लंबे इंतज़ार के बाद भारत की पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन कामख्या और हावड़ा के बीच शुरू हो गई है। यह राजधानी एक्सप्रेस का विकल्प है और यात्रियों का समय बचाएगी। ट्रेन के स्टॉपेज और अन्य ज़रूरी जानकारी देखें।
लंबे इंतज़ार के बाद वंदे भारत स्लीपर ट्रेन आख़िरकार भारतीय रेल में शामिल हो गई है. ऐसी पहली ट्रेन कामख्या और हावड़ा के बीच चलाई जा रही है.इस ट्रेन को राजधानी एक्सप्रेस ट्रेनों के विकल्प के तौर पर देखा जा रहा है.
इससे पहले जो वंदे भारत ट्रेनें चल रही हैं, उनमें केवल बैठकर यात्रा करने की सुविधा थी. हालाँकि शुरुआती योजना में वंदे भारत स्लीपर ट्रेन साल 2020 में ही शुरू हो जानी थी. जब इस ट्रेन की योजना बनाई गई थी, तब इसका नाम टी-20 रखा गया था, जो साल 2020 से जोड़कर दिया गया था.चेन्नई की इंटिग्रल कोच फ़ैक्ट्री ने टी-18 और टी-20 का कंसेप्ट और इसका मॉडल तैयार किया था. इनमें से एक ट्रेन साल 2018 में चलनी थी, जो 15 फ़रवरी 2019 को वंदे भारत से चली.महाराष्ट्र निकाय चुनावों में ओवैसी की पार्टी की दमदार जीत, क्या हैं इस जीत के मायने?महाराष्ट्रः निकाय चुनावों में बीजेपी बड़ी जीत की ओर मगर कांग्रेस के इस हाल की वजह क्या रही?भारत की पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन असम और पश्चिम बंगाल राज्य को जोड़ रही है.नज़र डालते हैं, इस ट्रेन से जुड़े उन सवालों पर जिनके बारे में लोग गूगल पर सर्च कर रहे हैं-रेल मंत्रालय के प्रवक्ता ने बीबीसी को बताया है कि इस ट्रेन का नंबर 27575 और 27576 होगा, जो हावड़ा-कामख्या-हावड़ा के बीच चलाई जाएगी. इस ट्रेन का कॉमर्सियल स्टॉपेज कामख्या, रांगिया, न्यू बॉन्गईगांव, न्यू अलीपुरद्वार, न्यू कूच बिहार, जलपाईगुड़ी रोड, न्यू जलपाईगुड़ी, अलुआबाड़ी रोड, मालदा टाउन, न्यू फरक्का जं., अज़ीमगंज, कटवा जं., नबाद्वीप धाम, बंडेल जं. और हावड़ा होगा.क्या वंदे भारत ट्रेन में कुछ रूटों पर किराये में छूट की वजह यात्रियों की कमी है?हावड़ा और कामख्या के बीच चलने वाली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन मुसाफ़िरों का क़रीब तीन घंटे का समय बचाएगी.प्रति घंटे है लेकिन जब यह ट्रेन अपनी सेवा में होगी तो रूट के क्षमता के मुताबिक़ स्पीड होगी. माना जाता है कि इस रूट पर वंदे भारत की औसत स्पीड इसकी डिज़ाइन स्पीड से काफ़ी कम होगी.दरअसल, वंदे भारत एक ट्रेन सेट है और इसके कम समय में रुकने या स्पीड पकड़ने की क्षमता इसकी ख़ासियत है, जिससे यह अपना सफ़र कम समय में पूरी कर लेती है. नॉर्थ फ़्रंटियर रेलवे ने इस ट्रेन के पहले सफ़र से जुड़ी जो जानकारी बीबीसी से साझा की है, उसके मुताबिक़ यह ट्रेन 17 जनवरी को दोपहर एक बजकर पंद्रह मिनट पर कामख्या से रवाना होगी और अगले दिन सुबह 3:55 पर हावड़ा पहुँचेगी.गुवाहटी और हावड़ा के बीच ट्रेन रूट की दूरी क़रीब एक हज़ार किलोमीटर है. हालाँकि वंदे भारत ट्रेन गुवाहटी के ही कामख्या स्टेशन से चलेगी और यह जिस रूट से हावड़ा पहुँचेगी उसकी दूरी क़रीब 958 किलोमीटर है.पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन को पीएम मोदी 17 जनवरी को मालदा टाउन रेलवे स्टेशन से हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे. यह ट्रेन दोनों तरफ़ से सप्ताह में छह दिन चलाई जाएगी. कामख्या से यह ट्रेन बुधवार को छोड़कर हर दिन शाम 6:15 पर चलेगी और अगले दिन सुबह 8:15 पर हावड़ा पहुँचेगी.हालाँकि ट्रेन के नियमित चलने के बारे में अधिसूचना कुछ दिनों के बाद जारी होगी, यानी यह ट्रेन कब से आम मुसाफ़िरों के लिए उपलब्ध होगी.एक दलित अधिकारी रेलवे में सबसे ऊंचे पद पर होंगे नियुक्त, क्यों हो रही है कांग्रेस की चर्चावंदे भारत स्लीपर ट्रेन का किराया सामान्य मेल एक्सप्रेस ट्रेनों की तुलना में ज़्यादा होगी. अगर हम 12346 गुवाहटी-हावड़ा सरायघाट एक्सप्रेस से तुलना करें, जो कि एक सुपरफ़ास्ट ट्रेन है तो- कामख्या और हावड़ा के बीच वंदे भारत स्लीपर ट्रेन में एसी 3 का किराया 2999 रुपये है जबकि सरायघाट एक्सप्रेस में यह किराया क़रीब दो हज़ार रुपये हैं. वहीं इस रूट पर वंदे भारत के एसी 2 का किराया 2970 रखा गया है जबकि अन्य सामान्य सुपरफ़ास्ट ट्रेन में यह किराया क़रीब 2970 रुपये है. इस किराये में खान-पान के पैसे भी शामिल हैं. एक ख़ास बात यह भी है कि इस ट्रेन में कम से कम 400 किलोमीटर की दूरी के टिकट ही बुक किए जा सकते हैं.वंदे भारत ट्रेनों के लिए भी आम ट्रेनों की तरह एडवांस टिकट बुक किए जा सकते हैं जो ट्रेन चलने के 60 दिन पहले शुरू होती है.यानी इस ट्रेन में कुल 823 मुसाफ़िरों के लिए बर्थ होगी. 16 कोच की इस ट्रेन में एसी3 के 11 कोच, एसी2 के 4 और एसी1 का एक कोच होगा.भारत में फ़िलहाल 164 वंदे भारत ट्रेनें चल रही हैं. ये ट्रेनें स्लीपर क्लास की ट्रेनों से अलग है और इनमें शताब्दी एक्सप्रेस की तरह बैठकर यात्रा करने की सुविधा होती है.अब इसकी कुल संख्या 82 हो गई है. इस तरह से अप-डाउन मिलाकर वंदे भारत की कुल 164 सेवाएँ चल रही हैं.ट्रेनों में ईसी क्लास उन ट्रेनों या क्लास से संबंधित है, जिनमें शताब्दी एक्सप्रेस ट्रेनों की तरह बैठने की सुविधा होती है. ईसी का मतलब होता है एग्जीक्यूटिव क्लास. इसमें बैठने के लिए सीटें होती हैं, जो आरामदायक मानी जाती हैं. सीसी- इसका मतलब होता है चेयर कार. यह भी बैठने के है, हालाँकि सुविधा और आरामदेह होने के लिहाज से ही ईसी से कमतर होती हैं. एनसी- इसका मतलब होता है 'नो चॉइस'. मसलन अगर आप किसी ट्रेन में टिकट बुक कर रहे हैं तो आपसे पूछा जा सकता है कि आप कौन सी बर्थ लेना चाहेंगे. ऐसे में आपके पास 'एससी' का भी एक ऑप्शन हो सकता है.ईरान में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई की आशंका के बीच दुनिया के कौन से देश किसके साथशक्सगाम घाटी पर भारत-चीन क्यों आमने-सामने, छिड़ा पाकिस्तान का भी ज़िक्रएआर रहमान के काम न मिलने वाली बात पर सिंगर शान ने क्या कहा?पाकिस्तान- सऊदी और तुर्की की 'डिफेंस डील' पर बढ़ी बात, भारत के लिए कितनी बड़ी चिंताईरान में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई की आशंका के बीच दुनिया के कौन से देश किसके साथबांग्लादेश: बीएनपी और जमात, दोनों गठबंधनों के सामने कौन सी मुसीबत खड़ी हो गई?'सरकार लोगों को ज़हर खिलाकर मार दे', बिहार में जिनके घरों पर चले बुलडोज़र उनका हाल - 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