US Reciprocal Tariff अमेरिकी अदालत ने ट्रंप सरकार के पारस्परिक शुल्क के फैसले पर रोक लगा दी है जिससे भारत को राहत मिली है। अदालत ने कहा कि 1977 के कानून के तहत ट्रंप को शुल्क लगाने का अधिकार नहीं है। ट्रंप सरकार ने फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। इस फैसले से भारत पर शुल्क का दबाव कम...
राजीव कुमार, जागरण, नई दिल्ली। Reciprocal Tariffs : वैश्विक व्यापार में उथल-पुथल मचाने वाली ट्रंप सरकार के पारस्परिक शुल्क के फैसले पर अमेरिकी अदालत ने रोक लगा दी है। अमेरिका की अंतरराष्ट्रीय व्यापार अदालत ने अपने फैसले में कहा कि वर्ष 1977 में बना इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनमिक पावर एक्ट ट्रंप को इस प्रकार से आयात शुल्क लगाने की इजाजत नहीं देता है। राष्ट्रपति ने अपने अधिकार का अतिक्रमण किया है। आयातित वस्तुओं का कारोबार करने वाले अमेरिकी कारोबारियों ने ट्रंप के आयात शुल्क को अदालत में चुनौती दी थी। हालांकि, ट्रंप सरकार ने अदालत के इस फैसले को तत्काल प्रभाव से सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने का फैसला किया है। ट्रंप ने किया है पारस्परिक टैरिफ लगाने का एलान डोनाल्ड ट्रंप ने दो अप्रैल को दुनिया के लगभग हर देश पर पारस्परिक शुल्क का लगाने का एलान किया था यानी जो देश अमेरिकी सामान पर जितना टैरिफ लगाएगा, अमेरिका भी उन देशों पर उतना ही टैरिफ लगाएगा। अमेरिकी अदालत का यह फैसला भारत के लिए राहत माना जा रहा है। भारत अब बिना किसी दबाव के अमेरिका के साथ व्यापार समझौता वार्ता कर सकेगा। एप्पल के सीईओ को भी ट्रंप दे चुके हैं धमकी दूसरा, ट्रंप सरकार स्मार्टफोन बनाने वाली एपल जैसी कंपनियों को भारत छोड़ने की धमकी नहीं दे सकेगी। हालांकि, फिलहाल भारत से अमेरिका में होने वाले निर्यात पर इस फैसले से कोई फर्क नहीं पड़ेगा और अप्रैल में भारतीय वस्तुओं पर लगाए गए 10 प्रतिशत का शुल्क पहले की तरह जारी रहेगा। वहीं, स्टील व एल्युमीनियम पर 25 प्रतिशत का शुल्क भी जारी रहेगा, क्योंकि इन दोनों वस्तुओं पर लगने वाले शुल्क अदालती फैसले से प्रभावित नहीं होंगे। स्टील व एल्युमीनियम पर सभी देशों के लिए अमेरिका ने गत मार्च में 25 प्रतिशत का शुल्क लगा दिया था। फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट आर्गेनाइजेशंस के सीईओ एवं महानिदेशक अजय सहाय ने बताया कि इस फैसले से अभी भारत से होने वाले निर्यात को कोई लाभ नहीं मिलने जा रहा है। पहले की तरह 10 प्रतिशत का शुल्क जारी रहेगा। ट्रंप सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में इस फैसले को चुनौती दी है। ट्रंप की पूरी कोशिश सुप्रीम कोर्ट के फैसले को अपने पक्ष में करने की होगी। जानकारों का कहना है कि अगर सुप्रीम कोर्ट भी पारस्परिक शुल्क के फैसले को अवैध ठहराता है तो पारस्परिक शुल्क से पूर्व की व्यवस्था लागू हो जाएगी। ऐसे में चीन को भी बड़ी राहत मिल जाएगी, जो भारत के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है। चीन पर 30 प्रतिशत का शुल्क अभी चीन पर 30 प्रतिशत का शुल्क है। ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव के संस्थापक व विदेश व्यापार सेवा के पूर्व वरिष्ठ अधिकारी अजय श्रीवास्तव ने बताया कि इस फैसले के बाद अमेरिका के साथ द्विपक्षीय व्यापार समझौते को लेकर चल रही वार्ता में भारत को दबाव में आने की जरूरत नहीं है। वर्तमान हालात में आगामी नौ जुलाई से भारत पर 26 प्रतिशत शुल्क लगने की आशंका के चलते भारत अमेरिका को कृषि व कई अन्य वस्तुओं पर शून्य शुल्क की पेशकश करने के लिए दबाव में था। अमेरिका भारत की सरकारी खरीद में भी प्रवेश चाहता है और भारत के क्वालिटी कंट्रोल नियम से भी छूट देने के लिए दबाव बना रहा है। श्रीवास्तव का कहना है कि भारत को बीटीए वार्ता को नए सिरे से देखने की जरूरत है। भारत और अमेरिका के बीच बीटीए के पहले चरण को आगामी सितंबर-अक्टूबर तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। लेकिन उससे पहले भारत अगले महीने ही अमेरिका के साथ एक अंतरिम व्यापार समझौता करना चाहता है, ताकि 26 प्रतिशत का पारस्परिक शुल्क भारत पर लागू नहीं हो सके। दो अप्रैल को ट्रंप ने भारत, चीन, वियतनाम समेत दुनिया के अधिकतर देशों पर पारस्परिक शुल्क लगाने की घोषणा की थी। आठ अप्रैल को ट्रंप ने इस फैसले को 90 दिनों के लिए स्थगित कर दिया था। यह भी पढ़ें: ड्रैगन को सबक सिखाने की तैयारी में अमेरिका, चीनी छात्रों का वीजा रद करने का एलान; क्या है ट्रंप का प्लान? यह भी पढ़ें: क्यों टूट गई ट्रंप और मस्क की दोस्ती? चार महीने में ही अमेरिकी प्रशासन से मोहभंग; पढ़ें अंदर की बात.
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