सीताफल एक्सीलेंस सेंटर में मौसम खराब, फिर भी बढ़िया पैदावार: 1100 किलो की हुई बिक्री, सरस्वती-7, सुपर गोल्ड...

Bad Weather At The Custard Apple Excellence Center News

सीताफल एक्सीलेंस सेंटर में मौसम खराब, फिर भी बढ़िया पैदावार: 1100 किलो की हुई बिक्री, सरस्वती-7, सुपर गोल्ड...
Yet Good Yield
  • 📰 Dainik Bhaskar
  • ⏱ Reading Time:
  • 198 sec. here
  • 6 min. at publisher
  • 📊 Quality Score:
  • News: 86%
  • Publisher: 51%

चित्तौड़गढ़ के सीताफल एक्सीलेंस सेंटर में इस साल मौसम साथ न देने के बावजूद भी अच्छी पैदावार देखने को मिली है। पिछले दो सालों की तुलना में इस बार सीताफल की क्वालिटी और मात्रा, दोनों ही बेहतर रहीं।

चित्तौड़गढ़ के सीताफल एक्सीलेंस सेंटर में इस साल मौसम साथ न देने के बावजूद भी अच्छी पैदावार देखने को मिली है। पिछले दो सालों की तुलना में इस बार सीताफल की क्वालिटी और मात्रा, दोनों ही बेहतर रहीं। अक्टूबर में समय से हटकर हुई बरसात के कारण फल जल्दी पकअक्टूबर की बेमौसम बरसात ने सीताफलों के पकने की गति बढ़ा दी। आमतौर पर सीताफल धीरे पकते हैं, लेकिन इस साल मौसम बदलने से फल तेजी से तैयार हो गए। सीताफल जल्दी खराब होने वाला फल है, इसलिए उन्हें लंबे समय के लिए स्टोर करना मुश्किल होता है। इस वजह से एक्सीलेंस सेंटर को एक साथ बड़ी मात्रा में सीताफल को मार्केट में उतारना पड़ा। समय से पहले पकने और गिरने के कारण कुछ फलों को नुकसान भी हुआ।उपनिदेशक जाट बोले—गिरे फलों से नुकसान, फिर भी अच्छी कमाई एक्सीलेंस सेंटर के उपनिदेशक शंकरलाल जाट ने बताया कि बदलते मौसम की वजह से कई सीताफल समय से पहले ही पककर जमीन पर गिर गए और खराब हो गए। इसके बावजूद कुल उत्पादन बेहतर रहा। इस साल मार्केट में लगभग 1100 किलो सीताफल बेचने में सफलता मिली। इसके साथ ही लगभग 200 किलो पल्प सेंटर पर ही सुरक्षित रखा गया है, जिसे जरूरत और मांग के हिसाब से बेचा जा रहा है। मार्केट में सीताफलों की कीमत ऊपर नीचे रही है लेकिन एवरेज कीमत 40 रुपए प्रति किलो माना जा रहा है।इस साल सबसे अधिक उत्पादन और लोकप्रियता सरस्वती-7, सुपर गोल्ड और फिंगर प्रिंट किस्मों की रही। सरस्वती-7 का अधिकतम वजन इस बार 1250 ग्राम तक पहुंचा, जो पिछले कई सालों की तुलना में बड़ा आकार माना जाता है। इस किस्म की खासियत यह है कि इसमें 70 प्रतिशत तक पल्प रहता है और बीज कम होते हैं, इसलिए यह ग्राहक के लिए अधिक उपयोगी फल माना जाता है। किसानों के लिए भी यह किस्म फायदा देती है क्योंकि वजन और गुणवत्ता दोनों अच्छी रहती हैं।सुपर गोल्ड किस्म एक्सपोर्ट क्वालिटी की, वजन डेढ़ किलो तक पहुंचा सुपर गोल्ड किस्म ने भी इस साल बेहतर उत्पादन दिया। इसका वजन इस बार 700 ग्राम से लेकर डेढ़ किलो तक रहा। इस किस्म को एक्सपोर्ट क्वालिटी माना जाता है क्योंकि यह लंबे समय तक खराब नहीं होती। इसकी शेल्फ लाइफ ज्यादा होने के कारण व्यापारी और ग्राहक दोनों इसे पसंद करते हैं। इसके अलावा फिंगरप्रिंट क्वालिटी वाली किस्म भी लोगों को काफी रास आई है। इस किस्म का अधिकतम वजन 830 ग्राम दर्ज किया गया।उपनिदेशक जाट ने बताया कि लंबे समय तक नमी रहने से कुछ सीताफलों में फंगस की समस्या भी देखने को मिली। ऐसे फल जल्दी खराब हो गए और उन्हें बेच पाना संभव नहीं था। मौसम में लगातार बदलाव होने के कारण यह समस्या अक्सर आती है, लेकिन इस बार इसका असर सीमित रहा। कुल उत्पादन पर इसका ज्यादा प्रभाव नहीं पड़ा।इस सीजन में कुल 200 किलो पल्प निकाला गया। इसमें से 100 किलो पल्प मशीन से और 100 किलो हाथ से निकाला गया। हाथ से निकाले गए पल्प में मेहनत ज्यादा लगती है, लेकिन उसका स्वाद और गुणवत्ता बेहतर मानी जाती है। सेंटर पर पल्प की मांग लगातार बनी हुई है, जिसकी वजह से उत्पादन के साथ-साथ पल्प प्रोसेसिंग पर भी ध्यान दिया गया।शादी-ब्याह में भी आई पल्प की मांग, रिटेल शॉप पर खूब बिक्री सीताफल एक्सीलेंस सेंटर के बाहर लगी रिटेल शॉप पर पल्प की बिक्री लगातार होती रहती है। स्थानीय लोग घर के उपयोग के लिए इसे खरीदते हैं। इस बार शादी समारोह से भी 25 किलो पल्प की विशेष मांग आई है। क्योंकि सीताफल पल्प से मिठाइयां, शेक और कई प्रकार की डिशेज बनाई जा सकती हैं, इसलिए शादी-ब्याह के समय इसकी डिमांड बढ़ जाती है।उपनिदेशक शंकरलाल जाट ने बताया कि पल्प की कीमत 200 रुपए प्रति किलो तय की गई है, जो ग्राहकों को स्वीकार्य लग रही है। अच्छी क्वालिटी और ताजगी के कारण खरीदार बिना झिझक इसे खरीद रहे हैं। स्थानीय बाजार में सीताफल और पल्प दोनों की अच्छी मांग बनी हुई है, जिससे एक्सीलेंस सेंटर को अच्छा फायदा हुआ है। पौधों की देखरेख में कृषि अनुसंधान अधिकारी सुनील कुमार खोईवाल और सहायक कृषि अधिकारी दिनेश चंद्र झवर ने अच्छा काम किया।कुल मिलाकर, अक्टूबर की बरसात और मौसम की चुनौतियों के बावजूद चित्तौड़गढ़ के सीताफल एक्सीलेंस सेंटर में इस साल का उत्पादन पिछले दो सालों की तुलना में काफी बेहतर रहा। फलों की गुणवत्ता, साइज और स्वाद ने किसानों और केंद्र दोनों को राहत दी है। एक्सीलेंस सेंटर का कहना है कि यदि अगले साल मौसम साथ देता है तो उत्पादन और भी बढ़ सकता है।सीताफल एक्सीलेंस सेंटर में मौसम खराब, फिर भी बढ़िया पैदावारकोटा में बर्फीली हवाओं का असर,आज सुबह हल्की धुंध छाईहरियाणा के 7 शहरों में 7 डिग्री से नीचे पाराकानपुर में तीन दिन से गिर रहा तापमानप्रयागराज में बढ़ी ठंड, तापमान में 5 डिग्री गिरावट.

चित्तौड़गढ़ के सीताफल एक्सीलेंस सेंटर में इस साल मौसम साथ न देने के बावजूद भी अच्छी पैदावार देखने को मिली है। पिछले दो सालों की तुलना में इस बार सीताफल की क्वालिटी और मात्रा, दोनों ही बेहतर रहीं। अक्टूबर में समय से हटकर हुई बरसात के कारण फल जल्दी पकअक्टूबर की बेमौसम बरसात ने सीताफलों के पकने की गति बढ़ा दी। आमतौर पर सीताफल धीरे पकते हैं, लेकिन इस साल मौसम बदलने से फल तेजी से तैयार हो गए। सीताफल जल्दी खराब होने वाला फल है, इसलिए उन्हें लंबे समय के लिए स्टोर करना मुश्किल होता है। इस वजह से एक्सीलेंस सेंटर को एक साथ बड़ी मात्रा में सीताफल को मार्केट में उतारना पड़ा। समय से पहले पकने और गिरने के कारण कुछ फलों को नुकसान भी हुआ।उपनिदेशक जाट बोले—गिरे फलों से नुकसान, फिर भी अच्छी कमाई एक्सीलेंस सेंटर के उपनिदेशक शंकरलाल जाट ने बताया कि बदलते मौसम की वजह से कई सीताफल समय से पहले ही पककर जमीन पर गिर गए और खराब हो गए। इसके बावजूद कुल उत्पादन बेहतर रहा। इस साल मार्केट में लगभग 1100 किलो सीताफल बेचने में सफलता मिली। इसके साथ ही लगभग 200 किलो पल्प सेंटर पर ही सुरक्षित रखा गया है, जिसे जरूरत और मांग के हिसाब से बेचा जा रहा है। मार्केट में सीताफलों की कीमत ऊपर नीचे रही है लेकिन एवरेज कीमत 40 रुपए प्रति किलो माना जा रहा है।इस साल सबसे अधिक उत्पादन और लोकप्रियता सरस्वती-7, सुपर गोल्ड और फिंगर प्रिंट किस्मों की रही। सरस्वती-7 का अधिकतम वजन इस बार 1250 ग्राम तक पहुंचा, जो पिछले कई सालों की तुलना में बड़ा आकार माना जाता है। इस किस्म की खासियत यह है कि इसमें 70 प्रतिशत तक पल्प रहता है और बीज कम होते हैं, इसलिए यह ग्राहक के लिए अधिक उपयोगी फल माना जाता है। किसानों के लिए भी यह किस्म फायदा देती है क्योंकि वजन और गुणवत्ता दोनों अच्छी रहती हैं।सुपर गोल्ड किस्म एक्सपोर्ट क्वालिटी की, वजन डेढ़ किलो तक पहुंचा सुपर गोल्ड किस्म ने भी इस साल बेहतर उत्पादन दिया। इसका वजन इस बार 700 ग्राम से लेकर डेढ़ किलो तक रहा। इस किस्म को एक्सपोर्ट क्वालिटी माना जाता है क्योंकि यह लंबे समय तक खराब नहीं होती। इसकी शेल्फ लाइफ ज्यादा होने के कारण व्यापारी और ग्राहक दोनों इसे पसंद करते हैं। इसके अलावा फिंगरप्रिंट क्वालिटी वाली किस्म भी लोगों को काफी रास आई है। इस किस्म का अधिकतम वजन 830 ग्राम दर्ज किया गया।उपनिदेशक जाट ने बताया कि लंबे समय तक नमी रहने से कुछ सीताफलों में फंगस की समस्या भी देखने को मिली। ऐसे फल जल्दी खराब हो गए और उन्हें बेच पाना संभव नहीं था। मौसम में लगातार बदलाव होने के कारण यह समस्या अक्सर आती है, लेकिन इस बार इसका असर सीमित रहा। कुल उत्पादन पर इसका ज्यादा प्रभाव नहीं पड़ा।इस सीजन में कुल 200 किलो पल्प निकाला गया। इसमें से 100 किलो पल्प मशीन से और 100 किलो हाथ से निकाला गया। हाथ से निकाले गए पल्प में मेहनत ज्यादा लगती है, लेकिन उसका स्वाद और गुणवत्ता बेहतर मानी जाती है। सेंटर पर पल्प की मांग लगातार बनी हुई है, जिसकी वजह से उत्पादन के साथ-साथ पल्प प्रोसेसिंग पर भी ध्यान दिया गया।शादी-ब्याह में भी आई पल्प की मांग, रिटेल शॉप पर खूब बिक्री सीताफल एक्सीलेंस सेंटर के बाहर लगी रिटेल शॉप पर पल्प की बिक्री लगातार होती रहती है। स्थानीय लोग घर के उपयोग के लिए इसे खरीदते हैं। इस बार शादी समारोह से भी 25 किलो पल्प की विशेष मांग आई है। क्योंकि सीताफल पल्प से मिठाइयां, शेक और कई प्रकार की डिशेज बनाई जा सकती हैं, इसलिए शादी-ब्याह के समय इसकी डिमांड बढ़ जाती है।उपनिदेशक शंकरलाल जाट ने बताया कि पल्प की कीमत 200 रुपए प्रति किलो तय की गई है, जो ग्राहकों को स्वीकार्य लग रही है। अच्छी क्वालिटी और ताजगी के कारण खरीदार बिना झिझक इसे खरीद रहे हैं। स्थानीय बाजार में सीताफल और पल्प दोनों की अच्छी मांग बनी हुई है, जिससे एक्सीलेंस सेंटर को अच्छा फायदा हुआ है। पौधों की देखरेख में कृषि अनुसंधान अधिकारी सुनील कुमार खोईवाल और सहायक कृषि अधिकारी दिनेश चंद्र झवर ने अच्छा काम किया।कुल मिलाकर, अक्टूबर की बरसात और मौसम की चुनौतियों के बावजूद चित्तौड़गढ़ के सीताफल एक्सीलेंस सेंटर में इस साल का उत्पादन पिछले दो सालों की तुलना में काफी बेहतर रहा। फलों की गुणवत्ता, साइज और स्वाद ने किसानों और केंद्र दोनों को राहत दी है। एक्सीलेंस सेंटर का कहना है कि यदि अगले साल मौसम साथ देता है तो उत्पादन और भी बढ़ सकता है।सीताफल एक्सीलेंस सेंटर में मौसम खराब, फिर भी बढ़िया पैदावारकोटा में बर्फीली हवाओं का असर,आज सुबह हल्की धुंध छाईहरियाणा के 7 शहरों में 7 डिग्री से नीचे पाराकानपुर में तीन दिन से गिर रहा तापमानप्रयागराज में बढ़ी ठंड, तापमान में 5 डिग्री गिरावट

We have summarized this news so that you can read it quickly. If you are interested in the news, you can read the full text here. Read more:

Dainik Bhaskar /  🏆 19. in İN

Yet Good Yield

 

United States Latest News, United States Headlines

Similar News:You can also read news stories similar to this one that we have collected from other news sources.

TN MRB Recruitment 2025: मेडिकल सेक्टर में शानदार अवसर! असिस्टेंट सर्जन के 1100 पदों पर बंपर भर्ती, 2 लाख से ज्यादा होगी सैलरीTN MRB Recruitment 2025: मेडिकल सेक्टर में शानदार अवसर! असिस्टेंट सर्जन के 1100 पदों पर बंपर भर्ती, 2 लाख से ज्यादा होगी सैलरीTN MRB Recruitment 2025 Vacancy: मेडिकल सर्विसेज रिक्रूटमेंट बोर्ड तमिलनाडु (TN MRB) ने असिस्टेंट सर्जन के 1100 पदों पर बंपर वैकेंसी निकाली है, जिसके लिए उम्मीदवार आधिकारिक वेबसाइट mrb.tn.gov.in पर जाकर आवेदन कर सकते हैं.
Read more »

Dharmendra First Car: धर्मेंद्र और उनकी पहली कार की भावुक कहानी, Fiat 1100 से जुड़ी यादें, देखें वीडियोDharmendra First Car: धर्मेंद्र और उनकी पहली कार की भावुक कहानी, Fiat 1100 से जुड़ी यादें, देखें वीडियोहिंदी सिनेमा के स्वर्ण युग के सबसे प्रिय सितारों में से एक धर्मेंद्र ने दुनिया को अलविदा को कह दिया। मुंबई में सोमवार को 89 वर्ष की आयु में धर्मेंद्र का निधन हो गया।
Read more »

1100 साल पुराना ममी! Canada में पत्थर से निकला डायनासोर का जीवाश्म; 1300KG वजन के बावजूद बन जाते थे शिकार1100 साल पुराना ममी! Canada में पत्थर से निकला डायनासोर का जीवाश्म; 1300KG वजन के बावजूद बन जाते थे शिकारBorealopelta Dinosaur mummy: कनाडा में 110 मिलियन साल पुराना डायनासोर Borealopelta खोजा गया है , जिसकी त्वचा, कवच और रंग पैटर्न अब भी सुरक्षित हैं.
Read more »

इटावा को जीबीसी-5 के लिए मिला 500 करोड़ रुपये का निवेश लक्ष्य, अब तक 25 प्रतिशत किया प्राप्तइटावा को जीबीसी-5 के लिए मिला 500 करोड़ रुपये का निवेश लक्ष्य, अब तक 25 प्रतिशत किया प्राप्तऔद्योगिक विकास विभाग ने जीबीसी-5 के लिए इटावा जनपद को 500 करोड़ रुपये का निवेश लक्ष्य दिया है, जिसमें से 25 प्राप्त हो चुका है। जीबीसी-4 में हुए 74 एमओयू में से 61 पर काम शुरू हो गया है, जिससे रोजगार मिल रहा है। ग्लोबल इंवेस्टर समिट-4 में 1100 करोड़ के एमओयू साइन हुए थे, जिनमें से 850 करोड़ के उद्योग शुरू हो चुके हैं। विभाग जीबीसी-5 की तैयारी कर...
Read more »

अयोध्या में ध्वजारोहण, 1100 किलोमीटर दूर लगे बाबरी मस्जिद के पोस्टर, बंगाल चुनाव से पहले गरमाई सियासतअयोध्या में ध्वजारोहण, 1100 किलोमीटर दूर लगे बाबरी मस्जिद के पोस्टर, बंगाल चुनाव से पहले गरमाई सियासतBengal Babri Masjid: हुमायूं कबीर ने 6 दिसंबर के दिन ही बेलडांगा में बाबरी मस्जिद की नींव रखने का ऐलान किया है. इसके बाद राज्य की सियासत में खलबली मच गई है. हुमायूं कबीर भी मुर्शिदाबाद पहुंच चुके हैं.
Read more »

नौसेना के 'खामोश शिकारी' का नाम INS माहे क्‍यों? सूंघकर ढूंढ लेता है दुश्मन की पनडुब्बी, पल भर में खेल खत्‍...नौसेना के 'खामोश शिकारी' का नाम INS माहे क्‍यों? सूंघकर ढूंढ लेता है दुश्मन की पनडुब्बी, पल भर में खेल खत्‍...INS Mahe Latest News: समंदर की खामोश लहरों के बीच भारतीय नौसेना का नया साइलेंट किलर INS माहे तैनात हो चुका है. 78 मीटर लंबा, 1,100 टन वॉरशिप, शैलो वॉटर में पनडुब्बियों का शिकार करने में माहिर है. हल-माउंटेड सोनार, ASW रॉकेट, टॉरपीडो और 30mm गन के साथ यह तटीय सुरक्षा का नया कवच है.
Read more »



Render Time: 2026-04-02 16:37:29