सुप्रीम कोर्ट ने राजनीतिक दलों को 2000 रुपये से कम के गुमनाम नकद चंदे की अनुमति देने वाले आयकर अधिनियम के प्रावधान को चुनौती देने वाली याचिका पर केंद्र से जवाब मांगा है। याचिकाकर्ता का तर्क है कि पारदर्शिता की कमी से चुनाव प्रक्रिया कमजोर होती है, क्योंकि मतदाताओं को दानकर्ताओं की जानकारी नहीं मिल पाती। याचिका में राजनीतिक दलों के लिए नकद चंदे पर...
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को राजनीतिक दलों को दो हजार रुपये से कम का 'गुमनाम' नकद चंदा लेने की अनुमति देने वाले आयकर अधिनियम के प्रविधान की वैधता को चुनौती देने वाली याचिका पर केंद्र और अन्य से जवाब मांगा है। याचिका में कहा गया है कि पारदर्शिता की यह कमी चुनाव प्रक्रिया की शुचिता को कमजोर करती है, क्योंकि यह मतदाताओं को दानकर्ता और उनके उद्देश्य समेत राजनीतिक चंदे के स्त्रोत के बारे में जानकारी से वंचित करती है, जिससे वे वोट डालते समय तर्कसंगत व बुद्धिमत्तापूर्ण निर्णय लेने से वंचित रह जाते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी कर मांगा जवाब सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र, चुनाव आयोग और अन्य को नोटिस जारी कर याचिका पर जवाब मांगा है। याचिका में निर्वाचन आयोग को यह निर्देश देने की भी मांग की गई है कि वह किसी राजनीतिक दल के पंजीकरण और चुनाव चिन्ह के आवंटन के लिए एक शर्त के रूप में यह निर्धारित करे कि कोई भी राजनीतिक दल नकद में कोई राशि प्राप्त नहीं कर सकता। पीठ ने क्या कहा? जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने कहा कि मामले को चार सप्ताह बाद सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाएगा। पीठ ने याचिकाकर्ता खेम सिंह भाटी की ओर से वकील स्नेहा कलिता के साथ पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता विजय हंसारिया से पूछा कि उन्होंने पहले हाई कोर्ट का रुख क्यों नहीं किया। पीठ ने कहा कि हाई कोर्ट को इस पर विचार करने दीजिए। हंसारिया ने कहा कि यह याचिका देश भर में सभी राजनीतिक दलों और उन्हें मिलने वाले राशि से संबंधित है। पीठ ने याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति जताते हुए चुनाव आयोग, केंद्र और भाजपा तथा कांग्रेस जैसे कई राजनीतिक दलों सहित अन्य को नोटिस जारी किए। याचिका में इन चीजों को रद करने की मांग याचिका में आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 13ए के खंड को असंवैधानिक करार देते हुए रद करने की मांग की गई है और साथ ही सुप्रीम कोर्ट के 2024 के फैसले का भी हवाला दिया गया है, जिसमें चुनावी बांड योजना को रद कर दिया गया था। वकील जयेश के उन्नीकृष्णन के माध्यम से दायर याचिका में कहा गया है कि याचिकाकर्ता यह निर्देश चाहता है कि राजनीतिक दल उन्हें कोई भी धनराशि देने वाले व्यक्ति का नाम और अन्य सभी विवरण उजागर करें तथा कोई भी धनराशि नकद में प्राप्त न की जाए, ताकि राजनीतिक चंदे में पारदर्शिता बनी रहे। यह भी पढ़ें: आरक्षण पर क्रीमी लेयर का क्या होगा भविष्य? CJI ने सरकार के पाले में डाला बॉल; रिटायरमेंट से पहले दिया बड़ा बयान.
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