सिमरन का अपहरण करके 3 साल गैंगरेप किया: पिता और भाई का मर्डर, मां की अधजली लाश मिली; 2 को फांसी की सजा

Bihar Simran Kidnapping News

सिमरन का अपहरण करके 3 साल गैंगरेप किया: पिता और भाई का मर्डर, मां की अधजली लाश मिली; 2 को फांसी की सजा
Rajiv Kumar SinghMohammad Shamim AkhtarJournalist And Social Worker
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पिता और भाई का मर्डर, मां की अधजली लाश मिली; 2 को फांसी की सजादैनिक भास्कर की इलेक्शन सीरीज ‘अपहरण’ के पांचवें एपिसोड में आज कहानी सिमरन किडनैपिंग और गैंगरेप कांड की… 2015 का साल था और तारीख 24 फरवरी। जगह पूर्वी चंपारण जिले का ढाका। सुबह के 10:30 बज रहे थे। पुलिस एक घर में छापेमारी करने पहुंची। एक वाहन चोरी के मामले में पुलिस आरोपी शमीम को पकड़ने पहुंची थी। पुलिस जब उस घर के एक कमरे में पहुंची तो दरवाजे पर दो-दो ताले लगे थे। ताला तोड़कर पुलिस अंदर पहुंची। अंदर कोई नहीं मिला, लेकिन पीछे के कमरे से तेज बदबू आ रही थी। पुलिस ने वो कमरा खोला तो उनके होश उड़ गए। फर्श पर एक नाबालिग लड़की बेहोशी की हालत में पड़ी थी। कपड़े फटे और बेहद मैले। कमरे में जगह-जगह मल-मूत्र के निशान थे। पुलिस ने लड़की को बाहर निकाला। वह इस कदर कमजोर हो चुकी थी कि ठीक से बोल तक नहीं पा रही थी। उसे तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहां मेडिकल चेकअप के दौरान डॉक्टरों ने पाया कि उसके शरीर पर गहरे जख्म हैं, मारपीट के निशान हैं। पीठ और जांघों पर जलाने के दाग थे। उसकी मानसिक हालत ठीक नहीं थी। शाम 6 बजे जब लड़की को होश आया, तो उसने महिला थाना प्रभारी को आपबीती बताई। ढाका कस्बे का वो घर, जहां सिमरन को बंद कर 3 साल तक गैंगरेप किया गया। पुलिस उसे उस घर से निकालती हुई। इससे पहले उसके परिवार को एक-एक करके मार दिया गया। लड़की बोली- मेरा नाम सिमरन है। मैं सीतामढ़ी जिले के एक छोटे से गांव- महुआवा टोला की रहने वाली हूं। पापा राजीव कुमार सिंह गांव के ही एक प्राइमरी स्कूल में पढ़ाते थे। साथ में खेती-बाड़ी का काम भी देखते थे। पापा के साथ मैं, भाई अमनदीप और मम्मी रीना रहती थीं। मम्मी अक्सर कहतीं- ‘बस इतना हो जाए कि बच्चे पढ़-लिख लें, यही बहुत है।’ पापा हंसकर जवाब देते- ‘अमनदीप को इंजीनियर बनाऊंगा, सिमरन टीचर बनेगी।’ 2008 की बात है। एक दिन गांव के स्कूल में एक आदमी आया। उसके गले में आईडी कार्ड था- नाम था मोहम्मद शमीम अख्तर। शमीम ने ही मुझे उस घर में बंद कर रखा था। वो पापा से खुद को पत्रकार बताता था। वो गांव में जब पापा से मिला था तब उनसे कहा था- ‘सुना है आप गांव में पढ़ाई-लिखाई का बहुत काम करते हैं।’ पापा ने कहा- ‘हां, बस थोड़ा बहुत।’ शमीम ने कहा- ‘लोकल रिपोर्टिंग के लिए आप जैसे लोगों से मिलना जरूरी है।’ उस दिन पापा और वो अखबार, खबरें, वगैरह पर बातें करते रहे। पापा को अच्छा लगा कि कोई ‘बाहर का आदमी’ गांव की बातें सुन रहा है। अगले हफ्ते शमीम फिर आया- इस बार उसके हाथ में मिठाई का डिब्बा था। कहने लगा, ‘सुना था आपकी बिटिया ने टॉप किया है, सोचा मिठाई दे दूं।’ उस दिन उसने मम्मी से भी बात की। अब वो अक्सर घर आने लगा। वो कभी हमारी पढ़ाई में मदद करता, कभी बिजली का बिल भरने में हाथ बंटाता। मम्मी कहती- ‘बड़ा भला लड़का है, सबका ख्याल रखता है।’ पापा को भी उस पर किसी तरह का शक नहीं हुआ।मम्‍मी से बोलता था- आपको तो अकेलापन महसूस होता होगा शमीम अब कुछ और खुलने लगा था। वो मम्मी से अकेले में बातें करने लगा। वो कहता- ‘आपके पति काम में बिजी रहते हैं.

.. आप कितना अकेला महसूस करती होंगी।’ मम्मी चुप रह जातीं। वो उसका इरादा समझ नहीं पा रही थीं। इस तरह वो मम्मी से नजदीकी बढ़ाने लगा। शमीम धीरे-धीरे हमारी जिंदगी का हिस्सा बन गया। अब वो कभी मम्मी के साथ आंगन में बैठता, कभी रसोई में चाय बनवाता। उस समय पापा को लगता कि ‘कोई भला इंसान’ है, जो उनके परिवार का इस तरह ख्याल रख रहा है। एक शाम पापा खेत से लौटे, तो देखा- शमीम और मम्मी दोनों घर के पीछे वाले बरामदे में थे। वे आपस में कुछ फुसफुसा रहे थे। उस दिन शमीम हंसकर बोला- ‘अरे भाई साहब, बस बच्चों की ट्यूशन की बात कर रहा हूं और कुछ नहीं,’ उस वक्त तो पापा ने कुछ नहीं कहा। लेकिन वो उस रात सो नहीं पाए। मुझे बार-बार पानी लाने को कहते। अगले दिन शमीम फिर घर आया है। इस बार उसके हाथ में मोबाइल था। वो मम्मी को कुछ दिखा रहा था। उस पर पापा ने आवाज लगाई, ‘क्या दिखा रहे हैं?’ शमीम मुस्कुराकर बोला- ‘बस एक वीडियो है, बच्चों का कार्टून।’ पापा कुछ पल उसे देखते रहे- फिर चुपचाप अपने कमरे में चले गए। इसी तरह शमीम हर दिन आता। अब उसको लेकर गांव के लोग भी फुसफुसाने लगे थे। कहते- ’रीना और वो पत्रकार... कुछ ज्यादा ही मिलने लगे हैं।’ पापा को ये सब सुनकर शर्म आती और गुस्सा भी, लेकिन वो बोलते नहीं। एक दोपहर अचानक पापा घर पहुंचे- दरवाजा भीतर से बंद था। आवाज दी- ‘रीना!’ कोई जवाब नहीं आया। पापा ने जोर से धक्का मारा। दरवाजा खुला- कमरे में शमीम था। मम्मी मेरे कमरे से निकलकर बाहर आ रही थीं। उनके बाल बिखरे हुए थे। उस दिन पापा की आंखों में गुस्सा उतर आया था। पापा ने कहा- ‘ये क्या हो रहा है?’ शमीम ने हकलाते हुए कहा- ‘कुछ नहीं भैया, आपको कोई गलतफहमी हुई है।’ पापा गुस्से से तमतमा उठे, लेकिन अपनी शराफत की वजह से कुछ कह नहीं पाए। अगले दिन शाम का वक्त था। पापा बरामदे में कुर्सी पर बैठे थे। वो अंदर ही अंदर कुछ सोच रहे थे। काफी परेशान, लेकिन कुछ कह नहीं रहे थे। थोड़ी देर में शमीम आया। सफेद कुर्ता-पायजामा पहने। काफी सजा-धजा और मुस्कुराता हुआ। उस दिन पापा ने तुरंत सीधे और सख्त लहजे में कहा- ‘शमीम, अब तुम मेरे घर मत आया करो।’ वो ठिठक गया। कहने लगा- ‘क्या हुआ राजीव जी, मैंने क्या गलती कर दी?’ पापा की आवाज धीमी थी, लेकिन बहुत गुस्से में थे। उन्होंने कहा- ‘जो कुछ चल रहा है, वह ठीक नहीं है। बच्चों के सामने, गांव में लोग बातें बना रहे हैं। पत्नी भी आज से तुमसे बात नहीं करेगी। अगर तुमने ये सब हरकतें नहीं रोकी, तो मैं पुलिस में शिकायत करूंगा।’ उसके बाद तो शमीम का चेहरा तमतमा उठा। वह कुछ पल चुप रहा, फिर धीरे से बोला, ‘अच्छा, आपको लगता है कि मैं बुरा आदमी हूं? ठीक है… अब तुम देख लेना, कौन बुरा है।’ यही कहते हुए वो चला गया।पापा को खेत में धोखे से बुलाया और गला दबाकर मार दिया कुछ ही दिन बाद की बात है। रात करीब 11 बज रहे थे, शमीम आया। उसने पापा से कहा- ‘राजीव जी, आपके रिश्तेदार की तबीयत बिगड़ गई है। जल्दी चलिए।’ पापा बिना किसी शक के सिर पर पगड़ी बांधे और चल दिए। उस वक्त भाई अमनदीप सो रहा था, लेकिन मैं जाग रही थी। पापा घर से निकले। रास्ते में जब खेत आया तो शमीम ने पापा को वहीं रोक लिया। उसने पहले से अपने दो साथियों को बुला रखा था। सभी ने पापा को घेर लिया और पीटने लगे। उस दिन पापा को बहुत मारा। तीनों ने लात-घूंसों से पीटना शुरू कर दिया। जब पापा अधमरे हो गए, तो शमीम ने उनका गला दबा दिया। जब पापा मर गए तो उनकी लाश खेत में ले जाकर फेंक दी। सुबह जब पापा घर नहीं लौटे तो मम्मी ने आवाज लगाई। लेकिन, उनका कहीं कुछ पता नहीं चला। मैं और मेरा भाई भी सो कर उठ चुके थे। पापा की तलाश शुरू हुई। गांव के लोग भी जुटने लगे। काफी तलाश के बाद गांव के बाहर एक सुनसान खेत में उनकी लाश मिली। गांव के लोगों ने तुरंत पुलिस को फोन किया। पुलिस ने मुझसे, मम्मी से और गांव के कुछ लोगों से पूछताछ की। हमारे बयान दर्ज किए, लेकिन मामला दुर्घटना में दर्ज किया। उसके बाद अगले दिन शमीम फिर घर आया। उस दिन मम्मी ने उससे कोई बात नहीं की। हम सब परेशान थे। उस दिन वो परेशान होकर चला गया।उस समय भाई केवल 11 साल का था। पापा की हत्या के बाद वो बहुत उदास रह रहा था। अक्सर मम्मी से पूछता- पापा के साथ क्या हुआ?’ वह बार-बार कहता- शमीम अंकल ने कुछ किया है क्या? लेकिन मां चुप रहतीं, कोई जवाब न देतीं। एक दिन सुबह, उसने दरवाजा खोला और मम्मी से कहा- ‘मम्मी, बाहर खेलने जा रहा हूं। जल्दी आ जाऊंगा’। वह खेलने के लिए खेतों की ओर चला गया। काफी देर हो गई, लेकिन लौटकर नहीं आया। सभी उसे खोजने लगे। काफी खोजबीन के बाद गांव में चर्चा फैल गई- ‘बेटा भी लापता हो गया।’ मम्मी और मैं बहुत रो रहे थे। उसका कहीं कुछ पता नहीं चल रहा था। कुछ दिनों बाद पुलिस को पास के गांव के पास खेत में एक बच्चे की लाश मिली। हम देखने पहुंचे। उसका चेहरा कुचल दिया गया था, जिससे पहचान में नहीं आ रहा था। उसके शरीर पर कपड़े भी नहीं थे, लेकिन उस दिन मैंने पुलिस से कहा था- ये भाई अमनदीप का शव है। पर पुलिस नहीं मानी। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में पता चला कि उसके सिर पर गहरी चोट लगी थी। गला घोंटने के निशान थे, लेकिन पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की।उसके बाद 2009 में शमीम मुझे और मम्मी को महुआवा टोला से, पूर्वी चंपारण के ढाका लेकर आया। वहां गांधी नगर मोहल्ले में एक छोटा किराए का घर लिया। वो हम दोनों का खर्च उठा रहा था। खुद भी आता-जाता रहता। गांव और मोहल्ले के लोगों से कहता- ‘मैं इनका गार्जियन हूं।’ फिर उस पर कोई शक नहीं करता। उस दौरान शमीम मम्मी को लगातार मना रहा था कि वह उससे कोर्ट में चलकर शादी कर लें। लेकिन मम्मी तैयार नहीं हुईं। 2013 की गर्मियों में एक दिन सुबह मम्मी भी लापता हो गईं। मैं सो कर उठी तो वो घर पर नहीं थीं। शमीम उस दिन घर पर मौजूद था। उसने कहा, ‘तुम्हारी मम्मी अभी लौटकर आ जाएंगी, कहीं गई हैं।’ लेकिन वो लौट कर नहीं आईं। उसके बाद मेरा डर बढ़ गया था। मैं बार-बार उससे पूछती- ‘बताओ मम्मी कहां हैं?’ लेकिन वो मुझे डराने लगा कि- ‘चुप रहो, कुछ मत कहो। बाहर मत जाना, वर्ना जान से मार देंगे।’ उसके बाद मैं डर-डरकर रहने लगी। बहुत परेशान थी। कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि अब कहां जाऊं। डर था कि अगर भागूंगी तो वो कहीं मुझे भी न मार दे। मम्मी के लापता हुए अब तक एक महीने हो चुके थे। ढाका के पास खेत में एक महिला की अधजली लाश मिली। चर्चा थी- ‘शायद यह रीना की लाश है।’ पुलिस आई, लाश को कब्जे में लिया, लेकिन रिपोर्ट में लिखा- ‘शव की पहचान नहीं हो पाई।’अब जब मैं अकेले हो गई, तो शमीम ने मुझे गांधी नगर के उसी सुनसान घर में शिफ्ट कर दिया, जहां से आप लोगों ने अब मुझे ढूंढा है। उसने जब उस घर में मुझे रखा तो मेरा मोबाइल छीन लिया। उस घर में मुझे अक्सर नशे की गोलियां, इंजेक्शन दिए जाते, ताकि कोई विरोध न कर सकूं। उसमें मुझे पिछले 3 साल से बंद रखा गया था। वहां बहुत सारे लोग आते और मेरे साथ गंदा काम करते। मेरे साथ शमीम अख्तर, राजू मियां, इसरार मियां, माजिद, अमित और चंदन ने गंदा काम किया। ये लोग रोज मुझे मारते भी थे। कई बार भूखा रखा और धमकाया कि अगर बाहर भागने की कोशिश की तो वे मां की तरह मुझे भी जला देंगे।पुलिस ने उसी रात पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज किया। सिमरन को एक शेल्टर होम में पहुंचाया। वहां 3 महीने तक उसकी काउंसलिंग कराई। उसके बाद पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज किया। उसके मुताबिक, जिस घर में सिमरन को रखा गया था, उसमें न खिड़की थी, न ठीक से बिजली-पानी की व्यवस्था। आस-पास कोई पड़ोसी भी नहीं था। दरवाजे पर बाहर से दो-दो ताले लगते थे। इस दौरान शमीम उसे बाहर से खाना लाकर देता। इस घर का मालिक शमीम का ही परिचित था, जो हर महीने चुपचाप किराया लेकर चला जाता था। पुलिस की रिपोर्ट के मुताबिक, एक दिन शमीम अख्तर, उसके करीबी राजू मियां, उस घर की देखरेख करने वाला इसरार मियां, कस्बे के एक होटल में काम करने वाले माजिद, ढाका के एक स्थानीय राजनीतिक नेता का रिश्तेदार अमित, उसी मोहल्ले में रहने वाले चंदन ने उसे नशे का इंजेक्शन दिया और सभी ने उसके साथ बलात्कार किया। उसके बाद यह सिलसिला हर दिन का हो गया। ये लोग रोज आते और सिमरन के साथ रेप करते।पुलिस ने FIR दर्ज करने के बाद आरोपियों को दबोचने का प्लान बनाया। पुलिस की टीमों ने जगह-जगह छापे मारने शुरू किए। फरवरी 2015 की सुबह थी। सूचना खबर मिली कि राजू मियां और चंदन गांधीनगर मोहल्ले के पास खिरबी टोला गांव के एक रिश्तेदार के घर छिपे हुए हैं। पुलिस ने दो अलग-अलग टीमें बनाई। एक टीम को राजू मियां को पकड़ना था और दूसरी टीम चंदन के लिए लगाई गई। टीमें खिरबी टोला गांव पहुंची। राजू मियां को पता चल गया। वो गांव से भागने लगा। खेतों से होते हुए गांव के पास ईंट-भट्ठे तक पहुंचा। पुलिस ने उसे भागते देख लिया और पीछा किया। वह ईंट-भट्ठे के शेड के पीछे छिपना चाहा, लेकिन पुलिस ने दबोच लिया। वहीं दूसरी तरफ, चंदन गांव में ही एक बैलगाड़ी के शेड के नीचे छिपा था। जब उसने भागने की कोशिश की, तो पुलिस ने उसे भी दबोच लिया। गांव में अब हलचल थी। लोग खिड़कियों और दरवाजों से पुलिस की कार्रवाई देख रहे थे। राजू मियां और चंदन को पुलिस थाने लेकर गई। ढाका थाना प्रभारी ने मीडिया को बताया, ‘गांव वालों की मदद से दोनों की गिरफ्तारी हुई। इनसे पूछताछ में कई और नाम सामने आए हैं। आरोपियों को 26 फरवरी को न्यायिक हिरासत में भेजा गया है और पुलिस ने कोर्ट से शमीम अख्तर और इसरार मियां के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट की मांग की है।’2017 में मामला कोर्ट पहुंचा। पुलिस ने चार्जशीट दाखिल की। कुल छह लोगों पर मामला दर्ज था। मुख्य आरोपी शमीम अख्तर अब भी फरार था। मुकदमे में कुल 12 गवाहों के बयान दर्ज हुए। इसमें मेडिकल अफसर, आईओ, शेल्टर होम सुपरिटेंडेंट और सिमरन का बयान शामिल थे। सिमरन ने कोर्ट में बताया- ‘मुझे एक कमरे में बंद रखा गया। मेरे शरीर पर नाखूनों के निशान थे। हर तीसरे दिन कोई नया आदमी आता, मुझे मारता और मेरे साथ बलात्कार करता।’ जुलाई 2022 में जज ने फैसला सुनाया। राजू मियां और इसरार मियां को दोषी पाया गया। सजा थी- फांसी। साथ ही 75-75 हजार रुपए का जुर्माना। बाकी आरोपियों- चंदन, माजिद और अमित को सबूतों अभाव में बरी कर दिया गया। फैसले को लेकर सिमरन ने कहा- ‘मुझे पूरा न्याय नहीं मिला। शमीम, माजिद, अमित और चंदन को भी फांसी होनी चाहिए।’ बिहार में इससे पहले जहां कानून व्यवस्था को लेकर पूर्व की आरजेडी सरकार पर सवाल उठते थे, वहीं इस कांड ने अब नीतीश सरकार की कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े करने लगे। विपक्ष ने नीतीश को घेरना शुरू कर दिया। हालांकि विपक्ष इस घटना का सियासी फायदा नहीं उठा पाया।जब अटल बिहारी एक बच्चे के अपहरण पर रो पड़े:तुम्हारा बाप अमीर है, पैसे भिजवा दो वरना काट डालेंगे:ब्राह्मण 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