Visa Credit Card Success Story And History & Facts; Market Capitalization And Revenue Figures - All You Need To Know.
15 हजार से ज्यादा बैंकों का नेटवर्क, कभी फ्री में बांटे थे 60 हजार क्रेडिट कार्डअमेरिका में एक सर्वे के दौरान लोगों से सिंपल सा सवाल पूछा गया। इस सवाल का जवाब 10 में से 8 अमेरिकियों ने गलत दिया। आज वहीं सवाल आपसे पूछते हैं-जवाब न जानने वालों को बता दें कि यह दूसरी सबसे बड़ी पेमेंट टेक्नोलॉजी कंपनी है। दुनिया में 15 हजार से ज्यादा बैंक और वित्तीय संस्थाओं का नेटवर्क वीजा कंपनी के पास है। कंपनी का रेवेन्यू 2.
73 लाख करोड़ रुपए है।वीजा कंपनी के फाउंडर डी वार्ड हॉक अमेरिका के एक बैंक में काम करते थे। उनके आइडिया से ही 66 साल पहले बैंक ऑफ अमेरिका से बैंक अमेरिका क्रेडिट कार्ड कंपनी बनी थी। 1958 में बैंक ऑफ अमेरिका ने मिडिल क्लास और छोटे-मंझोले व्यापारियों के लिए पहली बार कागज से बना 'बैंक अमेरिका कार्ड' लॉन्च किया। यह कार्ड कागज से बना हुआ था, इसे पहला लाइसेंस क्रेडिट कार्ड कहा गया। यह दुनिया का पहला क्रेडिट कार्ड था जो कागज का बना हुआ था। मिडिल क्लास और छोटे-मंझोले व्यापारियों के लिए बनाए गए इस कार्ड की वैलिडिटी मात्र 1 साल की थी।क्रेडिट कार्ड ज्यादातर लोगों की लाइफस्टाइल का हिस्सा है, जब इसकी शुरुआत हुई थी, तब लोगों ने इसका काफी मजाक उड़ाया। हालांकि कंपनी ने लोगों के बीच जगह बनाने के लिए एक एक्सपेरिमेंट के साथ इसकी शुरुआत की। इस प्रयोग को 'दी ड्राॅप' नाम दिया गया। इस एक्सपेरिमेंट के तहत कैलिफोर्निया के आम लोगों को पोस्ट के जरिए 60 हजार क्रेडिट कार्ड भेजे गए। डी वार्ड हॉक डी वार्ड को वीजा का फाउंडर माना जाता है। वह अमेरिका में एक बैंक में काम करते थे। बाद में वह वीजा के सीईओ बने। जुलाई 2022 में उनका निधन हो गया। कंपनी ने यह स्ट्रैटजी इसलिए अपनाई ताकि लोग उसके नए पेमेंट सिस्टम का इस्तेमाल करें। रातोंरात लोगों के पास आज के 5000 डॉलर यानी 4.17 लाख रुपए के बराबर की क्रेडिट लाइन थी। वे इसकी मदद से बिना बैंक गए खरीदारी कर सकते थे और बाद में इसकी पेमेंट कर सकते थे। कंपनी की यह स्ट्रैटजी काम कर गई और लोगों के बीच कागज का क्रेडिट कार्ड पॉपुलर हो गया।छोटे व मध्यम व्यापारियों के लिए शुरू किए गए इस क्रेडिट कार्ड की लिमिट 300 डॉलर थी। 1958 में बैंक अमेरिका कार्ड पेश किया गया था। हालांकि 1970 तक बैंक ऑफ अमेरिका का इससे सीधा नियंत्रण छिन गया और डी वार्ड हॉक के नेतृत्व में ‘नेशनल बैंक अमेरिका कार्ड इंक’ की स्थापना हुई। इसके बाद कंपनी ने तेजी से विस्तार किया। 1975 में कंपनी की एंट्री इंटरनेशनल मार्केट में हुई। इसी साल कंपनी ने पहला डेबिट कार्ड जारी किया। इंटरनेशनल मार्केट में बढ़ती पॉपुलैरिटी को देखते हुए 1976 में बैंक अमेरिका कार्ड का नाम बदलकर ऑफिशियल तौर पर 'वीजा' कर दिया गया। लोगों के बीच बढ़ रही डिमांड को देखते हुए 1983 में वीजा ने दुनियाभर में अपने ग्राहकों को चौबीस घंटे कैश मुहैया कराने के लिए एटीएम मशीन की शुरुआत की। वीजा कंपनी का हेडक्वार्टर अमेरिका के कैलिफोर्निया में है। कंपनी ने शुरुआत में कैलिफोर्निया के आम लोगों को फ्री में 60 हजार क्रेडिट कार्ड बांटे थे।60 साल पहले इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट की शुरुआत करने वाली कंपनी वीजा की पहुंच दुनिया के हर कोने में है। इसकी सफलता की वजह है इनके कार्ड की वैश्विक स्वीकार्यता यानी ग्लोबल ऐक्सेप्टन्स। कार्ड की संख्या के आधार पर यह चीन के यूनियन पे के बाद दूसरे नंबर पर है। भारत में अधिकांश बैंक डेबिट क्रेडिट के लिए चार तरह के कार्ड इशू करते हैं। इनमें वीजा, मास्टरकार्ड, मेस्ट्रो और रुपए कार्ड है। इनमें रुपए भारतीय कंपनी है, जिसे 2005 में आरबीआई का पेमेंट और सेटेलमेंट सिस्टम लेकर आया था। भारत में भी अगर इंटरनेशन ट्रांजैक्शन करना है तो वीजा कार्ड के जरिए ही हो सकेगा। हालांकि वीजा को भारत में रुपए से लगातार चुनौती मिल रही है, पर टेक्नोलॉजी के कारण वीजा अभी भी ग्लोबल ब्रांड बना हुआ है।शॉपिंग के दौरान जब भी आप अपना वीजा कार्ड स्वाइप या टैप करते हैं या कार्डलेस ट्रांजैक्शन करते हैं तो उस लेन-देन की जानकारी सबसे पहले संबंधित बैंक को जाती है। बैंक यह डिटेल वीजा नेट को देता है। वीजा नेट आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जरिए इससे जुड़े जोखिम, फ्रॉड और बाकी पैरामीटर का आकलन करके रिस्क स्कोर निकालता है और बैंक से शेयर करता है। इस रिस्क स्कोर के आधार पर बैंक तय करता है कि पेमेंट रिसीव करना है या नहीं। ऑथोराइजेशन की यह पूरी प्रोसेस एक सेकेंड में पूरी हो जाती है। वीजा इसी प्रक्रिया को सुरक्षित और तेज बनाने के लिए बैंकों से चार्ज वसूलता है। ट्रांजैक्शन का बहुमूल्य डेटा भी वीजा बाकी कंपनियों से शेयर करता है।ज्यादातर लोगों को लगता है कि वीजा क्रेडिट या डेबिट कार्ड के इंटरेस्ट फीस से पैसे कमाता है, लेकिन असल में यह फीस कार्ड जारी करने वाला बैंक कमाता है। वीजा का कस्टमर्स से सीधा संबंध नहीं है। दरअसल, वीजा फोर पार्टी मॉडल से पैसे कमाता है। इसमें कस्टमर, मर्चेंट, बैंक और चौथी पार्टी खुद वीजा है। कंपनी का 39% रेवेन्यू इस डेटा को प्रोसेस करने के लिए लगाए जाने वाले चार्ज के जरिए आता है। इसमें भुगतान को अधिकृत करना, सेटलमेंट, वैल्यू एडेड सर्विस से आता है।नेट थिएट पर सीमा मिश्रा ने रचा गीतों का इंद्रधनुषपांच साल में ग्वालियर में सबसे अच्छी बारिशहरियाणा के 9 जिलों में बारिश,सड़कों पर 1 फीट पानी
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