लखनऊ में AI आधारित ट्रैफिक सिग्नल: जाम से मिलेगी निजात, प्रदूषण भी होगा कम

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लखनऊ में AI आधारित ट्रैफिक सिग्नल: जाम से मिलेगी निजात, प्रदूषण भी होगा कम
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लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट शहर में ट्रैफिक जाम की समस्या से निपटने के लिए AI आधारित ट्रैफिक सिग्नल प्रणाली लागू कर रही है। यह प्रणाली वाहनों की संख्या और दबाव के आधार पर सिग्नल को स्वचालित रूप से नियंत्रित करेगी, जिससे ट्रैफिक सुचारू रूप से चल सकेगा। इस पहल से समय की बचत, ईंधन की खपत में कमी और प्रदूषण नियंत्रण में मदद मिलेगी। इस परियोजना को गूगल मैप से भी जोड़ा जाएगा ताकि जाम की स्थिति में तुरंत डायवर्जन लागू किया जा सके। शुरुआत में कुछ चौराहों पर पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर इसे शुरू किया जाएगा, जिसके बाद पूरे शहर में विस्तार होगा।

आयुष्मान पांडेय, लखनऊ : राजधानी में बढ़ते ट्रैफिक दबाव और चौराहों पर लगने वाले जाम से निजात दिलाने के लिए पुलिस कमिश्नरेट ने अहम पहल की है। अब शहर के प्रमुख चौराहों सहित सभी ट्रैफिक सिग्नल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के आधार पर संचालित किए जाएंगे। इस आधुनिक व्यवस्था के लागू होने के बाद ट्रैफिक सिग्नल तय समय पर नहीं, बल्कि सड़क पर वाहनों की संख्या और दबाव को देखकर अपने आप ग्रीन और रेड होंगे।एआइ आधारित ट्रैफिक सिस्टम में हाई-रिजाल्यूशन कैमरे और सेंसर लगाए जाएंगे। यह उपकरण चौराहों पर आने-जाने वाले वाहनों की संख्या, उनकी गति और लेन में लग रही कतार की लंबाई का आकलन करेंगे। इसके बाद साफ्टवेयर स्वतः तय करेगा कि किस दिशा से आने वाले वाहनों को कितनी देर तक ग्रीन सिग्नल दिया जाए। इससे एक ओर जहां अनावश्यक इंतजार खत्म होगा, वहीं दूसरी तरफ ट्रैफिक चलता रहेगा। इस परियोजना की एक बड़ी खासियत यह भी है कि इसे गूगल मैप से जोड़ा जा रहा है। जैसे ही किसी मार्ग पर ट्रैफिक जाम की स्थिति बनेगी, एआइ सिस्टम उस जानकारी को रियल टाइम में अपडेट करेगा। इसके आधार पर गूगल मैप पर उच्चाधिकारियों के निर्देश पर उस मार्ग का डायवर्जन लागू कर देगा। फिर वाहन चालकों को वैकल्पिक रास्तों की जानकारी तुरंत मिल सकेगी और वह जाम में फंसने से बच सकेंगे। कुछ चौराहों पर सफल होने के बाद लागू होगी व्यवस्था इस योजना को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। पहले पायलट प्रोजेक्ट के तहत कुछ प्रमुख चौराहों पर एआइ सिग्नल लगाए जाएंगे। सफल परीक्षण के बाद इसे पूरे शहर में विस्तार दिया जाएगा। ट्रैफिक पुलिस के कर्मियों को भी इस नई तकनीक के संचालन और निगरानी के लिए प्रशिक्षण दिया जाएगा, ताकि किसी तकनीकी समस्या की स्थिति में तुरंत समाधान किया जा सके। प्रदूषण भी होगा कम तो एक्यूआइ भी होगा बेहतर एक्सपर्ट का कहना है कि इस व्यवस्था से न केवल समय की बचत होगी, बल्कि ईंधन की खपत भी कम होगी। बार-बार सिग्नल पर रुकने और जाम में फंसने से होने वाले प्रदूषण पर भी अंकुश लगेगा। खासतौर पर कार्यालय समय और स्कूल-कालेज की छुट्टी के दौरान जिन चौराहों पर भारी दबाव रहता है, वहां यह सिस्टम बेहद कारगर साबित हो सकता है। आम जनता को राहत पुलिस उपायुक्त, यातायात व अपराध, कमलेश दीक्षित ने बताया कि इस व्यवस्था के लागू होने के बाद आम जनता को राहत मिलेगी। साथ ही चौराहों पर वाहनों को जमावड़ा भी नहीं लगेगा। साथ ही डायवर्जन लागू होने पर गूगल मैप की मदद से चलने वाले लोगों को तत्काल जानकारी मिल सकेगी। यह व्यवस्था जल्द ही लागू की जाएगी। पहले लागू हो चुकी यह व्यवस्थाएं 40 की स्पीड पर वाहन चलाने पर सभी सिग्नल मिलेंगे ग्रीन। चौराहों से 50 दूर सवारी वाहन होंगे खडे, ताकि जाम से मिल सके राहत। इंजीनियरिंग का सुधार करेंगे, ताकि वाहन चौराहे पर न फंसे।.

आयुष्मान पांडेय, लखनऊ: राजधानी में बढ़ते ट्रैफिक दबाव और चौराहों पर लगने वाले जाम से निजात दिलाने के लिए पुलिस कमिश्नरेट ने अहम पहल की है। अब शहर के प्रमुख चौराहों सहित सभी ट्रैफिक सिग्नल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के आधार पर संचालित किए जाएंगे। इस आधुनिक व्यवस्था के लागू होने के बाद ट्रैफिक सिग्नल तय समय पर नहीं, बल्कि सड़क पर वाहनों की संख्या और दबाव को देखकर अपने आप ग्रीन और रेड होंगे।एआइ आधारित ट्रैफिक सिस्टम में हाई-रिजाल्यूशन कैमरे और सेंसर लगाए जाएंगे। यह उपकरण चौराहों पर आने-जाने वाले वाहनों की संख्या, उनकी गति और लेन में लग रही कतार की लंबाई का आकलन करेंगे। इसके बाद साफ्टवेयर स्वतः तय करेगा कि किस दिशा से आने वाले वाहनों को कितनी देर तक ग्रीन सिग्नल दिया जाए। इससे एक ओर जहां अनावश्यक इंतजार खत्म होगा, वहीं दूसरी तरफ ट्रैफिक चलता रहेगा। इस परियोजना की एक बड़ी खासियत यह भी है कि इसे गूगल मैप से जोड़ा जा रहा है। जैसे ही किसी मार्ग पर ट्रैफिक जाम की स्थिति बनेगी, एआइ सिस्टम उस जानकारी को रियल टाइम में अपडेट करेगा। इसके आधार पर गूगल मैप पर उच्चाधिकारियों के निर्देश पर उस मार्ग का डायवर्जन लागू कर देगा। फिर वाहन चालकों को वैकल्पिक रास्तों की जानकारी तुरंत मिल सकेगी और वह जाम में फंसने से बच सकेंगे। कुछ चौराहों पर सफल होने के बाद लागू होगी व्यवस्था इस योजना को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। पहले पायलट प्रोजेक्ट के तहत कुछ प्रमुख चौराहों पर एआइ सिग्नल लगाए जाएंगे। सफल परीक्षण के बाद इसे पूरे शहर में विस्तार दिया जाएगा। ट्रैफिक पुलिस के कर्मियों को भी इस नई तकनीक के संचालन और निगरानी के लिए प्रशिक्षण दिया जाएगा, ताकि किसी तकनीकी समस्या की स्थिति में तुरंत समाधान किया जा सके। प्रदूषण भी होगा कम तो एक्यूआइ भी होगा बेहतर एक्सपर्ट का कहना है कि इस व्यवस्था से न केवल समय की बचत होगी, बल्कि ईंधन की खपत भी कम होगी। बार-बार सिग्नल पर रुकने और जाम में फंसने से होने वाले प्रदूषण पर भी अंकुश लगेगा। खासतौर पर कार्यालय समय और स्कूल-कालेज की छुट्टी के दौरान जिन चौराहों पर भारी दबाव रहता है, वहां यह सिस्टम बेहद कारगर साबित हो सकता है। आम जनता को राहत पुलिस उपायुक्त, यातायात व अपराध, कमलेश दीक्षित ने बताया कि इस व्यवस्था के लागू होने के बाद आम जनता को राहत मिलेगी। साथ ही चौराहों पर वाहनों को जमावड़ा भी नहीं लगेगा। साथ ही डायवर्जन लागू होने पर गूगल मैप की मदद से चलने वाले लोगों को तत्काल जानकारी मिल सकेगी। यह व्यवस्था जल्द ही लागू की जाएगी। पहले लागू हो चुकी यह व्यवस्थाएं 40 की स्पीड पर वाहन चलाने पर सभी सिग्नल मिलेंगे ग्रीन। चौराहों से 50 दूर सवारी वाहन होंगे खडे, ताकि जाम से मिल सके राहत। इंजीनियरिंग का सुधार करेंगे, ताकि वाहन चौराहे पर न फंसे।

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