सासाराम में हसन साह सूरी का मकबरा “सूखा रौजा” इतिहास और वास्तुकला प्रेमियों के लिए आकर्षण का केंद्र है. शेर शाह सूरी ने इसे अपने पिता की याद में बनवाया. अक्टूबर से फरवरी तक देश-विदेश से पर्यटक इसे देखने आते हैं.
हसन साह सूरी अफ़ग़ान वंश के दूरदर्शी और न्यायप्रिय जमींदार थे. इनका बेटा अपने राजा की रक्षा के लिए शेर से लड़ गया था. तब जाकर फरीद को शेरशाह के नाम से जाना जाने लगा. उनके पुत्र फरीद खान यानी शेर शाह सूरी ने पिता की शिक्षा से प्रेरणा लेकर प्रशासन और युद्ध कला में महारत हासिल की.
शेर शाह सूरी ने चौसा और कन्नौज के युद्धों में हुमायूँ को पराजित किया. शेर शाह ने अपने साहस और रणनीति कौशल से मुगलों को दो बार हराया. चौसा और कन्नौज की विजय के बाद हुमायूँ को निर्वासन में जाना पड़ा था. सासाराम का मकबरा “सूखा रौजा” के नाम से प्रसिद्ध है. शेर शाह सूरी ने अपने पिता की याद में यह मकबरा बनवाया. यह सूखे क्षेत्र में स्थित है, इसलिए इसे “सूखा रौजा” कहा जाता है। यह मकबरा भूरे बलुआ पत्थर से बना है, अष्टकोणीय ढांचा और बड़ा गुंबद ऊपर छतरियों के साथ दर्शनीय है. इसकी शानदार आर्किटेक्ट की वजह से पूरे देश में इसकी चर्चा होती है. मकबरे के परिसर में एक मस्जिद और बावली मौजूद है, जो स्थापत्य और धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं. सासाराम शहर के केंद्र से मकबरा लगभग 2 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. सड़क मार्ग से आप टैक्सी, ऑटो या निजी वाहन से आसानी से मकबरे तक पहुँच सकते हैं. हसन साह सूरी की मृत्यु लगभग 1526 में हुई थी. मकबरा उनके पुत्र शेर शाह के शासनकाल में बनकर तैयार हुआ और सूरी वंश की तीन पीढ़ियों के मकबरों में से एक महत्वपूर्ण स्मारक है. आज यह मकबरा इतिहास और वास्तुकला प्रेमियों के लिए आकर्षण का केंद्र है. स्थानीय लोग इसे ताजमहल से कम नहीं मानते और अक्टूबर से फरवरी तक पर्यटक इसे ज्यादा संख्या में देखने आते हैं, सासाराम हसन साह सूरी के मकबरे तक पहुंचने के लिए सड़क मार्ग सबसे आसान है.
SASARAM KA MAKBARA SASARAM NEWS SASARAM TOMB सासाराम का मकबरा सासाराम न्यूज बिहार न्यूज बेस्ट टूरिस्ट प्लेस सासाराम
