'आपको पता बताने में समस्या क्या है', अगस्ता वेस्टलैंड मामले में ब्रिटिश नागरिक की याचिका खारिज

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Agustawestland CaseSupreme CourtDelhi High Court
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सुप्रीम कोर्ट ने क्रिश्चियन मिशेल जेम्स की याचिका खारिज कर दी जिसमें उसने दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती दी थी। क्रिश्चियन को अगस्ता वेस्टलैंड मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जमानत पर रिहा होने के बाद पते का विवरण देने का निर्देश दिया गया था। कोर्ट ने कहा कि अगर आपका स्थायी पता तिहाड़ है तो वहीं...

पीटीआई, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को ब्रिटिश नागरिक क्रिश्चियन मिशेल जेम्स की याचिका खारिज कर दी, जिसमें उसने दिल्ली हाई कोर्ट के एक फैसले को चुनौती दी थी। हाई कोर्ट ने क्रिश्चियन को 3600 करोड़ रुपये के अगस्ता वेस्टलैंड मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जमानत पर रिहा होने के बाद उस पते का विवरण प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था, जहां वह रहना चाहता है। मामले में कथित बिचौलिये क्रिश्चियन ने हाई कोर्ट के 2022 के आदेश को चुनौती दी थी, जिसके तहत उसकी जमानत शर्तों में संशोधन किया गया था। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संजय कुमार की पीठ के समक्ष याचिका पेश की गई थी। पीठ ने फिर से पूछा पता पीठ ने क्रिश्चियन के वकील से कहा कि हम आपको जमानत दे चुके हैं और आप पता बताने जैसी एक शर्त तक पूरी नहीं करना चाहते। ईडी की ओर से पेश वकील ने कहा कि हाई कोर्ट का आदेश क्रिश्चियन के पक्ष में था। पीठ ने पूछा कि तो उनकी समस्या क्या है। क्रिश्चियन के वकील ने कहा कि मैं पिछले छह वर्ष और छह महीने से तिहाड़ में हूं। मेरा कोई स्थानीय पता नहीं है। इस पर पीठ ने कहा कि अगर आपका स्थायी पता तिहाड़ है तो वहीं रहें। जानिए क्या हैं आरोप? उल्लेखनीय है कि जांच एजेंसियों ने इतालवी कंपनी अगस्ता वेस्टलैंड से 12 वीवीआइपी हेलीकाप्टरों की खरीद में अनियमितताओं का आरोप लगाया है। क्रिश्चियन को दिसंबर, 2018 में दुबई से प्रत्यर्पित किया गया था और बाद में सीबीआइ और ईडी ने उसे गिरफ्तार कर लिया था। यह भी पढ़ें: सुप्रीम कोर्ट को मिले तीन नए जज, कॉलेजियम की सिफारिश को मिली मंजूरी; लिस्ट में इन न्यायाधीशों के नाम यह भी पढ़ें: दिल्ली के जामिया नगर में चलेगा बुलडोजर या लगेगी रोक? सुप्रीम कोर्ट करेगा आखिरी फैसला; पढ़ें पूरा मामला.

पीटीआई, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को ब्रिटिश नागरिक क्रिश्चियन मिशेल जेम्स की याचिका खारिज कर दी, जिसमें उसने दिल्ली हाई कोर्ट के एक फैसले को चुनौती दी थी। हाई कोर्ट ने क्रिश्चियन को 3600 करोड़ रुपये के अगस्ता वेस्टलैंड मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जमानत पर रिहा होने के बाद उस पते का विवरण प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था, जहां वह रहना चाहता है। मामले में कथित बिचौलिये क्रिश्चियन ने हाई कोर्ट के 2022 के आदेश को चुनौती दी थी, जिसके तहत उसकी जमानत शर्तों में संशोधन किया गया था। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संजय कुमार की पीठ के समक्ष याचिका पेश की गई थी। पीठ ने फिर से पूछा पता पीठ ने क्रिश्चियन के वकील से कहा कि हम आपको जमानत दे चुके हैं और आप पता बताने जैसी एक शर्त तक पूरी नहीं करना चाहते। ईडी की ओर से पेश वकील ने कहा कि हाई कोर्ट का आदेश क्रिश्चियन के पक्ष में था। पीठ ने पूछा कि तो उनकी समस्या क्या है। क्रिश्चियन के वकील ने कहा कि मैं पिछले छह वर्ष और छह महीने से तिहाड़ में हूं। मेरा कोई स्थानीय पता नहीं है। इस पर पीठ ने कहा कि अगर आपका स्थायी पता तिहाड़ है तो वहीं रहें। जानिए क्या हैं आरोप? उल्लेखनीय है कि जांच एजेंसियों ने इतालवी कंपनी अगस्ता वेस्टलैंड से 12 वीवीआइपी हेलीकाप्टरों की खरीद में अनियमितताओं का आरोप लगाया है। क्रिश्चियन को दिसंबर, 2018 में दुबई से प्रत्यर्पित किया गया था और बाद में सीबीआइ और ईडी ने उसे गिरफ्तार कर लिया था। यह भी पढ़ें: सुप्रीम कोर्ट को मिले तीन नए जज, कॉलेजियम की सिफारिश को मिली मंजूरी; लिस्ट में इन न्यायाधीशों के नाम यह भी पढ़ें: दिल्ली के जामिया नगर में चलेगा बुलडोजर या लगेगी रोक? सुप्रीम कोर्ट करेगा आखिरी फैसला; पढ़ें पूरा मामला

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