वेस्ट यूपी: यहां हर सीट की है अपनी एक खास 'हिस्ट्री' via NavbharatTimes ElectionsWithTimes LokSabhaElections2019
शादाब रिजवी, लखनऊ/ मेरठ वेस्ट यूपी की लोकसभा सीटों की अपनी खास हिस्ट्री रही है। हर सीट का कोई रोचक किस्सा है। कोई सीट दिग्गजों के नाम जुड़ने से वीआईपी रुतबा हासिल कर गई तो कहीं हर बार नया सांसद चुना जाता है। आम चुनाव से जुड़े ऐसे रोचक किस्सों पर रिपोर्ट : हर दल को दिया एमपी बिजनौर सीट ने कभी किसी बड़े दल को मायूस नहीं किया। आजादी के बाद से अब तक इस सीट से सभी प्रमुख सियासी दलों के कैंडिडेट कभी न कभी जीते। कांग्रेस नेता मीरा कुमार, बीएसपी सुप्रीमो मायावती, एलजेपी नेता रामविलास पासवान, पूर्व एसपी नेता जयाप्रदा, ये सभी इस सीट से जीत चुके हैं। वहीं मौजूदा सांसद बीजेपी के हैं। हर बार नया चेहरा चुना कैराना सीट से हर बार नया व्यक्ति सांसद बनता रहा है। कैराना सीट अस्तित्व में आने के बाद 1962 में यशपाल सिंह बतौर निर्दलीय जीते थे। इसके बाद से हर बार चुनाव में नया सांसद चुना गया। 2014 में भी बीजेपी के हुकुम सिंह जीते मगर 2018 में जब उनकी मौत के बाद उपचुनाव हुआ तो आरएलडी की तबस्सुम हसन यहां से सांसद बनीं। इस बार फिर गठबंधन की प्रत्याशी तबस्सुम होंगी, ऐसे में देखना होगा कि इतिहास खुद को दोहराता है या नहीं। गैर बीजेपी जाट नहीं जीता मुजफ्फरनगर में बीजेपी से बाहर का कोई जाट कैंडिडेट कभी जीत नहीं पाया। इस बार गठबंधन से अजित सिंह यह मिथक तोड़ पाएंगे या नहीं, यह देखना होगा। वैसे 1971 में पूर्व पीएम और बड़े जाट नेता चौधरी चरण सिंह तक गैर बीजेपी कैंडिडेट होने के कारण पराजित हो गए थे। 1977 में जाट नेता वरुण सिंह भी कांग्रेस से लड़कर चुनाव हारे थे। वहीं बीजेपी के जाट नेता चार बार यहां से जीते। 2014 में भी बीजेपी के संजीव बालियान यहां से जीते। बीजेपी की सबसे ज्यादा बार हार देश को चौधरी चरण सिंह के रूप में पीएम देने वाली बागपत सीट से बीजेपी आजादी के बाद से ज्यादातर हारी ही है। उसे सिर्फ दो बार जीत मिल सकी। 1952 से 2009 के बीच गैर बीजेपी सांसद जीते। सिर्फ 1998 में सोमपाल शास्त्री और 2014 में सत्यपाल सिंह कमल खिला सके। दोनों ही बार बीजेपी ने अजित सिंह को हराया था। तीन-तीन सीएम दिए बुलंदशहर को यूपी में लकी सीट बताया जाता है। इस सीट से सांसद रहे बाबू बनारसीदास और कल्याण सिंह यूपी के सीएम रहे। इस सीट से ताल्लुक रखने वाले रामप्रकाश गुप्त भी यूपी के सीएम रहे। 17 दिन में जीत का रेकॉर्ड 1984 के बाद कांग्रेस मेरठ से कभी जीत नहीं पाई मगर 1999 में कांग्रेस के टिकट पर फरीदाबाद के सांसद रहे अवतार सिंह भड़ाना को पार्टी ने चुनाव के बिल्कुल आखिरी दौर में भेजा। उनका यहां ऐसा जादू चला कि महज 17 दिन में वह बीजेपी से सीट छीन ले गए। इसी तरह सहारनपुर सीट से भी कांग्रेस ने इमरान मसूद को प्रत्याशी घोषित किया है मगर कांग्रेस का शख्स यहां 1984 के बाद से एक बार भी सांसद नहीं बन पाया।.
शादाब रिजवी, लखनऊ/ मेरठ वेस्ट यूपी की लोकसभा सीटों की अपनी खास हिस्ट्री रही है। हर सीट का कोई रोचक किस्सा है। कोई सीट दिग्गजों के नाम जुड़ने से वीआईपी रुतबा हासिल कर गई तो कहीं हर बार नया सांसद चुना जाता है। आम चुनाव से जुड़े ऐसे रोचक किस्सों पर रिपोर्ट : हर दल को दिया एमपी बिजनौर सीट ने कभी किसी बड़े दल को मायूस नहीं किया। आजादी के बाद से अब तक इस सीट से सभी प्रमुख सियासी दलों के कैंडिडेट कभी न कभी जीते। कांग्रेस नेता मीरा कुमार, बीएसपी सुप्रीमो मायावती, एलजेपी नेता रामविलास पासवान, पूर्व एसपी नेता जयाप्रदा, ये सभी इस सीट से जीत चुके हैं। वहीं मौजूदा सांसद बीजेपी के हैं। हर बार नया चेहरा चुना कैराना सीट से हर बार नया व्यक्ति सांसद बनता रहा है। कैराना सीट अस्तित्व में आने के बाद 1962 में यशपाल सिंह बतौर निर्दलीय जीते थे। इसके बाद से हर बार चुनाव में नया सांसद चुना गया। 2014 में भी बीजेपी के हुकुम सिंह जीते मगर 2018 में जब उनकी मौत के बाद उपचुनाव हुआ तो आरएलडी की तबस्सुम हसन यहां से सांसद बनीं। इस बार फिर गठबंधन की प्रत्याशी तबस्सुम होंगी, ऐसे में देखना होगा कि इतिहास खुद को दोहराता है या नहीं। गैर बीजेपी जाट नहीं जीता मुजफ्फरनगर में बीजेपी से बाहर का कोई जाट कैंडिडेट कभी जीत नहीं पाया। इस बार गठबंधन से अजित सिंह यह मिथक तोड़ पाएंगे या नहीं, यह देखना होगा। वैसे 1971 में पूर्व पीएम और बड़े जाट नेता चौधरी चरण सिंह तक गैर बीजेपी कैंडिडेट होने के कारण पराजित हो गए थे। 1977 में जाट नेता वरुण सिंह भी कांग्रेस से लड़कर चुनाव हारे थे। वहीं बीजेपी के जाट नेता चार बार यहां से जीते। 2014 में भी बीजेपी के संजीव बालियान यहां से जीते। बीजेपी की सबसे ज्यादा बार हार देश को चौधरी चरण सिंह के रूप में पीएम देने वाली बागपत सीट से बीजेपी आजादी के बाद से ज्यादातर हारी ही है। उसे सिर्फ दो बार जीत मिल सकी। 1952 से 2009 के बीच गैर बीजेपी सांसद जीते। सिर्फ 1998 में सोमपाल शास्त्री और 2014 में सत्यपाल सिंह कमल खिला सके। दोनों ही बार बीजेपी ने अजित सिंह को हराया था। तीन-तीन सीएम दिए बुलंदशहर को यूपी में लकी सीट बताया जाता है। इस सीट से सांसद रहे बाबू बनारसीदास और कल्याण सिंह यूपी के सीएम रहे। इस सीट से ताल्लुक रखने वाले रामप्रकाश गुप्त भी यूपी के सीएम रहे। 17 दिन में जीत का रेकॉर्ड 1984 के बाद कांग्रेस मेरठ से कभी जीत नहीं पाई मगर 1999 में कांग्रेस के टिकट पर फरीदाबाद के सांसद रहे अवतार सिंह भड़ाना को पार्टी ने चुनाव के बिल्कुल आखिरी दौर में भेजा। उनका यहां ऐसा जादू चला कि महज 17 दिन में वह बीजेपी से सीट छीन ले गए। इसी तरह सहारनपुर सीट से भी कांग्रेस ने इमरान मसूद को प्रत्याशी घोषित किया है मगर कांग्रेस का शख्स यहां 1984 के बाद से एक बार भी सांसद नहीं बन पाया।
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