2007 वर्ल्डकप में पाकिस्तान पर जीत के साथ भारत 3 प्वाइंट लेकर सुपर-8 में पहुंचा जहां उसे पहले ही मुकाबले में न्यूजीलैंड से हार मिली. उसके अगले दो मुकाबले साउथ अफ्रीका और इंग्लैंड के साथ खेले जाने थे. दोनों ही टीमें फॉर्म में थीं, फिर टीम कैसे सेमीफाइनल तक पहुंची और विजेता बनी.
साउथ अफ्रीका में जोहांसबर्ग क्रिकेट ग्राउंड पर सुपर-8 का पहला मुकाबला खेला जा रहा था. तारीख थी 16 सितंबर 2007. भारत के सामने थी न्यूजीलैंड, जिसने पहले बल्लेबाजी की और भारत के सामने 190 रन का लक्ष्य रखा.
जवाब में खेलने उतरी भारत की टीम महज 180 रन ही बना सकी. गौतम गंभीर और वीरेंद्र सहवाग के अलावा भारत की पूरी बल्लेबाजी फ्लॉप रही. न्यूजीलैंड ने 10 रन से जीता ही नहीं बल्कि भारत के लिए सेमीफाइनल में पहुंचने की राह को मुश्किल बनाया. ठीक वैसे, जैसे इस बार साउथ अफ्रीका ने किया है. अंतर सिर्फ इतना है कि बड़ी हार की वजह से भारत का रन रेट खराब हुआ है. मगर पिक्चर अभी बाकी है… 2007 में साउथ अफ्रीका में पहला टी-20 वर्ल्डकप आयोजित हुआ था. उस समय तक दुनिया में कुछ देशों के पास इस फॉर्मेट का अनुभव था, मगर लगभग सभी टीमें नई थीं. ऐसा पहली बार हो रहा था जब भारत की टीम में सचिन, गांगुली, द्रविण और लक्ष्मण जैसे दिग्गज नहीं थे. कप्तानी महेंद्र सिंह धोनी संभाल रहे थे. भारत ग्रुप डी में था, जिसमें पाकिस्तान और स्कॉटलैंड थे. भारत का पहला मुकाबला स्कॉटलैंड के साथ जो बारिश में धुल गया. दोनों टीमों को एक-एक प्वाइंट मिला. दूसरा मैच चिर प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान के खिलाफ था जो टाई रहा और मैच का फैसला बॉल आउट से किया गया. मुश्किल थी आगे की राह पाकिस्तान पर जीत के साथ भारत 3 प्वाइंट लेकर सुपर-8 में पहुंचा जहां उसे पहले ही मुकाबले में न्यूजीलैंड से हार मिली. उसके अगले दो मुकाबले साउथ अफ्रीका और इंग्लैंड के साथ खेले जाने थे. दोनों ही टीमें फॉर्म में थीं और ये माना जा रहा था कि भारत के लिए मुश्किल होने वाला है. दूसरा मैच हुआ इंग्लैंड के साथ, जिसे कौन ही भूल सकता है. ये वही मैच था, जिसमें युवराज सिंह ने स्टुअर्ट ब्रॉड पर एक ही ओवर में 6 छक्के मारे थे. युवराज सिंह ने स्टुअर्ट ब्रॉड के ओवर में लगाए थे 6 छक्के. युवराज से पहले सहवाग और गौतम गंभीर ने अंग्रेज टीम पर भड़ास निकाली थी और भारत की जीत की पटकथा लिख दी थी. हालांकि अकेले इस जीत से कुछ होने वाला नहीं था, क्योंकि भारत का रन रेट बहुत अच्छा नहीं था. न्यूजीलैंड इससे पहले इंग्लैंड के साथ हुए मैच को भी जीत कर सेमीफाइनल में पहले ही अपनी जगह लगभग पक्की कर चुकी थी. इधर अफ्रीका ने न्यूजीलैंड को हराकर अपनी चुनौती बरकरार रखी थी और भारत की मुश्किल बढ़ा दी थी. वह इंग्लैंड के खिलाफ भी जीत हासिल कर चुका था. यानी 4 टीमों में इंग्लैंड का आगे पहुंचने की उम्मीद खत्म हो चुकी थी, मगर बाकी तीनों टीमों के बीच जंग थी. भारत और अफ्रीका के मैच था निर्णायक भारत और अफ्रीका के बीच होने वाला मैच निर्णायक था, क्योंकि अब तक साउथ अफ्रीका और न्यूजीलैंड 2-2 मैच जीत चुके थे. मुश्किल ये थी कि भारत जीत के बाद भी प्वाइंट टेबल में बराबरी पर ही होता, ऐसे में निर्णायक होने वाला था नेट रन रेट. इस मामले में टीम थोड़ी आगे थी, क्योंकि उसे किसी भी टीम के खिलाफ बड़े अंतर से हार नहीं मिली थी. 20 सितंबर 2007 को भारत ने साउथ अफ्रीका को 37 रन से हराया. इससे भारत का रन रेट ज्यादा हुआ और वह सेमीफाइनल में पहुंचने वाली ग्रुप E से पहली टीम बन गई, न्यूजीलैंड दूसरे नंबर पर रही और साउथ अफ्रीका 2 जीत हासिल करने के बाद भी क्वालीफाई नहीं कर पाई. ऐसे बने विजेता सेमीफाइनल भारत और ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खेला गया, जिसमें युवराज की मैच विनिंग पारी की बदौलत भारत ने 188 रन बनाए और ऑस्ट्रेलिया को 173 रन पर रोक लिया. फाइनल में भारत और पाकिस्तान आमने सामने थे. भारत ने टॉस जीतकर बल्लेबाजी चुनी. गौतम गंभीर की ने 75 रन की पारी खेली. पाकिस्तान ने बढ़िया चेज किया. मिस्बाह ने टीम को टारगेट के करीब पहुंचाया. मगर आखिरी ओवर में जोगिंदर शर्मा की गेंद पर मिस्बाह स्कूप शॉट मारने के चक्कर में श्रीसंत के हाथों लपके गए और भारत ने 5 रन से मैच जीतकर ट्रॉफी उठाई. 2007 में ऐसा क्या था जो इस बार नहीं है… भारतीय टीम के हालात तो 2007 के जैसे ही हैं, मगर इस बार टीम के खिलाड़ी अभी तक उस स्तर का प्रदर्शन नहीं कर पाए हैं. सबसे बड़ी कमजोरी टीम के लिए रन रेट बन सकता है. हालांकि भारत के पास अभी मौके हैं, जिम्बाबे और वेस्टइंडीज के खिलाफ भारतीय टीम अगर बड़े अंतर से मैच जीतती है तो भारत का नेट रन रेट भी सुधरेगा, जिससे टीम को अगले दौर में जाने में मदद मिलेगी. हालांकि इसके लिए जरूरी है कि भारतीय टीम के बल्लेबाज बढ़िया प्रदर्शन करें जो इस बार तकरीबन फेल ही साबित हो रहे हैं. ईशान किशन, शिवम दुबे को छोड़ दें तो अब तक कोई भी भारतीय बल्लेबाज बढ़िया प्रदर्शन नहीं कर सका है, जबकि 2007 में हमारे पास गौतम गंभीर और वीरेंद्र सहवाग जैसी विस्फोटक ओपनिंग जोड़ी थी तो मध्य क्रेम में युवराज सिंह, रोहित शर्मा और खुद महेंद्र सिंह धोनी एक फिनिशर के तौर पर थे. गेंदबाजी में आरपी सिंह, इरफान पठान, एस श्रीसंत और जोगिंदर शर्मा जैसा वैरिएशन था, जिसने दुनिया की मजबूत टीमों को परेशान किया था.
India Struggle In 2026 World Cup Semifinal India Semifinal Qualification 2007 MS Dhoni First T20 World Cup Win Yuvraj Singh 6 Sixes Stuart Broad India Vs South Africa 2007 Super 8 India Net Run Rate Calculation 2007 India Vs Pakistan T20 Final 2007 Joginder Sharma Last Over Gautam Gambhir 75 Final India Comeback Story T20 World Cup भारत टी20 विश्व कप 2007 सफर भारत सेमीफाइनल क्वालिफिकेशन 2007 धोनी की कप्तानी पहला टी20 वर्ल्डकप युवराज सिंह 6 छक्के भारत बनाम दक्षिण अफ्रीका सुपर 8 2007 नेट रन रेट से भारत की एंट्री भारत पाकिस्तान फाइनल 2007 भारत की वापसी की कहानी टी20 विश्वकप
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