हरियाणा की तीन हॉट सीटों पर हुआ उल्टफेर तो बदल कर रख देगा प्रदेश की राजनीति VoteKaro BJP4India INCIndia Election2019 LokSabhaElections LoksabhaElections2019 LokSabhaElection LoksabhaElection2019
और हिसार शामिल हैं, इन पर सभी की निगाहें टिक गई हैं। अगर इन तीनों हॉट सीटों पर कोई बड़ा उल्टफेर होता है तो वह प्रदेश की राजनीति को बदल कर रख देगा। माना जा रहा है कि इसका असर पांच माह बाद होने वाले विधानसभा चुनाव पर पड़ेगा। तीनों सीटों पर कांटे का मुकाबला है। रोहतक में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के बेटे दीपेंद्र हुड्डा, सोनीपत से खुद भूपेंद्र सिंह हुड्डा और हिसार से कुलदीप बिश्नोई के पुत्र भव्य बिश्नोई चुनाव मैदान में हैं। हिसार में जजपा के प्रत्याशी दुष्यंत चौटाला ने मुकाबले को रोचक बना दिया है। प्रदेश की राजनीति के जानकारों का कहना है कि भूपेंद्र सिंह हुड्डा भले ही पार्टी अध्यक्ष या विधायक दल के नेता नहीं हैं, लेकिन कांग्रेस पार्टी में उनका कद किसी भी ओर से कम नहीं हुआ।प्रदेश के अधिकांश विधायक उनके साथ रहे हैं। यही वजह रही कि विरोधी खेमें ने जब भी कांग्रेस हाईकमान से किसी मुद्दे को लेकर हुड्डा के खिलाफ कुछ भी कहा, लेकिन कभी कोई कार्रवाई नहीं हुई। कार्रवाई की बात तो छोड़िए, हाईकमान की ओर से कभी सवाल जवाब तक नहीं हुए। अब लोकसभा चुनाव में विरोधी खेमा इस बात को अपनी विजय बता रहा है कि उन्होंने भूपेंद्र हुड्डा को सोनीपत से चुनाव मैदान में उतरवा दिया। उनके बेटे रोहतक से चुनाव लड़ रहे हैं। दोनों ही सीटों पर जाट वोटरों का बाहुल्य है। दीपेंद्र की जीत में अभी तक जाट वोटर ही अहम रहे हैं।रोहतक में करीब छह लाख जाट वोटर हैं। बाकी जातियां इनसे बहुत दूर के फासले पर हैं। प्रदेश की राजनीति पर गहरी पकड़ रखने वाले प्रो.
अशोक का कहना है कि इस चुनाव में अगर भूपेंद्र हुड्डा और दीपेंद्र हुड्डा, दोनों हार जाते हैं तो प्रदेश में एक नई कांग्रेस का चेहरा देखेंगे। अर्थात पार्टी की कमान बिल्कुल नए चेहरों को दी जा सकती है। दूसरी ओर यह भी तय है कि हुड्डा परिवार अपनी दोनों सीटें निकालने में कामयाब हो जाता है तो प्रदेश कांग्रेस में दूसरे सभी धड़े कौना पकड़ते दिखाई देंगे। इसका सीधा असर विधानसभा चुनाव पर भी पड़ेगा। इसी तरह हिसार से कुलदीप बिश्नोई यदि अपने बेटे भव्य बिश्नोई को चुनाव जिता ले जाते हैं तो उनका कद बढ़ जाएगा। अगर भजनलाल परिवार की तीसरी पीढ़ी हार जाती है तो उन्हें दोबारा से पांव जमाने में लंबा वक्त लगेगा। यहां पर देवीलाल परिवार से उनके पड़पौत्र दुष्यंत चौटाला मैदान में हैं। उनकी जीत प्रदेश में जजपा को खड़ा करने में अहम भूमिका निभाएगी।यदि वे हार जाते हैं तो नई पार्टी के पांव शुरु में ही उखड़ने लगेंगे।रोहतक सीट पर भाजपा ने पूर्व सांसद एवं कांग्रेस नेता रहे अरविंद शर्मा को टिकट दिया है। शर्मा ने अभी हाल ही में भाजपा ज्वाइन की है। रोहतक में 2014 के दौरान दीपेंद्र ने नौ हल्कों में से सात में जीत दर्ज कराई थी। केवल बहादुरगढ़ और कोसली हल्के से हुड्डा को हार का सामना करना पड़ा था। ये दोनों शहरी इलाके हैं। इस बार उनका प्रभाव थोड़ा कम हुआ है, खासतौर से शहरी इलाके रोहतक, कोसली और बहादुरगढ़ में उनकी स्थिति कुछ कमजोर बताई जा रही है। बता दें कि इस सीट पर किसी दूसरी पार्टी ने कोई बड़ा जाट नेता नहीं खड़ा किया है। इससे जाट वोटबैंक नहीं बंटेगा। यह फायदा दीपेंद्र को मिल सकता है। सोनीपत सीट पर भूपेंद्र सिंह हुड्डा को न तो भाजपा प्रत्याशी रमेश कौशिक जो कि मौजूदा सांसद हैं और न ही जजपा के दिग्विजय चौटाला टक्कर दे पा रहे हैं। यहां पर जोटवोट बैंक हुड्डा और चौटाला में ज़्यादा नहीं बंटेगा। हिसार सीट पर केंद्रीय मंत्री बीरेंद्र सिंह ने अपने बेटे ब्रजेंद्र सिंह को टिकट दिलाई है। यहां पर त्रिकोणीय मुकाबला है। भाजपा के ब्रजेंद्र सिंह जाट हैं। उन्हें भरोसा है कि जाट मतदाता तो उन्हें वोट देंगे ही, साथ ही भाजपा का परंपरागत वोटर भी उनके पाले में आ जाएगा। इससे उनकी जीत आसान होगी। दूसरी ओर, दुष्यंत चौटाला जो कि यहां से मौजूदा सांसद भी हैं, वे जाट मतदाताओं के सहारे मैदान में हैं। तीसरे नंबर पर भव्य बिश्नोई हैं, जो कि पूरी तरह से गैर-जाटों के वोटों पर निर्भर हैं। अगर दुष्यंत और ब्रजेंद्र के बीच जाट वोट पूरी तरह बंटते हैं और भाजपा के वोटर ब्रजेंद्र को स्पोर्ट नहीं करते तो ही बिश्नोई की राह कुछ आसान हो सकेगी। और हिसार शामिल हैं, इन पर सभी की निगाहें टिक गई हैं। अगर इन तीनों हॉट सीटों पर कोई बड़ा उल्टफेर होता है तो वह प्रदेश की राजनीति को बदल कर रख देगा। माना जा रहा है कि इसका असर पांच माह बाद होने वाले विधानसभा चुनाव पर पड़ेगा। तीनों सीटों पर कांटे का मुकाबला है। रोहतक में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के बेटे दीपेंद्र हुड्डा, सोनीपत से खुद भूपेंद्र सिंह हुड्डा और हिसार से कुलदीप बिश्नोई के पुत्र भव्य बिश्नोई चुनाव मैदान में हैं। हिसार में जजपा के प्रत्याशी दुष्यंत चौटाला ने मुकाबले को रोचक बना दिया है।प्रदेश की राजनीति के जानकारों का कहना है कि भूपेंद्र सिंह हुड्डा भले ही पार्टी अध्यक्ष या विधायक दल के नेता नहीं हैं, लेकिन कांग्रेस पार्टी में उनका कद किसी भी ओर से कम नहीं हुआ।प्रदेश के अधिकांश विधायक उनके साथ रहे हैं। यही वजह रही कि विरोधी खेमें ने जब भी कांग्रेस हाईकमान से किसी मुद्दे को लेकर हुड्डा के खिलाफ कुछ भी कहा, लेकिन कभी कोई कार्रवाई नहीं हुई। कार्रवाई की बात तो छोड़िए, हाईकमान की ओर से कभी सवाल जवाब तक नहीं हुए। अब लोकसभा चुनाव में विरोधी खेमा इस बात को अपनी विजय बता रहा है कि उन्होंने भूपेंद्र हुड्डा को सोनीपत से चुनाव मैदान में उतरवा दिया। उनके बेटे रोहतक से चुनाव लड़ रहे हैं। दोनों ही सीटों पर जाट वोटरों का बाहुल्य है। दीपेंद्र की जीत में अभी तक जाट वोटर ही अहम रहे हैं।रोहतक में करीब छह लाख जाट वोटर हैं। बाकी जातियां इनसे बहुत दूर के फासले पर हैं। प्रदेश की राजनीति पर गहरी पकड़ रखने वाले प्रो. अशोक का कहना है कि इस चुनाव में अगर भूपेंद्र हुड्डा और दीपेंद्र हुड्डा, दोनों हार जाते हैं तो प्रदेश में एक नई कांग्रेस का चेहरा देखेंगे। अर्थात पार्टी की कमान बिल्कुल नए चेहरों को दी जा सकती है। दूसरी ओर यह भी तय है कि हुड्डा परिवार अपनी दोनों सीटें निकालने में कामयाब हो जाता है तो प्रदेश कांग्रेस में दूसरे सभी धड़े कौना पकड़ते दिखाई देंगे। इसका सीधा असर विधानसभा चुनाव पर भी पड़ेगा। इसी तरह हिसार से कुलदीप बिश्नोई यदि अपने बेटे भव्य बिश्नोई को चुनाव जिता ले जाते हैं तो उनका कद बढ़ जाएगा। अगर भजनलाल परिवार की तीसरी पीढ़ी हार जाती है तो उन्हें दोबारा से पांव जमाने में लंबा वक्त लगेगा। यहां पर देवीलाल परिवार से उनके पड़पौत्र दुष्यंत चौटाला मैदान में हैं। उनकी जीत प्रदेश में जजपा को खड़ा करने में अहम भूमिका निभाएगी।यदि वे हार जाते हैं तो नई पार्टी के पांव शुरु में ही उखड़ने लगेंगे।रोहतक सीट पर भाजपा ने पूर्व सांसद एवं कांग्रेस नेता रहे अरविंद शर्मा को टिकट दिया है। शर्मा ने अभी हाल ही में भाजपा ज्वाइन की है। रोहतक में 2014 के दौरान दीपेंद्र ने नौ हल्कों में से सात में जीत दर्ज कराई थी। केवल बहादुरगढ़ और कोसली हल्के से हुड्डा को हार का सामना करना पड़ा था। ये दोनों शहरी इलाके हैं। इस बार उनका प्रभाव थोड़ा कम हुआ है, खासतौर से शहरी इलाके रोहतक, कोसली और बहादुरगढ़ में उनकी स्थिति कुछ कमजोर बताई जा रही है। बता दें कि इस सीट पर किसी दूसरी पार्टी ने कोई बड़ा जाट नेता नहीं खड़ा किया है। इससे जाट वोटबैंक नहीं बंटेगा। यह फायदा दीपेंद्र को मिल सकता है। सोनीपत सीट पर भूपेंद्र सिंह हुड्डा को न तो भाजपा प्रत्याशी रमेश कौशिक जो कि मौजूदा सांसद हैं और न ही जजपा के दिग्विजय चौटाला टक्कर दे पा रहे हैं। यहां पर जोटवोट बैंक हुड्डा और चौटाला में ज़्यादा नहीं बंटेगा। हिसार सीट पर केंद्रीय मंत्री बीरेंद्र सिंह ने अपने बेटे ब्रजेंद्र सिंह को टिकट दिलाई है। यहां पर त्रिकोणीय मुकाबला है। भाजपा के ब्रजेंद्र सिंह जाट हैं। उन्हें भरोसा है कि जाट मतदाता तो उन्हें वोट देंगे ही, साथ ही भाजपा का परंपरागत वोटर भी उनके पाले में आ जाएगा। इससे उनकी जीत आसान होगी। दूसरी ओर, दुष्यंत चौटाला जो कि यहां से मौजूदा सांसद भी हैं, वे जाट मतदाताओं के सहारे मैदान में हैं। तीसरे नंबर पर भव्य बिश्नोई हैं, जो कि पूरी तरह से गैर-जाटों के वोटों पर निर्भर हैं। अगर दुष्यंत और ब्रजेंद्र के बीच जाट वोट पूरी तरह बंटते हैं और भाजपा के वोटर ब्रजेंद्र को स्पोर्ट नहीं करते तो ही बिश्नोई की राह कुछ आसान हो सकेगी।
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