मिथलेश शर्मा, सहारनपुर की रहने वाली 47 वर्षीय महिला, प्रयागराज महाकुंभ में स्नान करने गई। उन्होंने अपने स्नान अनुभव, भीड़, व्यवस्थाओं और प्रयागराज महाकुंभ के आत्मिक महत्व के बारे में बताया।
अंकुर सैनी/सहारनपुर: प्रयागराज में महाकुंभ मेला 2025 का आयोजन ऐतिहासिक महत्व रखता है. यह महाकुंभ विशेष रूप से 144 वर्षों के बाद हो रहा है और इस समय बन रहा दुर्लभ खगोलीय संयोग इसे और भी खास बनाता है. प्रयागराज महाकुंभ में देश ही नहीं विदेशों से भी लोग स्नान के लिए पहुंच रहे हैं.
सहारनपुर की रहने वाले 47 वर्षीय मिथलेश शर्मा अकेले ही प्रयागराज स्नान के लिए गई थी. मिथलेश शर्मा ने आने-जाने की व्यवस्थाओं से लेकर प्रयागराज महाकुंभ में स्नान के अनुभव को लोकल 18 से साझा किया. मन में एक अटूट आस्था लेकर घर से निकली मिथलेश शर्मा के मन में था कि अगर महाकुंभ के दौरान उनको कुछ हो भी जाता है तो कोई गम नहीं होगा, लेकिन बस स्नान जरूर करना है. सहारनपुर से प्रयागराज महाकुंभ के लिए मिथलेश ट्रेन से गई और महाकुंभ में जाने के बाद वहां की भीड़ को देखकर मन में एक घबराहट सी महसूस हुई. मिथलेश बताती हैं कि इतनी भीड़ उन्होंने अपनी जिंदगी में पहले कभी नहीं देखी. लोगों के सर आपस में टकरा रहे थे पैर रखने की जगह नहीं थी. लेकिन मन में था स्नान जरूर करना है. घंटो की मशक्कत के बाद मिथलेश त्रिवेणी घाट पर पहुंची और स्नान करने से पहले का अनुभव बताया. मिथलेश बताती हैं कि स्नान करने से पहले उनके मन में एक घबराहट साथ ही शरीर काफी भारी-भारी महसूस हो रहा था. लेकिन जैसे ही उन्होंने संगम में डुबकी लगाने के लिए पैर आगे बढ़ाया तो धीरे-धीरे उनका शरीर शांत होता चला गया और डुबकी लगाने के बाद पूरा शरीर हल्का सा पड़ गया. स्नान करते हुए उनका मन नदी से बाहर आने का नहीं कर रहा था. जबकि बहुत से लोग पानी को देखकर काफी ठंड महसूस कर रहे थे. उन्होंने काफी देर तक संगम में स्नान किया. स्नान करने के बाद उनको एक अजीब सा एहसास हुआ. मिथलेश बताती हैं कि संगम में स्नान के बाद ऐसा लगा कि जैसे उनके सारे पाप धुल गए हो और स्वर्ग यही पर है. चारों तरफ अलग ही नजारा दिखने लगा. व्यवस्थाओं की बात करें तो मिथलेश ने बताया कि घर से निकलने से लेकर महाकुंभ स्नान और वापस अपने घर तक पहुंचने तक सभी व्यवस्थाएं अच्छी मिली, खाने-पीने की सभी व्यवस्थाएं निशुल्क थी. लोग सेवा में लगे हुए थे और संगम का पानी भी साफ सुथरा था. भीड़ को देखकर दंग रह गई थी मिथलेश मिथलेश बताती है कि महाकुंभ की भीड़ को देखकर लोग वापस भाग रहे थे, लेकिन जो लोग अपने मन में श्रद्धा लिए स्नान के लिए गए थे उनको हकीकत में पापों से मुक्ति और स्वर्ग की प्राप्ति हुई. मिथलेश के स्नान करने के बाद अब उनके परिवार के अन्य लोग भी जल्द प्रयागराज के लिए निकलेंगे और स्नान कर वहां का अद्भुत नजारा और सुखद एहसास जरूर करेंगे. मिथलेश का कहना है कि प्रयागराज महाकुंभ में अगर वह मर भी जाती ,तब भी उनके परिवार वालों को किसी चीज का कोई गम न होता. प्रयागराज से घर वापस लौटने पर अब उनका मन नहीं लग रहा. प्रयागराज की ही याद आ रही है.
MUKHAB PRAYAGRAJ SNAN BHID AYASH
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