मुजफ्फरपुर में नगर निगम की जलापूर्ति व्यवस्था चरमरा गई है। शहर के विस्तार के बावजूद जल कार्य शाखा का विस्तार नहीं हुआ, जिससे एक दर्जन वाटर टावर निष्क्रिय हैं और पाइपलाइनें जर्जर हो चुकी हैं। लीकेज की मरम्मत के लिए स्टाफ और आधुनिक उपकरण की कमी है। नल-जल योजना के तहत लगे मिनी पंप भी फेल हो रहे हैं। बुद्धिजीवी और महापौर विमला देवी जल बोर्ड के गठन और...
जागरण संवाददातास, मुजफ्फरपुर। जिस हिसाब से शहर का विस्तार हो रहा रहा है। आबादी और मकानों की संख्या बढ़ी है। लेकिन इस इस हिसाब से नगर निगम की जलापूर्ति व्यवस्था में सुविधा नहीं हुआ है। न तो नगर निगम के जल कार्य शाखा का विस्तार किया गया और न ही जलकार्य शाखा को आधुनिक सुविधाओं से लैस किया गया है। शहर के जलापूर्ति व्यवस्था का हाल यह है कि शहर में बने एक दर्जन वाटर आवर हाथी दांत बने हुए है। उनकी मदद से पेयजल की आपूर्ति नहीं हो रही है। पेयजल की आपूर्ति सीधे पंप हाउसों से की जा रही है। वहीं शहरी क्षेत्र में बिछे अधिकांश पाइप लाइन चार से पांच पूर्व बिछाए गए है और जर्जर हो चुके है। पाइपलाइन में लगातार लीकेज हो रहा है और लीकेज मरम्मत की सुविधा भी निगम के पास नहीं है। मिस्त्री एवं खलासी की भारी कमी है। लीकेज की तलाश करने के लिए निगम के पास आधुनिक मशीन नहीं है। वहीं शहर के स भी वार्डों में करोड़ों रुपये खर्च का नल-जल योजना के तहत मिनी पंप लगाए जा रहे जो छह माह से साल भर में फेल हो जा रहे है। कालीबाड़ी रोड स्थित मिनी पंप हो पंखा टोली में स्थित सबमर्सिबल फेल हो जा रहा है। योजना के तहत पाइप लाइन इस तरह से बिछाया जा रहा जो बार-बार क्षतिग्रस्त हो रहा है। शहर के बुद्धिजीवियों ने दैनिक जागरण के अभियान हर बूंद हो स्वच्छ, हर घूंट हो स्वस्थ में शामिल होकर कहा कि नगर निगम से जलापूर्ति व्यवस्था संभल नहीं रहा है। इसलिए जलबोर्ड का गठन कर जलापूर्ति की व्यवस्था उसे सौंपी जाए। नल जल की जगह जलापूर्ति की पुरानी व्यवस्था बहाल हो। स्वयं महापौर विमला देवी भी नल-जल योजना से संतुष्ट नहीं है। वह भी ओवर हेड जलापूर्ति व्यवस्था की पक्षधर है। यह भी पढ़ें- पटना हाई कोर्ट ने दो साल बाद सील मकान खोलने का दिया आदेश, बिहार सरकार पर लगा 50,000 रुपए का जुर्माना यह भी पढ़ें- आज पश्चिमी चंपारण से शुरू होगी CM नीतीश कुमार की 'समृद्धि यात्रा', 24 जनवरी तक चलेगा पहला चरण शहर को स्मार्ट सिटी का दर्जा मिल गया। शहर में स्मार्ट सुविधाओं का विकास किया जा रहा है। लेकिन शहर की जलापूर्ति व्यवस्था स्मार्ट नहीं हो रहा। सरकार को इसे नगर निगम से अगल कर नही जल बोर्ड का गठन कर सौंपी जानी चाहिए। - राजीव कुमार सिन्हा नगर निगम तीन दर्जन पंप हाउसों, एक दर्जन वाटर टावरों एवं सौ से अधिक सबमर्सिबल से पांच लाख आबादी को पीने के पानी की आपूर्ति कर रहा है। इस पर लाखों-करोड़ों रुपये खर्च हो रहा। बावजूद शहरवासियों को ठीक से पीने का शुद्ध पानी नहीं मिल रहा। - डा.
प्रो.एसके पाल नगर निगम बिना किसी प्लान के जलापूर्ति योजनाओं को अंजाम दे रहा है। जहां मन वहां सबमर्सिबल लगा दिया जा रहा है। योजना का सही तरीके से क्रियान्वयन भी नहीं हो रहा। कही पाइप बिछाया जा रहा तो कही सबमर्सिबल लगाया जा रहा है। वहां जरूरत है वहां भी और जहां जरूरत नहीं वहां भी। - जितेंद्र कुमार नगर निगम को जलकार्य शाखा जलापूर्ति व्यवस्था को संचालित करने में सक्षम नहीं है। पाइप लाइन में लिकेज होने की शिकायत पर भी समय पर वह मरम्मत नहीं कर पाता। मरम्मत के नाम पर लीकेज रोकने के लिए पाइप पर साइकिल का ट्यूब बांधकर छोड़ दिया जाता है। - सुबोध कुमार सिंह
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