हाई कोर्ट का अहम फैसला, सरकारी कर्मचारी की मौत के बाद कानूनी वारिस भी कर सकेंगे मेडिकल बिलों की प्रतिपूर्ति का दावा

High Court News

हाई कोर्ट का अहम फैसला, सरकारी कर्मचारी की मौत के बाद कानूनी वारिस भी कर सकेंगे मेडिकल बिलों की प्रतिपूर्ति का दावा
Medical ExpensesLegal HeirsGovernment Employee
  • 📰 Dainik Jagran
  • ⏱ Reading Time:
  • 83 sec. here
  • 16 min. at publisher
  • 📊 Quality Score:
  • News: 82%
  • Publisher: 53%

इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने फैसला सुनाया है कि सरकारी कर्मचारी या पेंशनर की इलाज के दौरान मृत्यु होने पर उनके कानूनी वारिस भी मेडिकल खर्च की प्रतिपूर्ति का दावा कर सकते हैं।

विधि संवाददाता, जागरण, लखनऊ। इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने कहा है कि यदि किसी सरकारी कर्मचारी या पेंशनर की इलाज के दौरान मृत्यु हो जाती है या वह दावा करने में असमर्थ हो जाता है, तो उसके कानूनी वारिस भी मेडिकल खर्च की प्रतिपूर्ति का दावा कर सकते हैं। यह निर्णय जस्टिस आलोक माथुर व जस्टिस अमिताभ कुमार राय की पीठ ने चंद्र चूड़ सिंह की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। याची के पिता सेवानिवृत्त डिप्टी रजिस्ट्रार थे। उनका लखनऊ के निजी अस्पतालों में इलाज हुआ था, जहां इलाज के दौरान उनका निधन हो गया। याची ने इलाज में हुए खर्च की प्रतिपूर्ति के लिए आवेदन किया था, लेकिन विभाग ने नियमों का हवाला देकर इसे खारिज कर दिया। राज्य सरकार ने दलील दी कि उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक नियम, 2011 के तहत दावा केवल लाभार्थी द्वारा ही किया जा सकता है और याची इस श्रेणी में नहीं आता। साथ ही, प्रस्तुत उत्तराधिकार प्रमाण पत्र में निर्धारित सीमित राशि का भी हवाला दिया गया। कोर्ट ने इस तर्क को अस्वीकार करते हुए कहा कि नियम-16 की यह व्यवस्था मनमानी है और संविधान के अनुच्छेद-14 का उल्लंघन करती है। अदालत ने कहा कि यदि किसी लाभार्थी की मृत्यु हो जाती है या वह दावा करने में अक्षम हो जाता है, तो उसके कानूनी वारिसों को इस अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने 'रीडिंग डाउन' के सिद्धांत को लागू करते हुए निर्देश दिया कि नियम-16 की व्याख्या इस प्रकार की जाए कि उसमें कानूनी वारिसों को भी शामिल माना जाए, विशेषकर तब जब कोई अन्य पात्र लाभार्थी मौजूद न हो। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि वारिस होने को लेकर कोई विवाद नहीं है, तो केवल तकनीकी आधारों पर दावा खारिज करना उचित नहीं है। अंततः कोर्ट ने संबंधित प्राधिकरण को निर्देश दिया कि याची के दावे पर दो माह के भीतर पुनर्विचार कर निर्णय लिया जाए और यदि दावा सही पाया जाए तो एक माह के भीतर भुगतान सुनिश्चित किया जाए।.

विधि संवाददाता, जागरण, लखनऊ। इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने कहा है कि यदि किसी सरकारी कर्मचारी या पेंशनर की इलाज के दौरान मृत्यु हो जाती है या वह दावा करने में असमर्थ हो जाता है, तो उसके कानूनी वारिस भी मेडिकल खर्च की प्रतिपूर्ति का दावा कर सकते हैं। यह निर्णय जस्टिस आलोक माथुर व जस्टिस अमिताभ कुमार राय की पीठ ने चंद्र चूड़ सिंह की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। याची के पिता सेवानिवृत्त डिप्टी रजिस्ट्रार थे। उनका लखनऊ के निजी अस्पतालों में इलाज हुआ था, जहां इलाज के दौरान उनका निधन हो गया। याची ने इलाज में हुए खर्च की प्रतिपूर्ति के लिए आवेदन किया था, लेकिन विभाग ने नियमों का हवाला देकर इसे खारिज कर दिया। राज्य सरकार ने दलील दी कि उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक नियम, 2011 के तहत दावा केवल लाभार्थी द्वारा ही किया जा सकता है और याची इस श्रेणी में नहीं आता। साथ ही, प्रस्तुत उत्तराधिकार प्रमाण पत्र में निर्धारित सीमित राशि का भी हवाला दिया गया। कोर्ट ने इस तर्क को अस्वीकार करते हुए कहा कि नियम-16 की यह व्यवस्था मनमानी है और संविधान के अनुच्छेद-14 का उल्लंघन करती है। अदालत ने कहा कि यदि किसी लाभार्थी की मृत्यु हो जाती है या वह दावा करने में अक्षम हो जाता है, तो उसके कानूनी वारिसों को इस अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने 'रीडिंग डाउन' के सिद्धांत को लागू करते हुए निर्देश दिया कि नियम-16 की व्याख्या इस प्रकार की जाए कि उसमें कानूनी वारिसों को भी शामिल माना जाए, विशेषकर तब जब कोई अन्य पात्र लाभार्थी मौजूद न हो। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि वारिस होने को लेकर कोई विवाद नहीं है, तो केवल तकनीकी आधारों पर दावा खारिज करना उचित नहीं है। अंततः कोर्ट ने संबंधित प्राधिकरण को निर्देश दिया कि याची के दावे पर दो माह के भीतर पुनर्विचार कर निर्णय लिया जाए और यदि दावा सही पाया जाए तो एक माह के भीतर भुगतान सुनिश्चित किया जाए।

We have summarized this news so that you can read it quickly. If you are interested in the news, you can read the full text here. Read more:

Dainik Jagran /  🏆 10. in İN

Medical Expenses Legal Heirs Government Employee Pensioner Medical Claim Allahabad High Court Lucknow Bench Article 14 UP Medical Rules Uttar Pradesh Lucknow News Lucknow Latest News Lucknow News In Hindi Lucknow Samachar

 

United States Latest News, United States Headlines



Render Time: 2026-04-01 22:01:01