भाजपा लगातार चौथी जीत दर्ज करने के लिए चुनाव मैदान में उतरी है जबकि कांग्रेस फिर से राजनीतिक प्रभुत्व कायम करने के लिए अपनी ताकत झोंक रही है LokSabhaElections2019
जालौर| पुनः संशोधित बुधवार, 17 अप्रैल 2019 इस सीट से भाजपा लगातार चौथी जीत दर्ज करने के लिए चुनाव मैदान में उतरी है जबकि कांग्रेस फिर से राजनीतिक प्रभुत्व कायम करने के लिए अपनी ताकत झोंक रही है। यहां मतदान उन्नतीस अप्रैल को होगा। चुनाव में कुल पन्द्रह उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। इनमें इन दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों के अलावा राम राज्य परिषद पार्टी के कालूराम, बीएमयूपी के भंवर लाल, एपीओआई के रामप्रसाद जाटव, एसएचएस की विजयश्री तथा नौ निर्दलीय प्रत्याशी शामिल हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में विदेशों में भारत की बढ़ी साख एवं गत फरवरी में आतंकवादी ठिकानों पर सर्जिकल स्ट्राइक के बाद बने माहौल एवं मोदी सरकार की उपलब्धियों के आधार पर भाजपा प्रत्याशी इस बार भी जीत का दावा कर रहे है जबकि कांग्रेस उम्मीदवार राज्य में उनकी सरकार एवं किसानों के कर्ज माफ एवं बेरोजगारों को भत्ता देने के साथ पूरे किये गये अन्य वादों एवं गहलोत सरकार की उपलब्धियां लेकर मतदाताओं के बीच जा रहे है। अभी दोनों दलों के उम्मीदवारों के पक्ष में किसी बड़े नेता का चुनाव प्रचार नहीं हुआ है। मतदान में मात्र तेरह दिन शेष बचे हैं और शीघ्र ही स्टार प्रचारकों का चुनाव प्रचार होगा। पटेल वर्ष 2009 एवं 2014 में दो बार लगातार लोकसभा चुनाव जीत चुके है और इस बार जीत की तीकड़ी बनाने के लिए चुनाव मैदान में उतरे हैं। चुनाव जीतने के बाद जनता के बीच में कम आने को लेकर उनका विरोध भी हो रहा है जबकि कांग्रेस उम्मीदवार को सिरोही से बागी होकर चुनाव लड़े संयम लोढ़ा की उनके करीब दो दर्जन समर्थकों के साथ पार्टी में वापसी का सहारा मिलने की उम्मीद है। सांचौर से कांग्रेस विधायक सुखराम विश्नोई राज्य सरकार में मंत्री है और इस बार कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के चुनाव में संबंधित क्षेत्र के मंत्री की जिम्मेदारी तय करने के बयान के बाद विश्नोई की राजनीतिक प्रतिष्ठा भी दांव पर लगी हैं। ऐसे में कांग्रेस एकजुट नजर आने लगी है, जिसका रतन देवासी को फायदा हो सकता है। देवासी जिले की रानीवाड़ा से 2008 में कांग्रेस विधायक रह चुके हैं और उन्हें उप मुख्य सचेतक भी बनाया गया। राजनीतिक प्रभुत्व एवं इस बार जिले में बदलते हालात के कारण लोकसभा चुनाव में उनकी पटेल के साथ कड़ीजालौर संसदीय क्षेत्र में जालौर, सिरोही, सांचौर, पिंडवाड़ा-आबू, रानीवाड़ा, आहोर, भीनमाल एवं रेवदर विधानसभा क्षेत्र आते हैं जहां पिछले विधानसभा चुनाव में छह विधानसभा क्षेत्रों पर भाजपा ने कब्जा जमाया था जबकि सांचौर में कांग्रेस तथा सिरोही में निर्दलीय प्रत्याशी ने चुनाव जीता था। जालौर में अब तक हुए लोकसभा चुनावों में कांग्रेस सर्वाधिक नौ बार, भाजपा चार तथा जनता पार्टी, स्वतंत्र पार्टी एवं निर्दलीय ने एक-एक बार चुनाव जीता है। वर्ष 1952 में भवानी सिंह निर्दलीय, 1957 में सूरज रतन दमानी कांग्रेस, 1962 में हरीश चंद कांग्रेस, 1967 डी एन पाटोदिया स्वतंत्री पार्टी, 1977 में हुकमाराम जनता पार्टी, 1980 में वीरदा राम फुलवारिया कांग्रेस, 1984, 1991, 1998 एवं 1999 में सरदार बूटा सिंह कांग्रेस, कैलाश मेघवाल भाजपा, 1996 में परसाराम मेघवाल कांग्रेस, 2004 में सुशीला बंगारु भाजपा प्रत्याशी ने चुनाव जीता था। जालौर से बूटा सिंह सबसे अधिक चार बार लोकसभा पहुंचे। इस सीट पर सात बार राज्य के बाहर के प्रत्याशियों ने जीत दर्ज की जिनमें पंजाब के बूटा सिंह , कोलकात्ता के सूरज रतन, देवी चंद पाटोदिया एवं उत्तर प्रदेश की सुशीला बंगारु शामिल है।.
जालौर| पुनः संशोधित बुधवार, 17 अप्रैल 2019 इस सीट से भाजपा लगातार चौथी जीत दर्ज करने के लिए चुनाव मैदान में उतरी है जबकि कांग्रेस फिर से राजनीतिक प्रभुत्व कायम करने के लिए अपनी ताकत झोंक रही है। यहां मतदान उन्नतीस अप्रैल को होगा। चुनाव में कुल पन्द्रह उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। इनमें इन दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों के अलावा राम राज्य परिषद पार्टी के कालूराम, बीएमयूपी के भंवर लाल, एपीओआई के रामप्रसाद जाटव, एसएचएस की विजयश्री तथा नौ निर्दलीय प्रत्याशी शामिल हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में विदेशों में भारत की बढ़ी साख एवं गत फरवरी में आतंकवादी ठिकानों पर सर्जिकल स्ट्राइक के बाद बने माहौल एवं मोदी सरकार की उपलब्धियों के आधार पर भाजपा प्रत्याशी इस बार भी जीत का दावा कर रहे है जबकि कांग्रेस उम्मीदवार राज्य में उनकी सरकार एवं किसानों के कर्ज माफ एवं बेरोजगारों को भत्ता देने के साथ पूरे किये गये अन्य वादों एवं गहलोत सरकार की उपलब्धियां लेकर मतदाताओं के बीच जा रहे है। अभी दोनों दलों के उम्मीदवारों के पक्ष में किसी बड़े नेता का चुनाव प्रचार नहीं हुआ है। मतदान में मात्र तेरह दिन शेष बचे हैं और शीघ्र ही स्टार प्रचारकों का चुनाव प्रचार होगा। पटेल वर्ष 2009 एवं 2014 में दो बार लगातार लोकसभा चुनाव जीत चुके है और इस बार जीत की तीकड़ी बनाने के लिए चुनाव मैदान में उतरे हैं। चुनाव जीतने के बाद जनता के बीच में कम आने को लेकर उनका विरोध भी हो रहा है जबकि कांग्रेस उम्मीदवार को सिरोही से बागी होकर चुनाव लड़े संयम लोढ़ा की उनके करीब दो दर्जन समर्थकों के साथ पार्टी में वापसी का सहारा मिलने की उम्मीद है। सांचौर से कांग्रेस विधायक सुखराम विश्नोई राज्य सरकार में मंत्री है और इस बार कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के चुनाव में संबंधित क्षेत्र के मंत्री की जिम्मेदारी तय करने के बयान के बाद विश्नोई की राजनीतिक प्रतिष्ठा भी दांव पर लगी हैं। ऐसे में कांग्रेस एकजुट नजर आने लगी है, जिसका रतन देवासी को फायदा हो सकता है। देवासी जिले की रानीवाड़ा से 2008 में कांग्रेस विधायक रह चुके हैं और उन्हें उप मुख्य सचेतक भी बनाया गया। राजनीतिक प्रभुत्व एवं इस बार जिले में बदलते हालात के कारण लोकसभा चुनाव में उनकी पटेल के साथ कड़ीजालौर संसदीय क्षेत्र में जालौर, सिरोही, सांचौर, पिंडवाड़ा-आबू, रानीवाड़ा, आहोर, भीनमाल एवं रेवदर विधानसभा क्षेत्र आते हैं जहां पिछले विधानसभा चुनाव में छह विधानसभा क्षेत्रों पर भाजपा ने कब्जा जमाया था जबकि सांचौर में कांग्रेस तथा सिरोही में निर्दलीय प्रत्याशी ने चुनाव जीता था। जालौर में अब तक हुए लोकसभा चुनावों में कांग्रेस सर्वाधिक नौ बार, भाजपा चार तथा जनता पार्टी, स्वतंत्र पार्टी एवं निर्दलीय ने एक-एक बार चुनाव जीता है। वर्ष 1952 में भवानी सिंह निर्दलीय, 1957 में सूरज रतन दमानी कांग्रेस, 1962 में हरीश चंद कांग्रेस, 1967 डी एन पाटोदिया स्वतंत्री पार्टी, 1977 में हुकमाराम जनता पार्टी, 1980 में वीरदा राम फुलवारिया कांग्रेस, 1984, 1991, 1998 एवं 1999 में सरदार बूटा सिंह कांग्रेस, कैलाश मेघवाल भाजपा, 1996 में परसाराम मेघवाल कांग्रेस, 2004 में सुशीला बंगारु भाजपा प्रत्याशी ने चुनाव जीता था। जालौर से बूटा सिंह सबसे अधिक चार बार लोकसभा पहुंचे। इस सीट पर सात बार राज्य के बाहर के प्रत्याशियों ने जीत दर्ज की जिनमें पंजाब के बूटा सिंह , कोलकात्ता के सूरज रतन, देवी चंद पाटोदिया एवं उत्तर प्रदेश की सुशीला बंगारु शामिल है।
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