ईरानी नौसेना के कमांडर रियर एडमिरल शहराम ईरानी ने 4 मार्च को अमेरिकी पनडुब्बी द्वारा IRIS Dena जहाज डुबोने का बदला लेने की कसम खाई है।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। ईरानी नौसेना के कमांडर रियर एडमिरल शहराम ईरानी ने अमेरिका के खिलाफ बड़ा कदम उठाने की कसम खाई है। उन्होंने कहा है कि ईरानी नौसेना अपने 87 नाविकों की मौत का बदला जरूर लेगी। यह हमला 4 मार्च को हुआ था, जब अमेरिकी पनडुब्बी ने अंतरराष्ट्रीय जल में श्रीलंका के गल्ले तट के पास ईरानी नौसेना के जहाज IRIS Dena को डुबो दिया। इस घटना में कम से कम 87 ईरानी नाविक मारे गए, जबकि कुछ को बचाया गया। ईरानी नौसेना का यह जहाज भारत के साथ संयुक्त नौसैनिक अभ्यास में हिस्सा लेने के बाद वापस ईरान लौट रहा था। ईरानी राज्य मीडिया प्रेस टीवी के मुताबिक, रियर एडमिरल शहराम ईरानी ने मंगलवार को कहा, हम दुश्मन के इस अपराध को कभी नहीं भूलेंगे और अपने शहीदों के खून का बदला जरूर लेंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि दुश्मन को ऐसी जगह से घातक हमला किया जाएगा, जहां से वह उम्मीद भी नहीं करेगा। 'शहीदों का खून बेकार नहीं जाएगा' ईरानी नौसेना प्रमुख ने आगे कहा, आज हम अपने प्रियजनों के लिए शोक मना रहे हैं, लेकिन अल्लाह की मेहरबानी से हमने दुश्मन को घुटनों पर ला दिया है। उन्होंने इस घटना को 'नरसंहार' करार दिया और कहा कि ईरान इस हमले का जवाब 'घातक हमलों' से देगा। यह बयान ऐसे समय में आया है जब ईरान और अमेरिका के बीच तनाव पहले से ही चरम पर है। यह घटना द्वितीय विश्व युद्ध के बाद पहली बार थी, जब अमेरिकी पनडुब्बी ने किसी दुश्मन जहाज को टॉरपीडो से डुबोया है। आईआरआईएस डेना एक फ्रिगेट था, जो ईरानी नौसेना का महत्वपूर्ण हिस्सा था। जहाज पर सवार नाविक भारत में इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू में शामिल होने के बाद वापस लौट रहे थे। हमले के बाद श्रीलंका की नौसेना ने बचाव अभियान चलाया, लेकिन अधिकांश नाविक जहाज के साथ ही डूब गए। यह भी पढ़ें: आइरिस डेना पर हमले का जवाब देगा ईरान, सेना प्रमुख ने दी चेतावनी.
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। ईरानी नौसेना के कमांडर रियर एडमिरल शहराम ईरानी ने अमेरिका के खिलाफ बड़ा कदम उठाने की कसम खाई है। उन्होंने कहा है कि ईरानी नौसेना अपने 87 नाविकों की मौत का बदला जरूर लेगी। यह हमला 4 मार्च को हुआ था, जब अमेरिकी पनडुब्बी ने अंतरराष्ट्रीय जल में श्रीलंका के गल्ले तट के पास ईरानी नौसेना के जहाज IRIS Dena को डुबो दिया। इस घटना में कम से कम 87 ईरानी नाविक मारे गए, जबकि कुछ को बचाया गया। ईरानी नौसेना का यह जहाज भारत के साथ संयुक्त नौसैनिक अभ्यास में हिस्सा लेने के बाद वापस ईरान लौट रहा था। ईरानी राज्य मीडिया प्रेस टीवी के मुताबिक, रियर एडमिरल शहराम ईरानी ने मंगलवार को कहा, हम दुश्मन के इस अपराध को कभी नहीं भूलेंगे और अपने शहीदों के खून का बदला जरूर लेंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि दुश्मन को ऐसी जगह से घातक हमला किया जाएगा, जहां से वह उम्मीद भी नहीं करेगा। 'शहीदों का खून बेकार नहीं जाएगा' ईरानी नौसेना प्रमुख ने आगे कहा, आज हम अपने प्रियजनों के लिए शोक मना रहे हैं, लेकिन अल्लाह की मेहरबानी से हमने दुश्मन को घुटनों पर ला दिया है। उन्होंने इस घटना को 'नरसंहार' करार दिया और कहा कि ईरान इस हमले का जवाब 'घातक हमलों' से देगा। यह बयान ऐसे समय में आया है जब ईरान और अमेरिका के बीच तनाव पहले से ही चरम पर है। यह घटना द्वितीय विश्व युद्ध के बाद पहली बार थी, जब अमेरिकी पनडुब्बी ने किसी दुश्मन जहाज को टॉरपीडो से डुबोया है। आईआरआईएस डेना एक फ्रिगेट था, जो ईरानी नौसेना का महत्वपूर्ण हिस्सा था। जहाज पर सवार नाविक भारत में इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू में शामिल होने के बाद वापस लौट रहे थे। हमले के बाद श्रीलंका की नौसेना ने बचाव अभियान चलाया, लेकिन अधिकांश नाविक जहाज के साथ ही डूब गए। यह भी पढ़ें: आइरिस डेना पर हमले का जवाब देगा ईरान, सेना प्रमुख ने दी चेतावनी
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