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कर्नाटक उच्च न्यायालय ने सोमवार को राज्य सरकार के उस फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया, जिसमें अंतरराष्ट्रीय बुकर विजेता लेखिका और कार्यकर्ता बानू मुश्ताक को 22 सितंबर से शुरू होने वाले मैसूरु दशहरा उत्सव के उद्घाटन के लिए आमंत्रित किया गया है.
की रिपोर्ट के मुताबिक, कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि अदालत को यह मानने का कोई कारण नहीं दिखता कि किसी अन्य धर्म के व्यक्ति को उद्घाटन के लिए आमंत्रित करना याचिकाकर्ताओं के कानूनी या संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन करता है. मालूम हो कि कन्नड़ भाषा की लेखक बानू मुश्ताक की कहानियों के संग्रह ‘हार्ट लैंप’ को 2025 का अंतरराष्ट्रीय बुकर पुरस्कारदशहरा उद्घाटन संबंधी मामले में मुख्य न्यायाधीश विभु बाखरू और जस्टिस सीएम जोशी की खंडपीठ ने मैसूर के पूर्व सांसद प्रताप सिम्हा, बेंगलुरु के गिरीश कुमार टी., सौम्या आर और एचएस गौरव द्वारा दायर याचिकाओं को खारिज करते हुए यह आदेश पारित किया. पीठ ने आदेश का मुख्य अंश सुनाते हुए कहा, ‘हम इस तर्क को स्वीकार करने के लिए सहमत नहीं हैं कि अलग धर्म के व्यक्ति को निमंत्रण देना संवैधानिक या कानूनी अधिकार का उल्लंघन है.’ इस संबंध में सिम्हा ने मुख्य तौर पर 2023 में एक साहित्यिक कार्यक्रम में बानू मुश्ताक द्वारा कथित ‘हिंदू-विरोधी और कन्नड़-विरोधी’ टिप्पणियों का हवाला दिया. साथ ही इस संबंध में मैसूर राजपरिवार के प्रतिनिधियों से परामर्श किए बिना उन्हें आमंत्रित किए जाने पर सवाल उठाया. सिम्हा के वकील ने तर्क दिया था कि मुश्ताक ने साहित्यिक कार्यक्रम में अपने भाषण में कहा था कि राज्य ने कन्नड़ भाषा को देवी का दर्जा देकर उन्हें कन्नड़ से दूर रखा है. उन्होंने यह भी कहा कि उनकी टिप्पणी से स्पष्ट है कि उन्हें हिंदू देवी की पूजा में कोई विश्वास नहीं है. सिम्हा ने कहा कि अगर वह अपने ‘हिंदू-विरोधी और कन्नड़-विरोधी’ बयान वापस ले लें, तो उन्हें उन्हें आमंत्रित करने में कोई आपत्ति नहीं है. याचिकाकर्ताओं की ओर से यह भी तर्क दिया गया कि राज्य सरकार एक ऐसे व्यक्ति को, जिसकी हिंदू देवी की पूजा में कोई आस्था नहीं है, दशहरा उत्सव का उद्घाटन करने के लिए कैसे आमंत्रित कर सकती है, जिसकी शुरुआत हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार देवी की पूजा से होती है. दूसरी ओर, राज्य सरकार से पेश हुए महाधिवक्ता शशि किरण शेट्टी ने बताया कि सिम्हा, जब वे सांसद थे, ने कवि निसार अहमद के साथ मंच साझा किया था, जिन्होंने 2017 में दशहरा उत्सव का उद्घाटन किया था. यह बताते हुए कि राज्य सरकार ने पहले ही एक अधिसूचना जारी कर दी है कि किसी भी व्यक्ति को, चाहे उसकी जाति या धर्म कुछ भी हो, किसी भी मंदिर में प्रवेश करने से नहीं रोका जाना चाहिए, चाहे वह मुजराई विभाग के अंतर्गत हो या किसी निजी मंदिर में. महाधिवक्ता ने कहा कि सरकार मैसूर में दशहरा उत्सव का आयोजन करके अपना धर्मनिरपेक्ष कर्तव्य निभा रही है.गृह मंत्री ने 1974 के बाद हुए आंदोलनों के ‘वित्तीय पक्ष’, ‘पर्दे के पीछे की ताक़तों’ की जांच के निर्देश दिए: रिपोर्टसुप्रीम कोर्ट ने विवादास्पद वक़्फ़ संशोधन अधिनियम के प्रमुख प्रावधानों पर रोक लगाई
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