अल फलाह यूनिवर्सिटी का मालिक जावेद अहमद सिद्दीकी (61) तीन वर्ष जेल में बंद रह चुका है। वह पहले चिट फंड का काम करता था। उसके बाद उसने लोगों को पैसे नहीं दिए थे।
अल फलाह यूनिवर्सिटी का मालिक जावेद अहमद सिद्दीकी तीन वर्ष जेल में बंद रह चुका है। वह पहले चिट फंड का काम करता था। उसके बाद उसने लोगों को पैसे नहीं दिए थे। उसके खिलाफ 14 से 15 प्राथमिकी दर्ज हुई थीं। माना जा रहा है कि उसने इन पैसों से यूनिवर्सिटी को खड़ा करने में लगाया। हालांकि बाद में उसने सभी लोगों का पैसा लौटा दिया। वह सभी केसों से बरी हो गया था। साल 2000 दर्ज हुई एफआईआर में सिद्दीकी और उनके भाई सऊद अहमद का नाम दर्ज किया गया था, जो नई दिल्ली के न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी पुलिस स्टेशन में आईपीसी की धाराओं 420 , 406 और 409 , 468 , 471 और 120बी के तहत दर्ज की गई थी। उन पर 7.
5 करोड़ रुपये की हेराफेरी का आरोप था। बीटेक सिविल इंजीनियरिंग में किया हुआ है मालिक जावेद ने इंदौर से बीटेक सिविल इंजीजिनयर में किया हुआ है। इसके बाद उसने वर्ष 1992 में जामिया मिलिया यूनिवर्सिटी में एसिस्टेंट प्रोफेसर के तौर पर नौकरी करना शुरू किया। यहां इसने जनवरी, 1994 तक नौकरी की। इसकी दोनों बहनें दुबई में रहती हैं। दोनों बेटे भी दुबई में रहते हैं। नौ कंपनियों से रहा है संबंध जावेद अहमद सिद्दीकी, अल-फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट का अध्यक्ष है, जो फरीदाबाद स्थित अल-फलाह यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च सेंटर चलाता है। फरीदाबाद स्थित अल-फलाह यूनिवर्सिटी का संबंध नौ कंपनियों से है, जिसका मैनेजिंग ट्रस्टी जावेद अहमद सिद्दीकी है। सिद्दीकी इन नौ कंपनियों का डायरेक्टर है, जो कि इनवेस्टमेंट, शिक्षा, सॉफ्टवेयर, ऊर्जा, निर्यात और कंसल्टेंसी से जुड़ा है। पहले भी बड़े कांड में फंस चुकी है यूनिवर्सिटी देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर से इंजीनियरिंग की डिग्री ले चुके जावेद अहमद सिद्दीकी, अल-फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट का अध्यक्ष है। अल फलाह विश्वविद्यालय अब उस जांच के केंद्र में है, जिसमें रेड फोर्ट मेट्रो स्टेशन के पास 10 नवंबर को हुए धमाके में शामिल उग्रवादी डॉक्टरों के मॉड्यूल का खुलासा हुआ है, जिसमें 13 लोगों की मौत हुई थी। इस साजिश से जुड़े तीन डॉक्टर उमर उन नबी, जो धमाके वाली कार चला रहा था, मुजम्मिल अहमद गनाई, जिसे 30 अक्टूबर को गिरफ्तार किया गया, और शाहीन शाहिद, जिसे 11 नवंबर को लखनऊ से पकड़ा गया अल-फलाह में पढ़ाता था। जांच में खुल रही हैं कई परतें रिकॉर्ड के अनुसार, सिद्दीकी का सबसे पुराना संबंध अल-फलाह इन्वेस्टमेंट कंपनी से है, जिसमें वह 18 सितंबर 1992 को शामिल हुए थे। अन्य कंपनियों में अल-फलाह सॉफ्टवेयर, अल-फलाह एनर्जीज, तर्बिया एजुकेशन फाउंडेशन और अल-फलाह एजुकेशन सर्विस शामिल हैं, जिसमें वह हाल ही में जुड़े। अधिकांश कंपनियों का रजिस्ट्रेशन का पता एक ही है- 274-A, अल-फलाह हाउस, जामिया नगर, ओखला, नई दिल्ली। यही वही बिल्डिंग है, जहां से अल-फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट संचालित होता है। एक इंजीनियरिंग कॉलेज के तौर पर शुरू हुई यूनिवर्सिटी विश्वविद्यालय की शुरुआत 1997 में एक इंजीनियरिंग कॉलेज के रूप में हुई थी। ट्रस्ट और कंपनियों में उस्मा अख्तर का नाम भी शामिल है, जो अल-फलाह स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग की गवर्निंग बॉडी की सदस्य रह चुकी हैं। उनके लिंक्डइन प्रोफाइल के अनुसार, वह वर्तमान में संयुक्त अरब अमीरात में रहती हैं और वहां कई व्यवसायों से जुड़ी हैं। उनका नाम अल-फलाह एजुकेशन सर्विस और एमजेएच डेवलपर्स जैसी कंपनियों में निदेशक के रूप में दर्ज है। आलिया सिद्दीकी का नाम भी न्यासियों की सूची में है।
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