Shakun Shastra : कई बार व्यक्ति को रास्ते में अर्थी दिखती है, ऐसे में सवाल उठता है कि अर्थी देखना शुभ होता है या अशुभ। और अगर रास्ते में अर्थी दिख जाए तो क्या करना चाहिए? शकुन शास्त्र में इस बारे में क्या लिखा है, आइये जानते हैं रास्ते में अर्थी देखना शुभ या अशुभ...
Good Luck Omens : ज्योतिष में शकुन शास्त्र हमारे आसपास होने वाली घटनाओं के शकुन अपशकुन के संकेतों के बारे में बताता है। इसमें न सिर्फ आसपास की घटनाओं बल्कि ध्वनि, पशु पक्षियों की गतिविधियों के आधार पर भी शुभ और अशुभ का अनुमान लगाया जाता है। माना जाता है कि शकुन शास्त्र का उद्देश्य कार्य का परिणाम आने से पहले संकेत देने के लिए होता है जिसके जरिए व्यक्ति अतिरिक्त सावधानी बरतते हुए कार्य को करें। ऐसे ही अक्सर आते जाते रास्ते में अर्थ दिख जाती है, रास्ते में अचानक अर्थी का दिखना शुभ संकेत होता है या अशुभ, आइये जानते हैं।रास्ते में अर्थी देखना शुभरास्ते में अर्थी का दिखना शकुन शास्त्र में शुभ संकेत माना गया है। इसलिए कहा जाता है कि अगर रास्ते में अर्थी दिख जाए तो दाह संस्कार के लिए अंतिम यात्रा पर जाने वाले व्यक्ति को हाथ जोड़कर प्रणाम करना चाहिए। इस दौरान मन में भगवान का नाम जपना चाहिए। साथ ही भगवान से यह कामना करनी चाहिए कि मृतक को अपने चरणों में स्थान दें और उसकी आत्मा को शांति मिले। माना जाता है कि अर्थी पर जा रहा मृतक उसकी शवयात्रा को देखने वाले लोगों के दुख दर्द भी अपने साथ लेकर चला जाता है।परम सत्य है मृत्युमाना जाता है कि शवयात्रा देखने से कार्यों में आने वाली रुकावटें खत्म हो जाती हैं और व्यक्ति के काम जल्दी निपट जाते हैं। अर्थी देखना वैसे भी सत्य के दर्शन करने जैसा है क्योंकि मृत्यु इस धरती का अटल सत्य है। जो आया है उसे एक न एक दिन जाना ही है। इसलिए भी न अर्थी और न श्मशान को अशुभ नहीं माना जाता है। शवयात्रा निकलने के बाद चली थी शिवजी की बारातबताया जाता है कि शिवजी की बारात श्मशान से शुरू हुई थी। एक कथा में बताया जाता है कि शिवजी की बारात का मुहूर्त निकला जा रहा था लेकिन शिवजी बारात के लिए तैयार नहीं हो रहे थे। ब्रह्माजी ने शिवजी से कहा कि विवाह का मुहूर्त निकल रहा है चलिए, लेकिन भोलेबाबा तैयार नहीं हुए। शादी का मुहूर्त चला गया, तीन दिन बीत गए। इस पर भगवान विष्णु ने शिवजी से पूछा कि प्रभु बारात कब निकलेगी, इस पर भोलेबाबा ने कहा कि सही मुहूर्त आने पर निकलेगी। थोड़े दिन बाद राम नाम सत्य है कहते हुए एक अर्थी निकली। तब भोलेबाबा ने कहा कि मुहूर्त आ गया है, मुझे तैयार करो। जब सामने से अर्थी आई तब शिवजी की बारात निकली। दाह संस्कार से निकली राख को शिवजी ने अंग पर धारण किया, तब वह बारात के लिए निकले। अब जब भोले बाबा की बारात अर्थी निकलने के बाद निकली है तो फिर अर्थी देखना कैसे अशुभ हो सकता है।.
Good Luck Omens : ज्योतिष में शकुन शास्त्र हमारे आसपास होने वाली घटनाओं के शकुन अपशकुन के संकेतों के बारे में बताता है। इसमें न सिर्फ आसपास की घटनाओं बल्कि ध्वनि, पशु पक्षियों की गतिविधियों के आधार पर भी शुभ और अशुभ का अनुमान लगाया जाता है। माना जाता है कि शकुन शास्त्र का उद्देश्य कार्य का परिणाम आने से पहले संकेत देने के लिए होता है जिसके जरिए व्यक्ति अतिरिक्त सावधानी बरतते हुए कार्य को करें। ऐसे ही अक्सर आते जाते रास्ते में अर्थ दिख जाती है, रास्ते में अचानक अर्थी का दिखना शुभ संकेत होता है या अशुभ, आइये जानते हैं।रास्ते में अर्थी देखना शुभरास्ते में अर्थी का दिखना शकुन शास्त्र में शुभ संकेत माना गया है। इसलिए कहा जाता है कि अगर रास्ते में अर्थी दिख जाए तो दाह संस्कार के लिए अंतिम यात्रा पर जाने वाले व्यक्ति को हाथ जोड़कर प्रणाम करना चाहिए। इस दौरान मन में भगवान का नाम जपना चाहिए। साथ ही भगवान से यह कामना करनी चाहिए कि मृतक को अपने चरणों में स्थान दें और उसकी आत्मा को शांति मिले। माना जाता है कि अर्थी पर जा रहा मृतक उसकी शवयात्रा को देखने वाले लोगों के दुख दर्द भी अपने साथ लेकर चला जाता है।परम सत्य है मृत्युमाना जाता है कि शवयात्रा देखने से कार्यों में आने वाली रुकावटें खत्म हो जाती हैं और व्यक्ति के काम जल्दी निपट जाते हैं। अर्थी देखना वैसे भी सत्य के दर्शन करने जैसा है क्योंकि मृत्यु इस धरती का अटल सत्य है। जो आया है उसे एक न एक दिन जाना ही है। इसलिए भी न अर्थी और न श्मशान को अशुभ नहीं माना जाता है। शवयात्रा निकलने के बाद चली थी शिवजी की बारातबताया जाता है कि शिवजी की बारात श्मशान से शुरू हुई थी। एक कथा में बताया जाता है कि शिवजी की बारात का मुहूर्त निकला जा रहा था लेकिन शिवजी बारात के लिए तैयार नहीं हो रहे थे। ब्रह्माजी ने शिवजी से कहा कि विवाह का मुहूर्त निकल रहा है चलिए, लेकिन भोलेबाबा तैयार नहीं हुए। शादी का मुहूर्त चला गया, तीन दिन बीत गए। इस पर भगवान विष्णु ने शिवजी से पूछा कि प्रभु बारात कब निकलेगी, इस पर भोलेबाबा ने कहा कि सही मुहूर्त आने पर निकलेगी। थोड़े दिन बाद राम नाम सत्य है कहते हुए एक अर्थी निकली। तब भोलेबाबा ने कहा कि मुहूर्त आ गया है, मुझे तैयार करो। जब सामने से अर्थी आई तब शिवजी की बारात निकली। दाह संस्कार से निकली राख को शिवजी ने अंग पर धारण किया, तब वह बारात के लिए निकले। अब जब भोले बाबा की बारात अर्थी निकलने के बाद निकली है तो फिर अर्थी देखना कैसे अशुभ हो सकता है।
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