राज्यसभा: अमित शाह बोले- जो देश को तोड़ने की बात करेंगे, हम उसे उसी की भाषा में जवाब देंगे

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जम्मू-कश्मीर: राज्यसभा में बोले शाह, अटल जी की राह पर मोदी सरकार BJP4India AmitShah JammuKashmir

- फोटो : एएनआईराज्यसभा में जम्मू कश्मीर में राष्ट्रपति शासन लगाए जाने के प्रस्ताव पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने केंद्र सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि कश्मीर की संस्कृति का संरक्षण सरकार करेगी। आतंक पर जीरो टॉलरेंस की बात करते हुए उन्होंने कहा कि भारत को तोड़ने की कोशिश करने वालों को उन्हीं की भाषा में जवाब देंगे। इस दौरान शाह ने कहा कि जम्मू कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और इसे कोई अलग नहीं कर सकता है। उन्होंने कहा कि कश्मीरी पंडित अपने ही देश में दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं। हमें उनकी वापसी की उम्मीद है। गृह मंत्री ने कहा कि कश्मीरियत की बात है तो सबकी बात होनी चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या सूफी संत कश्मीर का हिस्सा नहीं थे? शाह ने कहा कि वह समय आएगा जब कश्मीरी पंडित वहां के मंदिरों में पूजा-पाठ करते हुए दिखाई देंगे।शाह ने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी ने कहा था कि कश्मीर की समस्या का समाधान 'जम्हूरियत, कश्मीरियत और इंसानियत' होना चाहिए। मैं यह आज दोहराता हूं कि मोदी सरकार भी अटल जी के रास्ते पर ही कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि जम्हूरियत परिवारों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। गृह मंत्री ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के विकास के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि आयुष्मान भारत योजना का सबसे ज्यादा लाभ जम्मू-कश्मीर को मिल रहा है। उन्होंने कहा कि कश्मीर में शौचालय बनवाना और बिजली पहुंचाना ही इंसानियत है। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग था और हमेशा रहेगा।जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव और लोकसभा चुनाव एक साथ न कराने पर शाह ने कहा कि दोनों चुनाव इसलिए साथ नहीं कराए गए क्योंकि सुरक्षा का मसला था। विधानसभा चुनाव में हजारों उम्मीदवार होते हैं, उन्हें गांव-गांव पहुंचना होता है। बड़े नेताओं के दौरे होते हैं। गुलाम नबी आजाद से मुखातिब होते हुए शाह ने कहा कि जैसा आपने कहा हम राष्ट्रपति शासन के द्वारा शासन नहीं करना चाहते। ईश्वर की कृपा और मोदी जी की प्रसिद्धि से हमारे पास पर्याप्त राज्यों में सरकार है, कुल मिलाकर 16 राज्यों में। सुरक्षा कारणों के चलते ऐसा हुआ कि चुनाव एक साथ नहीं कराए गए।गृह मंत्री शाह ने कहा कि गुलाम नबी आजाद जी और मनोज झा जी ने कहा था कि हम भारत की जनता के बीच नेहरू जी के बारे में गलत जानकारी फैलाना चाहते हैं। यह गलत है। यह हमारा उद्देश्य न था और न कभी होगा। लेकिन, जो देश इतिहास में की गई अपनी गलतियों से नहीं सीखते उनका भविष्य बेहतर नहीं होता।-जम्मू कश्मीर भारत का अभिन्न अंग। कश्मीरी पंडित अपने ही देश में दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं। हमें उनकी वापसी की उम्मीद है। -घाटी से सूफी संतों को खदेड़ दिया गया, चुन चुनकर मार दिया गया। वो देश की एकता की बात कहते थे। कहां चली गई यहां से सूफी परंपरा?-अटल जी के रास्ते पर हैं मोदी सरकार।-भारत को तोड़ने वालों को उन्हीं की भाषा में जवाब देंगे।-आयुष्मान योजना का सबसे ज्यादा फायदा जम्मू कश्मीर को हुआ।-विधानसभा चुनाव, लोकसभा चुनाव इसलिए साथ नहीं कराए गए क्योंकि सुरक्षा का मसला था। विधानसभा चुनाव में हजारों उम्मीदवार होते हैं, उन्हें गांव गांव पहुंचना होता है। बड़े नेताओं के दौरे होते हैं। आयोग जब चाहे चुनाव करा ले।राज्यसभा में जम्मू कश्मीर में राष्ट्रपति शासन लगाए जाने के प्रस्ताव पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने केंद्र सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि कश्मीर की संस्कृति का संरक्षण सरकार करेगी। आतंक पर जीरो टॉलरेंस की बात करते हुए उन्होंने कहा कि भारत को तोड़ने की कोशिश करने वालों को उन्हीं की भाषा में जवाब देंगे।इस दौरान शाह ने कहा कि जम्मू कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और इसे कोई अलग नहीं कर सकता है। उन्होंने कहा कि कश्मीरी पंडित अपने ही देश में दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं। हमें उनकी वापसी की उम्मीद है। गृह मंत्री ने कहा कि कश्मीरियत की बात है तो सबकी बात होनी चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या सूफी संत कश्मीर का हिस्सा नहीं थे? शाह ने कहा कि वह समय आएगा जब कश्मीरी पंडित वहां के मंदिरों में पूजा-पाठ करते हुए दिखाई देंगे।शाह ने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी ने कहा था कि कश्मीर की समस्या का समाधान 'जम्हूरियत, कश्मीरियत और इंसानियत' होना चाहिए। मैं यह आज दोहराता हूं कि मोदी सरकार भी अटल जी के रास्ते पर ही कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि जम्हूरियत परिवारों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। Union Home Minister Amit Shah in Rajya Sabha: Atal Bihari Vajpayee had said that solution of Kashmir's problem should be in"Jamuriyat, Kashmiriyat, & insaniyat", I reiterate today that Modi led government is also working on Atal ji's path of"Jamuriyat, Kashmiriyat, & insaniyat".

- फोटो : एएनआईराज्यसभा में जम्मू कश्मीर में राष्ट्रपति शासन लगाए जाने के प्रस्ताव पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने केंद्र सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि कश्मीर की संस्कृति का संरक्षण सरकार करेगी। आतंक पर जीरो टॉलरेंस की बात करते हुए उन्होंने कहा कि भारत को तोड़ने की कोशिश करने वालों को उन्हीं की भाषा में जवाब देंगे। इस दौरान शाह ने कहा कि जम्मू कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और इसे कोई अलग नहीं कर सकता है। उन्होंने कहा कि कश्मीरी पंडित अपने ही देश में दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं। हमें उनकी वापसी की उम्मीद है। गृह मंत्री ने कहा कि कश्मीरियत की बात है तो सबकी बात होनी चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या सूफी संत कश्मीर का हिस्सा नहीं थे? शाह ने कहा कि वह समय आएगा जब कश्मीरी पंडित वहां के मंदिरों में पूजा-पाठ करते हुए दिखाई देंगे।शाह ने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी ने कहा था कि कश्मीर की समस्या का समाधान 'जम्हूरियत, कश्मीरियत और इंसानियत' होना चाहिए। मैं यह आज दोहराता हूं कि मोदी सरकार भी अटल जी के रास्ते पर ही कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि जम्हूरियत परिवारों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। गृह मंत्री ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के विकास के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि आयुष्मान भारत योजना का सबसे ज्यादा लाभ जम्मू-कश्मीर को मिल रहा है। उन्होंने कहा कि कश्मीर में शौचालय बनवाना और बिजली पहुंचाना ही इंसानियत है। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग था और हमेशा रहेगा।जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव और लोकसभा चुनाव एक साथ न कराने पर शाह ने कहा कि दोनों चुनाव इसलिए साथ नहीं कराए गए क्योंकि सुरक्षा का मसला था। विधानसभा चुनाव में हजारों उम्मीदवार होते हैं, उन्हें गांव-गांव पहुंचना होता है। बड़े नेताओं के दौरे होते हैं। गुलाम नबी आजाद से मुखातिब होते हुए शाह ने कहा कि जैसा आपने कहा हम राष्ट्रपति शासन के द्वारा शासन नहीं करना चाहते। ईश्वर की कृपा और मोदी जी की प्रसिद्धि से हमारे पास पर्याप्त राज्यों में सरकार है, कुल मिलाकर 16 राज्यों में। सुरक्षा कारणों के चलते ऐसा हुआ कि चुनाव एक साथ नहीं कराए गए।गृह मंत्री शाह ने कहा कि गुलाम नबी आजाद जी और मनोज झा जी ने कहा था कि हम भारत की जनता के बीच नेहरू जी के बारे में गलत जानकारी फैलाना चाहते हैं। यह गलत है। यह हमारा उद्देश्य न था और न कभी होगा। लेकिन, जो देश इतिहास में की गई अपनी गलतियों से नहीं सीखते उनका भविष्य बेहतर नहीं होता।-जम्मू कश्मीर भारत का अभिन्न अंग। कश्मीरी पंडित अपने ही देश में दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं। हमें उनकी वापसी की उम्मीद है। -घाटी से सूफी संतों को खदेड़ दिया गया, चुन चुनकर मार दिया गया। वो देश की एकता की बात कहते थे। कहां चली गई यहां से सूफी परंपरा?-अटल जी के रास्ते पर हैं मोदी सरकार।-भारत को तोड़ने वालों को उन्हीं की भाषा में जवाब देंगे।-आयुष्मान योजना का सबसे ज्यादा फायदा जम्मू कश्मीर को हुआ।-विधानसभा चुनाव, लोकसभा चुनाव इसलिए साथ नहीं कराए गए क्योंकि सुरक्षा का मसला था। विधानसभा चुनाव में हजारों उम्मीदवार होते हैं, उन्हें गांव गांव पहुंचना होता है। बड़े नेताओं के दौरे होते हैं। आयोग जब चाहे चुनाव करा ले।राज्यसभा में जम्मू कश्मीर में राष्ट्रपति शासन लगाए जाने के प्रस्ताव पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने केंद्र सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि कश्मीर की संस्कृति का संरक्षण सरकार करेगी। आतंक पर जीरो टॉलरेंस की बात करते हुए उन्होंने कहा कि भारत को तोड़ने की कोशिश करने वालों को उन्हीं की भाषा में जवाब देंगे।इस दौरान शाह ने कहा कि जम्मू कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और इसे कोई अलग नहीं कर सकता है। उन्होंने कहा कि कश्मीरी पंडित अपने ही देश में दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं। हमें उनकी वापसी की उम्मीद है। गृह मंत्री ने कहा कि कश्मीरियत की बात है तो सबकी बात होनी चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या सूफी संत कश्मीर का हिस्सा नहीं थे? शाह ने कहा कि वह समय आएगा जब कश्मीरी पंडित वहां के मंदिरों में पूजा-पाठ करते हुए दिखाई देंगे।शाह ने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी ने कहा था कि कश्मीर की समस्या का समाधान 'जम्हूरियत, कश्मीरियत और इंसानियत' होना चाहिए। मैं यह आज दोहराता हूं कि मोदी सरकार भी अटल जी के रास्ते पर ही कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि जम्हूरियत परिवारों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। Union Home Minister Amit Shah in Rajya Sabha: Atal Bihari Vajpayee had said that solution of Kashmir's problem should be in"Jamuriyat, Kashmiriyat, & insaniyat", I reiterate today that Modi led government is also working on Atal ji's path of"Jamuriyat, Kashmiriyat, & insaniyat"

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