'हरदीप-एपस्टीन का रिश्ता क्या कहलाता है' - लॉन्च से पहले डिजिटल इंडिया की खबर लीक कैसे हुई -कांग्रेस

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'हरदीप-एपस्टीन का रिश्ता क्या कहलाता है' - लॉन्च से पहले डिजिटल इंडिया की खबर लीक कैसे हुई -कांग्रेस
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एपस्टीन फाइल्स को लेकर कांग्रेस ने मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला है। शुक्रवार को कांग्रेस ने सवाल उठाया कि डिजिटल इंडिया की सूचना लॉन्च से पहले ही एपस्टीन से जुड़े लोगों को क्यों दी गई?

कांग्रेस ने शुक्रवार को एपस्टीन फाइल्स को लेकर नया खुलासा किया है। पार्टी नेता पवन खेड़ा ने दिल्ली में एक प्रेस कांफ्रेंस में दावा किया कि 13 नवंबर 2014 को लिंक्डइन सोशल मीडिया साइट के को फाउंडर रीड हॉफमैन को एपस्टीन ने एक मेल भेजकर 'डिजिटल इंडिया' की जानकारी दी थी। खेड़ा ने कहा कि यह तथ्य है कि 'डिजिटल इंडिया' की शुरुआत जुलाई, 2015 में हुई थी। उन्होंने कहा कि, “इसका मतलब यह है कि हरदीप पुरी ने भारत के नागरिकों से पहले ही एपस्टीन को 'डिजिटल इंडिया' की जानकारी दे दी थी।“ खेड़ा ने कहा- हम सोच रहे थे- इस देश की सरकार को एक 'माई का लाल' चला रहा था, जबकि सच्चाई यह है कि अमेरिका में बैठा 'एक दलाल' चला रहा था।पवन खेड़ा ने कहा कि हरदीप पुरी कह रहे हैं- मैं तो एपस्टीन को 'डिजिटल इंडिया' की जानकारी दे रहा था। अब सवाल है कि हरदीप पुरी को यह जानकारी कहां से मिली, उस समय तक वो तो सरकार का हिस्सा भी नहीं थे। खेड़ा ने सीधे पीएम से सवाल करते हुए कहा कि, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बताएं- आप हरदीप पुरी के माध्यम से देश की जानकारी किसे और क्यों दिलवा रहे थे? आखिर मोदी जी, हरदीप पुरी और एपस्टीन का क्या रिश्ता है?”.

कांग्रेस नेता ने कहा कि केंद्री मंत्री हरदीप पुरी सिर्फ रीड हॉफमैन के ईमेल की बातें बता रहे हैं और बाकी सब छिपाना चाहते हैं। हरदीप पुरी सिर्फ झूठ बोल रहे हैं कि मेरी एपस्टीन से बात ही नहीं होती थी। सच्चाई ये है कि कॉफी पीने आप जाते थे, हैव फन आप लिखते थे... यानी आप सबकुछ जानते थे। बलात्कारियों को पैरोल दिलवाकर मालाएं पहनाना, उन्हें एमपी-एमएलए बनाना... BJP की पुरानी आदत रही है।पवन खेड़ा ने कहा कि सवाल उठते हैं- एपस्टीन फाइल्स में ऐसा क्या है, जो नरेंद्र मोदी पहले जैसे नहीं रहे? जिन्होंने अपना कैंपेन 'घर-घर मोदी' से शुरू किया था, वो आज 'थर-थर मोदी' हो गया है। उन्होंने कहा कि 2017 में, हरदीप पुरी दिल्ली स्थित भारत सरकार के फंड से चलने वाले थिंक टैंक, रिसर्च एंड इन्फॉर्मेशन सिस्टम फॉर डेवलपिंग कंट्रीज के अध्यक्ष थे। 2017 में भारत सरकार का एक प्रतिनिधि एपस्टीन को ईमेल क्यों भेज रहा था? वह एपस्टीन से क्यों संपर्क कर रहा था - जो एक दोषी यौन अपराधी और मुजरिम था? इससे पहले भी, 2014 और 2016 के बीच, हरदीप पुरी किसके अधिकार और निर्देशों के तहत एपस्टीन से बातचीत कर रहे थे?.वीडियो: क्या आप पर मोदी का दबाव था कि एपस्टीन से मिलिए? पवन खेड़ा ने हरदीप पुरी के हर झूठ का धागा खोल दिया!.उन्होंने कहा कि हरदीप पुरी एक सेवानिवृत्त डिप्लेमैट थे। इस दौरान अमेरिका में भारत तीन राजदूत थे: एस. जयशंकर, अरुण सिंह और नवतेज सरना। क्या वे इतने अक्षम थे कि प्रधानमंत्री ने हरदीप पुरी को एपस्टीन से संपर्क करने के लिए कहा? इससे भी अधिक चिंताजनक बात यह है कि हरदीप पुरी ने भारत में डिजिटल इंडिया कार्यक्रम की आधिकारिक घोषणा से सात महीने पहले ही इस बारे में बात की थी। आखिर एपस्टीन के साथ डिजिटल इंडिया पर चर्चा क्यों हो रही थी? किसके कहने पर?कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने कहा कि हरदीप सिंह पुरी ने हाल ही में कहा कि 'अरे यार, कुछ हुआ होता तो बताता, मैं तो बस मिलकर ही रह गया'...ये बात हरदीप पुरी की मानसिकता दिखाती है। सवाल है कि क्या इस सबके बाद हरदीप पुरी को मंत्री बने रहने का हक है? जून, 2015 में एपस्टीन हरदीप पुरी के जरिए मिडिल ईस्ट की नीति पर नाराजगी जता रहा था, क्योंकि मई 2015 में फिलिस्तीन के राष्ट्राध्यक्ष महमूद अब्बास भारत आए थे? क्या एपस्टीन की नाराजगी के चलते और अपनी गलती सुधारने के लिए नरेंद्र मोदी फिलिस्तीन न जाकर इजरायल गए थे? आखिर भारत की विदेश नीति कौन तय कर रहा था?.पवन खेड़ा ने कहा कि हरदीप सिंह पुरी ने एक इंटरव्यू में कहा था- मेरी एपस्टीन से ज्यादा बात नहीं हुई। एक दो ईमेल हुए और तीन-चार बार मुलाकात हुई। ये सरासर झूठ है। हरदीप पुरी ने एक और इंटरव्यू में कहा- मैंने कभी अपॉइंटमेंट नहीं मांगा। ये बात भी झूठ है, क्योंकि हरदीप पूरी खुद पूछते थे- जेफ, कैन आई सी यू? , जेफ आर यू इन टाउन? खेड़ा ने कहा- जब हरदीप सिंह पुरी ने कभी अपॉइंटमेंट नहीं मांगा तो फिर ये सब क्या था। क्या आप पर मोदी का दबाव था कि जाइए और एपस्टीन से मिलिए। सवाल है आखिर किसके निर्देश पर रिटायर हो चुके हरदीप सिंह पुरी को एपस्टीन से मिलने भेजा जाता था।कांग्रेस नेता ने कहा- हरदीप पुरी ने इंटरव्यू में कहा, हम लोगों में से कुछ को एपस्टीन के क्रिमिनल रिकॉर्ड होने पर शक था।जबकि 2008 में ही Epstein ने कोर्ट में अपना गुनाह कबूल लिया था, उसे सजा हो गई थी। एपस्टीन के गुनाह कबूलने के बाद भी 2014 में हमारे मंत्री हरदीप पुरी के मन में संशय था। यह मंत्री हैं, यह इनकी नैतिकता का स्तर है। ऐसे में हरदीप पुरी को कैसे सही ठहराया जा सकता है?.पवन खेड़ा ने कहा- पिछले कुछ समय से एपस्टीन फाइल्स की पूरी दुनिया में चर्चा है। इस मामले को लेकर 7 देशों के नेताओं ने इस्तीफे दिए हैं। दुख की बात है कि नरेंद्र मोदी और हरदीप सिंह पुरी का नाम भी इसमें शामिल है। हरदीप सिंह पुरी ने इस बारे में मुंह खोला। कुछ इंटरव्यू दिए, जिनमें जमकर झूठ बोला। ये वही हरदीप सिंह पुरी हैं, जिन्हें बिना सांसद बने ही नरेंद्र मोदी ने मंत्री बना दिया।हरदीप सिंह पुरी ने इंटरव्यू में कहा- जब वे पहले बार एपस्टीन से मिलने जा रहे थे तो उन्हें पता ही नहीं था कि वे कहां जा रहे हैं, क्योंकि उन्हें कहा गया था कि ड्राइवर उन्हें छोड़ देगा। ये कितना शर्मनाक है कि ऐसी बात एक विदेश सेवा का अधिकारी कह रहा है, जो कि अमेरिका में डिप्लोमेट था। हरदीप सिंह पुरी ने इंटरव्यू में यह भी कहा- एपस्टीन से मिलने जाते वक़्त मैं थोड़ा असहज हुआ तो गूगल किया कि कहां जा रहा हूं।.Google न्यूज़, नवजीवन फेसबुक पेज और नवजीवन ट्विटर हैंडल पर जुड़ेंप्रिय पाठकों हमारे टेलीग्राम चैनल से जुड़िए और पल-पल की ताज़ा खबरें पाइए, यहां क्लिक करें @navjivanindia

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