'एक क्लर्क क्या जानता है?' अपमान से प्रेरित होकर विनोद बिहारी महतो बने 'महानायक', 1973 में की JMM की स्थापना

Jharkhand News News

'एक क्लर्क क्या जानता है?' अपमान से प्रेरित होकर विनोद बिहारी महतो बने 'महानायक', 1973 में की JMM की स्थापना
Vinod Bihari MahatoAk RaiJharkhand Separate State Movement
  • 📰 NBT Hindi News
  • ⏱ Reading Time:
  • 247 sec. here
  • 15 min. at publisher
  • 📊 Quality Score:
  • News: 133%
  • Publisher: 51%

Jharkhand separate state movement-जब भी झारखंड की कहानी कही जाती है, तीन प्रमुख महानायकों विनोद बिहारी महतो, शिबू सोरेन, और ए.के.

धनबादः झारखंड की जब भी बात होगी तीन महानायकों की जरूर बात होगी। विनोद बिहारी महतो , शिबू सोरेन और एके राय । इन तीनों की अलग-अलग खासियत थी। विनोद बिहारी महतो धनबाद के मशहूर वकील थे। खनन और कारखाना के कारण जो किसान विस्थापित हुए थे उनके हक की लड़ाई लड़ते थे। इससे इतर सामाज सुधारक भी थे। शिबू सोरेन आदिवासी समाज को सूदखोर महाजनों के शोषण से बचाने के लिए संघर्ष कर रहे थे। एके राय पेशे से इंजीनियर थे। वे नौकरी छोड़ कर खनन मजदूरों को कोल माफिया के शोषण से बचाने के लिए लड़ रहे थे। लेकिन ये तीनों नायक गरीबों, मजलूमों के इंसाफ की लड़ाई अलग-अलग लड़ रहे थे। अब उनकी लड़ाई में अलग झारखंड राज्य का मुद्दा भी जुड़ गया। 3 नायकों के मिलन के बाद बना झारखंड मुक्ति मोर्चा इन तीनों के अलग-अलग संघर्ष करने से मजदूरों और आदिवासियों के जीवन में आशा के अनुरूप सुधार नही हो रहा था। तब तीनों ने एक साथ मिलने का फैसला किया। विनोद बिहारी महतो के धनबाद स्थित आवास पर शिबू सोरेन और एके राय पहुंचे। तीनों ने एक हो कर एक पार्टी बनाने का फैसला किया। इसके बाद 4 फरवरी 1973 को झारखंड मुक्ति मोर्चा का गठन हुआ। विनोद बिहार महतो पार्टी के अध्यक्ष और शिबू सोरेन महासचिव बने। 1980 में बने बिहार विधानसभा के सदस्यविनोद बिहार महतो झारखंड मुक्ति मोर्चा के संस्थापक अध्यक्ष बनने से पहले मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी से सदस्य थे। वे कांग्रेस और जनसंघ को पूंजीवादियों की पार्टी मानते थे। उन्होंने 1971 में धनबाद से सीपीएम के टिकट पर लोकसभा का चुनाव भी लड़ा था। लेकिन हार गये थे। उनके भी मन में झारखंड के गरीबों और मजदूरों के लिए अलग पार्टी बनाने की बात चल रही थी। जब शिबू सोरेन और एके राय का साथ मिला तो वे भी झारखंड मुक्ति मोर्चा बनाने के लिए राजी हो गये। विनोद बिहारी महतो 1980 के बिहार विधानसभा चुनाव में टुंडी विधानसभा सीट से झामुमो के टिकट पर मैदान में उतरे। विजय हासिल कर विधायक बने। 1990 के बिहार विधानसभा चुनाव में फिर टुंडी से विधायक बने। सांसद रहते निधनविधायक रहते 1991 के लोकसभा चुनाव में झारखंड मुक्ति मोर्चा के टिकट पर गिरिडीह लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा। इस चुनाव में उन्होंने विशाल अंतर से जीत हासिल की। लेकिन दिसम्बर 1991 में उनका निधन हो गया। सांसद रहते उनकी मौत से झारखंड मुक्ति मोर्चा को बहुत झटका लगा। वे पार्टी के जुझारू और नीति-निर्माण करने वाले नेता थे। फरवरी 1992 में उपचुनाव हुआ तो उनके पुत्र राजकिशोर महतो झामुमो उम्मीदवार के रूप में यहां से जीते। दिल पर चोट लगी तो बने वकील विनोद बिहारी महतो एक नेता से अधिक समाज सुधारक थे। वे कुड़मी समाज से ताल्लुक रखते थे। वे स्वभाव से स्वाभिमानी और क्रांतिकारी थे। उनके माता-पिता बहुत गरीब थे। किसी तरह मैट्रिक की परीक्षा पास की। घर चलाने के लिए नौकरी जरूरी थी। इसलिए आगे पढ़ने की बजाय नौकरी खोजने लगे। धनबाद के आपूर्ति विभाग में उन्हें क्लर्क की नौकरी मिल गयी। एक दिन किसी बात को लेकर उनकी एक वकील से बहस हो गयी। इस वकील ने कहा, तुम जानते क्या हो, पढ़े क्या हो ? एक क्लर्क हो कर वकील से बहस कर रहे हो ? वकील की ये बात विनोद बिहारी महतो को तीर की तरह लगी। उसी दिन उन्होंने ठान लिया कि अब किसी भी हाल में वकील बन कर रहूंगा। दोबारा पढ़ाई शुरू कीनौकरी करते हुए उन्होंने फिर पढ़ाई शुरू कर दी। धनबाद से इंटरमीडिएट और ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद नौकरी छोड़ कर कानून की पढ़ाई के लिए पटना आ गये। पटना लॉ कॉलेज से पढ़ाई पूरी करने के बाद ही धनबाद लौटे। कुछ ही दिनों में वे धनबाद के चर्चित वकील हो गये। उसी समय बाकारो स्टील प्लांट निर्माण के लिए जमीन का अधिग्रहण हो रहा था। उचित मुआवजा के लिए किसान अधिकारियों के पास दौड़ लगा रहे थे। भ्रष्ट अधिकारी और क्लर्क किसानों के परेशान कर रहे थे। जमीन की सही कीमत नहीं लगा रहे थे। जमीन देने के बाद उनके विस्थापन के बारे में भी कुछ नहीं कहा जा रहा था।किसानों के हक की लड़ाईतब विनोद बिहारी महतो किसानों को हक दिलाने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ने लगे। गरीब किसानों के पास पैसा नहीं होता तो वे अपना पैसा लगा कर कागज तैयार करते। मुकदमा लड़ते। उचित मुआवजा दिलाते। जब मुआवजा मिलता को आंशिक तौर पर अपना फीस लेते। इसके बाद वे कोयला खदानों के विस्थापितों का केस लड़ने लगे। इस दौरान उनका सामाजिक सरोकार बढ़ता गया। कुड़मी कुरीतियों के के खिलाफ अभियान विनोद बिहारी महतो अपने स्वजातीय लोगों की कुरीतियों से बहुत दुखी थे। कुड़मी समाज खेती-बाड़ी से किसी तरह गुजारा कर रहा था। लेकिन दूसरी उच्च जातियों की देखा देखी दहेज प्रथा की कुरीति आ रही थी। शराबखोरी के कारण घर की हालत और खराब हो रही थी। साहूकारों से कर्ज लेकर लोग शादी करने लगे थे। कर्ज लेकर शराब पीने लगे थे। तब उन्होंने अपनी जाति को इन कुरीतियों से मुक्त कराने के लिए आंदोलन शुरू किया। इसके लिए एक संगठन बनाया शिवाजी समाज। विनोद बिहारी महतो छत्रपति शिवाजी महाराज को कुरमी मानते थे। वे शिवाजी के योद्धा और समाज सुधारक छवि से बहुत प्रभावित थे। इसलिए उन्होंने अपने संगठन का नाम ‘शिवाजी समाज’ रखा था। बाद में उन्होंने ‘शिवाजी समाज’ का झारखंड मुक्ति मोर्चा में विलय कर दिया था। कुड़मी भाषा और संस्कृति का प्रचार-प्रसार‘शिवाजी समाज’, कुड़मी समाज की भाषा ‘कुरमाली’ के प्रसार प्रचार में जुट गया। कुरमाली भाषा के व्याकरण और साहित्य की रचना के लिए लेखकों को प्रोत्साहित किया जाने लगा। उनके प्रयासों के कारण ही रांची विश्वविद्यालय में कुरमाली भाषा की पढ़ाई शुरू हुई। इसके अलावा कुड़मी समाज के सांस्कृतिक आयोजनों को संगठित और भव्य रूप दिया। वे गोहाल पूजा, टुसु परब, जीतिया, सोहराय, मनसा पूजा के आयोजनों में खुद शामिल हो कर कुड़मी समाज के लोगों को प्रोत्साहित किया करते थे। उन्हें झारखंड में कुड़मी समाज का प्रेरणास्रोत माना जाता है।.

धनबादः झारखंड की जब भी बात होगी तीन महानायकों की जरूर बात होगी। विनोद बिहारी महतो , शिबू सोरेन और एके राय । इन तीनों की अलग-अलग खासियत थी। विनोद बिहारी महतो धनबाद के मशहूर वकील थे। खनन और कारखाना के कारण जो किसान विस्थापित हुए थे उनके हक की लड़ाई लड़ते थे। इससे इतर सामाज सुधारक भी थे। शिबू सोरेन आदिवासी समाज को सूदखोर महाजनों के शोषण से बचाने के लिए संघर्ष कर रहे थे। एके राय पेशे से इंजीनियर थे। वे नौकरी छोड़ कर खनन मजदूरों को कोल माफिया के शोषण से बचाने के लिए लड़ रहे थे। लेकिन ये तीनों नायक गरीबों, मजलूमों के इंसाफ की लड़ाई अलग-अलग लड़ रहे थे। अब उनकी लड़ाई में अलग झारखंड राज्य का मुद्दा भी जुड़ गया। 3 नायकों के मिलन के बाद बना झारखंड मुक्ति मोर्चाइन तीनों के अलग-अलग संघर्ष करने से मजदूरों और आदिवासियों के जीवन में आशा के अनुरूप सुधार नही हो रहा था। तब तीनों ने एक साथ मिलने का फैसला किया। विनोद बिहारी महतो के धनबाद स्थित आवास पर शिबू सोरेन और एके राय पहुंचे। तीनों ने एक हो कर एक पार्टी बनाने का फैसला किया। इसके बाद 4 फरवरी 1973 को झारखंड मुक्ति मोर्चा का गठन हुआ। विनोद बिहार महतो पार्टी के अध्यक्ष और शिबू सोरेन महासचिव बने। 1980 में बने बिहार विधानसभा के सदस्यविनोद बिहार महतो झारखंड मुक्ति मोर्चा के संस्थापक अध्यक्ष बनने से पहले मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी से सदस्य थे। वे कांग्रेस और जनसंघ को पूंजीवादियों की पार्टी मानते थे। उन्होंने 1971 में धनबाद से सीपीएम के टिकट पर लोकसभा का चुनाव भी लड़ा था। लेकिन हार गये थे। उनके भी मन में झारखंड के गरीबों और मजदूरों के लिए अलग पार्टी बनाने की बात चल रही थी। जब शिबू सोरेन और एके राय का साथ मिला तो वे भी झारखंड मुक्ति मोर्चा बनाने के लिए राजी हो गये। विनोद बिहारी महतो 1980 के बिहार विधानसभा चुनाव में टुंडी विधानसभा सीट से झामुमो के टिकट पर मैदान में उतरे। विजय हासिल कर विधायक बने। 1990 के बिहार विधानसभा चुनाव में फिर टुंडी से विधायक बने। सांसद रहते निधनविधायक रहते 1991 के लोकसभा चुनाव में झारखंड मुक्ति मोर्चा के टिकट पर गिरिडीह लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा। इस चुनाव में उन्होंने विशाल अंतर से जीत हासिल की। लेकिन दिसम्बर 1991 में उनका निधन हो गया। सांसद रहते उनकी मौत से झारखंड मुक्ति मोर्चा को बहुत झटका लगा। वे पार्टी के जुझारू और नीति-निर्माण करने वाले नेता थे। फरवरी 1992 में उपचुनाव हुआ तो उनके पुत्र राजकिशोर महतो झामुमो उम्मीदवार के रूप में यहां से जीते। दिल पर चोट लगी तो बने वकीलविनोद बिहारी महतो एक नेता से अधिक समाज सुधारक थे। वे कुड़मी समाज से ताल्लुक रखते थे। वे स्वभाव से स्वाभिमानी और क्रांतिकारी थे। उनके माता-पिता बहुत गरीब थे। किसी तरह मैट्रिक की परीक्षा पास की। घर चलाने के लिए नौकरी जरूरी थी। इसलिए आगे पढ़ने की बजाय नौकरी खोजने लगे। धनबाद के आपूर्ति विभाग में उन्हें क्लर्क की नौकरी मिल गयी। एक दिन किसी बात को लेकर उनकी एक वकील से बहस हो गयी। इस वकील ने कहा, तुम जानते क्या हो, पढ़े क्या हो ? एक क्लर्क हो कर वकील से बहस कर रहे हो ? वकील की ये बात विनोद बिहारी महतो को तीर की तरह लगी। उसी दिन उन्होंने ठान लिया कि अब किसी भी हाल में वकील बन कर रहूंगा। दोबारा पढ़ाई शुरू कीनौकरी करते हुए उन्होंने फिर पढ़ाई शुरू कर दी। धनबाद से इंटरमीडिएट और ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद नौकरी छोड़ कर कानून की पढ़ाई के लिए पटना आ गये। पटना लॉ कॉलेज से पढ़ाई पूरी करने के बाद ही धनबाद लौटे। कुछ ही दिनों में वे धनबाद के चर्चित वकील हो गये। उसी समय बाकारो स्टील प्लांट निर्माण के लिए जमीन का अधिग्रहण हो रहा था। उचित मुआवजा के लिए किसान अधिकारियों के पास दौड़ लगा रहे थे। भ्रष्ट अधिकारी और क्लर्क किसानों के परेशान कर रहे थे। जमीन की सही कीमत नहीं लगा रहे थे। जमीन देने के बाद उनके विस्थापन के बारे में भी कुछ नहीं कहा जा रहा था।किसानों के हक की लड़ाईतब विनोद बिहारी महतो किसानों को हक दिलाने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ने लगे। गरीब किसानों के पास पैसा नहीं होता तो वे अपना पैसा लगा कर कागज तैयार करते। मुकदमा लड़ते। उचित मुआवजा दिलाते। जब मुआवजा मिलता को आंशिक तौर पर अपना फीस लेते। इसके बाद वे कोयला खदानों के विस्थापितों का केस लड़ने लगे। इस दौरान उनका सामाजिक सरोकार बढ़ता गया। कुड़मी कुरीतियों के के खिलाफ अभियानविनोद बिहारी महतो अपने स्वजातीय लोगों की कुरीतियों से बहुत दुखी थे। कुड़मी समाज खेती-बाड़ी से किसी तरह गुजारा कर रहा था। लेकिन दूसरी उच्च जातियों की देखा देखी दहेज प्रथा की कुरीति आ रही थी। शराबखोरी के कारण घर की हालत और खराब हो रही थी। साहूकारों से कर्ज लेकर लोग शादी करने लगे थे। कर्ज लेकर शराब पीने लगे थे। तब उन्होंने अपनी जाति को इन कुरीतियों से मुक्त कराने के लिए आंदोलन शुरू किया। इसके लिए एक संगठन बनाया शिवाजी समाज। विनोद बिहारी महतो छत्रपति शिवाजी महाराज को कुरमी मानते थे। वे शिवाजी के योद्धा और समाज सुधारक छवि से बहुत प्रभावित थे। इसलिए उन्होंने अपने संगठन का नाम ‘शिवाजी समाज’ रखा था। बाद में उन्होंने ‘शिवाजी समाज’ का झारखंड मुक्ति मोर्चा में विलय कर दिया था। कुड़मी भाषा और संस्कृति का प्रचार-प्रसार‘शिवाजी समाज’, कुड़मी समाज की भाषा ‘कुरमाली’ के प्रसार प्रचार में जुट गया। कुरमाली भाषा के व्याकरण और साहित्य की रचना के लिए लेखकों को प्रोत्साहित किया जाने लगा। उनके प्रयासों के कारण ही रांची विश्वविद्यालय में कुरमाली भाषा की पढ़ाई शुरू हुई। इसके अलावा कुड़मी समाज के सांस्कृतिक आयोजनों को संगठित और भव्य रूप दिया। वे गोहाल पूजा, टुसु परब, जीतिया, सोहराय, मनसा पूजा के आयोजनों में खुद शामिल हो कर कुड़मी समाज के लोगों को प्रोत्साहित किया करते थे। उन्हें झारखंड में कुड़मी समाज का प्रेरणास्रोत माना जाता है।

We have summarized this news so that you can read it quickly. If you are interested in the news, you can read the full text here. Read more:

NBT Hindi News /  🏆 20. in İN

Vinod Bihari Mahato Ak Rai Jharkhand Separate State Movement Jharkhand Mukti Morcha झारखंड समाचार विनोद बिहारी महतो एके राय झारखंड अलग राज्य आंदोलन झारखंड मुक्ति मोर्चा

 

United States Latest News, United States Headlines

Similar News:You can also read news stories similar to this one that we have collected from other news sources.

Jharkhand Politics: सरना धर्मकोड पर मचा सियासी घमासान, BJP और JMM आमने-सामनेJharkhand Politics: सरना धर्मकोड पर मचा सियासी घमासान, BJP और JMM आमने-सामनेझारखंड में सरना धर्म कोड को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। झामुमो ने भाजपा से पूछा है कि सरना कोड को कब मान्यता मिलेगी जबकि भाजपा ने झामुमो और कांग्रेस पर इस मुद्दे पर नाटक करने का आरोप लगाया है। दोनों दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है।
Read more »

Bihar Polls 2025: Congress Unveils Second Candidate List Amid Alliance TensionsBihar Polls 2025: Congress Unveils Second Candidate List Amid Alliance TensionsThis development comes as the Mahagathbandhan alliance faced a major jolt when the Jharkhand Mukti Morcha (JMM) announced it would contest six seats independently, breaking away from the grand alliance.
Read more »

After Bihar Seat-Sharing Snub, Will JMM Rethink Its Alliance Strategy In Jharkhand?After Bihar Seat-Sharing Snub, Will JMM Rethink Its Alliance Strategy In Jharkhand?On Diwali, the JMM formally withdrew from the Grand Alliance in Bihar, sparking speculation about the future of its partnership with the RJD and Congress in Jharkhand.
Read more »

Jharkhand Politics: घाटशिला उपचुनाव के बीच BJP को झटका, कद्दावर नेताओं ने थामा JMM का दामनJharkhand Politics: घाटशिला उपचुनाव के बीच BJP को झटका, कद्दावर नेताओं ने थामा JMM का दामनघाटशिला उपचुनाव के बीच भाजपा को उस समय झटका लगा जब पूर्व जिलाध्यक्ष सौरव चक्रवर्ती समेत कई मंडल अध्यक्ष झामुमो में शामिल हो गए। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने रांची में इन नेताओं को पार्टी की सदस्यता दिलाई। चक्रवर्ती पहले भी टिकट वितरण से नाराज थे और उन्हें इस बार उपचुनाव में स्टार प्रचारक का दायित्व मिला...
Read more »

Jharkhand Govt: ‘2050 तक झारखंड को समृद्ध बनाएंगे’, स्थापना दिवस कार्यक्रम में बोले हेमंत सोरेनJharkhand Govt: ‘2050 तक झारखंड को समृद्ध बनाएंगे’, स्थापना दिवस कार्यक्रम में बोले हेमंत सोरेनJharkhand Govt: ‘2050 तक झारखंड को समृद्ध बनाएंगे’, स्थापना दिवस कार्यक्रम में बोले हेमंत सोरेन Jharkhand CM says We will make state Prosperous
Read more »

बिहार के बाद अब झारखंड में कैबिनेट विस्तार, सोमेश बनेंगे मंत्री या JMM के इन दिग्गजों में से एक को मिलेगा मौकाबिहार के बाद अब झारखंड में कैबिनेट विस्तार, सोमेश बनेंगे मंत्री या JMM के इन दिग्गजों में से एक को मिलेगा मौकाJharkhand Cabinet Expansion-बिहार में मंत्रिमंडल गठन के बाद, अब झारखंड की गठबंधन सरकार में भी फेरबदल और विस्तार की हलचल शुरू हो गई है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में चल रही सरकार जल्द ही अपने मंत्रिमंडल का विस्तार कर सकती है, जिसके लिए झारखंड मुक्ति मोर्चा के कई वरिष्ठ और नए चेहरे दावेदारी पेश कर रहे...
Read more »



Render Time: 2026-04-02 16:49:17