सत्ता समर: राष्टीय चेहरे बनाता रहा है दिल्ली का चुनावी मैदान

United States News News

सत्ता समर: राष्टीय चेहरे बनाता रहा है दिल्ली का चुनावी मैदान
United States Latest News,United States Headlines
  • 📰 Jansatta
  • ⏱ Reading Time:
  • 189 sec. here
  • 5 min. at publisher
  • 📊 Quality Score:
  • News: 79%
  • Publisher: 63%

देश की राजधानी और लगातार बढ़ती जनसंख्या के कारण दिल्ली राष्ट्रीय नेताओं को संसद में भेजने का एक बड़ा ठिकाना आज भी बनी हुई है। 1912 में जब अंग्रेजों ने कलकत्ता के स्थान पर राजधानी बनाने का फैसला किया तब दिल्ली की आबादी 2,32,837 थी। आज दिल्ली की आबादी दो करोड़ के पार है।\n

देश की राजधानी और लगातार बढ़ती जनसंख्या के कारण दिल्ली राष्ट्रीय नेताओं को संसद में भेजने का एक बड़ा ठिकाना आज भी बनी हुई है। 1912 में जब अंग्रेजों ने कलकत्ता के स्थान पर राजधानी बनाने का फैसला किया तब दिल्ली की आबादी 2,32,837 थी। आज दिल्ली की आबादी दो करोड़ के पार है। मनोज मिश्र March 17, 2019 4:15 AM प्रतीकात्मक फोटो देश की राजधानी और लगातार बढ़ती जनसंख्या के कारण दिल्ली राष्ट्रीय नेताओं को संसद में भेजने का एक बड़ा ठिकाना आज भी बनी हुई है। 1912 में जब अंग्रेजों ने कलकत्ता के स्थान पर राजधानी बनाने का फैसला किया तब दिल्ली की आबादी 2,32,837 थी। आज दिल्ली की आबादी दो करोड़ के पार है। आजादी के बाद 1952 के पहले चुनाव में दिल्ली की दोनों सीटों पर स्वाधीनता सेनानी सीके नायर और सुचेता कृपलानी ने चुनाव जीते। सुचेता कृपलानी लगातार दो बार चुनाव जीतने के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में सक्रिय हो गर्इं और मुख्यमंत्री बनीं। दिल्ली में आबादी बढ़ने के साथ लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ती गई। लेकिन 1967 में सात सीटें होने के बाद सीटों की संख्या बढ़नी रुक गई और 2008 में सीटों की संख्या सात रखते हुए सीटों का परिसीमन करके सभी लोकसभा सीटों की आबादी बराबर करने के प्रयास हुए। अबादी का घनत्व समान न होने के कारण इन दस सालों में ही फिर से सीटों की आबादी में काफी अंतर आ गया। लेकिन हर लोकसभा सीट के नीचे दस-दस विधानसभा सीटें होने के कारण कुछ तो समानता अभी भी दिख रही है। बड़ी संख्या में पाकिस्तान से विस्थापित होकर पंजाब, सिंध और कुछ बंगाल मूल के लोग आए। आजादी के साथ ही केंद्र सरकार के दफ्तर में काम करने सरकारी कर्मचारी आए।फिर दिल्ली में कल- कारखाने बढ़े और प्रवासी लोगों का आना बढ़ा। उत्तराखंड के लोग बड़ी संख्या में आए। 1982 के एशियाड खेलों के समय बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य हुए और तभी से बिहार , मध्य प्रदेश , ओड़िशा, पूर्वी उत्तर प्रदेश आदि राज्यों से बड़ी संख्या में लोग आए। नई दिल्ली सीट से दो बार सुचेता कृपलानी, दो बार अटल बिहारी वाजपेयी, दो बार लालकृष्ण आडवाणी और दो बार दिल्ली के उप राज्यपाल रहे पूर्व नौकरशाह जग मोहन सांसद रहे। चांदनी चौक सीट से जनसंघ के बड़े नेता रहे वसंत राव ओक को कांग्रेस के दिग्गज राधारमण ने पराजित किया। स्वाधीनती सेनानी सुभद्रा जोशी चांदनी चौक से 1971 में चुनाव जीती और 1977 में पराजित हो गई। दिल्ली के पहले मुख्यमंत्री चौधरी ब्रह्म प्रकाश सदर से एक बार और बाहरी दिल्ली से चार बार सांसद बने। भाजपा के दिग्गज कृष्णलाल शर्मा दो बार बाहरी दिल्ली से सांसद बने। दिग्गज नेता और जीवन के अधिकांश समय सत्ता के शीर्ष पर रहे जगजीवन राम की पुत्री आरक्षित सीट करोल बाग से दो बार संससद रहीं, लेकिन एक बार वहीं से पराजित होकर वे फिर से बिहार की अपने पिता की परंपरागत सासाराम सीट पहुंच गर्इं। वहीं से चुनाव जीत कर लोक सभा अध्यक्ष बनी। नई दिल्ली की तरह ही दक्षिणी दिल्ली सीट 2008 के परिसीमन से पहले वीआईपी सीट हुआ करती थी। इस सीट से सुषमा स्वराज्य दो बार चुनाव जीतीं। भाजपा के मदन लाल खुराना और विजय कुमार मल्होत्रा दक्षिणी दिल्ली और सदर से सांसद रहे। वहां दिल्ली के दूसरे मुख्यमंत्री साहिब सिंह बाहरी दिल्ली से सांसद रहे। कांग्रेस के एचकेएल कपूर पूर्वी दिल्ली से, सज्जन कुमार बाहरी दिल्ली से तो जगदीश टाइटलर सदर और जय प्रकाश अग्रवाल चांदनी चौक से सांसद रहे। क्रिकेटर चेतन चौहान पूर्वी दिल्ली से पराजित हुए। जनता पार्टी के टिकट पर सिकंदर बख्य चांदनी चौक से सांसद रहे तो भाजपा के विजय गोयल सदर और चांदनी चौक दोनों ही सीटों से सांसद रहे। स्मृति ईरानी चांदनी चौक से पराजित हुर्इं तो कांग्रेस के कपिल सिब्बल विजयी रहे। 1984 में दक्षिणी दिल्ली से संसद रहे ललित माकन की आतंकवादियों ने हत्या कर दी थी। 1985 में उस सीट से उप चुनाव में कांग्रेस दिग्गज अर्जुन सिंह चुनाव जीते और कांग्रेस के इतिहास में पहली बार उपाध्यक्ष बने। पंजाब में राजीव-लौंगेवाल समझौता का श्रेय उनको जाता है। ’अभी सात सीटें हैं, लेकिन 2008 के परिसीमन में सीटों के नाम बदल गए। अब नई दिल्ली, दक्षिणी दिल्ली, चांदनी चौक, पूर्वी दिल्ली, उत्तर पूर्व दिल्ली, पश्चिमी दिल्ली और एससी आरक्षित उत्तर पश्चिम दिल्ली हैं।’1962 में करोलबाग आरक्षित सीट बनीHindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App.

देश की राजधानी और लगातार बढ़ती जनसंख्या के कारण दिल्ली राष्ट्रीय नेताओं को संसद में भेजने का एक बड़ा ठिकाना आज भी बनी हुई है। 1912 में जब अंग्रेजों ने कलकत्ता के स्थान पर राजधानी बनाने का फैसला किया तब दिल्ली की आबादी 2,32,837 थी। आज दिल्ली की आबादी दो करोड़ के पार है। मनोज मिश्र March 17, 2019 4:15 AM प्रतीकात्मक फोटो देश की राजधानी और लगातार बढ़ती जनसंख्या के कारण दिल्ली राष्ट्रीय नेताओं को संसद में भेजने का एक बड़ा ठिकाना आज भी बनी हुई है। 1912 में जब अंग्रेजों ने कलकत्ता के स्थान पर राजधानी बनाने का फैसला किया तब दिल्ली की आबादी 2,32,837 थी। आज दिल्ली की आबादी दो करोड़ के पार है। आजादी के बाद 1952 के पहले चुनाव में दिल्ली की दोनों सीटों पर स्वाधीनता सेनानी सीके नायर और सुचेता कृपलानी ने चुनाव जीते। सुचेता कृपलानी लगातार दो बार चुनाव जीतने के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में सक्रिय हो गर्इं और मुख्यमंत्री बनीं। दिल्ली में आबादी बढ़ने के साथ लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ती गई। लेकिन 1967 में सात सीटें होने के बाद सीटों की संख्या बढ़नी रुक गई और 2008 में सीटों की संख्या सात रखते हुए सीटों का परिसीमन करके सभी लोकसभा सीटों की आबादी बराबर करने के प्रयास हुए। अबादी का घनत्व समान न होने के कारण इन दस सालों में ही फिर से सीटों की आबादी में काफी अंतर आ गया। लेकिन हर लोकसभा सीट के नीचे दस-दस विधानसभा सीटें होने के कारण कुछ तो समानता अभी भी दिख रही है। बड़ी संख्या में पाकिस्तान से विस्थापित होकर पंजाब, सिंध और कुछ बंगाल मूल के लोग आए। आजादी के साथ ही केंद्र सरकार के दफ्तर में काम करने सरकारी कर्मचारी आए।फिर दिल्ली में कल- कारखाने बढ़े और प्रवासी लोगों का आना बढ़ा। उत्तराखंड के लोग बड़ी संख्या में आए। 1982 के एशियाड खेलों के समय बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य हुए और तभी से बिहार , मध्य प्रदेश , ओड़िशा, पूर्वी उत्तर प्रदेश आदि राज्यों से बड़ी संख्या में लोग आए। नई दिल्ली सीट से दो बार सुचेता कृपलानी, दो बार अटल बिहारी वाजपेयी, दो बार लालकृष्ण आडवाणी और दो बार दिल्ली के उप राज्यपाल रहे पूर्व नौकरशाह जग मोहन सांसद रहे। चांदनी चौक सीट से जनसंघ के बड़े नेता रहे वसंत राव ओक को कांग्रेस के दिग्गज राधारमण ने पराजित किया। स्वाधीनती सेनानी सुभद्रा जोशी चांदनी चौक से 1971 में चुनाव जीती और 1977 में पराजित हो गई। दिल्ली के पहले मुख्यमंत्री चौधरी ब्रह्म प्रकाश सदर से एक बार और बाहरी दिल्ली से चार बार सांसद बने। भाजपा के दिग्गज कृष्णलाल शर्मा दो बार बाहरी दिल्ली से सांसद बने। दिग्गज नेता और जीवन के अधिकांश समय सत्ता के शीर्ष पर रहे जगजीवन राम की पुत्री आरक्षित सीट करोल बाग से दो बार संससद रहीं, लेकिन एक बार वहीं से पराजित होकर वे फिर से बिहार की अपने पिता की परंपरागत सासाराम सीट पहुंच गर्इं। वहीं से चुनाव जीत कर लोक सभा अध्यक्ष बनी। नई दिल्ली की तरह ही दक्षिणी दिल्ली सीट 2008 के परिसीमन से पहले वीआईपी सीट हुआ करती थी। इस सीट से सुषमा स्वराज्य दो बार चुनाव जीतीं। भाजपा के मदन लाल खुराना और विजय कुमार मल्होत्रा दक्षिणी दिल्ली और सदर से सांसद रहे। वहां दिल्ली के दूसरे मुख्यमंत्री साहिब सिंह बाहरी दिल्ली से सांसद रहे। कांग्रेस के एचकेएल कपूर पूर्वी दिल्ली से, सज्जन कुमार बाहरी दिल्ली से तो जगदीश टाइटलर सदर और जय प्रकाश अग्रवाल चांदनी चौक से सांसद रहे। क्रिकेटर चेतन चौहान पूर्वी दिल्ली से पराजित हुए। जनता पार्टी के टिकट पर सिकंदर बख्य चांदनी चौक से सांसद रहे तो भाजपा के विजय गोयल सदर और चांदनी चौक दोनों ही सीटों से सांसद रहे। स्मृति ईरानी चांदनी चौक से पराजित हुर्इं तो कांग्रेस के कपिल सिब्बल विजयी रहे। 1984 में दक्षिणी दिल्ली से संसद रहे ललित माकन की आतंकवादियों ने हत्या कर दी थी। 1985 में उस सीट से उप चुनाव में कांग्रेस दिग्गज अर्जुन सिंह चुनाव जीते और कांग्रेस के इतिहास में पहली बार उपाध्यक्ष बने। पंजाब में राजीव-लौंगेवाल समझौता का श्रेय उनको जाता है। ’अभी सात सीटें हैं, लेकिन 2008 के परिसीमन में सीटों के नाम बदल गए। अब नई दिल्ली, दक्षिणी दिल्ली, चांदनी चौक, पूर्वी दिल्ली, उत्तर पूर्व दिल्ली, पश्चिमी दिल्ली और एससी आरक्षित उत्तर पश्चिम दिल्ली हैं।’1962 में करोलबाग आरक्षित सीट बनीHindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

We have summarized this news so that you can read it quickly. If you are interested in the news, you can read the full text here. Read more:

Jansatta /  🏆 4. in İN

 

United States Latest News, United States Headlines

Similar News:You can also read news stories similar to this one that we have collected from other news sources.

दिल्लीः देर रात जिम में हुई फायरिंग और गोलीबारी, बालकनी से झांक रहे 6 साल के मासूम को लगी गोलीदिल्लीः देर रात जिम में हुई फायरिंग और गोलीबारी, बालकनी से झांक रहे 6 साल के मासूम को लगी गोलीदिल्ली के इंद्रपुरी इलाके में शनिवार रात दो गुटों के बीच झगड़े में फायरिंग हो गई. इस फायरिंग की चपेट में एक 6 साल का मासूम आ गया जिसकी मौत हो गई है.
Read more »

लोकसभा चुनाव 2019: जानें दिल्ली की सातों सीट पर कब होंगे चुनावलोकसभा चुनाव 2019: जानें दिल्ली की सातों सीट पर कब होंगे चुनावदिल्ली में सात लोकसभा सीट हैं - चांदनी चौक, नॉर्थ ईस्ट दिल्ली, ईस्ट दिल्ली, नई दिल्ली, नॉर्थ वेस्ट दिल्ली, वेस्ट दिल्ली, साउथ दिल्ली.
Read more »

भाजपा मुख्यालय पर AAP का प्रदर्शन, दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने की मांगभाजपा मुख्यालय पर AAP का प्रदर्शन, दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने की मांगदिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने की मांग को लेकर आम आदमी पार्टी ने रविवार को दीनदयाल उपाध्याय मार्ग स्थित भाजपा के राष्ट्रीय कार्यालय का घेराव किया।
Read more »

केजरीवाल का दावा- कांग्रेस के बिना भी दिल्‍ली की सातों सीट जीतेगी AAP– News18 हिंदीकेजरीवाल का दावा- कांग्रेस के बिना भी दिल्‍ली की सातों सीट जीतेगी AAP– News18 हिंदीकेजरीवाल ने कहा, 'शीला दीक्षित कह रही हैं कि कांग्रेस गठबंधन नहीं करेगी. लेकिन हमारे इंटर्नल सर्वे हमें बता रहे हैं कि हम बिना गठबंधन के भी दिल्‍ली की सातों सीट जीत रहे हैं. सर्वे में यह भी बताया है कि भारत पाक तनाव से भाजपा को नुकसान होगा.' loksabha election, BJP, alliance, punjab,
Read more »

Surf Excel समझ कर Ms Excel का भी हो रहा है बायकॉटSurf Excel समझ कर Ms Excel का भी हो रहा है बायकॉटSurf Excel का विज्ञापन कुछ लोगों को पसंद नहीं आया और वो इसका विरोध कर रहे हैं. अनजाने में और जानबूझकर भी लोग माइक्रोसॉफ्ट के Excel को भी बायकॉट कर रहे हैं.
Read more »

अरावली की पहाड़ियों में दफ्न है दिल्ली और एनसीआर की दुर्दशा का राजअरावली की पहाड़ियों में दफ्न है दिल्ली और एनसीआर की दुर्दशा का राजअरावली पहाड़ियों को नष्ट करने के दुष्परिणाम हमारे सामने हैं। जिन क्षेत्रों से अरावली शृंखलाओं का विनाश हुआ उन क्षेत्रों में प्राकृतिक असंतुलन, पर्यावरण प्रदूषण, ऋतु-चक्र में बदलाव, जैविक विविधता की समाप्ति, इंसान में प्रकृति से मैत्री भाव का ह्रास, पाताल में रासायनिक विषैले तत्त्वों की वृद्धि, तेजी से गिरता भूजल स्तर, दुर्लभ वनस्पतियों का विनाश और मानवीय संवेदना में लगातार ह्रास जैसी गंभीर समस्याएं देखने को मिल रही हैं।
Read more »

दिल्ली पुलिस के एक्शन के खिलाफ चुनाव आयोग के बाहर धरने पर बैठे AAP नेतादिल्ली पुलिस के एक्शन के खिलाफ चुनाव आयोग के बाहर धरने पर बैठे AAP नेताआम आदमी पार्टी ने दिल्ली पुलिस के तीन सीनियर अफसरों के खिलाफ चुनाव आयोग में शिकायत दर्ज की गई है. इन अफसरों पर भाजपा के इशारे पर काम करने का आरोप लगाते हुए चुनाव आयोग से शिकायत की और कार्रवाई करने की मांग की.
Read more »



Render Time: 2026-04-01 22:28:10