पवन कल्याण की टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार और डीएमके शासित तमिलनाडु के बीच नई शिक्षा नीति के एक हिस्से 'तीन-भाषा फार्मूले' को लेकर तीखी नोकझोंक चल रही है. उनके इस बयान पर डीएमके और अभिनेता प्रकाश राज ने पलटवार किया.
दक्षिण में भाषा विवाद के बीच आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण ने तमिलनाडु पर पाखंड का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि तमिलनाडु के नेता वित्तीय लाभ के लिए तमिल फिल्मों को हिंदी में डब करने की अनुमति देते हैं, लेकिन भाषा का विरोध करते हैं.
अपनी पार्टी के स्थापना दिवस पर बोलते हुए जनसेना प्रमुख पवन कल्याण ने कहा कि देश की अखंडता के लिए भारत को तमिल सहित कई भाषाओं की आवश्यकता है.Advertisementवहीं डीएमके ने कल्याण के बयान पर आपत्ति जताते हुए पलटवार किया है. इसके अलावा अभिनेता प्रकाश राज ने भी निशाना साधते हुए कहा कि यह दूसरी भाषा से नफरत नहीं बल्कि हमारी मातृभाषा को बचाने के बारे में है. इसके अवाला उन्होंने एक एक्स पोस्ट में पवन कल्याण के पुराने पोस्ट शेयर करते हुए लिखा, "चुनाव जीतने से पहले ये जनसेना थी, जीतने के बाद ये भजन सेना हो गई."“ గెలవక ముందు “జనసేనాని”, గెలిచిన తరువాత “భజన సేనాని” … అంతేనా #justasking pic.twitter.com/EqjtqK6qFA— Prakash Raj March 15, 2025दरअसल, पवन कल्याण ने कहा, "तमिलनाडु में लोग हिंदी थोपे जाने का विरोध करते हैं. इससे मुझे आश्चर्य होता है कि अगर वे हिंदी नहीं चाहते हैं, तो वित्तीय लाभ के लिए तमिल फिल्मों को हिंदी में डब क्यों करते हैं? वे बॉलीवुड से पैसा चाहते हैं, लेकिन हिंदी को स्वीकार करने से इनकार करते हैं. यह किस तरह का तर्क है?" Advertisementआंध्र के उपमुख्यमंत्री ने यह भी रेखांकित किया कि उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे हिंदी भाषी राज्यों से मजदूरों का स्वागत करना लेकिन भाषा को अस्वीकार करना तमिलनाडु की ओर से अनुचित है. तमिलनाडु में हरियाणा, यूपी, बिहार और पश्चिम बंगाल से बड़ी संख्या में प्रवासी श्रमिक रहते हैं, एक सर्वेक्षण के अनुसार यह संख्या 1520 लाख के बीच है.उन्होंने आगे कहा, "वे उत्तर प्रदेश, बिहार और छत्तीसगढ़ जैसे हिंदी भाषी राज्यों से राजस्व चाहते हैं, फिर भी वे कहते हैं कि उन्हें हिंदी नहीं चाहिए. क्या यह अनुचित नहीं है? वे बिहार से आने वाले श्रमिकों का स्वागत करते हैं, लेकिन भाषा को अस्वीकार करते हैं. यह विरोधाभास क्यों है? क्या इस मानसिकता को नहीं बदलना चाहिए?"क्या है पूरा विवाद? पवन कल्याण की टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार और डीएमके शासित तमिलनाडु के बीच नई शिक्षा नीति के एक हिस्से 'तीन-भाषा फार्मूले' को लेकर तीखी नोकझोंक चल रही है. विवाद तब और बढ़ गया जब केंद्र ने तमिलनाडु की समग्र शिक्षा योजना के लिए 2,152 करोड़ रुपये रोक दिए, क्योंकि राज्य ने नई शिक्षा नीति को लागू करने से इनकार कर दिया था. तमिलनाडु लंबे समय से 'तीन-भाषा' फार्मूले को राज्य पर हिंदी थोपने के प्रयास के रूप में देखता रहा है, जबकि केंद्र का कहना है कि इस नीति का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि युवाओं को सभी क्षेत्रों में रोजगार मिले.Advertisementडीएमके ने पवन कल्याण पर पलटवार कियाडीएमके नेता टीकेएस एलंगोवन ने कहा कि तमिलनाडु में हमेशा दो-भाषा नीति का पालन किया जाता रहा है, स्कूलों में तमिल और अंग्रेजी पढ़ाई जाती है, और पवन कल्याण के जन्म से पहले ही एक विधेयक पारित हो गया था. एलंगोवन ने कहा, "हम 1938 से हिंदी का विरोध कर रहे हैं. हमने राज्य विधानसभा में कानून पारित किया कि तमिलनाडु हमेशा दो-भाषा के फॉर्मूले का पालन करेगा, क्योंकि शिक्षा के क्षेत्र के विशेषज्ञों की सलाह और सुझाव के कारण ऐसा हुआ है, अभिनेताओं की नहीं. यह विधेयक 1968 में ही पारित हो गया था, जब पवन कल्याण का जन्म भी नहीं हुआ था. उन्हें तमिलनाडु की राजनीति का पता नहीं है." "మీ హిందీ భాషను మా మీద రుద్దకండి", అని చెప్పడం ఇంకో భాషను ద్వేషించడం కాదు, “ స్వాభిమానంతో మా మాతృభాషను, మా తల్లిని కాపాడుకోవడం", అని పవన్ కళ్యాణ్ గారికి ఎవరైనా చెప్పండి please... 🙏🏿🙏🏿🙏🏿 #justasking— Prakash Raj March 14, 2025वहीं पवन कल्याण की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए अभिनेता प्रकाश राज ने कहा, "यह कहना कि अपनी हिंदी हम पर न थोपें, किसी दूसरी भाषा से नफरत करने जैसा नहीं है. अपनी मातृभाषा और अपनी मां की आत्म-सम्मान के साथ रक्षा करना है, कृपया कोई पवन कल्याण को बताए." ये भी देखें
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