Uttar Pradesh (UP) Haze: 18-year high smog covers UP. Follow Dainik Bhaskar (दैनिक भास्कर) Latest Updates. मार्च के महीने में पूरे यूपी पर धुंध छा गई। ऐसा 18 साल बाद दिखा।
यूपी में कब तक छाई रहेगी धुंध:यूपी में 4 दिनों से मौसम बिगड़ा हुआ है। सुबह के वक्त जनवरी महीने जैसी धुंध छाई रहती है। विजिबिलिटी घटकर 30 मीटर तक रह जाती है। 2008 यानी 18 साल बाद मार्च महीने में ऐसी स्थिति देखने को मिल रही है। इसी बीच, कुछ लोगों का कहना है कि इजराइल-अमेरिका और ईराक्या ऐसे दावे ठीक हैं? क्या इस धुंध की वजह से गर्मी ज्यादा पड़ेगी? यह धुंध कब तक छाई रहेगी? इस बारे में हमने IMD के वैज्ञानिक अतुल सिंह से बात की।धुंध के लिए 2 फैक्टर काम करते हैं।5 दिन पहले से शुष्क पछुआ हवाएं चल रही थीं। 4 दिन पहले झारखंड के पास चक्रवाती हवाओं का क्षेत्र बन गया। इसकी वजह से बंगाल की खाड़ी से हवाएं यूपी तक आईं। इससे मॉइश्चर की कमी पूरी हो गई। इस तरह से धुंध बनने के सारे फैक्टर पूरे हो गए। टेम्प्रेचर ज्यादा होने के बावजूद धुंध बनी और विजिबिलिटी 30 मीटर तक रह गई।देखिए, इस साल कोई भी पश्चिमी विक्षोभ एक्टिव नहीं हुआ है। इसकी वजह से हवा में स्थिरता है, जबकि गर्मियों में पश्चिमी विक्षोभ बनते रहे हैं। इस वक्त मध्य भारत के ऊपर एंटी साइक्लोन बना हुआ है। उसकी वजह से गर्म हवाओं में कमी आई है। इससे आसमान साफ रहा और गर्मी बढ़ती जा रही है।जनवरी-फरवरी सर्दी के महीने होते हैं। इनमें वातावरण बिल्कुल स्टेबल होता है। वहीं, मार्च गर्मी का शुरुआती महीना होता है। इस समय पश्चिमी विक्षोभ आने लगते हैं। इस साल अभी तक कोई एक्टिव डिस्टर्बेंस नहीं आया है। हालांकि, पहाड़ों पर एक्टिव डिस्टर्बेंस आए हैं, लेकिन मैदान इलाकों में ऐसा नहीं हुआ। मतलब जो स्थिरता ठंड में बनी थी, वो अभी खत्म नहीं हुई है। इसलिए धुंध दिख रही है। भदोही में लगातार तीसरे दिन 12 मार्च को भी सुबह के समय धुंध छाई रही। विजिबिलिटी घटकर सिर्फ 20 से 25 मीटर रह गई।इस समय पूरब की तरफ से हवाएं तो चलती नहीं हैं। मॉइश्चर भी नहीं होता। लेकिन, 2026 के मार्च महीने में पूरब से हवाएं चली हैं। इस वजह से मॉइश्चर बना और धुंध दिखी। अब पूरब की हवाएं धीरे-धीरे छंट रही हैं, इसलिए मॉइश्चर भी कम हो रहा है। धुंध अब कम होने लगेगी।ये ठीक है कि मार्च के महीने में धुंध का पड़ना रेयर होता है। लेकिन, ऐसा नहीं है कि ये हो नहीं सकता। 2008 में भी ऐसा हुआ था। 8 से 10 मार्च के दौरान धुंध छाई थी।धुंध का बच्चों और बुजुर्ग पर असर दिख सकता है। अस्थमा का पेशेंट को सांस लेने में दिक्कत हो सकती है। छोटे बच्चे ओस में ज्यादा समय रहें, तो उन्हें कोल्ड एंड फीवर की दिक्कत हो सकती है। लेकिन, कोई बड़ा नुकसान नहीं होता है। सबसे ज्यादा ट्रैफिक पर असर पड़ता है। सड़क पर चलते हुए अलर्ट रहने कही जरूरत होती है।नहीं, सब्जी और अनाज की पैदावार पर इस धुंध का कोई बुरा असर नहीं होता है।इस सीजन गर्मी ज्यादा पड़ेगी, यह सही है। लेकिन, इसमें धुंध का रोल नहीं होगा। भौगोलिक रीजन ऐसे हैं कि प्रशांत महासागर में जो अल-नीनो कंडीशन थीं, वो धीरे-धीरे न्यूट्रल नीनो की तरफ बढ़ रही हैं। ऐसा कह सकते हैं कि प्रशांत महासागर में भूमध्य रेखा के आसपास का तापमान बढ़ रहा है। इससे आने वाले वक्त में गर्मी बढ़ती जाएगी।नहीं , ऐसा नहीं है। ये लोगों के बीच की चर्चाएं हो सकती हैं। लेकिन, इस बात को फैक्ट सपोर्ट नहीं करते हैं।यूपी में 18 साल बाद मार्च में छा रही धुंध, कई जिलों में विजिबिलिटी 30 मीटर, 2 दिन बाद और बिगड़ेगा मौसम यूपी में मऊ, देवरिया समेत 10 शहरों में घनी धुंध छाई हुई है। कई जगह विजिबिलिटी 30 मीटर तक सिमट गई है। कुछ सड़कों पर सन्नाटा नजर आया। मौसम विभाग के मुताबिक, ठंडी हवाओं और नमी की वजह से धुंध और घनी हो सकती है।.
यूपी में कब तक छाई रहेगी धुंध:यूपी में 4 दिनों से मौसम बिगड़ा हुआ है। सुबह के वक्त जनवरी महीने जैसी धुंध छाई रहती है। विजिबिलिटी घटकर 30 मीटर तक रह जाती है। 2008 यानी 18 साल बाद मार्च महीने में ऐसी स्थिति देखने को मिल रही है। इसी बीच, कुछ लोगों का कहना है कि इजराइल-अमेरिका और ईराक्या ऐसे दावे ठीक हैं? क्या इस धुंध की वजह से गर्मी ज्यादा पड़ेगी? यह धुंध कब तक छाई रहेगी? इस बारे में हमने IMD के वैज्ञानिक अतुल सिंह से बात की।धुंध के लिए 2 फैक्टर काम करते हैं।5 दिन पहले से शुष्क पछुआ हवाएं चल रही थीं। 4 दिन पहले झारखंड के पास चक्रवाती हवाओं का क्षेत्र बन गया। इसकी वजह से बंगाल की खाड़ी से हवाएं यूपी तक आईं। इससे मॉइश्चर की कमी पूरी हो गई। इस तरह से धुंध बनने के सारे फैक्टर पूरे हो गए। टेम्प्रेचर ज्यादा होने के बावजूद धुंध बनी और विजिबिलिटी 30 मीटर तक रह गई।देखिए, इस साल कोई भी पश्चिमी विक्षोभ एक्टिव नहीं हुआ है। इसकी वजह से हवा में स्थिरता है, जबकि गर्मियों में पश्चिमी विक्षोभ बनते रहे हैं। इस वक्त मध्य भारत के ऊपर एंटी साइक्लोन बना हुआ है। उसकी वजह से गर्म हवाओं में कमी आई है। इससे आसमान साफ रहा और गर्मी बढ़ती जा रही है।जनवरी-फरवरी सर्दी के महीने होते हैं। इनमें वातावरण बिल्कुल स्टेबल होता है। वहीं, मार्च गर्मी का शुरुआती महीना होता है। इस समय पश्चिमी विक्षोभ आने लगते हैं। इस साल अभी तक कोई एक्टिव डिस्टर्बेंस नहीं आया है। हालांकि, पहाड़ों पर एक्टिव डिस्टर्बेंस आए हैं, लेकिन मैदान इलाकों में ऐसा नहीं हुआ। मतलब जो स्थिरता ठंड में बनी थी, वो अभी खत्म नहीं हुई है। इसलिए धुंध दिख रही है। भदोही में लगातार तीसरे दिन 12 मार्च को भी सुबह के समय धुंध छाई रही। विजिबिलिटी घटकर सिर्फ 20 से 25 मीटर रह गई।इस समय पूरब की तरफ से हवाएं तो चलती नहीं हैं। मॉइश्चर भी नहीं होता। लेकिन, 2026 के मार्च महीने में पूरब से हवाएं चली हैं। इस वजह से मॉइश्चर बना और धुंध दिखी। अब पूरब की हवाएं धीरे-धीरे छंट रही हैं, इसलिए मॉइश्चर भी कम हो रहा है। धुंध अब कम होने लगेगी।ये ठीक है कि मार्च के महीने में धुंध का पड़ना रेयर होता है। लेकिन, ऐसा नहीं है कि ये हो नहीं सकता। 2008 में भी ऐसा हुआ था। 8 से 10 मार्च के दौरान धुंध छाई थी।धुंध का बच्चों और बुजुर्ग पर असर दिख सकता है। अस्थमा का पेशेंट को सांस लेने में दिक्कत हो सकती है। छोटे बच्चे ओस में ज्यादा समय रहें, तो उन्हें कोल्ड एंड फीवर की दिक्कत हो सकती है। लेकिन, कोई बड़ा नुकसान नहीं होता है। सबसे ज्यादा ट्रैफिक पर असर पड़ता है। सड़क पर चलते हुए अलर्ट रहने कही जरूरत होती है।नहीं, सब्जी और अनाज की पैदावार पर इस धुंध का कोई बुरा असर नहीं होता है।इस सीजन गर्मी ज्यादा पड़ेगी, यह सही है। लेकिन, इसमें धुंध का रोल नहीं होगा। भौगोलिक रीजन ऐसे हैं कि प्रशांत महासागर में जो अल-नीनो कंडीशन थीं, वो धीरे-धीरे न्यूट्रल नीनो की तरफ बढ़ रही हैं। ऐसा कह सकते हैं कि प्रशांत महासागर में भूमध्य रेखा के आसपास का तापमान बढ़ रहा है। इससे आने वाले वक्त में गर्मी बढ़ती जाएगी।नहीं , ऐसा नहीं है। ये लोगों के बीच की चर्चाएं हो सकती हैं। लेकिन, इस बात को फैक्ट सपोर्ट नहीं करते हैं।यूपी में 18 साल बाद मार्च में छा रही धुंध, कई जिलों में विजिबिलिटी 30 मीटर, 2 दिन बाद और बिगड़ेगा मौसम यूपी में मऊ, देवरिया समेत 10 शहरों में घनी धुंध छाई हुई है। कई जगह विजिबिलिटी 30 मीटर तक सिमट गई है। कुछ सड़कों पर सन्नाटा नजर आया। मौसम विभाग के मुताबिक, ठंडी हवाओं और नमी की वजह से धुंध और घनी हो सकती है।
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