इस बार कोई क्षेत्रीय दल किंगमेकर की भूमिका अदा कर सकते हैं, देश में एक बार फिर बन सकती है एनडीए की सरकार ExitPoll2019 ExitPolls ExitPoll LokSabhaElections2019 BJP4India
उससे पहले वेबदुनिया ने देश के अलग-अलग राज्यों में वरिष्ठ पत्रकारों और चुनाव विश्लेषकों से चुनाव नतीजों को लेकर बात की। वेबदुनिया ने उनसे बात करके यह जानने की कोशिश की, उनकी नजर में इस बार दिल्ली की तस्वीर क्या होगी। किसी एक पार्टी या गठबंधन को अपने बल पर बहुमत मिलेगा या इस बार कोई क्षेत्रीय दल किंगमेकर की भूमिका अदा करेगा। पत्रकारों के मुताबिक देश में एक बार फिर एनडीए सरकार बनेगी। वरिष्ठ पत्रकार और चुनाव विश्लेषक गिरिजाशंकर कहते हैं कि भाजपा 2014 के परफॉर्मेंस को 2019 में दोहरा पाएगी या नहीं ये तो देखना होगा, लेकिन भाजपा सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरेगी इसमें कोई डिबेट नहीं है और सबसे बड़ी पार्टी होने के चलते सरकार बनाने का मौका बीजेपी को मिलेगा, ऐसी स्थिति में बीजेपी को फायदा मिल सकता है। सीटों की संख्या के बारे में वे कहते हैं कि भाजपा को लोकसभा चुनाव में 200 से अधिक सीटें मिलेंगी। वे कहते हैं कि यह सही है कि भाजपा 2014 वाली स्थिति में 2019 में नहीं रहेगी, लेकिन उसको बहुत बड़ा नुकसान होने जा रहा है ऐसा भी नहीं है। मध्यप्रदेश के बारे में गिरिजाशंकर कहते हैं कि मध्यप्रदेश में इस बार कांटे की टक्कर नजर आ रही है। वे कहते हैं कि मध्यप्रदेश के लोकसभा चुनाव में इस बार मोदी के चेहरे के साथ स्थानीय फैक्टर भी काम करेंगे।वरिष्ठ पत्रकार शिवअनुराग पटेरिया कहते हैं कि केंद्र में भाजपा सबसे बड़े दल के रूप में सामने आएगी और अकेले के दम पर सरकार बनाने के बहुत करीब होगी। शिवअनुराग पटेरिया कहते हैं कि उनके अनुमान के मुताबिक भाजपा 250 सीट अपने बल पर जीतेगी और एनडीए और उसके सहयोगी दलों के 300 सीटें जीतने का अनुमान है। वे कहते हैं कि उनके आकलन के मुताबिक देश में एक बार फिर भाजपा और उसके सहयोगी दलों की सरकार बनने की संभावना सबसे ज्यादा प्रबल है। शिवअनुराग पटेरिया कहते हैं कि इस बार का पूरा चुनाव मोदी बनाम ऑल के मुद्दे पर लड़ा गया। इसमें मोदी अपने विरोधियों पर भारी पड़ते दिख रहे हैं। मध्यप्रदेश के चुनाव नतीजों में भाजपा और कांग्रेस का प्रदर्शन कैसा रहेगा, इस पर शिवअनुराग पटेरिया कहते हैं कि प्रदेश में सरकार आने के बाद भी डबल डिजिट यानी दहाई अंकों में नहीं आएगी और ये उनका अनुमान आकलन और आशंका है। शिव अनुराग पटेरिया कहते हैं कि उनके अनुमान के मुताबिक मध्यप्रदेश में भाजपा को कोई बड़ा नुकसान नहीं होने जा रहा है। भाजपा को 22-25 सीटें और कांग्रेस को 5-7 सीटें मिलने की संभावना है। किसी भी पार्टी को अकेले बहुमत नहीं, 2009 जैसे होंगे हालात : वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक दिनेश गुप्ता का कहते हैं कि इस बार चुनाव नतीजे कुछ 2009 के नतीजों की तरह हो सकते हैं। किसी भी पार्टी को देश में अकेले के दम पर बहुमत नहीं मिल पाएगा। भाजपा को 2014 में जिस तरह बहुमत मिला था, उस पर भी संशय है। पूरे चुनाव के दौरान जो ध्रुवीकरण की कोशिश हुई वह सफल होती नहीं दिखाई दे रही है। देश के अलग-अलग राज्यों का जो मिजाज है, उससे इस बार चुनाव नतीजें भी अलग-अलग होते दिखेंगे। भाजपा अभी बंगाल और केरल में संघर्ष करती हुई दिख रही है तो उन हिन्दी राज्यों में जिसके सहारे उसने 2014 में सरकार बनाई थी उसमें भाजपा को कड़ी चुनौती मिली है। अगर मध्यप्रदेश की बात करें तो भाजपा जिसने 2014 में 27 सीटें हासिल की थी, उसको कई सीटों का नुकसान होगा। भाजपा को मालवा और ग्वालियर चंबल में भी कई सीटों का नुकसान होगा। दिनेश गुप्ता का मानना है कि कांग्रेस को 10-12 सीटें मिल सकती हैं तो भाजपा को 17-19 सीटे मिलने की संभावना है। भाजपा और उसके सहयोगी दलों को बहमुत मिलेगा, इसकी संभावना बहुत कम है। दिनेश गुप्ता कहते हैं कि क्षेत्रीय दलों की भूमिका इस चुनाव में बहुत अहम हो सकती है।.
उससे पहले वेबदुनिया ने देश के अलग-अलग राज्यों में वरिष्ठ पत्रकारों और चुनाव विश्लेषकों से चुनाव नतीजों को लेकर बात की। वेबदुनिया ने उनसे बात करके यह जानने की कोशिश की, उनकी नजर में इस बार दिल्ली की तस्वीर क्या होगी। किसी एक पार्टी या गठबंधन को अपने बल पर बहुमत मिलेगा या इस बार कोई क्षेत्रीय दल किंगमेकर की भूमिका अदा करेगा। पत्रकारों के मुताबिक देश में एक बार फिर एनडीए सरकार बनेगी। वरिष्ठ पत्रकार और चुनाव विश्लेषक गिरिजाशंकर कहते हैं कि भाजपा 2014 के परफॉर्मेंस को 2019 में दोहरा पाएगी या नहीं ये तो देखना होगा, लेकिन भाजपा सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरेगी इसमें कोई डिबेट नहीं है और सबसे बड़ी पार्टी होने के चलते सरकार बनाने का मौका बीजेपी को मिलेगा, ऐसी स्थिति में बीजेपी को फायदा मिल सकता है। सीटों की संख्या के बारे में वे कहते हैं कि भाजपा को लोकसभा चुनाव में 200 से अधिक सीटें मिलेंगी। वे कहते हैं कि यह सही है कि भाजपा 2014 वाली स्थिति में 2019 में नहीं रहेगी, लेकिन उसको बहुत बड़ा नुकसान होने जा रहा है ऐसा भी नहीं है। मध्यप्रदेश के बारे में गिरिजाशंकर कहते हैं कि मध्यप्रदेश में इस बार कांटे की टक्कर नजर आ रही है। वे कहते हैं कि मध्यप्रदेश के लोकसभा चुनाव में इस बार मोदी के चेहरे के साथ स्थानीय फैक्टर भी काम करेंगे।वरिष्ठ पत्रकार शिवअनुराग पटेरिया कहते हैं कि केंद्र में भाजपा सबसे बड़े दल के रूप में सामने आएगी और अकेले के दम पर सरकार बनाने के बहुत करीब होगी। शिवअनुराग पटेरिया कहते हैं कि उनके अनुमान के मुताबिक भाजपा 250 सीट अपने बल पर जीतेगी और एनडीए और उसके सहयोगी दलों के 300 सीटें जीतने का अनुमान है। वे कहते हैं कि उनके आकलन के मुताबिक देश में एक बार फिर भाजपा और उसके सहयोगी दलों की सरकार बनने की संभावना सबसे ज्यादा प्रबल है। शिवअनुराग पटेरिया कहते हैं कि इस बार का पूरा चुनाव मोदी बनाम ऑल के मुद्दे पर लड़ा गया। इसमें मोदी अपने विरोधियों पर भारी पड़ते दिख रहे हैं। मध्यप्रदेश के चुनाव नतीजों में भाजपा और कांग्रेस का प्रदर्शन कैसा रहेगा, इस पर शिवअनुराग पटेरिया कहते हैं कि प्रदेश में सरकार आने के बाद भी डबल डिजिट यानी दहाई अंकों में नहीं आएगी और ये उनका अनुमान आकलन और आशंका है। शिव अनुराग पटेरिया कहते हैं कि उनके अनुमान के मुताबिक मध्यप्रदेश में भाजपा को कोई बड़ा नुकसान नहीं होने जा रहा है। भाजपा को 22-25 सीटें और कांग्रेस को 5-7 सीटें मिलने की संभावना है। किसी भी पार्टी को अकेले बहुमत नहीं, 2009 जैसे होंगे हालात : वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक दिनेश गुप्ता का कहते हैं कि इस बार चुनाव नतीजे कुछ 2009 के नतीजों की तरह हो सकते हैं। किसी भी पार्टी को देश में अकेले के दम पर बहुमत नहीं मिल पाएगा। भाजपा को 2014 में जिस तरह बहुमत मिला था, उस पर भी संशय है। पूरे चुनाव के दौरान जो ध्रुवीकरण की कोशिश हुई वह सफल होती नहीं दिखाई दे रही है। देश के अलग-अलग राज्यों का जो मिजाज है, उससे इस बार चुनाव नतीजें भी अलग-अलग होते दिखेंगे। भाजपा अभी बंगाल और केरल में संघर्ष करती हुई दिख रही है तो उन हिन्दी राज्यों में जिसके सहारे उसने 2014 में सरकार बनाई थी उसमें भाजपा को कड़ी चुनौती मिली है। अगर मध्यप्रदेश की बात करें तो भाजपा जिसने 2014 में 27 सीटें हासिल की थी, उसको कई सीटों का नुकसान होगा। भाजपा को मालवा और ग्वालियर चंबल में भी कई सीटों का नुकसान होगा। दिनेश गुप्ता का मानना है कि कांग्रेस को 10-12 सीटें मिल सकती हैं तो भाजपा को 17-19 सीटे मिलने की संभावना है। भाजपा और उसके सहयोगी दलों को बहमुत मिलेगा, इसकी संभावना बहुत कम है। दिनेश गुप्ता कहते हैं कि क्षेत्रीय दलों की भूमिका इस चुनाव में बहुत अहम हो सकती है।
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