारत जैसे देशों के कड़ी टक्कर मिल रही है। अमेरिकी फिजिसिस्ट ने आगे बताया कि विदेश में पैदा हुए वैज्ञानिक ना सिर्फ इनोवेशन के लिए जरूरी हैं, बल्कि वे पूरी इंडस्ट्री तैयार करते हैं। उन्होंने कहा, 'आपको मालूम चलता है कि अमेरिका में 50 फीसदी पीएचडी उम्मीदवार विदेश में पैदा हुए थे। मेरे सिस्टम में ही, जो अमेरिका का सबसे बड़ा है, 100 फीसदी पीएचडी छात्र विदेश में पैदा हुए थे।' ये दिखाता है कि अमेरिका विदेशियों के भरोसे ही चल रहा है। मिचियो काकू का वीडियो देखने के लिए यहां क्लिक करें। अमेरिका के इनोवेशन पर पड़ेगा असरमिचियो काकू ने चेतावनी दी कि H-1B वीजा पर प्रतिबंध लगाने से अमेरिका की साइंटिफिक लीडरशिप प्रभावित होगी। उन्होंने कहा, 'अमेरिका एक चुम्बक की तरह है जो दुनिया के सारे टैलेंट को चूस रहा है। लेकिन अब टैलेंट वापस जा रहा है। वे चीन वापस जा रहे हैं, वे भारत वापस जा रहे हैं।' काकू ने आगे कहा कि अब आप देखते हैं कि भारत में सिलिकॉन वैली उभर रही है, चीन में भी ऐसा ही हो रहा है। ये सब टैलेंट के वापस लौटने की वजह से हो रहा है। H-1B वीजा फीस बढ़ने के बाद ऐसा होते हुए भी दिख रहा है, क्योंकि बहुत से वर्कर्स अब देश लौटने का प्लान बना रहे हैं।.

Michio Kaku on H-1B Visa: अमेरिका में टेक से लेकर हेल्थकेयर सेक्टर तक में जॉब के लिए सबसे आसान रास्ता H-1B वीजा है। हर साल भारतीयों के साथ दर्जनों देशों के हजारों वर्कर्स अमेरिका में इसी वीजा के जरिए जॉब के लिए जाते हैं। हालांकि, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले हफ्ते H-1B वीजा की फीस बढ़ाकर 1 लाख डॉलर कर दी। इस वजह से अब अमेरिकी कंपनियों के लिए विदेशी वर्कर्स को हायर करना महंगा हो जाएगा। ट्रंप के फैसले ने हजारों लोगों के अरमान तोड़े हैं।हालांकि, H-1B वीजा की फीस बढ़ने के बाद कई लोगों ने ट्रंप के फैसले की आलोचना की है। उनका तर्क है कि फीस बढ़ने से देश में टैलेंट की कमी हो जाएगी। सिर्फ इतना ही नहीं, बल्कि अमेरिका के साइंस और टेक्नोलॉजी फील्ड को भी इस फैसले से नुकसान पहुंचेगा। इस बीच अमेरिका के मशहूर फिजिसिस्ट या कहें भौतिक विज्ञानी मिचियो काकू का एक पुराना वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इसमें उन्होंने कहा था कि बिना H-1B वीजा के अमेरिका में कोई सिलिकॉन वैली नहीं होगी। बिना H-1B वीजा नहीं होती सिलिकॉन वैली: मिचियो काकूमिचियो काकू का वायरल हो रहा वीडियो ट्रंप के राष्ट्रपति बनने से पहले का है। इसमें मिचियो कहते हैं कि H-1B वीजा एक जीनियस वीजा है, जो अमेरिका का सीक्रेट हथियार भी है। वह कहते हैं, 'H-1B वीजा के बिना इस देश का वैज्ञानिक तंत्र पूरी तरह से ध्वस्त हो जाएगा। गूगल को भूल जाइए, सिलिकॉन वैली को भूल जाइए। H-1B वीजा के बिना सिलिकॉन वैली का कोई अस्तित्व ही नहीं होता।' उनकी बात सही भी है, क्योंकि अब अमेरिका को टेक सेक्टर में चीन-भारत जैसे देशों के कड़ी टक्कर मिल रही है। अमेरिकी फिजिसिस्ट ने आगे बताया कि विदेश में पैदा हुए वैज्ञानिक ना सिर्फ इनोवेशन के लिए जरूरी हैं, बल्कि वे पूरी इंडस्ट्री तैयार करते हैं। उन्होंने कहा, 'आपको मालूम चलता है कि अमेरिका में 50 फीसदी पीएचडी उम्मीदवार विदेश में पैदा हुए थे। मेरे सिस्टम में ही, जो अमेरिका का सबसे बड़ा है, 100 फीसदी पीएचडी छात्र विदेश में पैदा हुए थे।' ये दिखाता है कि अमेरिका विदेशियों के भरोसे ही चल रहा है। मिचियो काकू का वीडियो देखने के लिए यहां क्लिक करें। अमेरिका के इनोवेशन पर पड़ेगा असरमिचियो काकू ने चेतावनी दी कि H-1B वीजा पर प्रतिबंध लगाने से अमेरिका की साइंटिफिक लीडरशिप प्रभावित होगी। उन्होंने कहा, 'अमेरिका एक चुम्बक की तरह है जो दुनिया के सारे टैलेंट को चूस रहा है। लेकिन अब टैलेंट वापस जा रहा है। वे चीन वापस जा रहे हैं, वे भारत वापस जा रहे हैं।' काकू ने आगे कहा कि अब आप देखते हैं कि भारत में सिलिकॉन वैली उभर रही है, चीन में भी ऐसा ही हो रहा है। ये सब टैलेंट के वापस लौटने की वजह से हो रहा है। H-1B वीजा फीस बढ़ने के बाद ऐसा होते हुए भी दिख रहा है, क्योंकि बहुत से वर्कर्स अब देश लौटने का प्लान बना रहे हैं।

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