मिथिला विश्वविद्यालय के परीक्षा विभाग और डाटा सेंटर में बिचौलियों का प्रभाव बढ़ गया है। छात्रों को काम कराने में कठिनाई होती है, जबकि बिचौलिए पैसे लेकर आसानी से काम करवा देते हैं। इसमें दबंग छात्र भी शामिल हैं। हाल ही में बिचौलियों के दो गुटों में मारपीट भी...
जागरण संवाददाता, दरभंगा । ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय में बिचौलियों की प्रासंगिकता समय के साथ बढ़ती ही जा रही है। बिचौलिए के बिना किसी छात्र का काम परीक्षा विभाग हो या डाटा सेंटर हो कहीं होना कठिन तो जरूर है। छात्र जाएं तो उन्हें पहले तो प्रवेश मिलना ही मुश्किल है, किसी कारण से प्रवेश मिल भी गया, तो कोई कर्मचारी सीधे मुंह बात करना भी उचित नहीं समझते। हालांकि हाकिम जरूर उनकी सुन लेते हैं। लेकिन कर्मचारी भी तकनीकी उलझन बताकर उन्हें शांत कर देते हैं। दूर-दराज से आए ऐसे छात्र-छात्राओं को बिचौलिए बड़ी सरलता से हैंडिल कर देते हैं। उन्हें मुंह-मांगा रकम देकर झटपट काम करवा लेते हैं। बिचौलिए के इस धंधे में कुछ दबंग छात्र भी शामिल हैं, जो परिसर में ही बने छात्रावास में रहकर किसी ना किसी छात्र संगठन के पदाधिकारी भी बने हुए हैं। इसी में वर्चस्व की लड़ाई भी हो जाती है। वर्चस्व की ऐसी ही लड़ाई सोमवार को विश्वविद्यालय के छात्र कल्याण कार्यालय से दक्षिण देखी गई। इसमें बिचौलियों की दो गुट आपस में ही भिड़ गए। दोनों गुट के छात्र एक दूसरे पर लात-घूंसा और बेल्ट की बौछार कर रहे थे। विडंबना तो यह है बिचौलियों की भिड़ंत के समय कई पदाधिकारी भी उधर से आ जा रहे थे, लेकिन सब कन्नी काट कर निकल गए। हालांकि विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि सबकुछ नियमानुसार चल रहा है, कहीं कोई गड़बड़ी नहीं है। कर्मचारियों के आने से पहले ही सक्रिय हो जाते हैं बिचौलिए बिचौलिये सीधे तौर पर विश्वविद्यालय कर्मचारियों के साथ मिलकर अवैध वसूली करते हैं। इनकी पहुंच सीधे डाटा सेंटर तक है। जहां बिचौलिए पूरे दिन मंडराते रहते हैं। अच्छे-अच्छे लोगों का डाटा सेंटर में प्रवेश निषेध है। वहीं बिचौलिए प्रकार के छात्र और नेता बड़ी सहजता से भीतर आते-जाते रहते हैं। उनपर कोई रोकटोक नहीं है। हाकिम भी उन्हें देखकर आंख मूंद लेते हैं। सबसे बड़ी बात तो यह है कि बिचौलिये सवेरे नौ बजे ही डाटा सेंटर के प्रवेश द्वार पर पहुंच जाते हैं। जबकि कर्मचारी भी 10 बजे के बाद ही आते हैं। दूर-दराज से आने वाले मासूम छात्र भी सवेरे आ जाते हैं। बिचौलिए उनसे समस्या पूछते हैं, उनका पूरा विवरण प्राप्त कर लेते हैं। इसके बाद मोल-जोल शुरू होता है। सौदा पटने पर छात्रों का कागज लेकर डाटा सेंटर में चले जाते हैं। छात्र भी समझते हैं कि उनका काम हो रहा है। विश्वास होने पर वह भुगतान भी कर देते हैं। इसमें कई छात्र ठगे भी जाते हैं। ऐसे मामले को लेकर हंगामा भी मचता है, मामला विवि प्रशासन के संज्ञान में भी जाता है। कुछ दिन सख्ती रही और फिर वहीं ढ़ील होती है।.
जागरण संवाददाता, दरभंगा । ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय में बिचौलियों की प्रासंगिकता समय के साथ बढ़ती ही जा रही है। बिचौलिए के बिना किसी छात्र का काम परीक्षा विभाग हो या डाटा सेंटर हो कहीं होना कठिन तो जरूर है। छात्र जाएं तो उन्हें पहले तो प्रवेश मिलना ही मुश्किल है, किसी कारण से प्रवेश मिल भी गया, तो कोई कर्मचारी सीधे मुंह बात करना भी उचित नहीं समझते। हालांकि हाकिम जरूर उनकी सुन लेते हैं। लेकिन कर्मचारी भी तकनीकी उलझन बताकर उन्हें शांत कर देते हैं। दूर-दराज से आए ऐसे छात्र-छात्राओं को बिचौलिए बड़ी सरलता से हैंडिल कर देते हैं। उन्हें मुंह-मांगा रकम देकर झटपट काम करवा लेते हैं। बिचौलिए के इस धंधे में कुछ दबंग छात्र भी शामिल हैं, जो परिसर में ही बने छात्रावास में रहकर किसी ना किसी छात्र संगठन के पदाधिकारी भी बने हुए हैं। इसी में वर्चस्व की लड़ाई भी हो जाती है। वर्चस्व की ऐसी ही लड़ाई सोमवार को विश्वविद्यालय के छात्र कल्याण कार्यालय से दक्षिण देखी गई। इसमें बिचौलियों की दो गुट आपस में ही भिड़ गए। दोनों गुट के छात्र एक दूसरे पर लात-घूंसा और बेल्ट की बौछार कर रहे थे। विडंबना तो यह है बिचौलियों की भिड़ंत के समय कई पदाधिकारी भी उधर से आ जा रहे थे, लेकिन सब कन्नी काट कर निकल गए। हालांकि विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि सबकुछ नियमानुसार चल रहा है, कहीं कोई गड़बड़ी नहीं है। कर्मचारियों के आने से पहले ही सक्रिय हो जाते हैं बिचौलिए बिचौलिये सीधे तौर पर विश्वविद्यालय कर्मचारियों के साथ मिलकर अवैध वसूली करते हैं। इनकी पहुंच सीधे डाटा सेंटर तक है। जहां बिचौलिए पूरे दिन मंडराते रहते हैं। अच्छे-अच्छे लोगों का डाटा सेंटर में प्रवेश निषेध है। वहीं बिचौलिए प्रकार के छात्र और नेता बड़ी सहजता से भीतर आते-जाते रहते हैं। उनपर कोई रोकटोक नहीं है। हाकिम भी उन्हें देखकर आंख मूंद लेते हैं। सबसे बड़ी बात तो यह है कि बिचौलिये सवेरे नौ बजे ही डाटा सेंटर के प्रवेश द्वार पर पहुंच जाते हैं। जबकि कर्मचारी भी 10 बजे के बाद ही आते हैं। दूर-दराज से आने वाले मासूम छात्र भी सवेरे आ जाते हैं। बिचौलिए उनसे समस्या पूछते हैं, उनका पूरा विवरण प्राप्त कर लेते हैं। इसके बाद मोल-जोल शुरू होता है। सौदा पटने पर छात्रों का कागज लेकर डाटा सेंटर में चले जाते हैं। छात्र भी समझते हैं कि उनका काम हो रहा है। विश्वास होने पर वह भुगतान भी कर देते हैं। इसमें कई छात्र ठगे भी जाते हैं। ऐसे मामले को लेकर हंगामा भी मचता है, मामला विवि प्रशासन के संज्ञान में भी जाता है। कुछ दिन सख्ती रही और फिर वहीं ढ़ील होती है।
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![मिथिला विश्वविद्यालय में बिचौलियों का राज] परीक्षा विभाग से डाटा सेंटर तक दबदबा](https://i.headtopics.com/images/2026/4/1/jagrannews/235023672341236118135-235023672341236118135-9D3B472249640E23F7C6E5688BF39C84.webp)