'अमेरिका छोड़ने का मतलब फेल होना नहीं', H1B रिजेक्शन झेलने वाले वर्कर ने बताई 'अमेरिकन ड्रीम' की हकीकत

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'अमेरिका छोड़ने का मतलब फेल होना नहीं', H1B रिजेक्शन झेलने वाले वर्कर ने बताई 'अमेरिकन ड्रीम' की हकीकत
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US H-1B Visa News: अमेरिका में H-1B वीजा पाना बेहद मुश्किल हो चुका है। इसके लिए अप्लाई करने वाले लोगों के आवेदन बड़ी संख्या में रिजेक्ट भी हो जाते हैं।

H-1B Visa: ताइवान नेशनल सेंट्रल यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएट हुए वेन-ह्सिंग हुआंग ने सोचा था कि वह अमेरिका जाकर बड़ी टेक कंपनी में काम करेंगे। उन्हें अमेरिका में अच्छी सैलरी वाली नौकरी मिल जाएगी और फिर वह यहां आंत्रन्प्रेन्योरशिप शुरू कर पाएंगे। अन्य विदेशी छात्रों की तरह वेन-ह्सिंग हुआंग ने अमेरिका को अवसरों वाला देश समझा, जहां पर करियर बनाकर अच्छे भविष्य की नींव रखी जा सकती थी। हालांकि, दो साल अमेरिका में जॉब करने के बाद हुआंग को समझ आ गया कि यहां हालात अलग हैं।हुआंग ने अमेजन में नौकरी की, लेकिन उन्हें इस दौरान वीजा चुनौतियों का सामना करना पड़ा। हुआंग को लगा कि उन्होंने जिस सपने को देखा था, वो उनका नहीं है। H-1B वीजा पाने में रिजेक्शन का सामना करने के बाद हुआंग ने अब ताइवान लौटने का प्लान बनाया है। वह चाहते हैं कि अब वह अपने देश लौटकर आंत्रन्प्रेन्योरशिप करें। हुआंग ने सोचा था कि वह अमेरिका में पढ़ाई पूरी करेंगे, फिर H-1B वीजा के लिए अप्लाई करेंगे और इसके बाद यहां जॉब कर ग्रीन कार्ड हासिल कर लेंगे। छंटनी से जॉब के अवसर हुए कमबिजनेस इनसाइडर से बात करते हुए हुआंग ने बताया, 'मैं ऐसी कंपनी में काम करना चाहता था, जो मेरे लिए ग्रीन कार्ड के लिए अप्लाई कर सके। मैं फुल-टाइम जॉब कर सकूं और एक सीनियर सॉफ्टवेयर इंजीनियर बन सकूं। तब मैं आखिरकार आंत्रन्प्रेन्योरशिप के अपने सपने को साकार कर सकूंगा।' हालांकि, ग्रेजुएशन के बाद जॉब पाना बिल्कुल भी आसान नहीं था। 2022 में मेटा से लेकर ट्विटर तक में छंटनी हुई और फिर जॉब के ऑप्शन बिल्कुल ही खत्म हो गए। पैरेंट्स से कर्जा लेकर यूएस में की पढ़ाईहुआंग ने अमेरिका में पढ़ने के लिए अपने पैरेंट्स से एक लाख डॉलर उधार लिए थे, जिस वजह से वह जबरदस्त दबाव में थे। उन्होंने कहा, 'अगर मुझे ग्रेजुएशन के बाद जॉब नहीं मिलती, तो मुझे 60 दिनों में अमेरिका छोड़ना पड़ता। मैं अपने पैरेंट्स का कर्जदार होता।' हालांकि, फिर उन्हें अमेजन में जॉब मिल गई। लेकिन अभी भी वीजा को लेकर अनिश्चितता बनी हुई थी। उन्होंने कहा कि उन्हें हर चीज सोच समझकर करनी पड़ती, क्योंकि वह अपने वीजा स्टेटस को बिल्कुल भी खतरे में नहीं डालना चाहते थे। अमेरिकन ड्रीम क्या है? हुआंग ने बतायाहालांकि, हुआंग के लिए वीजा पाना चुनौतीपूर्ण रहा है। 2025 में उन्हें दूसरी बार H-1B वीजा नहीं मिला। फिर उन्हें एहसास हुआ कि उन्हें सपने पूरे करने के लिए अमेरिका में रहने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा, 'मैं एक अनिश्चित और भ्रामक अमेरिकन ड्रीम के पीछे अपनी उम्र की कुर्बानी नहीं देना चाहता हूं।' हुआंग ने इस बात को स्वीकार कर लिया है कि भविष्य में शायद उनका अमेरिका में रहना संभव न हो। इसके बजाय, वह ताइवान लौटने की योजना बना रहे हैं, जहां उन्हें कम खर्च में रहे, बेहतर हेल्थकेयर और अपना खुद का बिजनेस शुरू करने की ज्यादा आजादी मिलेगी।ताइवान के छात्र ने बताया, 'नया अमेरिकन ड्रीम अमेरिका में रहने को लेकर नहीं है। ये आपके जरिए हासिल की गई स्किल, नेटवर्किंग और सेविंग का इस्तेमाल करके एक ऐसा जीवन बनाने के बारे में है, जहां आप वीजा, छंटनी या राजनीति की दया पर निर्भर नहीं रहते हैं।' हुआंग के लिए अमेरिका छोड़ना उनका फेल होना नहीं है। उन्होंने कहा, 'यूएस छोड़ने का मतलब है कि मैं अंततः इस आधार पर फैसला ले सकता हूं कि मैं क्या बनाना चाहता हूं, न कि मेरे वीजा से मुझे क्या इजाजत है। वीजा का मोहताज रहकर जीना मुश्किल है।'.

H-1B Visa: ताइवान नेशनल सेंट्रल यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएट हुए वेन-ह्सिंग हुआंग ने सोचा था कि वह अमेरिका जाकर बड़ी टेक कंपनी में काम करेंगे। उन्हें अमेरिका में अच्छी सैलरी वाली नौकरी मिल जाएगी और फिर वह यहां आंत्रन्प्रेन्योरशिप शुरू कर पाएंगे। अन्य विदेशी छात्रों की तरह वेन-ह्सिंग हुआंग ने अमेरिका को अवसरों वाला देश समझा, जहां पर करियर बनाकर अच्छे भविष्य की नींव रखी जा सकती थी। हालांकि, दो साल अमेरिका में जॉब करने के बाद हुआंग को समझ आ गया कि यहां हालात अलग हैं।हुआंग ने अमेजन में नौकरी की, लेकिन उन्हें इस दौरान वीजा चुनौतियों का सामना करना पड़ा। हुआंग को लगा कि उन्होंने जिस सपने को देखा था, वो उनका नहीं है। H-1B वीजा पाने में रिजेक्शन का सामना करने के बाद हुआंग ने अब ताइवान लौटने का प्लान बनाया है। वह चाहते हैं कि अब वह अपने देश लौटकर आंत्रन्प्रेन्योरशिप करें। हुआंग ने सोचा था कि वह अमेरिका में पढ़ाई पूरी करेंगे, फिर H-1B वीजा के लिए अप्लाई करेंगे और इसके बाद यहां जॉब कर ग्रीन कार्ड हासिल कर लेंगे। छंटनी से जॉब के अवसर हुए कमबिजनेस इनसाइडर से बात करते हुए हुआंग ने बताया, 'मैं ऐसी कंपनी में काम करना चाहता था, जो मेरे लिए ग्रीन कार्ड के लिए अप्लाई कर सके। मैं फुल-टाइम जॉब कर सकूं और एक सीनियर सॉफ्टवेयर इंजीनियर बन सकूं। तब मैं आखिरकार आंत्रन्प्रेन्योरशिप के अपने सपने को साकार कर सकूंगा।' हालांकि, ग्रेजुएशन के बाद जॉब पाना बिल्कुल भी आसान नहीं था। 2022 में मेटा से लेकर ट्विटर तक में छंटनी हुई और फिर जॉब के ऑप्शन बिल्कुल ही खत्म हो गए। पैरेंट्स से कर्जा लेकर यूएस में की पढ़ाईहुआंग ने अमेरिका में पढ़ने के लिए अपने पैरेंट्स से एक लाख डॉलर उधार लिए थे, जिस वजह से वह जबरदस्त दबाव में थे। उन्होंने कहा, 'अगर मुझे ग्रेजुएशन के बाद जॉब नहीं मिलती, तो मुझे 60 दिनों में अमेरिका छोड़ना पड़ता। मैं अपने पैरेंट्स का कर्जदार होता।' हालांकि, फिर उन्हें अमेजन में जॉब मिल गई। लेकिन अभी भी वीजा को लेकर अनिश्चितता बनी हुई थी। उन्होंने कहा कि उन्हें हर चीज सोच समझकर करनी पड़ती, क्योंकि वह अपने वीजा स्टेटस को बिल्कुल भी खतरे में नहीं डालना चाहते थे। अमेरिकन ड्रीम क्या है? हुआंग ने बतायाहालांकि, हुआंग के लिए वीजा पाना चुनौतीपूर्ण रहा है। 2025 में उन्हें दूसरी बार H-1B वीजा नहीं मिला। फिर उन्हें एहसास हुआ कि उन्हें सपने पूरे करने के लिए अमेरिका में रहने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा, 'मैं एक अनिश्चित और भ्रामक अमेरिकन ड्रीम के पीछे अपनी उम्र की कुर्बानी नहीं देना चाहता हूं।' हुआंग ने इस बात को स्वीकार कर लिया है कि भविष्य में शायद उनका अमेरिका में रहना संभव न हो। इसके बजाय, वह ताइवान लौटने की योजना बना रहे हैं, जहां उन्हें कम खर्च में रहे, बेहतर हेल्थकेयर और अपना खुद का बिजनेस शुरू करने की ज्यादा आजादी मिलेगी।ताइवान के छात्र ने बताया, 'नया अमेरिकन ड्रीम अमेरिका में रहने को लेकर नहीं है। ये आपके जरिए हासिल की गई स्किल, नेटवर्किंग और सेविंग का इस्तेमाल करके एक ऐसा जीवन बनाने के बारे में है, जहां आप वीजा, छंटनी या राजनीति की दया पर निर्भर नहीं रहते हैं।' हुआंग के लिए अमेरिका छोड़ना उनका फेल होना नहीं है। उन्होंने कहा, 'यूएस छोड़ने का मतलब है कि मैं अंततः इस आधार पर फैसला ले सकता हूं कि मैं क्या बनाना चाहता हूं, न कि मेरे वीजा से मुझे क्या इजाजत है। वीजा का मोहताज रहकर जीना मुश्किल है।'

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