रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के बाबरी मस्जिद पर दिए गए बयान को लेकर विपक्षी दलों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। विपक्ष ने आरोप लगाया है कि ऐतिहासिक तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश किया जा रहा है और यह जनता का ध्यान असली मुद्दों से भटकाने की कोशिश है। कांग्रेस और अन्य दलों के नेताओं ने राजनाथ सिंह से माफी मांगने या सबूत पेश करने की मांग की है।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के हालिया बयान पर विपक्ष ी दलों ने तीखा हमला बोला है। राजनाथ सिंह ने कहा था कि देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू बाबरी मस्जिद को सरकारी धन से बनवाना चाहते थे, जिसका विरोध सरदार वल्लभभाई पटेल ने किया था। इस बयान को लेकर कांग्रेस समेत कई विपक्ष ी पार्टियों ने कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है और इसे ऐतिहासिक तथ्य ों को तोड़-मरोड़कर पेश करने का आरोप लगाया है। कांग्रेस नेताओं ने इसे जनता का ध्यान असली मुद्दों से भटकाने की रणनीति करार दिया है, जबकि अन्य विपक्ष ी दलों ने
राजनाथ सिंह से सबूत पेश करने या माफी मांगने की मांग की है।\विपक्षी दलों की प्रतिक्रिया में कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा कि यह सब असली मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि रोज नए मुद्दे खड़े किए जाते हैं ताकि जनता की असली समस्याओं पर बात ही न हो। कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने रक्षा मंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें इतिहास को तोड़ने-मरोड़ने के बजाय देश की रणनीतिक चुनौतियों पर ध्यान देना चाहिए। इमरान मसूद ने राजनाथ सिंह के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अगर ऐसा कोई तथ्य है तो उसे दस्तावेजों के साथ पेश किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सिर्फ बोल देने से कोई भी इस बात को स्वीकार नहीं करेगा। उन्होंने सरदार वल्लभभाई पटेल के आरएसएस पर प्रतिबंध लगाने से जुड़े ऐतिहासिक दस्तावेजों का भी जिक्र किया, जो नेहरू के नेतृत्व में हुए थे। एनसीपी नेता तारिक अनवर ने भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि उसका काम ही पुरानी बातों और विवादों को उठाना रह गया है, क्योंकि नेहरू अब इस दुनिया में नहीं हैं, इसलिए उन पर आरोप लगाना आसान है। समाजवादी पार्टी के सांसद धर्मेंद्र यादव ने कहा कि रक्षा मंत्री जैसे वरिष्ठ नेता को देश की सेना और सैनिकों से जुड़े मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए। टीएमसी सांसद कीर्ति आजाद ने राजनाथ सिंह से सबूत पेश करने या माफी मांगकर इस्तीफा देने की मांग की। शरद पवार गुट की सांसद फौजिया खान ने कहा कि मस्जिद के लिए पैसा ईमानदारी से जुटाया जाना चाहिए, न कि सरकारी धन का इस्तेमाल किया जाना चाहिए।\इस पूरे विवाद ने एक बार फिर भारत की राजनीति में इतिहास और विचारधारा को लेकर बहस छेड़ दी है। विपक्षी दलों का आरोप है कि भाजपा सरकार ऐतिहासिक तथ्यों को अपने राजनीतिक एजेंडे के अनुरूप इस्तेमाल कर रही है, जबकि भाजपा इस आरोप को खारिज करती रही है। इस घटनाक्रम ने यह भी उजागर किया है कि भारत में इतिहास को लेकर अभी भी कितने गहरे विभाजन हैं और विभिन्न राजनीतिक दल अपने-अपने तरीके से ऐतिहासिक घटनाओं की व्याख्या करते हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि भविष्य में इस मामले में और क्या घटनाक्रम सामने आते हैं और इस पर जनता की क्या प्रतिक्रिया रहती है। यह घटनाक्रम आगामी चुनावों पर भी असर डाल सकता है, क्योंकि विपक्षी दल इस मुद्दे को भाजपा सरकार के खिलाफ एक हथियार के रूप में इस्तेमाल करने की कोशिश करेंगे। इस पूरे मामले में, सरकार और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी रहने की संभावना है और जनता को सच्चाई तक पहुँचने के लिए गहन विश्लेषण करने की आवश्यकता होगी
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